<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>आचार्य विद्यासागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A5%80/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sun, 19 Jul 2026 10:58:32 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.2</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>आचार्य विद्यासागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>आचार्य श्री विद्यासागर जी के मुनि दीक्षा दिवस पर डडूका में वृक्षारोपण : पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_diksha_diwas_vriksharopan_daduka/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_diksha_diwas_vriksharopan_daduka/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Jul 2026 10:58:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Banswara]]></category>
		<category><![CDATA[daduka]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Diksha Diwas]]></category>
		<category><![CDATA[Environment Protection]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Rajasthan]]></category>
		<category><![CDATA[Rekha Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Tree Plantation]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[डडूका]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यावरण संरक्षण English Tags Shreephal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[बांसवाडा]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि दीक्षा दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[रेखा जैन]]></category>
		<category><![CDATA[वृक्षारोपण]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=109599</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मुनि दीक्षा दिवस पर डडूका स्थित नसियाजी तीर्थ क्षेत्र में सामूहिक वृक्षारोपण किया गया। समाजजनों, युवा समिति, महिला मंडल एवं पाठशाला के बच्चों ने पौधों की देखभाल का संकल्प लिया। पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया की यह रिपोर्ट। &#160; डडूका (बांसवाड़ा, राजस्थान)। आषाढ़ शुक्ल पंचमी पर इस सदी के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मुनि दीक्षा दिवस पर डडूका स्थित नसियाजी तीर्थ क्षेत्र में सामूहिक वृक्षारोपण किया गया। समाजजनों, युवा समिति, महिला मंडल एवं पाठशाला के बच्चों ने पौधों की देखभाल का संकल्प लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी अजीत कोठिया की यह रिपोर्ट।</span><del></del></strong></p>
<hr />
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>डडूका (बांसवाड़ा, राजस्थान)।</strong> आषाढ़ शुक्ल पंचमी पर इस सदी के महान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मुनि दीक्षा दिवस के अवसर पर दिगंबर जैन समाज, जैन युवा समिति, महिला मंडल एवं दिगंबर जैन पाठशाला परिवार डडूका के संयुक्त तत्वावधान में नसियाजी तीर्थ क्षेत्र डडूका में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।</p>
<p><strong>फलदार पौधों का किया रोपण</strong></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण प्रभारी एवं प्रकृति प्रेमी मितेश आर. शाह, समाज अध्यक्ष राजेश शाह, युवा समिति अध्यक्ष चिराग शाह तथा पलाश शाह के निर्देशन में फलदार पौधों का रोपण किया गया। उपस्थित सभी सदस्यों ने पौधों के संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>बच्चों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश</strong></p>
<p>जैन युवा समिति के सदस्य राजेंद्र कोठिया, टीना शाह, अजीत कोठिया, अंकित शाह तथा दिगंबर जैन पाठशाला के बच्चों ने उत्साहपूर्वक वृक्षारोपण में भाग लिया। बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा का आह्वान किया।</p>
<p><strong>समाज की सामूहिक सहभागिता</strong></p>
<p>कार्यक्रम में समाज के विभिन्न संगठनों एवं सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही। सभी ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के तप, त्याग और प्रकृति संरक्षण के प्रेरक संदेशों को आत्मसात करने का संकल्प व्यक्त किया।</p>
<p><strong>पर्यावरण संरक्षण का प्रेरक संदेश</strong></p>
<p>समाज प्रवक्ता राकेश शाह ने बताया कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। इस प्रकार के आयोजन समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_diksha_diwas_vriksharopan_daduka/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विद्यासागर महाराज की उत्कृष्ट त्याग-तपस्या अनुकरणीय : मुनि सुव्रत सागर महाराज : आचार्य श्री के 59वें दीक्षा दिवस पर ललितपुर में संगीतमय पूजन एवं भक्ति का आयोजन </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_59th_diksha_diwas_lalitpur/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_59th_diksha_diwas_lalitpur/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 16:49:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Ata Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Diksha Diwas]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lalitpur]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Suvrat Sagar]]></category>
		<category><![CDATA[Rekha Jain]]></category>
		<category><![CDATA[अटा मंदिर English Tags Shreephal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षा दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि सुव्रत सागर]]></category>
		<category><![CDATA[रेखा जैन]]></category>
		<category><![CDATA[ललितपुर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=109573</guid>

					<description><![CDATA[ललितपुर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटा मंदिर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का 59वां दीक्षा दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। मुनि सुव्रत सागर महाराज ने आचार्य श्री के त्याग, तप और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को अनुकरणीय बताते हुए समाज को प्रेरित किया। पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट। ललितपुर। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>ललितपुर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटा मंदिर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का 59वां दीक्षा दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। मुनि सुव्रत सागर महाराज ने आचार्य श्री के त्याग, तप और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को अनुकरणीय बताते हुए समाज को प्रेरित किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> संत शिरोमणि आचार्य श्रेष्ठ श्री 108 विद्यासागर जी महाराज का 59वां दीक्षा दिवस पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटा मंदिर, ललितपुर में मुनि श्री सुव्रत सागर महाराज के सान्निध्य में श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रातःकाल अभिषेक, शांतिधारा, संगीतमय पूजन एवं विद्या गुरु विधान का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।</p>
