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	<title>आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>नीति आयोग की सदस्य ने जैन तीर्थ पर मनाई शादी की वर्षगांठ : आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज एवं मुनि श्री उपशांत सागर जी महाराज का लिया आशीर्वाद  </title>
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		<pubDate>Wed, 31 Dec 2025 16:54:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ की पुष्पाश्रय गौशाला में एक विशेष दृश्य देखने को मिला। जब खुरई में निवासरत सुनीलकुमार एवं अर्चना जैन (नीति आयोग सदस्य) ने अपने परिवार एवं हितैषी जनों के साथ अपनी शादी की 30 वीं सालगिरह मनाई। नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; नवागढ़। प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ की पुष्पाश्रय गौशाला में एक विशेष दृश्य देखने को मिला। जब खुरई में निवासरत सुनीलकुमार एवं अर्चना जैन (नीति आयोग सदस्य) ने अपने परिवार एवं हितैषी जनों के साथ अपनी शादी की 30 वीं सालगिरह मनाई। <span style="color: #ff0000">नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नवागढ़।</strong> प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र नवागढ़ की पुष्पाश्रय गौशाला में एक विशेष दृश्य देखने को मिला। जब खुरई में निवासरत सुनीलकुमार एवं अर्चना जैन (नीति आयोग सदस्य) ने अपने परिवार एवं हितैषी जनों के साथ अपनी शादी की 30 वीं सालगिरह मनाई। ललितपुर के प्रसिद्ध जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में पहुंचकर उन्होंने श्रद्धा भाव से भगवान अरनाथ के दर्शन कर मंगलमय जीवन एवं उज्जवल भविष्य की कामना की। आपकी विशेष श्रद्धा भगवान अरनाथ स्वामी के प्रति है, आप समय-समय पर अपने परिवारजनों के साथ यहां की योजनाओं में सक्रिय सहभागिता प्रदान करते हैं। चाहे वह गौशाला में गाय दान हो, भूमि क्रय करने में भूमि दान हो या नवागढ़ गुरुकुलम के छात्रों की शिक्षा का कार्य हो, आपकी विशेष भूमिका रहती है।</p>
<p><strong>छात्रों के साथ वत्सलमयी आयोजन  </strong></p>
<p>आज जहां लोग अपनी सालगिरह मनाने होटल, गार्डन आदि जगहों में जाते हैं, मौज मस्ती करते हैं, वहीं उन्होंने अपना जन्मदिन पावन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ में भगवान अरनाथ स्वामी के आशीष तले सादगी एवं धार्मिक भावनाओं के साथ आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज एवं मुनि श्री उपशांत सागर जी महाराज के आशीर्वाद के साथ मनाया।</p>
<p><strong>गुरुकुल परंपरा की अनिवार्यता</strong></p>
<p>इस अवसर पर उन्होंने गुरुकुलम् के विद्यार्थियों के साथ समय बिताया। आपने अपने वक्तव्य में कहा कि जैन धर्म को संरक्षित करने के लिए निशांत भैया जो प्रयास कर रहे हैं। वह अनुकरणीय हैं। यदि हम गुरुकुल परंपरा को जीवंत नहीं करेंगे तो कुछ ही वर्षों में जैन धर्म खतरे में पड़ जाएगा। अर्चना जैन ने छात्रों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आपका सौभाग्य है कि आप ऐसे अतिशय क्षेत्र में निशांत भैया जी के निर्देशन में निःशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। आपको इस प्रकार श्रम करना है कि आपके द्वारा आपके परिवार का नाम ऊंचा हो, जिनशासन का संरक्षण हो, आप अच्छे से अच्छे पद पर पहुंचे लेकिन, अपने इस जैन शासन के अनुशासन एवं धर्म के प्रति सदैव सजग रहें। मैं चाहती हूं आप आगे बढ़ते हुए अपने जीवन को मंगलमय बनाएं। आपके पास आकर मुझे अपना बचपन याद आ रहा है। मैं चाहती हूं कि हमेशा आपका विचार कर आपके साथ समय बिताऊं।</p>
<p><strong>गौसेवा से मन को शांति मिलती है </strong></p>
<p>मैं अनुरोध करती हूं, सभी जैन बंधु अतिशय क्षेत्र नवागढ़ जी की वंदना अवश्य करें। यहां भगवान अरनाथ स्वामी के दर्शन से मानसिक शांति एवं उल्लास की अनुभूति होती है। इस अवसर पर आपके परिवार एवं परिजनों ने ने गायों को गुड़ खिलाकर अपने मंगलमय एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि गौसेवा से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। गुरुकुलम् के छात्रों ने भी उनके साथ इस पुण्य अवसर में सहभागिता की और उनके दीर्घायु व उज्ज्वल भविष्य की कामना की।</p>
<p><strong>नवागढ़ क्षेत्र के विकास एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएं</strong></p>
