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	<title>आचार्य विमर्श सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>आचार्य विमर्श सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>दिल्ली कृष्णा नगर में आचार्य विमर्श सागर के वर्षायोग की पूर्ण संभावना, हर घर में बहेगी धर्म की गंगा जमुना 6 या 7 जुलाई को होगा जिनालय का शिलान्यास </title>
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		<pubDate>Wed, 05 Jun 2024 05:30:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ 2 जून रविवार को दिल्ली की कृष्णा नगर की समुचित जैन समाज ने संगठित होकर अतिशय क्षेत्र तिजारा में विराजमान परम पूज्य भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ससंघ के पावन चरणों में राजधानी चातुर्मास हेतु भावभीना निवेदन किया। आचार्य विमर्श सागर के वर्षायोग की पूर्ण संभावना। पढ़िए मनोज जैन नायय रिपोर्ट । [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> 2 जून रविवार को दिल्ली की कृष्णा नगर की समुचित जैन समाज ने संगठित होकर अतिशय क्षेत्र तिजारा में विराजमान परम पूज्य भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ससंघ के पावन चरणों में राजधानी चातुर्मास हेतु भावभीना निवेदन किया। आचार्य विमर्श सागर के वर्षायोग की पूर्ण संभावना। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायय रिपोर्ट ।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दिल्ली।</strong> राष्ट्रीयोगी, राष्ट्रगौरव भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज आ रहे हैं राष्ट्र की राजधानी दिल्ली में सन 2024 का स्वर्णिम पावन वर्षायोग राजधानी दिल्ली में संपन्न होगा 2 जून रविवार को दिल्ली की कृष्णा नगर की समुचित जैन समाज ने संगठित होकर अतिशय क्षेत्र तिजारा में विराजमान परम पूज्य भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ससंघ के पावन चरणों में राजधानी चातुर्मास हेतु भावभीना निवेदन किया इस अवसर पर आगरा, द्वारका, कोटा, जलेसर, एटा आदि अनेक नगरों के गुरु भक्तों ने गुरु चरणों में अपना निवेदन निवेदित किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-61522" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240604-WA0015.jpg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240604-WA0015.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240604-WA0015-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240604-WA0015-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240604-WA0015-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240604-WA0015-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240604-WA0015-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240604-WA0015-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240604-WA0015-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/06/IMG-20240604-WA0015-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज ने राजधानी के गुरु भक्तों को मंगलमय शुभाशीष प्रदान करते हुए कहा विगत दो वर्षों पूर्व मेरा दो दिन के लिए कृष्णा नगर में प्रवास हुआ था तब दो दिन में ही ऐसा लग रहा था जैसे यह संयोग मात्र आज का ही नहीं है यह संयोग भव &#8211; भव से चला आ रहा हो तब से लेकर आज तक समाज के बंधुजन जगह-जगह पहुंचकर चातुर्मास हेतु निवेदन करते आ रहे हैं समाज का प्रतिनिधिमंडल भी आचार्य गुरुदेव विराग सागर जी महामुनिराज के पास पत्र लेकर पहुंचा था पूज्य आचार्य गुरुदेव ने आपको अपना आशीष प्रदान किया है अतः कृष्णा नगर दिल्ली चातुर्मास 2024 हेतु मेरा 99 प्रतिशत आशीर्वाद है।</p>
