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	<title>आचार्य पदारोहण &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>आचार्य पदारोहण &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ जी का गर्भ कल्याणक मनाया: गुरु भक्त, श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धा-भक्ति और आस्था से आराधना की </title>
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		<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में मंगलवार से अष्टाह्निका पर्व की शुरूआत हुई। स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ जी का गर्भ कल्याणक मनाया। इस अवसर पर तृतीय पट्टाचार्य धर्मसागर जी महाराज का 58वां आचार्य पदारोहण भी मनाया गया। धामनोद से पढ़िए, यह दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट&#8230; धामनोद। नगर में मंगलवार से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में मंगलवार से अष्टाह्निका पर्व की शुरूआत हुई। स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ जी का गर्भ कल्याणक मनाया। इस अवसर पर तृतीय पट्टाचार्य धर्मसागर जी महाराज का 58वां आचार्य पदारोहण भी मनाया गया। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, यह दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> नगर में मंगलवार से अष्टाह्निका पर्व की शुरूआत हुई। स्थानीय दिगंबर जैन मंदिर में जैन धर्म के तीसरे तीर्थंकर भगवान संभवनाथ जी का गर्भ कल्याणक मनाया। इस अवसर पर तृतीय पट्टाचार्य धर्मसागर जी महाराज का 58वां आचार्य पदारोहण भी मनाया गया। साथ ही उनके शिष्य आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का 58वां दीक्षा दिवस पर नगर में गुरु भक्त, श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धा-भक्ति और आस्था से आराधना की। इस अवसर पर सभी समाजजनों ने गुरु चरणों में श्रीफल और अर्घ्य समर्पित कर वंदना की। प्राप्त जानकारी के अनुसार जैन मंदिर में अष्टानिका पर्व की शुरुआत और तीसरे तीर्थंकर भगवान श्रावस्ती वाले श्री संभवनाथ जी का गर्भ कल्याणक भक्तिपूर्ण वातावरण में मनाया गया। मंगलवार को तृतीय’पट्टाचार्य श्री धर्मसागरजी का 58 आचार्य पदारोहण पर भी गुरु पूजन किया गया। आचार्य वर्धमान सागरजी के 58दीक्षा दिवस मंदिर में श्रावक-श्राविकाओं ने गुरु चरणों में श्रीफल अर्पित किए और अर्घ्य चढ़ाए।</p>
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		<title>आचार्य शांति सागर आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव में उमड़े समाजजन : नए आजीवन नियम व्रत लेने वालों का किया सम्मान </title>
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		<pubDate>Fri, 14 Nov 2025 13:36:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[उस समय समवशरण की रचना का वर्णन आता है जिससे तीर्थंकर भगवान धर्म देशना देते हैं। वर्तमान में समवशरण नहीं है, अब जिनालय का निर्माण किया जाता है। यह मंगल देशना आचार्य शांति सागर के आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव अंतर्गत आचार्य श्री की प्रतिमा स्थापना के अवसर पर धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी [&#8230;]]]></description>
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<p>उस समय समवशरण की रचना का वर्णन आता है जिससे तीर्थंकर <strong>भगवान धर्म देशना देते हैं। वर्तमान में समवशरण नहीं है, अब जिनालय का निर्माण किया जाता है। यह मंगल देशना आचार्य शांति सागर के आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव अंतर्गत आचार्य श्री की प्रतिमा स्थापना के अवसर पर धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> पहले तीर्थंकर भगवान धर्म तीर्थ का प्रवर्तन करते थे। उस समय समवशरण की रचना का वर्णन आता है जिससे तीर्थंकर भगवान धर्म देशना देते हैं। वर्तमान में समवशरण नहीं है, अब जिनालय का निर्माण किया जाता है। यह मंगल देशना आचार्य शांति सागर आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव अंतर्गत आचार्य श्री शांति सागर जी की प्रतिमा स्थापना के अवसर पर धर्मसभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रकट की। उन्होंने कहा कि जिनालय भी निर्माण भी समवशरण के बराबर ही है। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के समाज पर अनंत उपकार है ,आचार्य श्री शांतिसागर जी नहीं होते तो हम भी नहीं होते। वर्तमान श्रमण परंपरा नहीं होती।समाज द्वारा साधुओं की समाधि स्थल के लिए कार्य योजना बनाई गई किंतु विघ्न आने से पुण्यदाता परिवार द्वारा गुरु मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया।</p>