<p><strong>अभिषेक, शांतिधारा एवं संगीतमय विधान</strong></p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान जिनेन्द्र देव के अभिषेक एवं शांतिधारा से हुआ। शांतिधारा का वाचन मुनि श्री सुव्रत सागर महाराज ने कराया, जिसका पुण्यार्जन जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया एवं महामंत्री आकाश जैन ने संयुक्त रूप से किया। ब्रह्मचारी संजय भैया (मुरैना) के निर्देशन में संगीतमय विधान सम्पन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से अर्घ्य समर्पित किए।</p>
<p><strong>आचार्य श्री के चरणों में श्रद्धा अर्पित</strong></p>
<p>आचार्य श्री के चरणों का पाद प्रक्षालन साधु वैयावृत्ति संघ एवं समाज के श्रेष्ठीजनों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में शीलचंद अनौरा, सनत जैन खजुरिया, सतीश नजा, डॉ. सजीव कडंकी, अक्षय अलया, सुरेश जैन बड़ैरा, अमित सराफ, धन्यकुमार जैन, अजय जैन गंगचारी, मनोज जैन बबीना सहित अनेक समाजजन एवं महिला श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>त्याग और तपस्या से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री सुव्रत सागर महाराज ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का त्याग, तप और संयमपूर्ण जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनुकरणीय है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर हजारों लोगों ने आत्मकल्याण का मार्ग अपनाया तथा अपने जीवन को सार्थक बनाया।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आचार्य श्री ने समाज को केवल आध्यात्मिक दिशा ही नहीं दी, बल्कि गौशालाओं, गुरुकुलों, अस्पतालों, प्रतिभास्थली, शिक्षा संस्थानों तथा हथकरघा जैसे सेवा कार्यों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में भी अमूल्य योगदान दिया। उनके उपकारों का स्मरण जितना किया जाए, उतना कम है।</p>
<p><strong>58 दीपों से हुई संगीतमय आरती</strong></p>
<p>सायंकाल आचार्य श्री के दीक्षा दिवस के उपलक्ष्य में 58 दीपों से भव्य संगीतमय महाआरती सम्पन्न हुई। भक्तों ने भक्ति गीतों के साथ आरती कर गुरुचरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। पूरा मंदिर परिसर गुरु भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से गूंज उठा।</p>
<p><strong>श्रद्धा और प्रेरणा का बना पर्व</strong></p>
<p>दीक्षा दिवस समारोह ने समाजजनों में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आदर्शों के प्रति नई श्रद्धा एवं प्रेरणा का संचार किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनके बताए संयम, सेवा और साधना के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_59th_diksha_diwas_lalitpur/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य श्री विद्यासागर जी के 59वें दीक्षा दिवस पर मक्सी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब : मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी बोले— आचार्य श्री ने श्रमण परम्परा को नई ऊर्जा प्रदान की </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_59th_diksha_diwas_maksi_parshwanath/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_59th_diksha_diwas_maksi_parshwanath/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 16:46:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Diksha Diwas]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Maksi Parshwanath]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Puṅgav Sudhasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Rekha Jain]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दीक्षा दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[मक्सी पार्श्वनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि पुंगव सुधासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[रेखा जैन]]></category>
		<category><![CDATA[श्रमण परम्परा English Tags Shreephal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=109569</guid>

					<description><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र मक्सी पार्श्वनाथ में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का 59वां दीक्षा दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने अपने प्रेरक प्रवचन में आचार्य श्री के तप, त्याग, चर्या और श्रमण परम्परा में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण कराया। पढ़िए श्रीफल साथी राजीव [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र मक्सी पार्श्वनाथ में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का 59वां दीक्षा दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने अपने प्रेरक प्रवचन में आचार्य श्री के तप, त्याग, चर्या और श्रमण परम्परा में उनके अमूल्य योगदान का स्मरण कराया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मक्सी पार्श्वनाथ।</strong> श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र मक्सी पार्श्वनाथ में परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज का 59वां दीक्षा दिवस मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ मनाया गया। पहली बार इस पावन तीर्थ पर आचार्य श्री का दीक्षा दिवस समारोह आयोजित होने से समाजजनों में विशेष उत्साह देखने को मिला।</p>
<p><strong>59 दीपों से हुई भव्य महाआरती</strong></p>
<p>दीक्षा दिवस के अवसर पर 59 दीपों से भव्य महाआरती की गई। जगत कल्याण की भावना से महाशांतिधारा का सौभाग्य अक्षय कासलीवाल एवं आकाश कोयला परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि महाआरती राहुल जैन स्पोर्ट्स परिवार द्वारा सम्पन्न हुई। आचार्य श्री के चित्र का अनावरण पुष्पा कासलीवाल, कैलाश जैन, अमित कासलीवाल एवं धर्मेन्द्र सिमकेम ने किया। दीप प्रज्ज्वलन आनंद नवीन गोधा, हर्ष जैन, विजय पाटोदी, भरत मोदी, हंसमुख गांधी, राजेश जैन दद्दू सहित अन्य प्रमुख समाजजनों ने किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-109570" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-1320x743.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034-414x232.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260718-WA0034.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>आचार्य श्री की चर्या स्वयं आगम का प्रमाण बनी</strong></p>
<p>विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने श्रमण परम्परा को नई चेतना और नई ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने अपने तप, संयम और निष्कलंक चर्या से यह सिद्ध कर दिया कि आगम केवल ग्रंथों में ही नहीं, बल्कि साधु के जीवन में भी साकार होता है। उनकी साधना ने अनेक विद्वानों को भी उनकी चर्या की तुलना आगम से करने के लिए प्रेरित किया।</p>