<p>ध्यान रखना दिल्ली राजधानी में मुझे गृहस्थों के घर नहीं चाहिए मुझे दिल्ली में श्रावको के घर चाहिए आप सभी चतुर्विधि संघ की सेवा कर अपना कर्तव्य पूर्ण करें।</p>
<p><strong>6 और 7 जुलाई को होगा जिनालय का शिलान्यास</strong></p>
<p>इसी मंगल अवसर पर द्वारिका सेक्टर- 10 के भक्तों ने मिलकर सुसज्जित अष्टद्रव्यों से आचार्य भगवान की आराधना संपन्न की एवं द्वारका में एक नवीन जिनालय निर्माण का आशीर्वाद प्रदान करने हेतु निवेदन किया पूज्य आचार्य श्री ने दिल्ली राजधानी में प्रवेश के बाद ही 6 एवं 7 जुलाई को नवीन जैन मंदिर के शिलान्यास का मंगल आशीष प्रदान किया।</p>
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		<title>अक्षय तृतीया पर्व पर होगी 13 दीक्षार्थियों की मंगल गोद भराई वैरागियों के वैराग्य की अनुमोदना से भरती हैं खाली झोलियां- आचार्य विमर्श सागर  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 May 2024 03:21:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आखा तीज (अक्षय तृतीया) के पावन पर्व पर अक्षय क्षेत्र देहरा तिजारा के बड़े बाबा 1008 श्री चंद्र प्रभु भगवान की चरण छाया में एवं भावलिंगी संत राष्ट्रीयोगी श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज के मंगल आशीर्वाद एवं पावन सानिध्य में गुरुदेव के ही संघस्थ 13 दीक्षार्थी शिष्यों का प्रथम गोद भराई का महा आयोजन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आखा तीज (अक्षय तृतीया) के पावन पर्व पर अक्षय क्षेत्र देहरा तिजारा के बड़े बाबा 1008 श्री चंद्र प्रभु भगवान की चरण छाया में एवं भावलिंगी संत राष्ट्रीयोगी श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज के मंगल आशीर्वाद एवं पावन सानिध्य में गुरुदेव के ही संघस्थ 13 दीक्षार्थी शिष्यों का प्रथम गोद भराई का महा आयोजन होगा। <span style="color: #ff0000">पढि़ए मनोज जैन नायक एवं दीपक प्रधान की पूरी रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>देहरा/तिजारा।</strong> आखा तीज (अक्षय तृतीया) के पावन पर्व पर अक्षय क्षेत्र देहरा तिजारा के बड़े बाबा 1008 श्री चंद्र प्रभु भगवान की चरण छाया में एवं भावलिंगी संत राष्ट्रीयोगी श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज के मंगल आशीर्वाद एवं पावन सानिध्य में गुरुदेव के ही संघस्थ 13 दीक्षार्थी शिष्यों का प्रथम गोद भराई का महा आयोजन होगा। पूज्य गुरुदेव के परम भक्त विश्वनाथ जैन कोटिया आगरा द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार 10 मई 2024 शुक्रवार के पावन दिवस पर आगामी 15 नवंबर 2024 को होने वाली भगवती जिन दीक्षा को प्राप्त करने वाले भव्य आत्माओं की प्रथम गोद भराई के महा आयोजन में देशभर से हजारों श्रद्धालु भक्तगढ़ अतिशय क्षेत्र पर पधार कर भव्य दीक्षार्थियों की गोद भरकर उनके परम वैराग्य की अनुमोदना करेंगे।</p>
<p><strong>क्या है गोद भराई का महत्व-</strong></p>
