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	<title>आचार्य वर्धमान सागरजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>आचार्य वर्धमान सागरजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ जी का गर्भ कल्याणक मनाया: गुरु भक्त, श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धा-भक्ति और आस्था से आराधना की </title>
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		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में मंगलवार से अष्टाह्निका पर्व की शुरूआत हुई। स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ जी का गर्भ कल्याणक मनाया। इस अवसर पर तृतीय पट्टाचार्य धर्मसागर जी महाराज का 58वां आचार्य पदारोहण भी मनाया गया। धामनोद से पढ़िए, यह दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट&#8230; धामनोद। नगर में मंगलवार से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में मंगलवार से अष्टाह्निका पर्व की शुरूआत हुई। स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ जी का गर्भ कल्याणक मनाया। इस अवसर पर तृतीय पट्टाचार्य धर्मसागर जी महाराज का 58वां आचार्य पदारोहण भी मनाया गया। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, यह दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> नगर में मंगलवार से अष्टाह्निका पर्व की शुरूआत हुई। स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ जी का गर्भ कल्याणक मनाया। इस अवसर पर तृतीय पट्टाचार्य धर्मसागर जी महाराज का 58वां आचार्य पदारोहण भी मनाया गया। साथ ही उनके शिष्य आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का 58वां दीक्षा दिवस पर नगर में गुरु भक्त, श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धा-भक्ति और आस्था से आराधना की। इस अवसर पर सभी समाजजनों ने गुरु चरणों में श्रीफल और अर्घ्य समर्पित कर वंदना की। प्राप्त जानकारी के अनुसार जैन मंदिर में अष्टानिका पर्व की शुरुआत और तीसरे तीर्थंकर भगवान श्रावस्ती वाले श्री संभवनाथ जी का गर्भ कल्याणक भक्तिपूर्ण वातावरण में मनाया गया। मंगलवार को तृतीय’पट्टाचार्य श्री धर्मसागरजी का 58 आचार्य पदारोहण पर भी गुरु पूजन किया गया। आचार्य वर्धमान सागरजी के 58दीक्षा दिवस मंदिर में श्रावक-श्राविकाओं ने गुरु चरणों में श्रीफल अर्पित किए और अर्घ्य चढ़ाए।</p>
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		<title>मुनि श्री चारित्र सागरजी का 32 वां दीक्षा दिवस मनाया : अभिषेक,पूजन के बाद हुई विनयांजलि </title>
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		<pubDate>Tue, 25 Nov 2025 13:00:34 +0000</pubDate>
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<p><strong>दिगंबर जैन धर्म के सर्वाेच्च आचार्य वर्धमान सागरजी के शिष्य मुनिश्री चारित्र सागरजी का 32 वां दीक्षा दिवस हर्षाेल्लास से मनाया गया। आदिनाथ चैत्यालय स्कीम नंबर 71 में सुबह 6.30 बजे मंगलाष्टक के बाद जिनेंद्र अभिषेक हुआ। भक्तों ने वृहद शांतिधारा की। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> दिगंबर जैन धर्म के सर्वाेच्च आचार्य वर्धमान सागरजी के शिष्य मुनिश्री चारित्र सागरजी का 32 वां दीक्षा दिवस हर्षाेल्लास से मनाया गया। अजय पंचोलिया ने बताया कि दीक्षा दिवस के उपलक्ष्य में आदिनाथ चैत्यालय स्कीम नंबर 71 में सुबह 6.30 बजे मंगलाष्टक के बाद जिनेंद्र अभिषेक हुआ। भक्तों ने वृहद शांतिधारा की। नित्य नियम पूजन के बाद पूर्वाचार्यों को अर्घ्य समर्पित किए गए। महेंद्र जैन, निखिल जैन ने आचार्य वर्धमान सागर जी बाद मुनिश्री चारित्र सागरजी को विशेष द्रव्यों से अर्घ्य समर्पित किए। विशाल जैन, समीक्षा जैन एवं भक्तों ने मंगल आरती की। भक्तों ने मुनि चारित्र सागर जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुनि चारित्र सागरजी को धर्म के संस्कार विरासत में ही मिले थे। मुनि श्री बचपन से ही साधु संतों की सेवा में अग्रणी थे। छोटी उम्र से ही प्रतिदिन अभिषेक, पूजन, विधान, भक्ति, प्रवचन और ध्यान करना उनकी दिनचर्या थी।</p>