<p><strong>महापुरुष अपने आदर्शों से अमर रहते हैं</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि कुछ महापुरुष ऐसे होते हैं जो शरीर से विदा होने के बाद भी समाज के हृदयों में सदैव जीवित रहते हैं। भगवान महावीर का शासन आज भी चल रहा है, उसी प्रकार आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज अपने आदर्शों, तप और त्याग के कारण आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के जीवन का मार्गदर्शन कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि शासक का शासन उसके जीवन तक सीमित होता है, लेकिन तीर्थंकरों और महान संतों का प्रभाव उनके देहावसान के बाद भी युगों तक बना रहता है। यही उनकी वास्तविक महानता है।</p>
<p><strong>साधना से प्राप्त पद ही शाश्वत होता है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि साधना से प्राप्त सम्मान और पद ही शाश्वत होता है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कभी प्रसिद्धि की इच्छा नहीं की, बल्कि आत्मसाधना को जीवन का लक्ष्य बनाया। उन्होंने स्वयं मंजिल प्राप्त की और उनके द्वारा निर्मित मार्ग पर आज हजारों साधु-साध्वियाँ एवं लाखों श्रद्धालु चल रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आचार्य श्री के जीवन को देखकर लोगों ने केवल शास्त्र पढ़ने की अपेक्षा उनके जीवन से धर्म सीखना प्रारम्भ किया। उनका सम्पूर्ण व्यक्तित्व संयम, तप और आगम की जीवंत व्याख्या था।</p>
<p><strong>दीक्षा दिवस बना ऐतिहासिक</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश महासभा के विजय धुर्रा ने कहा कि मक्सी पार्श्वनाथ में पहली बार आचार्य श्री विद्यासागर जी का 59वां दीक्षा दिवस मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के सान्निध्य में मनाया गया। 59 दीपों से महाआरती कर इस दिवस को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया गया।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने लिया आदर्शों पर चलने का संकल्प</strong></p>
<p>कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के तप, त्याग, संयम एवं सेवा के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। धर्मसभा का वातावरण गुरु भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत रहा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_59th_diksha_diwas_maksi_parshwanath/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बच्चों ने शिविर में बनाए गहन अर्थ युक्त चित्र : आचार्य विद्यासागर जी की मात्र सत्रह अक्षर की कविताओं (हाइकू) पर की चित्रकारी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/children_created_deeply_meaningful_paintings_at_the_camp/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/children_created_deeply_meaningful_paintings_at_the_camp/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 May 2026 16:02:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[All India Shraman Sanskriti Women's Federation]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Haiku]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Poetry]]></category>
		<category><![CDATA[Seventeen Syllables]]></category>
		<category><![CDATA[Shree Digambar Jain Shraman Sanskriti Institute Sanganer]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Summer Cultural Education Camp. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति (भारत)]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[कविता]]></category>
		<category><![CDATA[ग्रीष्म कालीन संस्कार शिक्षण शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[सत्रह अक्षर]]></category>
		<category><![CDATA[हाइकू]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=107005</guid>

					<description><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर एवं अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति भारत द्वारा 17 से 28 मई तक लगाए गए ग्रीष्म कालीन संस्कार शिक्षण शिविरों में मंगलवार को जैनाचार्य विद्यासागर जी महाराज की मात्र सत्रह अक्षर की कविताओं (हाइकू) पर बच्चों ने शिविर में गहन अर्थ युक्त चित्र बनाए। जयपुर से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर एवं अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति भारत द्वारा 17 से 28 मई तक लगाए गए ग्रीष्म कालीन संस्कार शिक्षण शिविरों में मंगलवार को जैनाचार्य विद्यासागर जी महाराज की मात्र सत्रह अक्षर की कविताओं (हाइकू) पर बच्चों ने शिविर में गहन अर्थ युक्त चित्र बनाए। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर एवं अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति भारत द्वारा 17 से 28 मई तक लगाए गए ग्रीष्म कालीन संस्कार शिक्षण शिविरों में मंगलवार को जैनाचार्य विद्यासागर जी महाराज की मात्र सत्रह अक्षर की कविताओं (हाइकू) पर बच्चों ने शिविर में गहन अर्थ युक्त चित्र बनाए। संत सुधा सागर बालिका महाविद्यालय छात्रावास तथा छात्रावास की अधिष्ठात्री शीला जैन ड्योडा ने हाइकू के बारे में बताया कि यह एक मात्र सत्रह अक्षर की गहरे अर्थ वाली कविता होती है, जिसमे प्रथम लाइन में पांच, द्वितीय में सात तथा तृतीय में पांच अक्षर होते हैं। आचार्य विद्यासागर जी की ऐसी रचनाएं बहुत प्रचलित है। निदेशिका वंदना जैन और जयपुर शिविर प्रभारी विनीता जैन ने प्रचार-प्रसार प्रभारी पदम जैन बिलाला को बताया कि जयपुर के मंदिरों में मंगलवार को छोटे छोटे बच्चों ने हाइकू के अर्थ को बहुत अच्छे-अच्छे चित्रों में सजोया है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-107006" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260519-WA0018-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260519-WA0018-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260519-WA0018-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260519-WA0018-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260519-WA0018-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260519-WA0018-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260519-WA0018-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260519-WA0018-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/05/IMG-20260519-WA0018.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>यह प्रतियोगिता चार से सात साल तथा आठ से बारह साल के बच्चों के लिए है, जिसमे मंदिर स्तर पर प्रथम आने वालो में से छह सर्वश्रेष्ठ बच्चों को समापन समारोह में पुरस्कृत किया जाएगा। आंचल अध्यक्षा शालिनी बाकलीवाल के अनुसार प्रतियोगिता में चित्रकूट, वैशाली नगर, बगरू वालों का मंदिर, दुर्गापुरा, जनकपुरी, केसर चौराहा, थड़ी मार्केट, महेश नगर, अरिहंत विहार, मधुबन, झोटवाड़ा, मालवीय नगर, मुल्तान मंदिर, सांगानेर सहित बहुत से मंदिरों से करीब तीन सो बच्चों की भागीदारी रही है। इधर, सभी मंदिरों में शिविर शिक्षण का कार्य नियमित रूप से ज़ोर-शोर से चल रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/children_created_deeply_meaningful_paintings_at_the_camp/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है: मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने धर्मसभा में मुनिदीक्षा की क्रियाओं को सूक्ष्मता से समझाया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_the_path_to_balance_your_results/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_the_path_to_balance_your_results/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 05:41:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Gyansagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shantisagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shivsagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Samaysagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Veersagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Arihant Vihar]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Morning Religious Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[munidiksha]]></category>