<p>गुरु मंदिर का निर्माण उससे अधिक पुण्य का कार्य है। महान पुरुषों के दर्शन करने से पुण्य में वृद्धि होती है। गुरु मंदिर निर्माण से सभी को दर्शन का लाभ मिलेगा उनके गुणों का स्मरण करने से पुण्य अर्जित करेंगे। कलई परिवार ने द्रव्य का उपयोग कर गुरु मंदिर बनाया है। गुरु के दर्शन भी भगवान के दर्शन के बराबर है क्योंकि, णमोकार मंत्र में आचार्य साधु परमेष्ठी का वर्णन है सभी को पुण्य अर्जित कर धर्म से लगाव होना चाहिए। धर्म के प्रति लगाव से सुख शांति और समृद्धि होकर पुण्य में वृद्धि होती है। कमल सराफ के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि प्रतिदिन सभी को भगवान के दर्शन अभिषेक पूजन के साथ आचार्य श्री शांति सागर जी के दर्शन पूजन करना चाहिए।</p>
<p>चातुर्मास वर्षा योग समिति द्वारा दोपहर को अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। जिसमें आचार्य श्री वर्तमान सागर जी का पूजन नगर के अनेक सांस्कृतिक संगठनों द्वारा महिला मंडल द्वारा संगीत में पूजन की गई। आचार्य श्री के पूजन के बाद अचार्य संघ में लगातार चौक आहार विहार में सहयोग करने वाले बाल ब्रह्मचारी गज्जू भैया, तारा दादी, परमीत, छोटू भैया समर कंठाली, सनत जैन इंदौर, निर्मला दीदी, प्रेमलता पाटनी आदि का स्वागत सम्मान किया गया। जिन लोगों ने नए आजीवन नियम व्रत लिए उनका सम्मान किया।</p>
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		<title>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी के चातुर्मास की घोषणा 27 को:  आचार्य पदारोहण जहाजपुर में मनेगा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 07:43:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। जहाजपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; जहाजपुर। आचार्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। <span style="color: #ff0000">जहाजपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जहाजपुर।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। आर्यिका माताजी श्री स्वस्ति भूषण माताजी अन्य साधुओं प्रियंका दीदी एवं किशोर जैन इंदौर ने जहाजपुर मंदिर आगमन पर आचार्य श्री के 9 प्रकार के रत्नों केशर से चरण प्रक्षालन किए। आचार्य श्री वर्धमानसागरजी ने प्रवचन में दर्शन, अभिषेक,पूजन, आहारदान, सांसों का महत्व, वास्तविक दान ,समवशरण की रचना, दर्शन का महत्व ,पंचकल्याणक का महत्व, स्वयं के चिंतन, ब्यावर में आचार्य शांतिसागर जी के चातुर्मास, साधु के साधु के प्रति विनम्रता और विनय भाव, चक्रवर्ती शब्द का महत्व, जहाज का वास्तविक अर्थ ,संस्कृति और धर्म की रक्षा में आचार्य शांतिसागर जी के योगदान, जीवन में सांस का सदुपयोग आदि पर विस्तृत उपदेश दिया। आचार्य श्री ने बताया कि तीर्थंकर चक्रवर्ती एक समय में एक होते हैं। चक्रवर्ती 6 खंड पर विजय प्राप्त करते हैं।</p>
<p><strong>जीवन में जितनी सांसे बची है उन सांसों को धर्म में लगाएं </strong><br />
प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने चारित्र के 6 खंडों पर विजय प्राप्त की थी। इसीलिए उन्हें चक्रवर्ती की उपमा दी गई। उनके जीवनकाल में अन्य कोई मुनि आचार्य चक्रवर्ती नहीं हुए। श्री शांति सागर जी ने धर्म और संस्कृति की रक्षा की। साधु दूसरे साधु के प्रति विनम्रता और भक्ति प्रदर्शित करते हैं साधुओं में आचार्य श्री शांति सागर जी और सिद्ध क्षेत्रों में श्री सम्मेद शिखर जी के दर्शन सभी को अवश्य करना चाहिए। धर्मात्मा सर्व को प्रेरणा और उपदेश देते हैं। जीवन में जितनी सांसे बची है उन सांसों को धर्म में लगाना चाहिए। तीर्थ क्षेत्र संयम साधना के स्थल है खाने पीने आमोद प्रमोद के स्थल श्रावकों ने बना दिया।इससे धर्म नहीं होता आपके विचारों क्रियाओं से हमारे तीर्थ क्षेत्र सुरक्षित नहीं हैं जीवन में धर्म को अपना कर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का पुरुषार्थ करना चाहिए। यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने स्वस्ति धाम जहाजपुर में आयोजित धर्म सभा में प्रगट की।</p>