<p>गुरुदेव ने अपनी जन्म नगरी सनावद में रहकर समाज सेवा और उत्थान में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन किया था। उन्हीं की प्रेरणा से नगर के अनेकों युवाओं ने संयम मार्ग को अंगीकार करते हुए आत्म कल्याण किया है। कर्नाटक प्रांत के श्रवण बेलगोला में आचार्य श्री वर्धमान सागरजी से सीधे मुनि दीक्षा प्राप्त कर जैन धर्म की अभूतपूर्व प्रभावना की। उनके 32 वें दीक्षा दिवस पर पूरा देश उनके चरणों में वंदन, नमन करते हुए नतमस्तक है।</p>
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		<title>मुनि भक्त समर कंठाली का मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने अभिनंदन किया : आचार्य वर्धमान सागरजी ससंघ के सान्निध्य में पंचकल्याणक में सौधर्म इंद्र बने थे  </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 10:36:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पीपल्दा (सवाई माधोपुर) में पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज संघ के सानिध्य में हुआ था। इस महोत्सव में युवा समाज सेवी समर कंठाली सौधर्म इंद्र बने थे। उनके इस धार्मिक कार्य में शामिल होने पर मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने स्वागत अभिनंदन किया। धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230; धामनोद। पीपल्दा (सवाई माधोपुर) में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पीपल्दा (सवाई माधोपुर) में पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज संघ के सानिध्य में हुआ था। इस महोत्सव में युवा समाज सेवी समर कंठाली सौधर्म इंद्र बने थे। उनके इस धार्मिक कार्य में शामिल होने पर मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने स्वागत अभिनंदन किया। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> पीपल्दा (सवाई माधोपुर) में पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज संघ के सानिध्य में हुआ था। इस महोत्सव में युवा समाज सेवी समर कंठाली सौधर्म इंद्र बने थे। उनके इस धार्मिक कार्य में शामिल होने पर मां अन्नपूर्णा रोगी सेवा संस्थान ने स्वागत अभिनंदन किया। कंठाली को तिलक लगाकर मोती की माला, पुष्पहार, दुपट्टा और पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया। साथ ही सम्मान पत्र, श्रीफल व और शॉल भेंट की गई। इंजीनियर समर कंठाली विदेश में जॉब कर रहे थे लेकिन, उनका मोह विदेशी नौकरी से भंग हुआ और भारत लौट आए। प्रदेश की उद्योग नगरी इंदौर आए। यहीं उन्होंने अपना इनवेस्मेंट कंपनी खोलकर बिजनेस चालू किया। साथ ही खेती करना आरंभ किया। वे नई तकनीकी से खेती करवा रहे हैं और धीरे-धीरे धर्म की ओर अग्रसर हुए। उनकी माताजी ने आर्यिका दीक्षा ली। संघ में सेवाएं दीं। चातुर्मास में संत सेवा के लिए आहार चौका लगाया। अब पूर्णकालीन आहार चौका लगाने का संकल्प लेकर कार्य प्रारंभ किया। पुण्य जगा सौधर्म इंद्र बनने का आचार्य गुरु का आशीर्वाद मिला।</p>
<p>यह सभी गुरदेव के आशीर्वाद संत सेवा का फल है। इस दौरान ट्रस्ट सदस्य अजय जैन, महाप्रबंधक शशि श्रीवास्तव, मैनेजर कविता तोमर, भोजन प्रभारी प्रभुलाल स्वामी भी उपस्थित थे। सम्मान पत्र का वाचन दीपक प्रधान ने किया। इस अवसर उन्हें श्रावक श्रेष्ठी से अलंकृत किया गया। जैन मंदिर पहुंचकर अध्यक्ष महेश जैन, सुशीला जैन, सुरक्षा अजय जैन, राकेश जैन, नीलेश जैन, लोकेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष धीरेन्द्र जैन, प्रिया नीलेश जैन, महेंद्र टेंट मामी आदि समाजजनों की उपस्थिति में सम्मान किया गया।</p>