		<category><![CDATA[Munishri Sambhavsagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अरिहंत विहार]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य ज्ञानसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य वीरसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य शांतिसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य शिवसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री समयसागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रातःकालीन धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिदीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री संभवसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=100346</guid>

					<description><![CDATA[मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है। यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते हैं। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए,राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; विदिशा। मोक्ष [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है। यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते हैं। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए,राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है। यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते हैं। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने सर्कस का उदाहरण देते हुए कहा कि आप लोगों ने देखा होगा कि किस प्रकार से खिलाड़ी बैलेंस बनाते हुए खेल दिखाता है। जरा सी चूक उसकी जानलेवा सिद्ध हो सकती है। उसी प्रकार साधक को अपनी दैनिक क्रिया करते समय अपने 28 मूलगुणों तथा पंच महाव्रतों के पालन का पूर्ण ध्यान रखना पड़ता है। मुनि श्री ने कहा कि कल आप लोगों ने देखा होगा किस प्रकार से आचार्य श्री समयसागर महाराज ने मूल संघ के संस्थापक आचार्य कुंद-कुंद की वीतरागी निर्ग्रंथ परंपरा में आचार्य शांतिसागरजी, आचार्य वीरसागरजी, आचार्य शिवसागरजी, आचार्य ज्ञानसागरजी की परंपरा के आचार्य विद्यासागर जी की परंपरा का निर्वाहन करते हुए मुक्तागिरी में नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100350" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-300x99.jpg" alt="" width="300" height="99" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-300x99.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-1024x339.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-768x255.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-990x328.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010.jpg 1080w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>दीक्षा से पहले क्षमायाचना करते हैं</strong></p>
<p>वर्तमान के संघ नायक आचार्य श्री समयसागरजी महाराज जब 22 साधकों को निर्ग्रन्थ मुनि दीक्षा प्रदान कर रहे थे तो ऐसा लगा कि समय मानो थम सा गया है, विदिशा से बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने यह दृश्य प्रत्यक्ष देखा और बड़ी संख्या में सभी लोग अपने घरों पर बड़ी टीवी पर विद्याकुल में वृद्धि के दृश्यों को देख रहे थे। मुनिश्री ने दीक्षा विधि को बताते हुए कहा कि दीक्षा देने के पूर्व सभी साधक संसार में रहते हुए राग द्वेष के निमित्त जो भी परिणाम उनके विचलित होते हैं। वह सभी सांसारिक संबंधों जैसे अपने गृहस्थ जीवन के माता-पिता, भाई बंधु एवं सभी परिवारी जन एवं इष्टमित्रों एवं समस्त जीवों से क्षमायाचना करते हैं तथा सभी को क्षमा प्रदान करते हैं। इसके पश्चात ही दीक्षा निधि को प्रारंभ होती है। इसके बाद आचार्य गुरुदेव गंधोदक, केसर और कपूर मिश्रित उबटन लगाकर जैसे भगवान की प्रतिष्ठा की जाती है कि उस अनुसार केशलोच विधि संपन्न कर मस्तक पर श्री कार तथा अंकलेखन कर वस्त्र विमोचन का आदेश देते हैं। प्रत्येक साधक को दो, तीन और चार माह में उपवास के साथ अपने हाथों से कैशलोच करना अनिवार्य होता है।</p>
<p><strong>फरवरी 1998 में 9 मुनि दीक्षा प्रदान की थी</strong></p>
<p>धर्मसभा में मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने सकल दिगंबर जैन समाज समिति के सभी पदाधिकारियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आप लोगों न ेजो मुक्तागिरी पहुंचने की व्यवस्थित व्यवस्था की। उससे कई लोग प्रत्यक्ष दर्शन का लाभ उठा पाए। उन्होंने कहा कि गुरुवार का दिन बहुत शुभ था। फाल्गुन माह दूज तिथि थी। ऐसे शुभ संयोग के साथ मुक्तागिरी में हमारे संघ नायक आचार्य श्री समयसागरजी महाराज ने आचार्य बनने के बाद जिस प्रकार से 22 निर्ग्रंथ मुनि महाराज को दीक्षा देकर आचार्य श्री गुरुदेव विद्यासागरजी की वंश बेल को आगे बढ़ाया है। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है। उससे आज समूचे जैन समाज गौरान्वित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी स्थान से आचार्य गुरुदेव ने फरवरी 1998 में 9 मुनि दीक्षा प्रदान की थी और पुनः 28 साल बाद यह इतिहास दोहराया गया। यह पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद का ही प्रतिफल है।</p>
<p><strong>वीतराग मुद्रा को जिसने भी देखा अभिभूत हो गया</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि जैसे ही सभी 22 साधकों ने एक साथ अपने अपने वस्त्रों को उतारा तो ऐसा लगा कि जैसे कालचक्र रुक गया है। सभी साधक समयसार की अनुभूति करते हुए सिद्धत्व के भावों की अनूभूति कर रहे थे। उनकी खड़गासन निर्ग्रंथ वीतराग मुद्रा को जिसने भी देखा वह उस दृश्य को देखता ही रह गया। अपार जनसमूह के साथ गगनभेदी नारे गुंजायमान हो रहे थे। आचार्य गुरुदेव ने आगे दीक्षा विधि की क्रियाएं संपन्न कराते हुए उनको बैठने का संकेत दिया और उनके हाथों में श्रीफल देकर 28 मूलगुणों को आरोपित करते हुए उसके महत्व को समझाया तथा सभी साधकों को आगे की चर्या समझाते हुए पिच्छी एवं कमंडल मंत्रोच्चारण के साथ प्रदान किए तथा पांच महाव्रत एवं सभी समितियों के पालन करने का निर्देश दिया।</p>
<p><strong>बेहतर आवागमन की व्यवस्था की </strong></p>
