<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>आचार्य श्री ज्ञानसागरजी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A5%80/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Mon, 16 Mar 2026 10:25:33 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>आचार्य श्री ज्ञानसागरजी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>मुनिश्री योगसागरजी ने आचार्य श्री ज्ञानसागरजी के समाधि स्थल पर नमन किया : अद्भुत दर्शन की अनुभूति से ओतप्रोत रहे मुनि श्री </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/munishri_yogsagarji_paid_homage_at_the_samadhi_site_of_acharya_shri_gyansagarji/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/munishri_yogsagarji_paid_homage_at_the_samadhi_site_of_acharya_shri_gyansagarji/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 10:25:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Gyan Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya's seat]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[initiation place]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Munishree Yog Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Nasirabad]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य पदस्थली भूमि]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षा स्थली]]></category>
		<category><![CDATA[नसीराबाद]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री योगसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=102122</guid>

					<description><![CDATA[नगर में मुनिश्री योगसागर महाराज का मंगल प्रवेश हुआ। उन्होंने आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की समाधि स्थली एवं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की आचार्य पदस्थली भूमि को नमन किया। नसीराबाद से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; नसीराबाद। नगर में मुनिश्री योगसागर महाराज का मंगल प्रवेश हुआ। उन्होंने आचार्य श्री ज्ञानसागर जी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर में मुनिश्री योगसागर महाराज का मंगल प्रवेश हुआ। उन्होंने आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की समाधि स्थली एवं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की आचार्य पदस्थली भूमि को नमन किया। <span style="color: #ff0000">नसीराबाद से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नसीराबाद।</strong> नगर में मुनिश्री योगसागर महाराज का मंगल प्रवेश हुआ। उन्होंने आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की समाधि स्थली एवं आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की आचार्य पदस्थली भूमि को नमन किया। इससे पूर्व स्थानीय दिगंबर जैन समाज ने मुनि संघ की भव्य अगवानी की। जब ज्येष्ठ मुनिश्री योग सागर जी महाराज ने संघ सहित आचार्य ज्ञान सागर जी समाधि स्थल के दर्शन उसके उपरांत भाव प्रकट करते हुए कहा कि समाधि स्थली के दर्शन कर अद्भुत दर्शन की अनुभूति हुई। विजय जैन ने बताया की मुनि श्री ने कुंडलपुर से राजस्थान की ओर विहार किया तब उनका लक्ष्य नसीराबाद दादा गुरुदेव आचार्य श्री ज्ञान सागरजी महाराज समाधि स्थल और अजमेर के आचार्य विद्यासागर जी महाराज की दीक्षा स्थली के दर्शन के भाव लेकर राजस्थान में प्रवेश किया।</p>