<p>जैन धर्म में जैन धर्म में दीक्षा लेने वाले भाव्यजीवों की दीक्षा से पूर्व दीक्षार्थी भव्य आत्माओं के वैराग्य की प्रशंसा एवं अनुमोदना के साथ ही आप जैसा उत्कृष्ट वैराग्य हमें भी प्राप्त हो इस पवित्र भावनाओं से भरकर श्रावक-श्राविकाएं मांगलिक द्रव्यों से दीक्षार्थियों की गोद भरते हैं। पूज्य आचार्य श्री इस अवसर की महत्वता को बताते हुए कहते हैं कि जो कोई मां भावपूर्वक दीक्षार्थियों के मंगल द्रव्यों से गोद बढ़ती है उनकी गोद कभी सुनी नहीं रहती।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-60195" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240509-WA0000.jpg" alt="" width="1038" height="665" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240509-WA0000.jpg 1038w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240509-WA0000-300x192.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240509-WA0000-1024x656.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240509-WA0000-768x492.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/IMG-20240509-WA0000-990x634.jpg 990w" sizes="(max-width: 1038px) 100vw, 1038px" />कहां होगा दीक्षाओं का महा आयोजन कहां होगा विमर्श भक्तों का महाकुंभ15 नवंबर 2024 को परम पूज्य भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महामुनिराज के पवित्र कर कमल से बाल ब्रह्मचारी विशू दीदी सहित 13 दीक्षार्थियों को भगवती जिन दीक्षा प्रदान की जाएगी, लेकिन कहां यह निश्चि नहीं किया गया है। देश की राजधानी दिल्ली प्रदेश की जैन समाज सहित बड़ोत जैन समाज, अतिश्य क्षेत्र तिजारा जैन समाज, अलवर जैन समाज तथा रेवाड़ी जैन समाज के श्रद्धालु भक्तगण आचार्य श्री के चरणों में बारंबार निवेदन कर रहे हैं कि इस वर्ष का चातुर्मास एवं दीक्षाओं का महाकुंभ हमारे नगर में संपन्न किया जाए पूज्य आचार्य श्री श्रुत पंचमी पर्व के पश्चात निश्चित करेंगे कि इस वर्ष का सौभाग्य किसी समाज को प्राप्त होगा।</p>
<p><strong>कौन होंगे भगवती जिन दीक्षा प्राप्त करने वाले महापात्र</strong></p>
<p>भावलिंगी संत आचार्य श्री से जिन दीक्षा प्राप्त करने वाले संघर्ष शिष्य शिष्याओं में सर्वप्रथम विमर्शनुरागनी बहन बाल ब्रह्मचारी विशू दीदी है जिन्होंने सिद्ध क्षेत्र आहार जी में भगवान शांतिनाथ एवं गुरुदेव आचार्य विमर्श सागर जी के आशीर्वाद से असाध्य रोग से मुक्त होकर नवजीवन प्राप्त किया था और अपनी गुरु भक्ति का अनुपम परिचय दिया था। अगले क्रम में आचार्य गुरुवर की ग्रस्त जीवन की छोटी बहन बाल ब्रह्मचारी महिमा दीदी है आगे ,बाल ब्रह्मचारी मेघा दीदी, बाल ब्रह्मचारी ज्योति दीदी, बाल ब्रह्मचारी सोनली दीदी, बाल ब्रह्मचारिणी सृष्टि दीदी, बाल ब्रह्मचारी रिया दीदी, ब्रह्मचारिणी गुंजन दीदी, बाल ब्रह्मचारी दीपा दीदी, ब्रह्मचारिणी रीता दीदी, बाल ब्रह्मचारी प्रतीक्षा दीदी, ब्रह्मचारिणी मित्रावती दीदी एवं ब्रह्मचारी प्रवीण भैया जी है। इन 13 महापात्राओं को आगामी नवंबर माह में जिन दीक्षा प्रदान की जाएगी। इन्हीं 13 दीक्षार्थी की आगामी 10 मई को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर आचार्य गुरुदेव के मंगल आशीर्वाद पूर्वक गोद भराई की जाएगी।</p>
<p><strong>जिन शासन का सबसे महत्वपूर्ण दिवस ‘अक्षय तृतीया महापर्व’</strong></p>
