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	<title>आचार्य विमल सागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>आचार्य विमल सागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>साधुओं का स्नेह, प्रेम और वात्सल्य व्यक्ति को सद्मार्ग पर लगाता है : अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी के सानिध्य में 32 वें पुण्य स्मृति दिवस समारोह में छाई अनूठी भक्ति की छटा  </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 05:19:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री विमलसागर जी महाराज का 32 वां पुण्य स्मृति दिवस समारोह सोमवार को बड़ा गणपति के समीप श्री मोदीजी की नसिया में मनाया गया। इस पुण्य अवसर पर कई मांगलिक कार्यक्रम और संगीतमय भजनों पर अर्घ्य आदि अर्पित किए गए। कार्यक्रम में अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज और आर्यिका यशस्विनी माताजी ने गुणानुवाद सभा को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री विमलसागर जी महाराज का 32 वां पुण्य स्मृति दिवस समारोह सोमवार को बड़ा गणपति के समीप श्री मोदीजी की नसिया में मनाया गया। इस पुण्य अवसर पर कई मांगलिक कार्यक्रम और संगीतमय भजनों पर अर्घ्य आदि अर्पित किए गए। कार्यक्रम में अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज और आर्यिका यशस्विनी माताजी ने गुणानुवाद सभा को संबोधित किया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्यश्री विमलसागर जी महाराज का 32 वें पुण्य स्मृति दिवस समारोह में सोमवार को श्रद्धा भक्ति, आराधना का अपूर्व गर्व क्षण देखने में आया। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के सान्निध्य में हुए इस समारोह में बड़ी संख्या में विमलसागर विधान पूजन में पुण्यार्जक परिवार मौजूद रहे। विनयांजलि और गुणानुवाद सभा में अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी ने आचार्य विमल सागर जी के चरित्र, कृतित्व और व्यक्तित्व पर गहराई से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में जितना देखें, सुने, चिंतन करें, मनन करें उतना कम है। आज हम जिस आचार्य परमेष्ठी का समाधि दिवस मना रहे हैं, मुझे नहीं लगता है कि पूरे देश में कोई ऐसा साधु हो, जो उनके वात्सल्य से अछूता रहा हो। क्योंकि साधुओं का स्नेह, प्रेम और वात्सल्य व्यक्ति को सद्मार्ग पर लगाता है। विनयांजलि सभा में आर्यिका श्री यशस्विनी मति माताजी ने भी आचार्य श्री विमलसागर जी के साथ बिताए पलों, क्षणों और उनके वात्सल्य से भरे उपकारों का स्मरण करते हुए अपनी भावांजलि में कहा कि जिनकी मन ही निर्मल था। जिनकी चर्या ही निर्मल थी। वे चलते-फिरते तीर्थ थे। वे चतुर्थकाल में होते तो मोक्ष को जाते। माताजी ने कहा कि शिष्य कैसा होना चाहिए। उनके शिष्य आचार्य श्री भरतसागर जी महाराज, आर्यिका स्यादवाद मति माताजी अन्य साधु विहार में चलते समय आगे-पीछे हो जाते थे।</p>
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<p>यदि वे अपना कमंडल मांगते थे तो कहते थे कि जब गुरु ने नहीं दिया तो हम कैसे दें किन्तु आचार्य श्री कहते थे कि आर्यिका स्वादाद मति का कमंडल नहीं है। उसको अभिप्राय बहुत आता है। माताजी कंडल दे दो इसको। मेरी आज्ञा है। ये गुरु का वात्सल्य शिष्यों पर और भक्तों पर नहीं जैन धर्म के अनुयायियों पर था और भारत की जनता जो अहिंसा को मानने वाले जैन जनता और इतर जैन से भी वे जैन धर्म को ग्रहण करवाते थे। गुणानुवाद सभा में समाजसेवी कैलाश वेद ने भी आचार्यश्री के बारे में बताया और भजन प्रस्तुत किया। भोपाल से आए देवेंद्र शाह ने भी सभा को संबोधित किया। इस अवसर पर पार्षद राजीव जैन, इंदर सेठी सहित अन्य सम्मानित समाजजन मौजूद रहे। विनयांजलि और गुणानुवाद सभा का संचालन भक्ति से ओतप्रोत संचालन बाल ब्रह्मचारी तरूण भैया ने किया।</p>