<p>मुक्तागिरी तीर्थ पर बड़ी संख्या में चार पहिया वाहन एवं सैकड़ों बसों का प्रबंध के लिए निश्चित करके मुक्तागिरी तीर्थ क्षेत्र कमेटी धन्यवाद की पात्र है। दोनों पांडाल ठसाठस भरे हुए थे एवं हजारों की संख्या में लोग पांडाल के बाहर धूप में खड़े हुए थे। 40 से 50 हजार की उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज, आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के रूप में आज भी विद्यमान हैं। लाखों की संख्या में जिनवाणी एवं पारस चैनल के माध्यम से देश तथा विदेश के विभिन्न हिस्सों से इस अदभुत दृश्य को देखकर अभिभूत हुए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_the_path_to_balance_your_results/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सामाजिक संस्थाओं ने डॉ विरधीचंद्र जैन को किया उपाधियों से अलंकृत : जैन समाज प्रथम नागरिक की उपाधि से हुए सम्मानित  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/dr_virdhichandra_jain_was_honored_with_titles_by_social_organizations/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/dr_virdhichandra_jain_was_honored_with_titles_by_social_organizations/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Feb 2026 13:50:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Chhatisi Vidhan]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Virdhichandra Jain]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य छत्तीसी विधान]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ विरधीचंद्र जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=100226</guid>

					<description><![CDATA[धर्म,धर्मायतनों साधु संतों की सेवा में सदैव अग्रिम पंक्ति में कार्य करने और अपने द्वारा सहृदय भाव से हर किसी की मदद एवं मुक्तहस्त दान देने में प्रसिद्ध कस्बा मड़ावरा के जाने माने चिकित्सक डॉ. विरधी चंद्र जैन को एक वृहद समारोह के दौरान सकल दिगम्बर जैन समाज एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा उपाधियां और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धर्म,धर्मायतनों साधु संतों की सेवा में सदैव अग्रिम पंक्ति में कार्य करने और अपने द्वारा सहृदय भाव से हर किसी की मदद एवं मुक्तहस्त दान देने में प्रसिद्ध कस्बा मड़ावरा के जाने माने चिकित्सक डॉ. विरधी चंद्र जैन को एक वृहद समारोह के दौरान सकल दिगम्बर जैन समाज एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा उपाधियां और प्रशस्तियां देकर सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">मडावरा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मड़ावरा(ललितपुर)।</strong> धर्म, धर्मायतनों, साधु संतों की सेवा में सदैव अग्रिम पंक्ति में कार्य करने और अपने द्वारा सहृदय भाव से हर किसी की मदद एवं मुक्तहस्त दान देने में प्रसिद्ध कस्बा मड़ावरा के जाने माने चिकित्सक डॉ. विरधी चंद्र जैन को एक वृहद समारोह के दौरान सकल दिगम्बर जैन समाज एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा उपाधियां और प्रशस्तियां देकर सम्मानित किया गया। आचार्य विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस के उपलक्ष्य में कस्बे के महावीर विद्याविहार में कार्यक्रम के दौरान कस्बा क्षेत्र सहित जनपद में दानवीर के रूप में प्रसिद्ध डॉ. विरधीचंद्र, लक्ष्मीदेवी जैन की 50 वीं वैवाहिक वर्षगांठ को सर्व समाज एवं परिवार जनों द्वारा बड़े हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। दो दिवसीय धार्मिक आयोजन के दौरान सकल दिगम्बर जैन समाज द्वारा समाधिस्थ् आचार्य विद्यासागर के व्यक्तितव और उनके द्वारा सर्व समाज हित में किए गए कार्यों को याद किया गया। श्रद्धालुओं द्वारा आचार्य श्रेष्ठ के चरण चिन्हों पूजन भक्ति कर सदा उनके आशीर्वाद की कामना कर आचार्य छत्तीसी विधान किया। जिसमें महिला पुरुष श्रद्धालुओं ने इंद्र-इंद्राणी बन पुण्य का संचय किया।</p>
<p><strong>सामाजिक संस्थाओं ने दी उपाधियां </strong></p>
<p>दानवीर भामाशाह डॉ विरधीचंद लक्ष्मीदेवी, डॉ. विकास जैन, डॉ. विशाल जैन सपरिवार को सकल दिगम्बर जैन समाज मड़ावरा ने सम्मानित करते हुए समाज के ‘प्रथम नागरिक’ की उपाधि से अलंकृत किया गया तो वहीं नगर की सामाजिक संस्थाओं में दयोदय पशु संरक्षण केंद्र,गौशाला परिवार द्वारा गौ आश्रय दाता आदर्श परिवार की उपाधि से नवनिर्माणधीन पंचायती पाषाण मंदिर समिति ने ‘धर्म सेवा शिरोमणि’ श्री वर्णी बल विद्यामन्दिर समिति ने ‘विद्या सेवा शिरोमणि’ की उपाधि से, श्री विद्यासागर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय समिति ने ‘समर्पण श्री’ की उपाधि से तो वहीं अतिशय क्षेत्र गिरार जी कमेटी ने ‘चरित्र शिरोमणि’ की उपाधि से नवाजा।</p>
<p><strong>उनकी भागीदारी कार्यक्रम की सफलता की गारंटी</strong></p>
<p>सकल दिगम्बर जैन समाज मड़ावरा ने डॉ. विरधीचंद सपरिवार की प्रशंसा करते हुए कहा कि कस्बा मड़ावरा सहित क्षेत्रीय समाज के धर्म कार्यों में ऐसा कभी नहीं हुआ कि डॉ. विरधी चंद ने मुक्त हस्त से सहयोग न किया गया। उनका सरल सौम्य व्यक्तित्व सभी को अपना बना लेता है। किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में उनकी भागीदारी कार्यक्रम की सफलता की गारंटी बन जाती है। सामाजिक संस्थाओं एवं अतिथियों का पगड़ी माला पहनाकर सम्मान किया गया एवं संपूर्ण सकल जैन समाज एवं क्षेत्रीय समाज का वात्सल्य भोज चंद्रकुमार जैन, डॉ विरधी चंद्र, हंसराज जैन, डॉ.विकास जैन, डॉ. विशाल जैन, मुकेश मामा परिवार के सौजन्य से किया गया। इस दौरान सकल दिगम्बर जैन समाज मड़ावरा के डॉ. राकेश जैन, अभिनंदन जैन, राजेश जैन, सुरेंद्र जैन, नीलेश जैन, डीके जैन, राजेन्द्र जैन, प्रियंक जैन, नितिन जैन ,शैलेन्द्र जैन, प्रकाश जैन, प्रदीप जैन, अभिषेक जैन, रज्जु, कल्लू, सुधीर जैन सहित क्षेत्रीय समाजजन उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/dr_virdhichandra_jain_was_honored_with_titles_by_social_organizations/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य विद्यासागर एक तपस्वी की स्मृति और राष्ट्र की आत्मा : भारत केवल एक भूखंड नहीं, एक भाव है </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_thememory_of_an_ascetic_and_the_soul_of_the_nation/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_thememory_of_an_ascetic_and_the_soul_of_the_nation/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Feb 2026 12:37:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Pathfinder]]></category>
		<category><![CDATA[Shramdaan]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Soul of the Nation]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पथ प्रदर्शक]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्र की आत्मा]]></category>
		<category><![CDATA[श्रमदान]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=100019</guid>