<p>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ स्वामी को तप धारण करने के पश्चात 13 महा बीत जाने पर राज सोम- श्रेयांश के राजमहल में प्रथम आहार की प्राप्ति हुई थी। उसे दिन आहार सामग्री क्षय को प्राप्त नहीं हुई थी अत: ‘दान तीर्थ प्रवर्तन’ के रूप में यह अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाता है। इस दिन सुधी श्रावक श्राविकाओं को अवश्य ही आहार दान करना चाहिए। अतिशय क्षेत्र तिजारा पर 10 में को देश भर से पधारने वाले हजारों गुरुभक्तों को आहार दान एवं दीक्षार्थियों की अनुमोदना यह दोनों महान अवसर प्राप्त होंगे। कोई भी पुण्य आत्मा इस पूर्ण कर से चूक नहीं सकता। 10 मई को प्रात: वेला में जिनआराधना पश्चात अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाएगा। पश्चात चतुर्विधि संघ की आहारचार्य संपन्न होगी, जिसमें हजारों श्रावक, श्राविकाएं आहार दान देकर महापुण्य अर्जन करेंगे। मध्यान 1:00 से बाल ब्रह्मचारी विशू दीदी सहित 13 भव्य दीक्षार्थियों की मंगल गोद भराई की जाएगी स्थानीय जैन समाज सहित देशभर से आने वाले हजारों गुरु भक्तों को यह महान वैराग्य अनुमोदन का सुअवसर प्राप्त होगा। संध्या बेला में सुप्रसिद्ध गीतकार भजन सम्राट रूपेश जैन द्वारा गुरु चरणों में ‘विमर्श स्वरांजलि’ समर्पित की जाएगी।</p>
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		<title>सन्तो की साधना में सहयोगी बनने का कार्य श्रावक का : हमेशा धर्म और सन्तो की सेवा में रहो अग्रणी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/devotees_and_saints_are_mutual_helpers_in_the_vehicle_of_society_acharya_vimarsh_sagar/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Apr 2024 16:36:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सन्तो की साधना में सहयोगी बनने का कार्य श्रावक का होता है और प्रत्येक श्रावक को इसे अपना कर्तव्य समझ कर निभाना चाहिए, श्रावक और सन्त परस्पर समाज की गाड़ी को आगे बढ़ाने वाले होते हैं अतः सन्त श्रावक को दिशा दिखाते हैं और श्रावक सन्तो की साधना को आगे बढ़ाने में सहयोगी बन पुण्यार्जन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सन्तो की साधना में सहयोगी बनने का कार्य श्रावक का होता है और प्रत्येक श्रावक को इसे अपना कर्तव्य समझ कर निभाना चाहिए, श्रावक और सन्त परस्पर समाज की गाड़ी को आगे बढ़ाने वाले होते हैं अतः सन्त श्रावक को दिशा दिखाते हैं और श्रावक सन्तो की साधना को आगे बढ़ाने में सहयोगी बन पुण्यार्जन करते हैं ।<span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक रिपोर्ट …</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कामां ।</strong> सन्तो की साधना में सहयोगी बनने का कार्य श्रावक का होता है और प्रत्येक श्रावक को इसे अपना कर्तव्य समझ कर निभाना चाहिए, श्रावक और सन्त परस्पर समाज की गाड़ी को आगे बढ़ाने वाले होते हैं अतः सन्त श्रावक को दिशा दिखाते हैं और श्रावक सन्तो की साधना को आगे बढ़ाने में सहयोगी बन पुण्यार्जन करते हैं उक्त प्रवचन दिगम्बर जैन आचार्य विराग सागर महाराज के सुशिष्य भावलिंगी सन्त आचार्य विमर्श सागरमहाराजने धर्मनगरीकामां में प्रवेश उपरांत विजयमती त्यागी आश्रम में जैन समुदाय से व्यक्त किये।आचार्य ने कहा कि जिस प्रकार वैद सबसे पहले नब्ज देखता है उसी प्रकार संत भी समाज की धर्म भावना की नब्ज को टटोलते है उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रोगी को डॉक्टर के पास आना पड़ता है उसी प्रकार समाज जनों को भी सन्तो के पास आना पड़ता है तभी उपचार संभव हो पाता है जो व्यक्ति बिल्कुल मरणासन्न पर पहुंच चुका है उसका इलाज संभव नहीं है तो डॉक्टर भी जवाब दे देते हैं इसलिए समाज को हमेशा जागृत, सजग व संतों के प्रति भावों से भरा हुआ होना चाहिए।</p>