<p>इसमें उनका नसीराबाद का लक्ष्य पूर्ण हुआ। यह उद्गार मुनि श्री ने अपने मंगल प्रवचन में व्यक्त किए। महाराज श्री संघ सहित आचार्य श्री ज्ञान सागरजी महाराज समाधि स्थल से मुख्य बाजार होते हुए आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचे। मुनि संघ का जगह-जगह पद प्रक्षालन मंगल आरती करते हुए मंगल आगवानी की महाराज श्री का अभी कुछ दिन यहां प्रवास रहने की संभावना है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/munishri_yogsagarji_paid_homage_at_the_samadhi_site_of_acharya_shri_gyansagarji/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रतिकृति हुई विराजमान: गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजी के चरण स्थापित </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_replica_of_acharya_shri_vidyasagarji_was_installed/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_replica_of_acharya_shri_vidyasagarji_was_installed/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 13:35:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Gyan Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidya Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Bhaktamar]]></category>
		<category><![CDATA[Chanting]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Feet established]]></category>
		<category><![CDATA[Guru Upkar Bhavan]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Jaineshwari Muni Diksha]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Nissim Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sambhav Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sanskar Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[namokar mahamantra]]></category>
		<category><![CDATA[Replica]]></category>
		<category><![CDATA[Shantividhan]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[गुरु उपकार भवन]]></category>
		<category><![CDATA[चरण स्थापित]]></category>
		<category><![CDATA[जाप]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैनेश्वरी मुनि दीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[णमोकार महामंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतिकृति]]></category>
		<category><![CDATA[भक्तामर]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री निस्सीम सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री संभवसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री संस्कार सागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[शांतिविधान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=100161</guid>

					<description><![CDATA[अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर परिसर के गुरु उपकार भवन में आचार्य श्री ज्ञानसागरजी एवं आचार्य श्री विद्यासागरजीके चरण स्थापित कर उनकी मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिष्ठा मुनि श्री संभवसागरजी, मुनि श्री निस्सीम सागरजी, मुनि श्री संस्कार सागरजी के सानिध्य में की गई। इसके बाद दोनों चरणों का प्रथम अभिषेक शुद्ध वस्त्रों के साथ किया गया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि इस बीच आचार्य श्री विद्यासागरजी की प्रतिकृति का आगमन जयजयकार के साथ हुआ तथा गुरु उपकार भवन में सिंहासन पर प्रतिकृति विराजमान की गई। इस अवसर पर मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने कहा कि नगर के प्रत्येक भक्त के हृदय में गुरुदेव विराजमान है और यहां पर जितने भी कार्यक्रम हुए हैं और चल रहे हैं। वह सभी अभूतपूर्व हुए तथा ऊंचाइयों को प्राप्त हो रहे हैं। यह सब गुरुदेव की वरदानी छांव का ही परिणाम है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने अपने सभी शिष्यों को ऐसी घुट्टी पिलाई है कि उसके पास आशीर्वाद की कोई कमी नहीं रहेगी। उन्होंने गुरुदेव के हायकू को सुनाते हुए कहा कि ‘गुरु अंक में पले बड़े हम, अंक भी वही देंगे’ अर्थात उनकी गोद में रहकर हमने जो शिक्षा प्राप्त की उसका परिणाम भी उनके ही द्वारा हम सभी मुनिराजों को प्राप्त हो रहा है।</p>
<p><strong>मुनि श्री संभवसागरजी ने सुनाए अपने संस्मरण </strong></p>