					<description><![CDATA[मृत्यु मनुष्य को एक बार मारती है, परन्तु महापुरुषों के जाने का समाचार हमें बार-बार मारता है। जब किसी साधारण व्यक्ति का देहावसान होता है, तो घर की चौखट सूनी होती है; पर जब कोई संत, कोई तपस्वी, कोई युगपुरुष विदा लेता है, तो सम्पूर्ण समाज की आत्मा सूनी हो जाती है। जयेन्द्र जैन&#8217;निप्पू चन्देरी&#8217; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मृत्यु मनुष्य को एक बार मारती है, परन्तु महापुरुषों के जाने का समाचार हमें बार-बार मारता है। जब किसी साधारण व्यक्ति का देहावसान होता है, तो घर की चौखट सूनी होती है; पर जब कोई संत, कोई तपस्वी, कोई युगपुरुष विदा लेता है, तो सम्पूर्ण समाज की आत्मा सूनी हो जाती है। <span style="color: #ff0000">जयेन्द्र जैन&#8217;निप्पू चन्देरी&#8217; का पढ़िए यह आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>चंदेरी।</strong> मृत्यु मनुष्य को एक बार मारती है, परन्तु महापुरुषों के जाने का समाचार हमें बार-बार मारता है। जब किसी साधारण व्यक्ति का देहावसान होता है, तो घर की चौखट सूनी होती है; पर जब कोई संत, कोई तपस्वी, कोई युगपुरुष विदा लेता है, तो सम्पूर्ण समाज की आत्मा सूनी हो जाती है। आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महाराज के दूसरे समाधि दिवस पर यह शून्य फिर से बोल उठता है—वह शून्य, जो शब्दों से नहीं, संवेदना से भरा है।</p>
<p>आचार्य श्री केवल एक मुनि नहीं थे; वे युग की चेतना थे। उनके चरण जहाँ पड़े, वहाँ केवल धर्म का दीपक नहीं जला, बल्कि राष्ट्रीयता का प्रदीप भी प्रज्वलित हुआ। उन्होंने धर्म को मठों की दीवारों में बंद नहीं किया; उसे गाँव की चौपाल तक पहुँचाया। गौशाला की सेवा हो, चरखे की महिमा हो, श्रमदान का आह्वान हो, या स्वदेशी का उद्घोष—उनकी वाणी में अध्यात्म और राष्ट्र एक-दूसरे के पूरक बन जाते थे।</p>
<p>वे कहा करते थे—“अंग्रेज़ी नहीं, हिंदी बोलो; इंडिया नहीं, भारत बोलो।” यह केवल भाषा का आग्रह नहीं था, यह आत्मसम्मान का मंत्र था। उन्होंने हमें याद दिलाया कि जो राष्ट्र अपनी भाषा से लज्जित होता है, वह अपनी आत्मा से भी दूर हो जाता है। भारत केवल एक भूखंड नहीं, एक भाव है, एक संस्कृति है, एक सनातन प्रवाह है।</p>
<p>उनका जीवन तप का पर्याय था। कठोर व्रत, नंगे पाँव विहार, अल्पाहार और अपार अध्ययन—इन सबके बीच उन्होंने साहित्य की ऐसी धारा प्रवाहित की, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए पथ प्रदर्शक बन गई। वे अध्यात्म और ज्ञान के ऐसे पुंज थे, जिनकी आभा में अनेक युवाओं ने जीवन का लक्ष्य पाया।</p>
<p>गौशालाओं के प्रति उनका स्नेह केवल धार्मिक भावना नहीं था; वह ग्राम्य जीवन की रक्षा का संकल्प था। चरखे की बात उन्होंने इसलिए की कि आत्मनिर्भरता केवल अर्थनीति का विषय नहीं, आत्मगौरव का प्रश्न है। श्रमदान का आह्वान उन्होंने इसलिए किया कि समाज सेवा बिना श्रम के केवल भाषण बनकर रह जाती है।</p>
<p>आज जब हम उनके दूसरे समाधि दिवस पर उन्हें स्मरण करते हैं, तो यह केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, आत्मपरीक्षण का क्षण भी है। क्या हमने उनके बताए मार्ग पर चलने का साहस किया? क्या हमने स्वदेशी को केवल नारे तक सीमित रखा, या उसे जीवन का अंग बनाया? क्या हमने हिंदी और भारतीय भाषाओं को सम्मान दिया, या सुविधा के आगे झुका दिया?</p>
<p>आचार्य श्री का जीवन हमें सिखाता है कि अध्यात्म पलायन नहीं, परिवर्तन का साधन है। तप केवल आत्मशुद्धि नहीं, समाजशुद्धि का माध्यम भी है। उन्होंने अपने संयम से यह सिद्ध किया कि त्याग में ही सच्ची शक्ति है।</p>
<p>उनकी मृत्यु का समाचार हमें इसलिए मारता है कि वह हमारे भीतर के आलस्य, हमारी जड़ता, और हमारी आत्मविस्मृति को उजागर कर देता है। परंतु यदि हम उनकी स्मृति को संकल्प में बदल दें, तो वही समाचार हमें जीवन भी दे सकता है।</p>
<p>आज आवश्यकता है कि उनके विचारों को केवल पुस्तकों में न रखा जाए, बल्कि विद्यालयों, गौशालाओं, ग्राम सभाओं और युवा मंचों तक पहुँचाया जाए। राष्ट्र और धर्म के समन्वय का जो आदर्श उन्होंने प्रस्तुत किया, वही भारत की सच्ची पहचान है।</p>
<p>दूसरे समाधि दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।</p>
<p>वे शरीर से दूर हुए हैं, परंतु विचारों से आज भी हमारे बीच हैं—दीपक की लौ की तरह, जो अंधकार में भी दिशा देती है।</p>
<p>आइए, उनके चरणों में श्रद्धा अर्पित कर यह प्रण लें कि भारत को भारत ही कहेंगे, स्वदेशी को अपनाएँगे, श्रम को पूजा मानेंगे और अध्यात्म को जीवन का आधार बनाएँगे। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_vidyasagar_thememory_of_an_ascetic_and_the_soul_of_the_nation/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्य भगवंतों के अवतरण पर पूजन किया: गुरु भक्तों ने आरती और आराधना कर गुरुओं का स्मरण किया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/worshiped_on_the_arrival_of_acharya_bhagwans/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/worshiped_on_the_arrival_of_acharya_bhagwans/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 12:31:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Sunil Sagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Avtaran Day]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Ganini Aryaka Gyan Mati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Navacharya Samay Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Vijaymati Women's Federation]]></category>
		<category><![CDATA[अवतरण दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुनील सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[गणिनी आर्यिका ज्ञान मति माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[नवाचार्य समय सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[विजयमति वुमेन्स फ़ेडरेशन]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=92019</guid>

					<description><![CDATA[दिगंबर जैन मंदिर में विजयमति वुमेन्स फ़ेडरेशन के निर्देशन में आचार्य सुनील सागर जी ,आचार्य विद्यासागर जी,नवाचार्य समय सागर जी,गणिनी आर्यिका ज्ञान मति माताजी के अवतरण दिवस पर पूजन किया गया और आरती कर भक्ति और आरधना की गई। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। दिगंबर जैन मंदिर में विजयमति वुमेन्स फ़ेडरेशन के निर्देशन में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगंबर जैन मंदिर में विजयमति वुमेन्स फ़ेडरेशन के निर्देशन में आचार्य सुनील सागर जी ,आचार्य विद्यासागर जी,नवाचार्य समय सागर जी,गणिनी आर्यिका ज्ञान मति माताजी के अवतरण दिवस पर पूजन किया गया और आरती कर भक्ति और आरधना की गई। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन मंदिर में विजयमति वुमेन्स फ़ेडरेशन के निर्देशन में आचार्य सुनील सागर जी ,आचार्य विद्यासागर जी,नवाचार्य समय सागर जी,गणिनी आर्यिका ज्ञान मति माताजी के अवतरण दिवस पर पूजन किया गया और आरती कर भक्ति और आरधना की गई।</p>