<p><strong>युवाओं की है आवश्यकता </strong></p>
<p>आचार्य ने युवाओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्तमान को आपकी आवश्यकता है अतः हमेशा धर्म,धार्मिक क्रियाओ और सन्तो की सेवा में अग्रणी रहो। कामां में हुआ मंगल प्रवेश भाव लिंगी सन्त आचार्य विमर्श सागर महाराज का 24 साधु साध्वियों सहित धर्म नगरी कामा में मंगल प्रवेश हुआ तो कामां के प्रवेश द्वार पर जैन समाज के युवाओं ने बड़े जोश के साथ आचार्य संघ की आगवानी की। जुलूस के रूप में बैंड बाजो के साथ डीग गेट, नगर पालिका मुख्य बाजार,लाल दरवाजा होते हुए विजयमती त्यागी आश्रम पहुँचे। इस अवसर पर वातावरण जैन धर्म के जयकारों से गुंजायमान हो गया तो रंगीन पुष्प वर्षा की गई। जैन श्रावकों ने अपने-अपने प्रतिष्ठानों पर अचार्य संघ की मंगल आरती पाद प्रक्षालन कर भव्य आगवानी की।</p>
<p><strong>गुरुभक्ति का कार्यक्रम हुआ आयोजित </strong></p>
<p>इंद्रोली गांव से तपती दुपहर में हुआ विहार कामां प्रवेश से पूर्व इंद्रोली गांव से अचार्य संघ का ,बढ़ते तापमान,तपती दोपहरी एवं गर्म धरती पर नंगे पांव पद विहार हुआ। ज्ञात रहे कि आचार्य संघ का एटा से तिजारा के लिए मंगल विहार मथुरा डीग कामां होते हुए चल रहा है। युवा परिषद अध्यक्ष मयंक जैन लहसरिया ने बताया कि आचार्य संघ में बारह दिगंबर जैन मुनिराज एवं बारह जैन साध्वी सहित अनेको ब्रह्मचारिणी बहने व भैया है। विजयमती त्यागी आश्रम में गुरुभक्ति का कार्यक्रम आयोजित किया गया।</p>
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		<title>धर्म प्रभावना : हम भी भगवान की तरह पुरुषार्थ कर भगवान बन सकते हैं &#8211; आचार्य श्री विमर्श सागर </title>
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		<pubDate>Thu, 23 Feb 2023 04:39:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8216; जीवन है पानी की बूंद &#8216; महाकाव्य के मूल रचयिता आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि यदि हमें धर्म प्राप्त करना है तो हमें अधर्म का भी पता होना चाहिए। पढ़िए राजेश रागी/रत्नेश जैन की रिपोर्ट&#8230; बकस्वाहा। सर्वज्ञ प्रभु की वाणी में सबका हित निहित है। आप प्रतिदिन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>&#8216; जीवन है पानी की बूंद &#8216; महाकाव्य के मूल रचयिता आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि यदि हमें धर्म प्राप्त करना है तो हमें अधर्म का भी पता होना चाहिए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश रागी/रत्नेश जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> सर्वज्ञ प्रभु की वाणी में सबका हित निहित है। आप प्रतिदिन मंदिर आते हैं, आपका मंदिर आने का क्या कारण है? मंदिर आने का हमारा एक ही प्रयोजन होना चाहिए कि मुझे भी भगवान बनना है। मंदिर में भगवान के दर्शन करते हुए हमें यह विचार