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		<title>आचार्य वर्धमान सागरजी ने कहा-भगवान और गुरु के दर्शन विनय पूर्वक करें : 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ  </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Oct 2025 13:14:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> नगर के आदर्श नगर के 1008 श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। केवलचंद कल्ली वाले, ज्ञान भरनी वाले, पारसमल बगड़ी वाले ने बताया कि शनिवार को जिनालय में जल, शर्करा, नारियल पानी, विभिन्न फलों के रस, धी, दूध, दही, केशर सर्वऔषधि, लाल सफेद चंदन, हल्दी पुष्प मंगल आरती, सुगंधित जल एवं शांतिधारा विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों ने किए। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की संघस्थ शिष्या 70 वर्षीय आर्यिका श्री वत्सलमति जी की संयम समाधि साधना निरंतर एकांतर एक आहार एक उपवास से साथ चल रही है। आहार में भी सीमित मात्र मनुक्का जल, दूध और पानी ही ले रही हैं। दूध के अतिरिक्त अन्य 5 रसों ,सभी अनाज सहित काफी खाद्य सामग्री का त्याग कर दिया हैं।</p>
<p><strong>जब बच्चा संसार में जन्म लेता है तब दुनिया हंसती है</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया और गजराज लोकेश ने बताया कि संत भवन में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने उपस्थित श्रावकों से कहा कि हमें दुनिया में जो कुछ भी प्राप्त होता है। वह हमारे पुण्य कर्मों से होता है। मनुष्य जीवन भी हमें अपने पुण्य कर्मों से ही मिला है। दुनिया में हम जैसा कर्म करेंगे। वैसा ही हमें फल प्राप्त होगा। कहते भी हैं जैसी करनी वैसी भरनी। जब बच्चा संसार में जन्म लेता है तब दुनिया हंसती है और बच्चा रोता है। हमें दुनिया में आने के बाद ऐसे कर्म करने हैं कि जब हम हमारी आयु पूर्ण कर दुनिया से जाएं तो हमारे जाने के दुख में सारी दुनिया रोए। इसके लिए जरूरी है कि हमारे कर्म अच्छे होने चाहिए। हमारे जैसे गुरु होंगे हमें शिक्षा भी वैसी ही मिलेगी। अच्छे गुरु की संगत हमें अच्छे कर्म करवाएगी।</p>
<p><strong>प्रभु सब की प्रार्थना स्वीकार करते हैं </strong></p>
<p>हमारे अच्छे कर्म और पुण्यों के कारण से ही हम लोगों के दिलों में जगह बना सकते हैं। आचार्य श्री ने कहा कि जब भी आप गुरु या भगवान के पास जाएं तो उनके सामने विनम्रता पूर्वक दर्शन करे। हर आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति होती है। बस जरूरत है साधना और तपोबल की। प्रभु के सामने जो भी प्रार्थना करता है। प्रभु सब की प्रार्थना स्वीकार करते हैं लेकिन, जरूरी नहीं जो आप मांग रहे हैं। वह सब आपको प्रभु प्रदान कर दे। जो भी आपको मिलना है वह आपके पुण्य कर्म के आधार पर ही मिलना है। अगर हमें अपने जीवन की दशा सुधारनी है तो हमें दिशा बदलनी पड़ेगी। राग, द्वेष, मोह ,माया और जीवन के कषायों को छोड़कर अपनी दिशा बदलोगे तो आपके जीवन के दशा अपने आप बदल जाएगी। प्रभु के पास जब भी आप जाएं उन से विनती करें प्रार्थना करें कि हे प्रभु जैसे आप हैं मुझे भी वैसा ही बनना है। ऐसा बनने के लिए मुझे पुरुषार्थ करने की शक्ति प्रदान करें।</p>
<p><strong>आचार्यश्री की आहारचर्या हुई </strong></p>
<p>आज आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की आहार चर्या केवलचंद, लोकेश गजराज कलई परिवार टोंक ओर समर, सनत राजेश पंचोलिया इंदौर के चौके में हुई। पारसमल फूलेता परिवार पुण्यार्जक के निवास से जुलूस आकर शाम को श्रीजी ओर आचार्य श्री आरती हुई। शाम को छहढाला की कक्षा में सभी उम्र के समाज जन शामिल होते हैं।</p>
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		<title>शिरोमणि आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज का 75वां अवतरण दिवस बड़े धूमधाम से मनाया : पर्यूषण पर्व पर धामनोद में आयोजित हुआ भावपूर्ण समारोह </title>