<p><strong> वात्सल्य रत्नाकर विधान में चढ़ाए गए अर्घ्य </strong></p>
<p>बड़ा गणपति के समीप श्री मोदीजी की नसिया में सोमवार को आचार्यश्री विमलसागर जी के जयकारों से पूरा सभा मंडप गुंजायमान हो गया। इस अवसर पर पूर्ण भक्ति और आराधना के साथ संगीतमय मांगलिक कार्यक्रम संपन्न हुए। कार्यक्रम में अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने विमलसागर विधान में मंत्रोच्चार से आचार्यश्री के चरणों में अर्घ्य समर्पित करवाए। वात्सल्य रत्नाकर विमल सागर भक्त परिवार और सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से संयोजित इस कार्यक्रम में प्रातः स्मरणीय आचार्यश्री भरत सागर जी महाराज और गणनी आर्यिका श्री स्यादवाद मति माताजी के मंगल आशीर्वाद से सुबह 7 बजे से अभिषेक हुआ।</p>
<p><strong>संगीतमय भजनों की प्रस्तुतियों से सभी भक्तजन भक्ति में रहे लीन</strong></p>
<p>शाम साढ़े 6 बजे से 36 दीपकों के माध्यम से आचार्यश्री विमलसागर जी और श्री जी की संगीतमयी आरती की गई। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक म्यूजिकल तंबोला भी खेला गया। इस अवसर पर आर्यिका श्री यशस्विनी मति माताजी और आर्यिका श्री मनस्वनी मति माताजी का भी मंगल सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में संघस्थ बाल ब्रह्मचारी श्रद्धा दीदी ने भी विधान में मंत्र आदि के माध्यम से भक्ति का संचार किया। संगीतकार जैनम पंकज जैन की संगीतमय भजनों की प्रस्तुतियों से सभी भक्तजन भक्ति में झूम उठे। इस पूरे आयोजन के पुण्यार्जक परिवार अशर्फीलाल अशोककुमार, संजय नीलम, अनंतवीर्य जैन, वैशालिक ज्वेलर्स परिवार सराफा थे।</p>
<p><strong>इनका सहयोग रहा। </strong></p>
<p>इस आयोजन को सफल बनाने और इसका पुण्यलाभ अर्जन में चंद्रप्रभु ज्वेलर्स, वात्सल्य रत्नाकर विमल सागर भक्त परिवार, सकल दिगंबर जैन समाज, पंच लश्करी गोठ मोदीजी की नसिया, शांतिनाथ दिगंबर जैन त्रिमूर्ति मंदिर कालानी नगर, शांतिनाथ दिगंबर जैन बीसपंथी मंदिर, विहर्ष भक्त मंडल, राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी ) दिगंबर जैन संगठन एवं महिला संगठन का अद्वितीय सहयोग रहा।</p>
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		<title>आचार्य श्री विमलसागर जी का 32वां समाधि महोत्सव श्रद्धा से मनाया: बड़ौत नगर में अपार भक्ति के माहौल में झूमे श्रद्धालु  </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 05:08:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के महान तपस्वी, वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज का 32वां समाधि महोत्सव नगर में श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। यह पावन आयोजन आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में हुआ। बड़ौत से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230; बड़ौत। जैन समाज के महान तपस्वी, वात्सल्य रत्नाकर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन समाज के महान तपस्वी, वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज का 32वां समाधि महोत्सव नगर में श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। यह पावन आयोजन आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में हुआ। <span style="color: #ff0000">बड़ौत से पढ़िए, सोनल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़ौत।