करना चाहिए कि भगवान भी पूर्व अवस्था में मेरे ही समान थे। उन्होंने अपनी आत्मा से अवगुणों को हटाकर आत्मा के स्वभाव रूप गुणों को प्राप्त कर लिया है। मेरे अंदर भी भगवान के समान वे सभी गुण मौजूद हैं, अब मैं भी भगवान की तरह पुरुषार्थ करके भगवान की तरह अनंत गुण वैभव को प्राप्त करूंगा। यह बात बकस्वाहा के श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में दूसरे दिन आयोजित धर्मसभा में &#8216; जीवन है पानी की बूंद &#8216; महाकाव्य के मूल रचयिता, राष्ट्रयोगी आचार्य श्री 108 विमर्श सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कही।।</p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि यदि हमें धर्म प्राप्त करना है तो हमें अधर्म का भी पता होना चाहिए । जब हमें यह पता होगा कि क्रोध अधर्म है, तब हम उसे त्याग कर क्षमा धर्म को प्राप्त करने का पुरुषार्थ कर सकेंगे। जब हमें अपने वस्त्र की मलिनता का भान होगा, तब ही हम उसे साफ करने व धोने का प्रयास करेंगे। हम अधर्म को जानकर उसे त्याग कर अपनी आत्मा के स्वभाव रूप धर्म को प्राप्त करना चाहिए। इस अवसर पर आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज की ससंघ 25 पिच्छीधारी से अधिक साधु व आर्यिका माताजी सहित विशाल चतुर्विध संघ की आहार चर्या भी सम्पन्न हुई। दोपहर उपरांत आचार्यश्री का ससंघ हीरापुर की ओर विहार हुआ। रात्रि विश्राम गडोही मे होगा और गुरुवार की आहारचर्या हीरापुर ग्राम मे होगी।</p>
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		<title>विश्व शान्ति का आधार है दसलक्षण महापर्व  -भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Aug 2022 08:20:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विमर्श सागर]]></category>
		<category><![CDATA[दसलक्षण पर्व]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रेषक- बा.ब्र.विशुदीदी (संघस्थ) दिगम्बर जैनधर्म में भाद्रपद शुक्ला पंचमी का दिन विश्वशान्ति के लिए समर्पित प्रथम दिन है। दसलक्षण महापर्व वास्तव में विश्व शान्ति पर्व है क्योंकि विश्व में शान्ति धर्म के इन दस लक्षणों के माध्यम से ही स्थापित की जा सकती है। यदि गहराई से चिन्तन किया जाए तो धर्म के यह दस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000">प्रेषक- बा.ब्र.विशुदीदी (संघस्थ)</span></p>
<p>दिगम्बर जैनधर्म में भाद्रपद शुक्ला पंचमी का दिन विश्वशान्ति के लिए समर्पित प्रथम दिन है। दसलक्षण महापर्व वास्तव में विश्व शान्ति पर्व है क्योंकि विश्व में शान्ति धर्म के इन दस लक्षणों के माध्यम से ही स्थापित की जा सकती है। यदि गहराई से चिन्तन किया जाए तो धर्म के यह दस लक्षण केवल जैनों के पर्व या व्रत नहीं हैं अपितु प्रत्येक मानव के लिए जीवनोपयोगी हैं। उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य एवं उत्तम ब्रह्मचर्य ये दसलक्षण धर्म कहलाते हैं। ये भाद्रपद शुक्ला चतुर्दशी को पूर्ण हैं। आइए, जानते हैं इनमें से प्रत्येक के बारे में&#8230;।</p>
<p><strong>उत्तम क्षमा धर्म</strong> &#8211; आत्मा क्षमा स्वभावी है। यदि कोई क्रोध, कषाय का कारण उपस्थित हो जाए तो भी क्षमा धर्म का पालन करना वास्तव में वीरों का कार्य है। क्रोध समस्या का समाधान नहीं अपितु स्वयं एक समस्या है। क्षमा हर समस्या का जीवंत समाधान है।</p>