<p>मेरी आत्मा इन पवित्र स्थलों से ही जुड़ी है। नवागढ़ क्षेत्र वास्तव में आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। और यही वह भावना है की जिसके वशीभूत होकर मुझे अपनी सालगिरह इस पावन क्षेत्र पर मनाने की भावना हुई। क्षेत्र संचालक ब्र. जय निशांत जी ने भी बताया कि आप सभी इसी प्रकार नवागढ़ क्षेत्र के विकास एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाएं। अब आप अपने सभी परिवार जनों एवं परिजनों के साथ यहां विधान का विशेष आयोजन संपन्न करें। महामंत्री श्री वीरचंद्र जैन तथा गौशाला के संयोजक सुरेंद्र सोजना के साथ ब्रह्मचारी निशांत भैया के सानिध्य में ब्रह्मचारी संध्या दीदी,अनुराग जैन, रौनक जैन, प्रवीण जैन, विनीत सर, संजय सर ने सभी का भावभीना स्वागत करते हुए पुनः आगमन का आमंत्रण दिया।</p>
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		<title>चातुर्मासरत आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ससंघ का नगर से मंगल विहार : समाजजनों ने नम आखों से विहार करवाया  </title>
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		<pubDate>Thu, 21 Nov 2024 15:15:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार पोदनपुरम की ओर हुआ। आर्यिका माता जी पिछले 5 माह से नगर में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान हो कर धर्म की प्रभावना कर रही थी। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230; सनावद। सनावद नगर में पिछले [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार पोदनपुरम की ओर हुआ। आर्यिका माता जी पिछले 5 माह से नगर में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान हो कर धर्म की प्रभावना कर रही थी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> सनावद नगर में पिछले 4 माह से अपनी ओजस्वी वाणी से सभी को रसपान करवाने वाली गणीनी आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ एवं आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार पोदनपुरम की ओर हुआ। आर्यिका माता जी पिछले 5 माह से नगर में श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में विराजमान हो कर धर्म की प्रभावना कर रही थीं। उनके सानिध्य में अनेक मंडल विधान आयोजित किए गए। उनके द्वारा निरंतर धर्म की प्रभावना की जा रही थी। आप सनावद से दिल्ली की ओर विहार करेगी। उनके विहार के पूर्व सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका अनंतमति माताजी ने कहा कि हमारे द्वारा जो भी ज्ञान की बातें आप को बताई। आप उस पर जरूर अमल करेंगे।</p>
<p>उन्हें अपने जीवन में उतारेंगे। उन्होंने जिस प्रकार 5 माह तक प्रतिदिन सब ने मिलकर स्वाध्याय किया है। आशा करते हैं आप आगे भी इसी तरह सभी मिलकर यह स्वाध्याय निरंतर जारी रखेंगे।</p>
<p><strong>साधु नदी में निरंतर बहते हुआ पानी की तरह है &#8211; आर्यिका सरस्वती माताजी</strong></p>
<p>गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी ने अपने वाणी का रसपान करवाते हुए कहा कि साधु नदी में निरंतर बहते हुआ पानी की तरह है। चलता रहता है। सनावद में चतुर्मास करना हमारे जीवन का अभी तक सार्थक एवं यादगार चातुर्मास रहा। साधु तो सिर्फ़ आप के मन के मेल को धोने आते हैं। हम तो सिर्फ एक निमित्त होते हैं। हम तो सिर्फ ज्ञान देने आए थे। आप ने जो भी हमसे ज्ञान अर्जित किया आप निरंतर उसे यूंही आगे भी भुना पायेंगे।</p>
<p><strong>सच्ची भावनाएं प्रकट कीं</strong></p>
<p>इस अवसर पर आर्यिका माताजी ससंघ के प्रति मंजुला भूच, संगीता पाटोदी, संतोष बाकलीवाल, प्रशांत जैन ने भी नम आंखों से अपनी सच्ची भावनाएं प्रकट कीं। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>उत्तंग शिखरों पर नवीन ध्वजदंड स्थापति किये गए : श्रीजी का पंचामृत अभिषेक किया गया </title>
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		<pubDate>Thu, 21 Nov 2024 11:37:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सनावद नगर के तकरीबन 150 वर्ष प्राचीनतम उत्तंग शिखरों वाले श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर एवं श्री सुपार्श्वनाथ मंदिर जी के शिखरों पर नवीन ध्वजदंड स्थापित किए गए। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230; सनावद। सनावद नगर के तकरीबन 150 वर्ष प्राचीनतम उत्तंग शिखरों वाले श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर एवं श्री सुपार्श्वनाथ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सनावद नगर के तकरीबन 150 वर्ष प्राचीनतम उत्तंग शिखरों वाले श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर एवं श्री सुपार्श्वनाथ मंदिर जी के शिखरों पर नवीन ध्वजदंड स्थापित किए गए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> सनावद नगर के तकरीबन 150 वर्ष प्राचीनतम उत्तंग शिखरों वाले श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर एवं श्री सुपार्श्वनाथ मंदिर जी के शिखरों पर नवीन ध्वजदंड स्थापित किए गए। प्रातःकाल मंदिर में श्रीजी का पंचामृत अभिषेक, भूमि शुद्धि, मंगलाष्टक, गर्त शुद्धि, नवदेवता की पूजन के साथ मंदिरों के उत्तंग शिखरों आचार्य श्री उदारसागर जी महाराज एवं नगर में चातुर्मासरत आर्यिका सरस्वती माता जी के सानिध्य में उत्तंग शिखरों पर नवीन ध्वजदंड स्थापित किए गए।</p>