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		<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 18:00:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धामनोद में पर्यूषण पर्व के अवसर पर शिरोमणि आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज का 75वां अवतरण दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। समाज के गणमान्य सदस्यों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… धामनोद में जैन समाज द्वारा शिरोमणि आचार्य राष्ट्रीय संत वात्सल्य बारिधि वर्धमान सागरजी महाराज का 75वां अवतरण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धामनोद में पर्यूषण पर्व के अवसर पर शिरोमणि आचार्य वर्धमान सागरजी महाराज का 75वां अवतरण दिवस अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। समाज के गणमान्य सदस्यों ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>धामनोद में जैन समाज द्वारा शिरोमणि आचार्य राष्ट्रीय संत वात्सल्य बारिधि वर्धमान सागरजी महाराज का 75वां अवतरण दिवस पर्यूषण पर्व के अवसर पर बड़े हर्ष और भक्ति भाव से मनाया गया।</p>
<p>कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री की फोटो के अनावरण से हुआ, जिसे समाज के अध्यक्ष महेश जैन, सचिव दीपक प्रधान और समस्त कार्यकारिणी ने पथरिया से पधारे पंडित यश जैन एवं पंडित अंशुल की उपस्थिति में किया।</p>
<p>दीप प्रज्वलन का कार्य मुनि सेवा समिति के सदस्यों ने किया। इसके बाद नमोकार महामंत्र प्लेट का विमोचन समाज के वरिष्ठजनों—पूर्व अध्यक्ष रमेशचंद जैन, राजा भाई जैन, नरेंद्र जैन, राकेश जैन, अशोक प्रधान, संदीप मंडलोई, विजय जैन झंडा, लोकेंद्र जैन, डॉ. प्रकाश कियावत, अजय जैन, सुनील जैन, नीलेश जैन आदि ने संयुक्त रूप से किया।</p>
<p><strong>बच्चों और युवाओं ने सुंदर अर्घावली प्रस्तुत की</strong></p>
<p>अष्टद्रव्य पूजन में समाज की महिलाओं और पुरुषों के छह ग्रुपों ने भाग लेकर संत चरणों में अर्पण किया और भक्ति भाव से आहारचर्या का सहयोग किया। कार्यक्रम के प्रायोजक डॉ. विनय एवं प्रीति प्रधान, सपना विशेष जैन, मुकेश-वंदना जैन और मीना-दीपक प्रधान रहे। इस अवसर पर बच्चों और युवाओं ने सुंदर अर्घावली प्रस्तुत की, जिसका वाचन सोना, राकेश जैन, अर्षुल और आयुष जैन ने किया। सीमा संदीप मंडलोई ने संत सेवा के लिए स्टील की टेबल समाज को दान की। साथ ही धर्म प्रभावना का वितरण भी किया गया।</p>
<p><strong>समाज ने लिया सामूहिक संकल्प </strong></p>
<p>समाज ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि आगामी चातुर्मास में इंदौर के लिए धामनोद समाज की ओर से एक बस ले जाकर आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज के चरणों में निवेदन किया जाएगा। वर्तमान में आचार्य श्री राजस्थान के टोंक नगर में चातुर्मास कर रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन दीपक प्रधान ने किया और आभार ज्ञापन समाज अध्यक्ष महेश जैन ने प्रस्तुत किया। यह आयोजन धामनोद जैन समाज की आस्था, एकता और संत सानिध्य के प्रति गहन श्रद्धा का प्रतीक बना।</p>
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		<title>वर्षा योग के लिए देवपुरा पहुंचे दिगंबर संत: संतों की अगवानी में उमड़ा जैन समाज </title>
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		<pubDate>Mon, 07 Jul 2025 14:31:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए आचार्य वर्धमान सागरजी के शिष्य सुप्रभ सागर महाराज व मुनिश्री वैराग्य सागर महाराज का सोमवार को प्रातः देवपुरा बूंदी में मंगल प्रवेश हुआ। सुबह रजत गृह कॉलोनी में स्थित शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर से मुनिश्री का भव्य जुलूस प्रारंभ हुआ। जो नैनवा रोड, गोपाल सिंह प्लाजा, सर्किट हाउस, कॉलेज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए आचार्य वर्धमान सागरजी के शिष्य सुप्रभ सागर महाराज व मुनिश्री वैराग्य सागर महाराज का सोमवार को प्रातः देवपुरा बूंदी में मंगल प्रवेश हुआ। सुबह रजत गृह कॉलोनी में स्थित शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर से मुनिश्री का भव्य जुलूस प्रारंभ हुआ। जो नैनवा रोड, गोपाल सिंह प्लाजा, सर्किट हाउस, कॉलेज रोड़ होते हुए बघेरवाल छात्रावास पहुंचा। <span style="color: #ff0000">यहां धर्मसभा हुई। बूंदी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बूंदी।