<p><strong>उत्तम मार्दव धर्म &#8211;</strong> मृदुता का भाव उत्तम मार्दव धर्म है। मान कषाय के कारण आत्मा में कठोरता आ जाती है। जिस प्रकार कठोर भूमि पर पड़ा श्रेष्ठ बीज भी नष्ट हो जाता है। उसी प्रकार कठोर परिणामी आत्मा का धर्म करना भी अप्रयोजनीय होता है।</p>
<p><strong>उत्तम आर्जव धर्म &#8211;</strong> मन-वचन-काय की सरलता का नाम ही उत्तम आर्जव धर्म है। आर्जव धर्म मायाचार, छल-कपट से बचाता है। मनुष्य का आचरण जब तक छल-कपट युक्त होगा, तब तक वह धर्मविहीन माना जाता है। छल से किया धर्म विनाश का कारण बनता है।</p>
<p><strong>उत्तम शौच धर्म &#8211;</strong> शुचिता का होना ही शौच धर्म है। लोभ कषाय के कारण मानव का मन सदा अशुचि बना रहता है। संतोष की भावना जब हृदय में प्रकट होती है तब मन में शुचिता का भाव जाग्रत होता है। इस धर्म के पालन से छोटे-बड़े का भेद मिट जाता है।</p>
<p><strong>उत्तम सत्य धर्म &#8211;</strong> दूसरों को पीड़ादायक कठोर वचन, परनिंदापरक वचन, झूठे वचन तथा दूसरों को नीचा दिखाने वाले वचन, असत्य की श्रेणी में आते हैं। इन सभी असत्य वचनों को त्यागकर हित- मित-प्रिय वचन कहना, उत्तम सत्य धर्म है। इस धर्म के होने पर ही धार्मिकता होती है।</p>
<p><strong>उत्तम संयम धर्म &#8211;</strong> मनोबल को बढ़ाने की अचूक औषधि संयम है। संयम धर्म के द्वारा साधक बे-लगाम इन्द्रिय और मन पर नियंत्रण रखता है। षट्काय के जीवों की रक्षा करता है। उत्तम संयम धर्म मनुष्य को सामाजिक, नैतिक, धार्मिक एवं जिम्मेदार बनाता है।</p>
<p><strong>उत्तम तप धर्म &#8211;</strong> इच्छाओं को रोकना ही तप है। अंतरंग एवं बहिरंग तप द्वारा आत्मा को शुद्ध किया जाता है। जिस प्रकार स्वर्ण तपकर ही शुद्ध बनता है, भोजन तपकर ही स्वादिष्ट बनता है उसी प्रकार यह आत्मा तपश्चरण की साधना से परमात्मा बनती है।</p>
<p><strong>उत्तम त्याग धर्म &#8211;</strong> आत्मा के राग-द्वेष आदि काषायिक भावों का अभाव होना ही वास्तविक त्याग धर्म है। चार प्रकार के दान भी इसी त्याग धर्म के अन्तर्गत आते हैं। साधना का सच्चा आनन्द राग में नहीं अपितु त्याग में ही है। निःस्वार्थ भाव से दिया गया दान ही त्याग धर्म है।</p>
<p><strong>उत्तम आकिंचन्य धर्म &#8211;</strong> सांसारिक वस्तुओं के साथ &#8216;मैं&#8217; और &#8216;मेरेपन&#8217; का संबंध भी विसर्जित कर देना और निज शुद्धात्मा ही एकमात्र मेरा है, ऐसी गहन आत्मानुभूति का नाम ही उत्तम आकिंचन्य धर्म है। &#8216;मैं&#8217; और &#8216;मेरेपन&#8217; का भाव संसार भ्रमण का कारण है।</p>
<p><strong>उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म &#8211;</strong> निज आत्मा में रमण करना उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है। ब्रह्मचर्य धर्म के द्वारा ही समाजवाद की स्वस्थता कायम रह सकती है। ब्रह्मचर्य धर्म से असंयम, अश्लीलता, अमर्यादा, बलात्कार जैसी घटनाओं पर अंकुश लग सकता है तथा जनसंख्या वृद्धि का समाधान भी मिल सकता है। ब्रह्मचर्य धर्म सर्वधर्मों की सिद्धि का आधार है।</p>
<p>दसलक्षण महापर्व के इन दस दिनों में सभी लोग अपना खान-पान, रहन-सहन, आचरण सुधारें। सामायिक, संयम, साधना, उपवास से जुड़ें। व्यापार, गपशप, सीरियल का परित्याग करें। सादगी और सात्विकता से अपना जीवन धर्ममय बनाएं।</p>
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