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	<title>आचार्य श्री अतिवीर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>जिन शासन संरक्षण के विलक्षण कार्यक्रम में समाजजनों का सम्मान : आचार्य श्री अतिवीरसागर के आशीर्वाद से हुआ कार्यक्रम  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 11:18:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम दिल्ली में आचार्य श्री अतिवीर जी महाराज के आशीर्वाद से विलक्षण कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने अनुमोदना की। आज जिन शासन को आहत करने के कई आयाम स्थापित हो रहे हैं। मुरैना/दिल्ली से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट&#8230; मुरैना/दिल्ली। केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम दिल्ली में आचार्य श्री अतिवीर जी महाराज के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम दिल्ली में आचार्य श्री अतिवीर जी महाराज के आशीर्वाद से विलक्षण कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने अनुमोदना की। आज जिन शासन को आहत करने के कई आयाम स्थापित हो रहे हैं। <span style="color: #ff0000">मुरैना/दिल्ली से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/दिल्ली।</strong> केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम दिल्ली में आचार्य श्री अतिवीर जी महाराज के आशीर्वाद से विलक्षण कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने अनुमोदना की। आज जिन शासन को आहत करने के कई आयाम स्थापित हो रहे हैं। जिसमें शासकीय, सामाजिक, राजनीतिक से घातक हैं, जैनत्व का मुखौटा लगाने वाले जैन। आज जैनत्व के संस्कारों का तेजी से क्षरण हो रहा है। जैन युवा इससे बहुत ही दूर हो रहे हैं। मंदिरों की संख्या बढ़ रही है और जैनों की जनसंख्या तेजी से घट रही है। वह दिन दूर नहीं जब मंदिरों का द्वार भी खोलने वाला ना होगा। महानगरों में ही नहीं ग्रामीण अंचल से भी जैनों का पलायन निरंतर हो रहा है पर, हम सब इससे बेखबर हैं। आचार्यश्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विगत कई वर्षों से जिन शासन के भेद-प्रवेद, आपसी मतभेद, जैन श्रावकों का पंथ, ग्रंथ, संत में बंटना तथा एकल परिवार की अवधारणा जैन संस्कृति के लिए सबसे घातक सिद्ध हो रही है। अर्थ प्रधान इस परिवेश में पाश्चात्य की अंधी दौड़ में सामाजिक मर्यादाएं तो विलीन हो गई हैं। आज मुनिराजों के चातुर्मास, विधान, पंचकल्याणक सभी मांगलिक अनुष्ठानों के साथ अर्थ के व्यामोह में भगवान भी इसकी चपेट में आ गए हैं।</p>
<p><strong>प्रतिद्वंदी नहीं पूरक बनकर जैनत्व का संरक्षण करें</strong></p>
<p>आचार्यश्री अतिवीरजी महाराज ने निरंतर कोशिश की। अंत में उनकी विचारधारा के श्रावकों ने जैन धर्म के सभी पक्षों को एक मंच पर समायोजित करने का उपक्रम अतिवीराचार्य सम्मान के रूप में फलीभूत किया। आचार्य श्री ने कहा कि दिगंबर, श्वेतांबर, कांजी पंथी, 20 पंथी, 13 पंथी, स्थानकवासी सभी महावीर की संतान हैं। हमारी पहचान एक ही हो हम जैन हैं। हम एक-दूसरे के प्रतिद्वंदी नहीं पूरक बनकर जैनत्व का संरक्षण करें। तभी हमारी संस्कृति, इतिहास, पुरातत्व एवं धर्म का उन्नयन संवर्धन संभव हो सकेगा। मैं अपना प्रयास जारी रखूंगा। मैंने मुनि धर्म मोक्ष मार्ग पर चलने के लिए स्वीकार किया है और अभेद मोक्ष मार्ग एक ही है। जिस पर चलने वाला महावीर का अनुयायी है, जिसका में सदैव समर्थन करूंगा।</p>
<p><strong>इन समाजजन और श्रेष्ठियों का किया बहुमान-सम्मान </strong></p>
<p>दिल्ली के केदार साहनी ऑडिटोरियम में उपस्थित विशाल जन समूह ने अतिवीराचार्य सम्मान का समर्थन करते हुए पुरस्कार प्रदाताओं का उत्साह वर्धन एवं बहुमान तालियों के माध्यम से किया। पुरस्कार प्राप्त कर्ताओं का चयन भी इसी उद्देश्य से किया गया। जिसकी सभी ने सराहना की। कार्यक्रम में जिन शासन प्रभावना के लिए उपाध्याय श्री रविंद्र मुनि जी मसा. संस्कृति संरक्षक के लिए पं. स्व. गुलाबचंद्र जैन पुष्प ‘प्रतिष्ठा पितामह’ जैन न्याय दर्शन के लिए डॉ. वीर सागर जैन (लाल बहादुर संस्कृत विद्यालय), जीव दया परोपकार के लिए पक्षियों का धर्मार्थ चिकित्सालय (लाल मंदिर दिल्ली) को सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong>‘हम जैनी, अपना जैन धर्म, </strong></p>