<p><strong>ध्वजदंड किया स्थापित</strong></p>
<p>श्री पार्श्वनाथ मंदिर जी के ध्वजदंड के निर्माण एवं ध्वज दंड स्थापित करने का सौभाग्य श्रीमती कमलाबाई स्व. सुरेशचंदजी बाकलीवाल परिवार को प्राप्त हुआ है। श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर जी के ध्वजदंड के निर्माण का सौभाग्य श्रीमती चंचला बाई पवन कुमार जैन, नितेश-प्रियांशी, परिधि कातोरा, परिवार को प्राप्त हुआ है। ध्वजदंड स्थापित करने का सौभाग्य अक्षय कुमार सराफ परिवार एवं राजेश कुमार जी जैन रेलवे परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>ध्वज चढ़ाने वाला सौभाग्यशाली और देखने वाले का जीवन सार्थक हो जाता है</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिनालय के ऊपर शिखर पर जो ध्वज लगाया जाता है वह हमारे जीवन में मंगलमय वातावरण बना रहे और समूचे शहर में मंगल हो, ऐसी भावन से यह ध्वज स्थापित किया जाता है। हमारे यहां ध्वज फ़राया नहीं जाता है हमारे यहां ध्वज स्थापित किया जाता है। हमारे जैन आगमन में बताया गया है कि ध्वज आरोहण यानी ध्वजारोहण अर्थात् ध्वज स्थापित करना। यहां जिनालयों के ऊपर जो यह नवीन ध्वजदंड कार्यक्रम आयोजित किया। ध्वज स्थापित करना, यह सम्यक दर्शन की प्राप्ति के उपाय है। यदि ध्वज चढ़ाने का सौभाग्य मिले तो आप बहुत ही सौभाग्यशाली कहलाएंगे और यदि अवसर नहीं मिले तो ध्वज चढ़ते को देख लेने से भी हमारा जीवन सार्थक हो जाता है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70143" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241121-WA0020.jpg" alt="" width="576" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241121-WA0020.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241121-WA0020-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241121-WA0020-461x1024.jpg 461w" sizes="(max-width: 576px) 100vw, 576px" />आचार्य संघ का दोपहर में मंगल विहार हुआ</strong></p>
<p>इस अवसर पर मुकेश कुमार प्रेमचंद जैन परिवार एवं संतोष कुमार बाकलीवाल परिवार की ओर से प्रभावना वितरण किया गया। आचार्य संघ का दोपहर में पोदनपुरम की ओर मंगल विहार हुआ। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश : महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर की अगवानी </title>
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		<pubDate>Tue, 19 Nov 2024 10:27:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज मुनि श्री 108 उपशांत सागर जी महाराज ससंघ मंगल प्रवेश नगर में हुआ। पढ़िए सन्मति काका की रिपोर्ट&#8230; सनावद। संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज मुनि श्री 108 उपशांत [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज मुनि श्री 108 उपशांत सागर जी महाराज ससंघ मंगल प्रवेश नगर में हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति काका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सनावद।</strong> संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज मुनि श्री 108 उपशांत सागर जी महाराज ससंघ मंगल प्रवेश नगर में हुआ। इंदौर में चातुर्मासरत आचार्य श्री श्री सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट से यात्रा कर नगर में पधारे, जहां नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ के साथ सभी समाजजन रेल्वे गेट पर पहुंच कर आचार्य संघ की आगवानी की। इस अवसर पर सभी समाजजन जुलूस के रूप में श्री सुपार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में पहुंचे। महिलाओं ने सिर पर कलश रख कर आचार्य श्री की आगवानी की और पाद प्रक्षालन किया गया।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70052" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0022.jpg" alt="" width="971" height="912" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0022.jpg 971w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0022-300x282.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0022-768x721.jpg 768w" sizes="(max-width: 971px) 100vw, 971px" />संतों के दर्शन होना भाग्य है, नगर में आना सौभाग्य है &#8211; आर्यिका माताजी</strong></p>