<p>इस अवसर गुरु भक्तों ने आचार्य भगवंतों का स्मरण कर उनके बताए सिंद्धांतों पर चलने का संकल्प लिया। अध्यक्ष राजकुमार डेचिया ने बताया कि इस दौरान जलकांता शाह, इंदु कोठारी,जीवनलता, शकुंतला ,चंदा ,लता डैचिया छाया, प्रियंका ,पिंकी ,पिनल ,शीतल ,रंजना भूता ,छाया, स्मिता ,कोशांबी डैचिया उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/worshiped_on_the_arrival_of_acharya_bhagwans/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विद्याप्रमाण गुरुकुलम् के विस्तार पर भोपाल में राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न : मुनि प्रमाण सागर बोले– बड़े उद्देश्य के लिए आगे बढ़ रही है ‘विद्याप्रमाण गुरुकुलम्’ </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/vidyapraman_gurukul_expansion_workshop_in_bhopal/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/vidyapraman_gurukul_expansion_workshop_in_bhopal/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Sep 2025 13:47:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Anubhav Saraf]]></category>
		<category><![CDATA[Anupam Pandit]]></category>
		<category><![CDATA[Avinash Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Bhopal Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Deepak Jain USA]]></category>
		<category><![CDATA[Gunyatan]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Child Development]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Community News]]></category>
		<category><![CDATA[jain culture]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharma]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Education]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Education Project]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Event]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Gurukul]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Gurukul Expansion]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Infinity]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Leadership]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Sanskar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Social Service]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Spiritual Workshop]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Students]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Trustees]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Praman Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[NC Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Sanskar Upvan]]></category>
		<category><![CDATA[shrifal news]]></category>
		<category><![CDATA[Shripal News]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual News]]></category>
		<category><![CDATA[Vidyapraman Expansion जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Vidyapraman Gurukul]]></category>
		<category><![CDATA[Vidyavani]]></category>
		<category><![CDATA[Vineet Godha]]></category>
		<category><![CDATA[Vinod Kala]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर प्रेरणा]]></category>
		<category><![CDATA[आशीर्वाद संदेश]]></category>
		<category><![CDATA[गुणायतन]]></category>
		<category><![CDATA[जैन अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन आयोजन भोपाल]]></category>
		<category><![CDATA[जैन इन्फिनिटी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन गुरुकुल]]></category>
		<category><![CDATA[जैन ट्रस्ट]]></category>
		<category><![CDATA[जैन दर्शन]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन नेतृत्व]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन विद्यार्थी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[जैन शिक्षा प्रकल्प]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज आयोजन]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साधना]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साधु-संत]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ दीपक जैन]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक आयोजन]]></category>
		<category><![CDATA[बाल संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[भोपाल जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि प्रमाण सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिभक्त]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय कार्यशाला]]></category>
		<category><![CDATA[विद्या गुरुकुल]]></category>
		<category><![CDATA[विद्याप्रमाण गुरुकुलम्]]></category>
		<category><![CDATA[वैराग्य मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[श्रमण संस्कृति]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[संयम मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[संस्कार उपवन भोपाल]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=91014</guid>

					<description><![CDATA[भोपाल के संस्कार उपवन में जैन इन्फिनिटी और गुणायतन के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न हुई। इसमें भारत सहित विदेशों से शिक्षाविद और मुनिभक्त शामिल हुए। मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि बड़े उद्देश्य को पाने के लिए हमें निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… भोपाल (संस्कार उपवन)। विगत दो दिनों [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भोपाल के संस्कार उपवन में जैन इन्फिनिटी और गुणायतन के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला सम्पन्न हुई। इसमें भारत सहित विदेशों से शिक्षाविद और मुनिभक्त शामिल हुए। मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि बड़े उद्देश्य को पाने के लिए हमें निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (संस्कार उपवन)</strong>। विगत दो दिनों से राजधानी भोपाल के संस्कार उपवन में ‘विद्याप्रमाण गुरुकुलम्’ के विस्तार हेतु जैन इन्फिनिटी और गुणायतन द्वारा राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें देशभर और विदेशों से शिक्षाविद, गुणायतन पदाधिकारी और मुनिभक्तों ने भाग लिया।</p>
<p>संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज के आशीर्वाद से मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने बताया कि विद्याप्रमाण गुरुकुलम् एक बड़े उद्देश्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा– “जब हम किसी बड़े लक्ष्य के लिए चलना शुरू करते हैं तो राह की कठिनाइयाँ महत्वहीन हो जाती हैं, केवल उद्देश्य ही हमारे सामने रहता है।”</p>
<p>गुरुकुलम् की स्थापना वर्ष 2025 में श्री विद्यासागर प्रवधकीय संस्थान, भोपाल में गुणायतन के सहयोग से की गई थी। लगभग 1600 बच्चों में से 180 का चयन कर उन्हें आवास, भोजन और संस्कार की व्यवस्था गुरुकुल में की गई है। शिक्षा की जिम्मेदारी ‘सैज इंटरनेशनल’ द्वारा संभाली जा रही है।</p>
<p>इस कार्यशाला में मुनि श्री प्रमाण सागर ने कहा कि “यह केवल मंगलाचरण है, अभी हमें और व्यापक स्तर पर नीतियों का निर्धारण और क्रियान्वयन करना होगा।” उन्होंने शिकागो से आए डॉ. दीपक जैन और उनकी टीम को विशेष रूप से सराहा और आगे की दिशा में मार्गदर्शन देने का आग्रह किया</p>