</strong> वर्ष 2025 के चातुर्मास के लिए आचार्य वर्धमान सागरजी के शिष्य सुप्रभ सागर महाराज व मुनिश्री वैराग्य सागर महाराज का सोमवार को प्रातः देवपुरा बूंदी में भव्य जुलूस के साथ मंगल प्रवेश हुआ। सुबह रजत गृह कॉलोनी में स्थित शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर से मुनिश्री का भव्य जुलूस प्रारंभ हुआ। जो नैनवा रोड, गोपाल सिंह प्लाजा, सर्किट हाउस, कॉलेज रोड़ होते हुए बघेरवाल छात्रावास पहुंचा। एक किमी की शोभायात्रा में जुलूस के आगे दो घुड़सवार घोड़ी पर बैठकर जैन ध्वज लेकर आगे चल रहे थे। उसके पीछे जैन संस्कार महिला मंडल बड़े-बड़े श्रीफल लेकर गुजराती रंग बिरंगी छत्रियां के साथ संभवनाथ पाठशाला देवपुरा बूंदी के नन्हें-मुन्ने बालक बालिकाएं रंग बिरंगे गुब्बारे के ध्वज लेकर चल रहे थे। इसके साथ देवपुरा पाठशाला महिला मंडल की महिलाएं जैन धर्म के आचार्यों की तख्तियां तथा मुनि वैराग्य सागर महाराज व सुप्रभ सागर महाराज की तख्तियां लेकर चल रही थी। जिन शासन प्रभावना महिला मंडल आसमान में जैन ध्वज लहरा रही थी।</p>
<p><strong> पुण्य कार्य से धर्म की उंचाइयों को छुआ जा सकता है</strong></p>
<p>मुनिश्री की अगवानी में दिगम्बर जैन समाज बून्दी के साथ साथ कोटा व आसपास का जैन समाज भी उमड़ पड़ा। मुनिश्री के स्वागत के लिए जगह-जगह स्वागत द्वार बनाए गए तथा पाद प्रक्षालन व आरती उतारी गई। शोभायात्रा में रजत महिला मंडल का जयघोष, सकल जैन समाज महिला मंडल का नमोस्तु जयघोष आकर्षण का केन्द्र रहा। शोभा यात्रा का संचालन संभवनाथ नवयुवक मंडल देवपुरा के युवा वर्ग कर रहे थे। शोभायात्रा बघेरवाल छात्रावास पर पहुंचते ही धर्मसभा मंे परिवर्तित हो गई। धर्मसभा में मुनि वैराग्य सागर महाराज ने चातुर्मास के महत्व पर कहा कि जिस प्रकार मनुष्य अपने परिश्रम के माध्यम से उंचाइयों को छूता है। उसी प्रकार श्रावक चातुर्मास में अपनी दैनिक चर्या को बदलकर पुण्य कार्य के माध्यम से धर्म की उंचाइयों को छू सकता है।</p>
<p><strong>गुरु के सानिध्य में रहकर मोक्ष मार्ग पा सकते हैं</strong></p>
<p>मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने धर्मसभा में चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चातुर्मास में गुरु भक्ति का श्रावकों को अवसर प्राप्त होता है और उस गुरु भक्ति व धार्मिक कार्यों के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन की दैनिक चर्या में परिवर्तन ला सकता है। मुनिश्री ने कहा कि चातुर्मास में गुरु के सानिध्य में रहकर मोक्ष मार्ग रूपी महल की प्राप्ति कर सकता है। धर्मसभा में भगवान संभवनाथ की तस्वीर पर बघेरवाल प्रांत के केन्द्रीय अध्यक्ष महेंद्र हरसौरा, बूंदी प्रांत के अध्यक्ष महावीर जैन, सकल जैन समाज के अध्यक्ष एडवोकेट संजय जैन, संरक्षक त्रिलोकचंद जैन, ओमप्रकाश बड़जात्या, धर्मचंद कोट्या राजेंद्र सामरिया ने दीप प्रज्वलन किया। पाद प्रक्षालन महेंद्र हरसौरा परिवार ने किया। शास्त्र भेंट देवपुरा महिला मंडल ने किया। मंगलाचरण देवपुरा पाठशाला की नन्हीं-मुन्नी बालिकाओं ने किया। संचालन ओमप्रकाश ठग ने किया।</p>
<p><strong>इस अवसर पर यह रहे मौजूद </strong></p>
<p>इस अवसर पर सकल जैन समाज के कोषाध्यक्ष रामविलास जैन, मंत्री महावीर धनोप्या, खण्डेलवाल सरावगी समाज के पूर्व अध्यक्ष रविन्द्र काला, देवपुरा दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष विनोद कोट्या मंत्री ओमप्रकाश ठग, कोषाध्यक्ष अशोक धानोत्या मुनि सुव्रतनाथ जैन मंदिर मधुबन कॉलोनी के मंत्री नमन जैन, चातुर्मास समिति के अध्यक्ष पदम बरमुण्डा, संयोजक कमल कोटिया, उप संयोजक सुरेश कोटिया महेन्द्र सामरिया, भानू खटोड़, महावीर कोटिया, रितेश धनोप्या, चिराग जैन सहित कई श्रद्धालुओं ने भाग लिया।</p>
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