</strong> जैन समाज के महान तपस्वी, वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज का 32वां समाधि महोत्सव नगर में श्रद्धा, भक्ति एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। यह पावन आयोजन आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में साधु-संतों, श्रावक-श्राविकाओं एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। समाधि महोत्सव में धर्मसभा, प्रवचन, पूजन, भक्ति कार्यक्रम एवं श्रद्धांजलि अर्पण किए गए। आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने अपने उद्बोधन में आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज के त्यागमय, तपस्वी एवं करुणामय जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य विमलसागर जी महाराज का संपूर्ण जीवन आत्म संयम, अहिंसा और धर्मप्रभावना का जीवंत उदाहरण रहा है। ऐसे महापुरुष युगों-युगों तक समाज को दिशा देते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य विमलसागर जी महाराज ने कठोर तपस्या, हजारों उपवास, आजीवन त्याग एवं अनुशासित साधना के माध्यम से जैन धर्म की गौरवशाली परंपरा को सुदृढ़ किया। उनके द्वारा स्थापित धार्मिक संस्कार आज भी समाज को नैतिकता और संयम के मार्ग पर अग्रसर कर रहे हैं। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण भक्ति गीतों के माध्यम से आचार्यश्री को नमन किया।</p>
<p><strong>सामूहिक शांति पाठ एवं मंगल कामना व्यक्त की </strong></p>
<p>समाजजनों ने उनके बताए मार्ग पर चलने तथा धर्म-संस्कारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन के अंत में सामूहिक शांति पाठ एवं मंगल कामनाओं के साथ महोत्सव का समापन हुआ। 32वें समाधि महोत्सव का यह आयोजन बड़ौत नगरी के लिए गौरवपूर्ण अवसर रहा। जिसमें आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज की स्मृतियों को नमन करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश दिया गया। आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज का पावन समाधि महोत्सव अत्यंत शांत, गरिमामय एवं श्रद्धा-भाव से संपन्न हुआ। उनके समाधि समाचार से संपूर्ण देश-विदेश में शोक की लहर व्याप्त हो गई। साधु-संतों, श्रद्धालुओं एवं अनुयायियों ने इसे जैन समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।</p>
<p><strong>दीर्घ साधना जीवन में 4056 उपवास किए </strong></p>
<p>आचार्यश्री का जन्म कोसमा (जिला एटा, उत्तर प्रदेश) में आयुर्वेण कृष्ण सप्तमी, विक्रम संवत 1973 को हुआ। आपके पिता लाला बिहारीलाल एवं माता कटोरी बाई थीं। गृहस्थ अवस्था में आपका नाम नेमीचंद था। प्रारंभ से ही आप वैराग्यशील, संयमी एवं धर्मनिष्ठ प्रवृत्ति के रहे। आपने मोरेना महाविद्यालय (म.प्र.) से शास्त्री (हिंदी, संस्कृत एवं प्राकृत) की शिक्षा प्राप्त की। आचार्यश्री ने जीवन भर कठोर तप, त्याग और साधना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। आपने आजीवन अन्न त्याग (11 वर्ष से), दही, नमक एवं तेल का त्याग किया। अपने दीर्घ साधना जीवन में आपने 4056 उपवास सहित अनेक कठिन व्रत किए। क्षुल्लक, ऐलक, मुनि तथा आचार्य पद तक की दीक्षा-परंपरा में आपने असंख्य आत्माओं को संयम पथ पर अग्रसर किया।</p>
<p><strong>अनेको उपाधियों से अलंकृत किए गए आचार्य श्री </strong></p>
<p>आचार्यश्री को चारित्रचक्रवर्ती, ज्ञानभूषण, समन्वयाचार्य, करुणानिधि, वात्सल्य मूर्ति, कलिकालसर्वज्ञ जैसी अनेक उपाधियों से अलंकृत किया गया। आपके मार्गदर्शन में देश के अनेक तीर्थों पर जिनप्रतिमाओं की प्रतिष्ठा, मंदिरों का निर्माण, ज्ञानपीठ एवं धार्मिक संस्थानों की स्थापना हुई। आपने जैन साहित्य को भी समृद्ध किया जिनमें श्रीमज्जिनसहस्रनाम, मंडलविधान, पूजाविधान आदि उल्लेखनीय हैं।</p>