<p><strong>गुरुजी के सपनों को साकार कर देश का आइकॉन बनना</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि सभी अतिथियों ने बच्चों की पढ़ाई, आवास और भोजन व्यवस्था का निरीक्षण किया। बच्चों ने एक स्वर में कहा– “हमें गुरुजी के सपनों को साकार कर देश का आइकॉन बनना है।” यह सुनकर सभी अतिथिगण अत्यंत प्रसन्न हुए।कार्यक्रम में गुणायतन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद काला, अध्यक्ष विनीत गोधा, महामंत्री अनुभव सराफ, संस्कार उपवन के अनुपम पंडित, कार्याध्यक्ष एन.सी. जैन सहित देशभर से आए संरक्षक, ट्रस्टी और समाजजन उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का आभार विद्याप्रमाण गुरुकुलम् की ओर से रचना पारिख ने व्यक्त किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/vidyapraman_gurukul_expansion_workshop_in_bhopal/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जैन समाज के दबंग वकीलों ने आरोपी की जमानत अर्जी करवाई खारिज : विद्यासागर जी के अपमान मामले में कोर्ट ने नहीं दी राहत </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/jain_samaj_advocates_got_bail_plea_rejected/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/jain_samaj_advocates_got_bail_plea_rejected/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 16:14:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Anil Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Apoorv Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Arvind Ajmera]]></category>
		<category><![CDATA[Arvind Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Bail Plea]]></category>
		<category><![CDATA[Bail Rejected]]></category>
		<category><![CDATA[Court Decision जैन न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[Court News]]></category>
		<category><![CDATA[Criminal Case]]></category>
		<category><![CDATA[Dharma Protection]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Indian Judiciary]]></category>
		<category><![CDATA[Indore Court]]></category>
		<category><![CDATA[indore news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Advocates]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj indore]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj protest]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society Stand]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Unity]]></category>
		<category><![CDATA[legal action]]></category>
		<category><![CDATA[Legal Battle]]></category>
		<category><![CDATA[Rajesh Jain Daddu]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Insult Case]]></category>
		<category><![CDATA[Religious Sentiment]]></category>
		<category><![CDATA[shrifal news]]></category>
		<category><![CDATA[Social Media Post Case]]></category>
		<category><![CDATA[Strong Lawyer]]></category>
		<category><![CDATA[TilaK Nagar Indore]]></category>
		<category><![CDATA[Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Vidyasagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[अदालत की खबर]]></category>
		<category><![CDATA[अपराधी को सज़ा]]></category>
		<category><![CDATA[अरविंद अजमेरा मामला]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आरोपी अरविंद अजमेरा]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[एडवोकेट अनिल जैन]]></category>
		<category><![CDATA[एडवोकेट अपूर्व जैन]]></category>
		<category><![CDATA[एडवोकेट अरविंद जैन]]></category>
		<category><![CDATA[कानूनी कार्रवाई]]></category>
		<category><![CDATA[कोर्ट का फैसला]]></category>
		<category><![CDATA[कोर्ट समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जमानत अर्जी खारिज]]></category>
		<category><![CDATA[जमानत खारिज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म गौरव]]></category>
		<category><![CDATA[जैन वकील]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज एकजुटता]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज की जीत]]></category>
		<category><![CDATA[तिलक नगर इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म अपमान मामला]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म की रक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[धार्मिक अपमान प्रकरण]]></category>
		<category><![CDATA[राजेश जैन दद्दू]]></category>
		<category><![CDATA[विधिक लड़ाई]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समाज की प्रतिक्रिया]]></category>
		<category><![CDATA[सोशल मीडिया विवाद]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=90865</guid>

					<description><![CDATA[इंदौर में आचार्य विद्यासागर जी के अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट प्रकरण में आरोपी अरविंद अजमेरा की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी। जैन समाज के दबंग वकीलों ने समाज की भावनाओं का पक्ष रखते हुए आरोपी की जमानत को रोकने में सफलता पाई। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट… इंदौर। श्रमण संस्कृति के महामहिम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>इंदौर में आचार्य विद्यासागर जी के अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट प्रकरण में आरोपी अरविंद अजमेरा की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी। जैन समाज के दबंग वकीलों ने समाज की भावनाओं का पक्ष रखते हुए आरोपी की जमानत को रोकने में सफलता पाई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> श्रमण संस्कृति के महामहिम आचार्य भगवान विद्यासागर जी महाराज के प्रति अपमानजनक भाषा और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले आरोपी तिलक नगर निवासी अरविंद अजमेरा जैन के खिलाफ जैन समाज ने सशक्त कानूनी कदम उठाया। पहले ही इस मामले में आरोपी को जेल की सज़ा सुनाई जा चुकी थी।</p>
<p>आज आरोपी की ओर से उसके वकील और परिजनों ने कोर्ट में जमानत अर्जी प्रस्तुत की। जानकारी मिलते ही इंदौर दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ वकील एडवोकेट अरविंद जैन, अपूर्व जैन और अनिल जैन कोर्ट पहुंचे। इन वकीलों ने अदालत में जैन समाज की भावनाओं और धर्म की गरिमा का पक्ष रखते हुए प्रभावशाली तर्क प्रस्तुत किए। अदालत ने सुनवाई के बाद आरोपी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने कहा कि यह निर्णय पूरे जैन समाज की एकजुटता और धर्म की रक्षा का प्रतीक है। इस प्रकरण में जैन समाज ने दिखा दिया कि जब धर्म पर चोट होती है तो पूरा समाज एक होकर खड़ा होता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/jain_samaj_advocates_got_bail_plea_rejected/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