<p>आचार्य श्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका माताजी ने कहा कि संतों के दर्शन होना भाग्य है। नगर में साधु का आना सौभाग्य है और साधु के आने के बाद उनके वचन सुनना अहोभाग्य है। दिगंबर मुनिराज के दर्शन होना बहुत ही भाग्य की बात है कि आज मुनिराज नगर में पधारे हैं। पहले समय में मुनिराज के दर्शन बहुत ही दुर्लभ होते थे। मुनिराज के दर्शन करने से बहुत ही पुण्य का फल मिलता है। इसी क्रम में आचार्य श्री उदार सागर जी न कहा कि सनावद नगरी बहुत ही पावन नगरी है हमारा यहां आना बहुत भाग्य की बात है। यहां से 18 साधुओं ने अपना मार्ग मोक्ष की ओर प्रशस्त किया है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-70050" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023.jpg" alt="" width="1280" height="752" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023-300x176.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023-1024x602.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023-768x451.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241119-WA0023-990x582.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />आप बहुत ही भाग्यशाली हैं कि आपको आज दिगम्बर साधु के दर्शन आसानी से हो रहे हैं। पहले साधु के दर्शन करना बहुत ही मुश्किल था। लेकिन पहले युग में लोगों की भक्ति बहुत ही प्रकाट्य होती थी, लेकिन अब श्रावक की आस्था इतनी प्रकाट्य नहीं रही। अगली कड़ी में शाम को आचार्य श्री एवं माताजी के सानिध्य में गुरुभक्ति आरती एवं प्रश्नमंच आयोजित किए गए। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज का नगर प्रवेश : कलश निष्ठापन कर निकली शोभा यात्रा </title>
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		<pubDate>Tue, 19 Nov 2024 06:56:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में चतुर्मास निष्ठापन के अवसर पर भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। सन्मति काका ने बताया कि गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ का सनावद में चतुर्मास के दौरान श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में चतुर्मास स्थापना कार्यक्रम के तहत कलश स्थापना की गई थी, जिसका निष्ठापन विधिपूर्वक संपन्न हुआ। पढ़िए सन्मति जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में चतुर्मास निष्ठापन के अवसर पर भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। सन्मति काका ने बताया कि गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ का सनावद में चतुर्मास के दौरान श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में चतुर्मास स्थापना कार्यक्रम के तहत कलश स्थापना की गई थी, जिसका निष्ठापन विधिपूर्वक संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सनावद।</strong> नगर में चतुर्मास निष्ठापन के अवसर पर भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। सन्मति काका ने बताया कि गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ का सनावद में चतुर्मास के दौरान श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में चतुर्मास स्थापना कार्यक्रम के तहत कलश स्थापना की गई थी, जिसका निष्ठापन विधिपूर्वक संपन्न हुआ। मुख्य कलश स्थापनाकर्ता संतोष कुमार बाकलीवाल थे, जबकि द्वितीय कलश के पुण्यार्जक पवन कुमार जैन और तृतीय कलश स्थापनाकर्ता सुधीर कुमार चौधरी थे। सभी कलश स्थापनाकर्ता परिवारों के साथ समाजजन मंदिर से शोभा यात्रा में सम्मिलित हुए और प्रत्येक कलश स्थापनाकर्ता के घर जाकर जुलूस के रूप में आर्यिका संघ ने मंत्रोच्चारण के साथ कलश स्थापना की।</p>
<p>इस अवसर पर सभी कलश प्राप्तकर्ताओं द्वारा प्रभावना वितरित की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे और उन्होंने इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया।</p>
<p><strong>19 नवंबर को आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज का नगर प्रवेश</strong></p>
<p>इंदौर में चतुर्मासरत आचार्य श्री उदार सागर जी महाराज का 19 नवंबर, मंगलवार को सनावद नगर में मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर सभी समाजजन ने भोगांवा रोड रेलवे गेट पर पहुंचकर आचार्य श्री का भव्य स्वागत किया और उनकी मंगल आगवानी की।</p>
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