<p><strong>समाधि सम्मेद शिखर जी में हुई</strong></p>
<p>समाधि के पूर्व आचार्यश्री पूर्ण चेतना एवं शांति में स्थित रहे। न चेहरे पर विकार था, न शरीर में कोई कष्ट। चारों ओर अपूर्व सन्नाटा छा गया। अंतिम यात्रा अत्यंत गंभीर एवं मौन वातावरण में हुई। यह दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को भावविभोर कर गया। आचार्यश्री की समाधि पौष कृष्ण द्वादशी, विक्रम संवत 2051 (21 दिसंबर 1994) को श्री सम्मेदशिखरजी में हुई। उनके समाधि स्थल पर देशभर से साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।</p>
<p><strong>एक-एक वचन में तप की शक्ति और वात्सल्य की शीतलता </strong></p>
<p>आचार्य 108 श्री विमलसागर जी महाराज का संपूर्ण जीवन त्याग, तप, करुणा एवं धर्मप्रचार का जीवंत उदाहरण रहा। जैन समाज उन्हें युगदृष्टा आचार्य के रूप में सदैव स्मरण करता रहेगा। आपने न केवल आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि हजारों नर-नारियों को संयम, सदाचार और अहिंसा के पथ पर अग्रसर किया। आचार्यश्री का व्यक्तित्व अत्यंत सरल, तेजस्वी एवं प्रभावशाली था। उनके मुख से निकले एक-एक वचन में तप की शक्ति और वात्सल्य की शीतलता अनुभव होती थी। उनके उपदेशों से प्रभावित होकर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु धर्म लाभ के लिए उपस्थित होते थे। भारत ही नहीं, विदेशों में भी उनके प्रवचनों की गूंज सुनाई दी।</p>
<p><strong>कई तीर्थों का उन्नयन करवाया </strong></p>
<p>असंख्य साधनाएँ, अपूर्व तपस्या आचार्यश्री ने अपने दीर्घ साधना जीवन में 4056 उपवास कर जैन तपस्या की उच्चतम परंपरा को जीवंत किया। चातुर्मास, वर्षायोग, कठिन व्रत, जप, ध्यान और मौन साधना के माध्यम से उन्होंने आत्मसंयम की पराकाष्ठा को प्राप्त किया। आपने आजीवन अन्न त्याग, दही, नमक एवं तेल का त्याग कर संयम का कठोर पालन किया। दीक्षा परंपरा में ऐतिहासिक योगदान आचार्यश्री के सान्निध्य में शुल्लक, ऐलक, मुनि, आर्यिका एवं आचार्य दीक्षाएं संपन्न हुईं। हजारों श्रद्धालुओं को आपने संयम पथ की ओर प्रेरित किया। आपकी दीक्षा परंपरा आज भी जैन समाज में जीवंत एवं प्रेरणास्रोत बनी हुई है। धर्म, संस्कृति और निर्माण कार्य आचार्यश्री के मार्गदर्शन में अनेक जिनमंदिरों, तीर्थस्थलों, जिनप्रतिमाओं की प्रतिष्ठा, धर्मशालाओं, ज्ञानपीठों एवं शैक्षिक संस्थानों का निर्माण हुआ। सम्मेद शिखरजी, सोनागिरि, लोहारिया, राजगृह, ग्वालियर सहित अनेक स्थानों पर धर्मप्रभावना के स्थायी कार्य संपन्न हुए।</p>
<p><strong>आपकी वाणी सरल होते हुए भी गहन तत्वज्ञान से परिपूर्ण थी</strong></p>
<p>आपने जैन संस्कृति के संरक्षण और विस्तार में अतुलनीय योगदान दिया। साहित्य सृजन से ज्ञान की धाराअआचार्य 108 श्री विमलसागर जी महाराज ने जैन साहित्य को भी समृद्ध किया। आपके द्वारा रचित एवं प्रेरित ग्रंथ आज भी साधकों और विद्वानों के लिए मार्गदर्शक हैं। आपकी वाणी सरल होते हुए भी गहन तत्वज्ञान से परिपूर्ण थी। समाधि के समय आचार्यश्री पूर्ण शांति एवं समाधिस्थ अवस्था में थे। न कोई वेदना, न कोई विकारकृमानो देह स्वयं तत्व में विलीन हो रही हो। चारों दिशाओं में सन्नाटा छा गया और श्रद्धालुओं की आँखें नम हो गईं। यह दृश्य जीवन की नश्वरता और साधना की महिमा को दर्शाने वाला था। समाधि समाचार फैलते ही देश-विदेश से श्रद्धालुओं, साधु-संतों, समाजसेवियों एवं धर्मप्रेमियों ने गहन शोक व्यक्त किया। अनेक स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं। जैन समाज ने एक स्वर में कहा कि आचार्यश्री का जीवन युगों-युगों तक प्रेरणा देता रहेगा।</p>