<p><strong>सभी 5 मिनट स्वयं के बारे में चिंतन करें </strong><br />
आचार्य श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि न्याय और नीति से अर्जित द्रव्य को दान देना चाहिए दान धर्म कार्य में देना चाहिए। समवशरण मंदिर धर्म का प्रतीक है जिन बिंब दर्शन से सम्यक ज्ञान होता है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में सूर्य मंत्र से प्रतिमाओं में देवत्व के गुण आरोपित किए जाते हैं। जिनालय जिन बिंब के दर्शन श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए सभी को 5 मिनट स्वयं के बारे में चिंतन करना चाहिए। भगवान की प्रतिमा संदेश देती है। आचार्य श्री ने बताया कि 40 वर्ष पूर्व हमने जहाजपुर गांव में भगवान श्री नेमिनाथ और श्री मुनिसुब्रत नाथ भगवान के दर्शन किए थे।</p>
<p><strong>सच्ची श्रद्धा सम्यक दर्शन है</strong><br />
आचार्य श्री ने बताया कि ब्यावर राजस्थान में आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी ने एक साथ चातुर्मास किया था। इसके पूर्व गणिनी आर्यिकाश्री स्वस्ति भूषण माताजी ने सम्यक दर्शन, ज्ञान, चारित्र की विवेचना की। देव शास्त्र गुरु वितरागी और होते हैं, उनके प्रति दृढ़ श्रद्धा रखना चाहिए। तत्वार्थ सूत्र के छठे अध्याय में विवेचना है कि सच्ची श्रद्धा सम्यक दर्शन है। माताजी ने बताया कि सिद्धि और प्रसिद्धि में अंतर है लौकिक ज्ञान से प्रसिद्धि मिलती है किंतु रत्नत्रय धर्म से सिद्धि प्राप्त होती है।</p>
<p><strong>साधुओं ने किया विहार </strong><br />
माताजी ने आचार्य श्री के प्रशंसा कर बताया कि मंगलवार चतुर्दशी को आचार्य श्री सहित सात साधुओं के उपवास थे। उसके बावजूद संघ ने प्रतिकूल मौसम में विहार किया। 27 जून को 36 वां आचार्य पदारोहण जहाजपुर में मनाया जाएगा। अनेक नगरों से भक्त चातुर्मास का पुनः निवेदन करेंगे। आचार्य श्री 27 जून को वर्ष 2025 के चातुर्मास स्थल की घोषणा करेंगे।</p>
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		<title>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी के चातुर्मास की घोषणा 27 को: आचार्य पदारोहण जहाजपुर में मनेगा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 09:19:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। जहाजपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; जहाजपुर। आचार्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। <span style="color: #ff0000">जहाजपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जहाजपुर।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। आर्यिका माताजी श्री स्वस्ति भूषण माताजी अन्य साधुओं प्रियंका दीदी एवं किशोर जैन इंदौर ने जहाजपुर मंदिर आगमन पर आचार्य श्री के 9 प्रकार के रत्नों केशर से चरण प्रक्षालन किए। आचार्य श्री वर्धमानसागरजी ने प्रवचन में दर्शन, अभिषेक,पूजन, आहारदान, सांसों का महत्व, वास्तविक दान ,समवशरण की रचना, दर्शन का महत्व ,पंचकल्याणक का महत्व, स्वयं के चिंतन, ब्यावर में आचार्य शांतिसागर जी के चातुर्मास, साधु के साधु के प्रति विनम्रता और विनय भाव, चक्रवर्ती शब्द का महत्व, जहाज का वास्तविक अर्थ ,संस्कृति और धर्म की रक्षा में आचार्य शांतिसागर जी के योगदान, जीवन में सांस का सदुपयोग आदि पर विस्तृत उपदेश दिया। आचार्य श्री ने बताया कि तीर्थंकर चक्रवर्ती एक समय में एक होते हैं। चक्रवर्ती 6 खंड पर विजय प्राप्त करते हैं।</p>
<p><strong>जीवन में जितनी सांसे बची है उन सांसों को धर्म में लगाएं </strong></p>
<p>प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने चारित्र के 6 खंडों पर विजय प्राप्त की थी। इसीलिए उन्हें चक्रवर्ती की उपमा दी गई। उनके जीवनकाल में अन्य कोई मुनि आचार्य चक्रवर्ती नहीं हुए। श्री शांति सागर जी ने धर्म और संस्कृति की रक्षा की। साधु दूसरे साधु के प्रति विनम्रता और भक्ति प्रदर्शित करते हैं साधुओं में आचार्य श्री शांति सागर जी और सिद्ध क्षेत्रों में श्री सम्मेद शिखर जी के दर्शन सभी को अवश्य करना चाहिए। धर्मात्मा सर्व को प्रेरणा और उपदेश देते हैं। जीवन में जितनी सांसे बची है उन सांसों को धर्म में लगाना चाहिए। तीर्थ क्षेत्र संयम साधना के स्थल है खाने पीने आमोद प्रमोद के स्थल श्रावकों ने बना दिया।इससे धर्म नहीं होता आपके विचारों क्रियाओं से हमारे तीर्थ क्षेत्र सुरक्षित नहीं हैं जीवन में धर्म को अपना कर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का पुरुषार्थ करना चाहिए। यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने स्वस्ति धाम जहाजपुर में आयोजित धर्म सभा में प्रगट की।</p>