<p>आचार्य श्री के इस प्रयास का सभी ने समर्थन करते हुए सहयोग करने का संकल्प किया और सब ने स्वीकार किया ‘हम जैनी, अपना जैन धर्म, इतना ही परिचय केवल हो जैन’ अखंडता का सभी ने उत्साह पूर्वक समर्थन किया। आयोजन समिति ने वर्तमान परिवेश में समय का मूल्यांकन करते हुए घोषित अवधि में ही कार्यक्रम संपन्न कर सभी को आश्चर्यचकित किया। विवेक जी ने संचालन करते हुए समाज गौरव चक्रेश एवं स्वदेश भूषण के साथ निर्देशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत भैया, सह निदेशक डॉ. सोनल का स्वागत करते हुए ध्वजारोहण से समारोह का शुभारंभ किया। जिसका मंगल गान बबीता झांझरी ने करके सभी को सम्मोहित किया।</p>
<p><strong>सम्मान के वक्त यह रहे मौजूद </strong></p>
<p>प्रतिष्ठा पितामह पं. गुलाब चंद्र जी पुष्प का सम्मान उनके चतुर्थ पुत्र ब्रह्मचारी जय निशांत भैया को प्रदान किया गया। आपके परिवारजन इंजी. अभिनव, इंजी. लोहित जी, इंजी. सुमित, शर्मिला जैन, अनुभूति जैन, सोनिया जैन एवं परिवारजन रहे। विद्वानों में पं. सनत कुमार विनोद कुमार रजवांस, पं. मनीष जैन संजू टीकमगढ़, ऋषभ जैन शास्त्री, पं. दीपक शास्त्री, पं. राजेश शास्त्री पं.मदन जैन दिल्ली के साथ सभी विद्वानों ने गौरव प्राप्त किया।</p>
<p><strong>अपनी विरासत तो प्रतिष्ठा रत्नाकर के रूप में सौंपी</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा उस काल में जब दो-तीन वर्ष में एक ही पंचकल्याणक होता था, तब पुष्प जी ने 155 पंचकल्याणक पूर्ण शुद्धि, आगम सिद्धांत के साथ स्नेह एवं वात्सल्य से भरपूर संपन्न किए। आपने अपनी विरासत तो प्रतिष्ठा रत्नाकर के रूप में सौंपी ही है, निशांत भैया को इस क्षेत्र में अग्रणी किया है। संस्कृति संरक्षण के लिए आपकी स्मृति में श्री नवागढ़ गुरुकुलम् का विशेष आयाम स्थापित कर पुष्प परिवार ने अपने कर्तव्य का पालन किया है। गरिमामय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ आचार्य श्री का पिच्छी परिवर्तन, पूजन अनूठे ढंग से संक्षिप्त समय में ही संगीत में वातावरण में संपन्न किया गया।</p>
<p><strong>आचार्य श्री ने कहा-यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा</strong></p>
<p>पुरस्कार प्रदाता द्वारा पुरस्कार प्राप्त कर्ताओं का 3 लाख की नगद राशि, शाल, श्रीफल प्रशस्ति एवं बोलती जिनवाणी समर्पित कर उनको उपाधि पूर्वक सम्मानित किया गया।   मंगल आरती के साथ कार्यक्रम का गरिमामय समापन किया गया। आयोजन के पश्चात सुरुचि पूर्ण भोज की व्यवस्था का आनंद सभी ने प्राप्त किया। आचार्य श्री ने सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। समीर जैन ने सभी पुरस्कार प्रदाताओं एवं पुरस्कार प्राप्तकर्ता के साथ उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का का आभार जताया और कहा कि आप सब की उपस्थिति हमारे इस प्रयास की सफलता है। आपका संकल्पपूर्वक समर्थन मुझे अभिर्भूत कर रहा है।</p>
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		<title>पांचवें आचार्य पद प्रतिष्ठापन दिवस पर विशेषः 20 दिसंबर को 108 श्री अतिवीर जी मुनिराज का हुआ था आचार्य पद पर प्रतिष्ठापन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Dec 2024 11:32:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री 108 अतिवीर जी महाराज का 20 दिसंबर को आचार्य पद पांचवां प्रतिष्ठापन दिवस है। इस पुण्य अवसर पर उन्हें श्रद्धा भाव से याद किया जा रहा है। इस गौरवशाली पल से जैन समाज में हर्षित है। प्रतिष्ठापन दिवस पर अनुमोदना-अनुमोदना की जा रही है। पढ़िए इस अवसर पर दिल्ली के समीर जैन का यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री 108 अतिवीर जी महाराज का 20 दिसंबर को आचार्य पद पांचवां प्रतिष्ठापन दिवस है। इस पुण्य अवसर पर उन्हें श्रद्धा भाव से याद किया जा रहा है। इस गौरवशाली पल से जैन समाज में हर्षित है। प्रतिष्ठापन दिवस पर अनुमोदना-अनुमोदना की जा रही है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इस अवसर पर दिल्ली के समीर जैन का यह खास आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दिल्ली।