<p>मुनि श्री ने 17 फरवरी 2024 को स्मरण करते हुए कहा कि आज के दिन पूरे देश की नजर चंद्रगिरी डोंगरगढ़ की ओर थी। भारत ही नहीं विश्व का प्रत्येक भक्त जाप, भक्तामर, शांतिविधान या णमोकार महामंत्र का पाठ कर रहा था कि आज कोई चमत्कार घटित हो जाए और पूज्य गुरुदेव उठकर बैठ जाएं लेकिन, कोई चमत्कार घटित न हो सका। सभी की आंख गीली थी। सभी के मुख से एक ही उच्चारण था। ‘सबकुछ दिया है तुमने हमको हम कुछ भी न दे पाए’ हमारे और गुरुदेव के बीच अभी भी पचास किमी का फासला था। प्रातःकाल से हम लोग संध्या काल तक चालीस किमी चले और मात्र 10 किमी की दूरी शेष रह गई थी लेकिन, आप लोग सभी पुण्यशाली हो कि हमारे बाजू में बैठे मुनिराज निस्सीम सागर जी पिछले एक हफ्ता से गुरुजी के पास सेवा में दिनरात तत्पर थे।</p>
<p><strong>गुरुदेव की स्मृतियां उभर रही: मुनिश्री </strong></p>
<p>गुरुदेव की शेष स्मृति को आप लोग उनके ही मुख से कल सुनेंगे। मुनि श्री ने कहा कि विदिशा वालों को जो कुछ भी गुरुदेव ने दिया। वह ‘भूतो न भविष्यति’। गुरु के उपकार को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अरिहंत विहार का यह विशाल परिसर हो या शीतलधाम का विशाल समवशरण, गुरुदेव की स्मृतियां स्मृति पटल पर एक के बाद एक उभरकर सामने आ रही है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री समयसागरजी 23 मुनि दीक्षा देंगे</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया 18 फरवरी को शाम 6 बजे नगर से मुक्तागिरी सिद्धक्षेत्र के लिए 6 बस तथा कई चार पहिया वाहनों से भक्तगण रवाना होंगे। ‘मुक्तागिरी’ मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र की सीमा से लगा हुआ प्रकृति का अनुपम स्थान है। जहां से अनंतानंत मुनिराजों ने साधना की एवं मोक्ष को गए हैं। ऐसे स्थान पर पहली बार आचार्य श्री समयसागर महाराज 19 फरवरी को 23 जैनेश्वरी मुनि दीक्षा देंगे। जिसमें विदिशा नगर गौरव ऐलक कैवल्य सागर एवं ऐलक गरिष्ठ सागर महाराज, ऐलक गौरव सागर महाराज सहित अन्य मुनिसंघों के संघस्थ ऐलक एवं क्षुल्लक शामिल हैं तथा कई नए ब्रह्मचारी भी दीक्षित हो सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_replica_of_acharya_shri_vidyasagarji_was_installed/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विराट व्यक्तित्व एवं कृतित्व के धनी आचार्य श्री ज्ञानसागरजी महाराज : 15 नवंबर को है आचार्य श्री का 5 वां समाधि स्मृति दिवस </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_gyan_sagar_ji_maharaj_aman_of_great_personality_and_achievements/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_gyan_sagar_ji_maharaj_aman_of_great_personality_and_achievements/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 14 Nov 2025 13:57:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[5 वां समाधि स्मृति दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[5th Samadhi Memorial Day]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Gyan Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Sumati Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidya Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Digambar Jain Temple Nasiya Ji Vara]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञानसागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री सुमति सागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्री दिगंबर जैन मंदिर नसिया जी वारा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=94419</guid>

					<description><![CDATA[पट्टाचार्य ज्ञानसागरजी महाराज के 5 वां समाधि स्मृति दिवस 15 नवंबर को मनाया जाएगा। इस अवसर पर मुरैना से पढ़िए मनोज जैन नायक का यह विशेष आलेख&#8230; मुरैना। चंबल अंचल की पवित्र वसुंधरा संस्कारधानी ज्ञान नगरी मुरैना में 1 मई 1957 को दिगंबर जैसवाल जैन उपरोचियां समाज के बजाज गोत्रीय श्रावक श्रेष्ठी शांतिलाल जैन के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पट्टाचार्य ज्ञानसागरजी महाराज के 5 वां समाधि स्मृति दिवस 15 नवंबर को मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">इस अवसर पर मुरैना से पढ़िए मनोज जैन नायक का यह विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> चंबल