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		<title>आचार्य विमल सागर जी महाराज का 32 वां पुण्य स्मृति दिवस सोमवार को: श्री मोदी जी की नसिया में होंगे मांगलिक कार्यक्रम  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Dec 2025 12:18:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री विमलसागर जी महाराज का 32 वां पुण्य स्मृति दिवस समारोह सोमवार को बड़ा गणपति के समीप श्री मोदीजी की नसिया में मनाया जा रहा है। पूर्ण भक्ति और आराधना के साथ इस पुण्य अवसर पर कई मांगलिक कार्यक्रम और संगीतमय आयोजन होंगे। कार्यक्रम में मुनिश्री सिद्धांतसागर जी महाराज, अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज, मुनिश्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री विमलसागर जी महाराज का 32 वां पुण्य स्मृति दिवस समारोह सोमवार को बड़ा गणपति के समीप श्री मोदीजी की नसिया में मनाया जा रहा है। पूर्ण भक्ति और आराधना के साथ इस पुण्य अवसर पर कई मांगलिक कार्यक्रम और संगीतमय आयोजन होंगे। कार्यक्रम में मुनिश्री सिद्धांतसागर जी महाराज, अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज, मुनिश्री विद्युवसागर जी महाराज का मंगल सान्निध्य प्राप्त होगा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्यश्री विमलसागर जी महाराज का 32 वां पुण्य स्मृति दिवस समारोह सोमवार को बड़ा गणपति के समीप श्री मोदीजी की नसिया में मनाया जा रहा है। पूर्ण भक्ति और आराधना के साथ इस पुण्य अवसर पर कई मांगलिक कार्यक्रम और संगीतमय आयोजन होंगे। कार्यक्रम में मुनिश्री सिद्धांतसागर जी महाराज, अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज, मुनिश्री विद्युवसागर जी महाराज का मंगल सान्निध्य प्राप्त होगा। वात्सल्य रत्नाकर विमल सागर भक्त परिवार और सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से बताया गया कि प्रातः स्मरणीय आचार्यश्री भरत सागर जी महाराज और गणनी आर्यिका श्री स्यादवाद मति माताजी के मंगल आशीर्वाद से सोमवार को सुबह 7 बजे से अभिषेक होगा। साथ ही वात्सल्य रत्नाकर विधान, विनयांजलि, गुणानुवाद सभा का आयोजन होगा। इसके बाद वात्सल्य भोज होगा।</p>
<p><strong>आर्यिका श्री यशस्विनी मति माताजी संघ का मिलेगा सान्निध्य </strong></p>
<p>शाम साढ़े 6 बजे से 36 दीपकों के माध्यम से संगीतमयी आरती होगी। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक म्यूजिकल तंबोला भी होगा। इस अवसर पर आर्यिका श्री यशस्विनी मति माताजी और आर्यिका श्री मनस्वनी मति माताजी का भी मंगल सान्निध्य प्राप्त होगा। कार्यक्रम में संघस्थ बाल ब्रह्मचारी श्रद्धा दीदी भी मौजूद रहेंगी। संगीतकार जैनम पंकज जैन की सांगेतिक प्रस्तुतियों से सभी मांगलिक विधियां संपन्न होंगी। इस आयोजन के पुण्यार्जक परिवार अशर्फीलाल अशोककुमार, संजय नीलम, अनंतवीर्य जैन, वैशालिक ज्वेलर्स परिवार सराफा रहेंगे।</p>
<p><strong>इन्होंने किया है पुण्यार्जन का आग्रह </strong></p>
<p>इस आयोजन को सफल बनाने और इसका पुण्यलाभ अर्जन करने के लिए चंद्रप्रभु ज्वेलर्स, वात्सल्य रत्नाकर विमल सागर भक्त परिवार, सकल दिगंबर जैन समाज, पंच लश्करी गोठ मोदीजी की नसिया, शांतिनाथ दिगंबर जैन त्रिमूर्ति मंदिर कालानी नगर, शांतिनाथ दिगंबर जैन बीसपंथी मंदिर, विहर्ष भक्त मंडल, राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी ) दिगंबर जैन संगठन एवं महिला संगठन ने समाजजनों से आग्रह किया है। सभी ने इन पंक्तियों को स्मरण करते हुए कहा है कि ‘पलटकर रख दी रेखाएं तकदीर की, जय बोलो विमलसागर जी गुरुदेव की&#8230;, चलो वात्सल्यधाम में डुबकी लगाने&#8230;।</p>
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