</strong> प्रशममूर्ति आचार्य श्री 108 शांतिसागर जी महाराज (छाणी) की गौरवशाली परंपरा में पंचम पट्टाधीश गुरुवर आचार्यश्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज की असीम अनुकंपा से सल्लेखनारत आचार्यश्री 108 मेरुभूषण जी महाराज ने अपने परम प्रभावक अनुज-भ्राता एलाचार्य श्री 108 अतिवीर जी महाराज की विशेष योग्यता, दिव्यता, संगठन और संचालन कुशलता एवं गंभीरता को देखते हुए श्रमण परंपरा के वर्तमान में सर्वोच्च पद ‘आचार्य पद‘ पर प्रतिष्ठित करने की घोषणा कर भक्तों को प्रफुल्लित कर दिया है। पूज्य आचार्य श्री ने कहा कि आपके द्वारा अल्प समय में ही अभूतपूर्व ज्ञान-गंगा का प्रवाह निरंतर गतिमान है तथा विभिन्न नगरों में व्यापक धर्म प्रभावना संपन्न हो रही है।</p>
<p><strong>दैदीप्यमान नक्षत्र बनकर उभरेंगे</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि आपकी छलछलाती मंद-मंद मुस्कान हर बाल-वृद्ध को अपनी ओर सहज ही आकर्षित कर लेती है। लगभग 29 वर्षों की सतत संयम साधना से फलीभूत अथाह ज्ञान भंडार, तप, त्याग, साधना, समाज, उद्धारक मानसिकता, स्व-पर कल्याण की भावना, एकता और संगठन, साधर्मी वात्सल्य, गंभीर चिंतन, धैर्य आदि अनेकों योग्य गुणों को देखते हुए यह कहना अतिश्योक्ति ना होगी कि आप जैन धर्म के वाङ्ग्मय में एक प्रखर प्रकाश पुंज की भांति दैदीप्यमान नक्षत्र बनकर जगमगाएंगे।</p>
<p><strong>जैन समाज को नई दिशा प्रदान करने की सार्थक पहल की</strong></p>
<p>गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज से दीक्षित समस्त शिष्य समुदाय में आप एकमात्र ऐसे शिष्य हैं, जिन्हें उन्होंने स्वयं अपने कर-कमलों द्वारा कोई पद प्रदान किया है। एलाचार्य पद के बाद गुरुवर ने आपको आचार्य पद से भी सुशोभित करना था, लेकिन अचानक ही उनके समाधिमरण हो जाने से यह कार्य अधूरा रह गया। गुरुजी की भावना के अनुरूप गुरु भ्राता ने अधूरा कार्य पूर्ण किया। गहन चिंतक, विचारक, प्रवचनकार और कुशल मार्गदर्शक के रूप में आपने अल्प समय में ही जैन समाज को नई दिशा प्रदान करने की सार्थक पहल की। आप हर उस कार्य को सहजता से कर लेते हैं, जिसके लिए जैन समाज एक सही नेतृत्व का इंतज़ार करता रह जाता है।</p>
<p><strong>उत्कृष्ट कार्य श्रमण और श्रावक के लिए प्रेरक उदाहरण</strong></p>
<p>युवा पीढ़ी को कुशलतापूर्वक सही दिशा में अग्रसर करने में आपके हर कदम पर हज़ारों युवा चलने को तैयार हो जाते हैं। आने वाला कल जिनके हाथों में है, उनको सही दिशा में आगे बढ़ाने की कला के भंडार हैं। स्पष्ट सोच, स्वच्छ कार्यप्रणाली, निश्चित दिशा, हर विचार को यथार्थ में सहजता से अग्रसित कर देती है। आपके द्वारा विभिन्न प्रसंगों पर किए गए उत्कृष्ट कार्य श्रमण और श्रावक के लिए प्रेरक उदाहरण हैं।</p>
<p><strong>पांचवां आचार्य पद प्रतिष्ठापन दिवस है यह</strong></p>
<p>आपकी इन्हीं विलक्षण प्रतिभा और विशेषताओं को देखते हुए छाणी परंपरा के द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री 108 विजय सागर जी महाराज के समाधि दिवस के प्रसंग पर आपके गुरु भ्राता परम पूज्य सल्लेखनारत आचार्य श्री 108 मेरुभूषण जी महाराज ने 20 दिसम्बर 2020 को एमडी जैन कॉलेज, हरी पर्वत, आगरा (उप्र) में हजारों गुरु भक्तों के समक्ष तथा अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद् के विद्वानों की अनुमोदना के साथ विधि-विधान पूर्वक आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया। आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज के श्रीचरणों में पंचम आचार्य पद प्रतिष्ठापन दिवस के पुनीत अवसर पर शत-शत नमन&#8230;</p>
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