अंचल की पवित्र वसुंधरा संस्कारधानी ज्ञान नगरी मुरैना में 1 मई 1957 को दिगंबर जैसवाल जैन उपरोचियां समाज के बजाज गोत्रीय श्रावक श्रेष्ठी शांतिलाल जैन के घर माता अशर्फी देवी जैन की कोख से जन्मे बालक उमेश जन्म से ही सहज, सरल और धार्मिक संस्कारों से संस्कारित थे। आप भौतिक चकाचौंध से दूर, धर्म आराधना में लीन रहते थे। जब भी कभी किन्हीं दिगंबर मुनिराजों का मुरैना से निकलना होता था तब आप उनके विहार में सहभागिता प्रदान करने तत्पर रहते थे। घंटों मंदिर में बैठकर जाप देना स्वाध्याय करना, आत्म चिंतन करना आपकी दैनिक दिनचर्या थी। गुरुदेव के परम भक्त अनूप भंडारी ने बताया कि वर्ष 1974 में आप वीरम गांव अजमेर में आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज से 17 वर्ष की उम्र में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण कर आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़े तथा 5 नवंबर 1976 को श्री 1008 दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिरजी में आचार्य श्री सुमति सागर जी महाराज से क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण कर क्षुल्लकश्री गुणसागर जी नाम प्राप्त किया। आचार्यश्री सुमति सागर जी महाराज से 31 मार्च 1988 चैत्र शुक्ला त्रयोदशी महावीर जयंती के पावन अवसर पर श्री 1008 दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिरीजी की पावन भूमि पर मूलनायक श्री 1008 चंद्रप्रभु भगवान के पाद मूल में निग्रंथ दिगंबर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण कर मुनि श्री ज्ञानसागरजी नाम से सुशोभित हुए ।</p>
<p>30 जनवरी 1989 को गुरुदेव के निर्देशानुसार दिगंबर जैन समाज सरधना मेरठ उत्तर प्रदेश द्वारा आपको उपाध्याय पद पर अलंकृत किया गया। उपाध्याय रत्न श्री ज्ञान सागर जी महाराज ने समाज की मुख्य धारा से अलग-थलग रहने वाले बिहार बंगाल उड़ीसा के सराक बंधुओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ते हुए उन्हें शिक्षित व सशक्त बनाकर संगठित किया और समाज की मुख्य धारा से जोड़ा। इस कारण उन्हें सराकोद्धारक नाम की विशिष्ट पहचान मिली तथा सराक बंधु उन्हें अपना आराध्य मानकर आज भी उनके प्रति पूर्ण समर्पित भाव रखते हुए उनकी आराधना में लीन रहते हैं तथा उन्हें सराको के राम मानते हैं।</p>
<p>आपकी प्रेरणा से अनेकों तीर्थ क्षेत्रों का जीर्णोद्धार व निर्माण कार्य किया गया। जो युगों-युगों तक जैन धर्म की प्रभावना में सहयोगी रहेगा। आपके द्वारा समूचे देश में पद विहार कर अहिंसा का प्रचार-प्रसार हुआ। आपके सानिध्य में अनेको गोष्ठी संगोष्ठी के माध्यम से शिक्षकों, वकीलों, बैंकर्स, सीए, डॉक्टर्स, इन्जीनियर, आईएएस आईपीएस, वैज्ञानिक आदि को समाज सेवा के साथ आध्यात्मिकता से भी जोडा गया। आपकी प्रेरणा से मेधावी छात्रों को प्रतिभा सम्मान के माध्यम से सम्मानित किया गया। पूज्य आचार्यश्री सन्मतिसागर जी महाराज की समाधि के बाद 27 मई 2013 को श्री 1008 दिगंबर जैन त्रिलोकतीर्थ क्षेत्र बड़ागांव (बागपत) उत्तर प्रदेश में आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा में षष्ठम पट्टाचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया।</p>
<p>कार्तिक कृष्ण अमावस्या को भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव की पावन बेला में श्री दिगंबर जैन मंदिर नसिया जी वारा राजस्थान में आपका समाधि पूर्वक देवलोक गमन हो गया। भगवान महावीर स्वामी जी के जन्म कल्याणक पर दीक्षा ग्रहण कर भगवान महावीर निर्वाणोत्सव की पावन बेला में देवलोक गमन करना यह दर्शाता है कि आप वर्तमान के वर्धमान थे। आपके द्वारा किए गए कार्यों को सदियों तक याद किया जाता रहेगा। सराकोद्धारक छाणी परंपरा के षष्ट पट्टाचार्य ज्ञानसागरजी महाराज के 5वें समाधि स्मृति दिवस (15 नवंबर) के अवसर पर गुरु चरणों में कोटि-कोटि नमन।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_gyan_sagar_ji_maharaj_aman_of_great_personality_and_achievements/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