<p><strong>सभी 5 मिनट स्वयं के बारे में चिंतन करें </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि न्याय और नीति से अर्जित द्रव्य को दान देना चाहिए दान धर्म कार्य में देना चाहिए। समवशरण मंदिर धर्म का प्रतीक है जिन बिंब दर्शन से सम्यक ज्ञान होता है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में सूर्य मंत्र से प्रतिमाओं में देवत्व के गुण आरोपित किए जाते हैं। जिनालय जिन बिंब के दर्शन श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए सभी को 5 मिनट स्वयं के बारे में चिंतन करना चाहिए। भगवान की प्रतिमा संदेश देती है। आचार्य श्री ने बताया कि 40 वर्ष पूर्व हमने जहाजपुर गांव में भगवान श्री नेमिनाथ और श्री मुनिसुब्रत नाथ भगवान के दर्शन किए थे।</p>
<p><strong>सच्ची श्रद्धा सम्यक दर्शन है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने बताया कि ब्यावर राजस्थान में आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी ने एक साथ चातुर्मास किया था। इसके पूर्व गणिनी आर्यिकाश्री स्वस्ति भूषण माताजी ने सम्यक दर्शन, ज्ञान, चारित्र की विवेचना की। देव शास्त्र गुरु वितरागी और होते हैं, उनके प्रति दृढ़ श्रद्धा रखना चाहिए। तत्वार्थ सूत्र के छठे अध्याय में विवेचना है कि सच्ची श्रद्धा सम्यक दर्शन है। माताजी ने बताया कि सिद्धि और प्रसिद्धि में अंतर है लौकिक ज्ञान से प्रसिद्धि मिलती है किंतु रत्नत्रय धर्म से सिद्धि प्राप्त होती है।</p>
<p><strong>साधुओं ने किया विहार </strong></p>
<p>माताजी ने आचार्य श्री के प्रशंसा कर बताया कि मंगलवार चतुर्दशी को आचार्य श्री सहित सात साधुओं के उपवास थे। उसके बावजूद संघ ने प्रतिकूल मौसम में विहार किया। 27 जून को 36 वां आचार्य पदारोहण जहाजपुर में मनाया जाएगा। अनेक नगरों से भक्त चातुर्मास का पुनः निवेदन करेंगे। आचार्य श्री 27 जून को वर्ष 2025 के चातुर्मास स्थल की घोषणा करेंगे।</p>
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		<title>आचार्य श्री शांतिसागर जी की 153 वीं जन्म जयंती 17 जून को : आचार्य पदारोहण का शताब्दी वर्ष 2024 में मनाया </title>
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		<pubDate>Tue, 17 Jun 2025 03:49:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी का 17 जून मंगलवार को 153 वां जन्म जयंती महोत्सव है। पूरे देश में दिगंबर जैन समाज के लोग भक्ति भाव से आचार्य श्री का जन्म जयंती महोत्सव मनाएंगे। अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230; अयोध्या। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी का 17 जून मंगलवार को 153 वां जन्म जयंती महोत्सव हैं। पूरे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी का 17 जून मंगलवार को 153 वां जन्म जयंती महोत्सव है। पूरे देश में दिगंबर जैन समाज के लोग भक्ति भाव से आचार्य श्री का जन्म जयंती महोत्सव मनाएंगे। <span style="color: #ff0000">अयोध्या से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी का 17 जून मंगलवार को 153 वां जन्म जयंती महोत्सव हैं। पूरे देश में दिगंबर जैन समाज के लोग भक्ति भाव से आचार्य श्री का जन्म जयंती महोत्सव मनाएंगे। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद, कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने कहा कि गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। वे आचार्य श्री शांतिसागर जी की शिष्या हैं। अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवनप्रकाश जैन जी ने कहा कि मंगलवार को आचार्य श्री वीरसागर जी का जन्म जयंती महोत्सव है। इसे पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री शांतिसागर जी के बारे में हम क्या ही कह सकते हैं। परम सौभाग्य है कि ऐसे चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी का वर्तमान में आचार्य पदारोहण का शताब्दी वर्ष 2024 में मनाया गया। वर्ष 1924 में उन्हें समडोली (महाराष्ट्र) में आचार्य पद पर समाज ने प्रतिष्ठापित किया था और वे बीसवीं शताब्दी में प्रथम आचार्य के रूप में इस धरती पर हम सबके लिए दिगदिगन्त बने थे।</p>
<p><strong>माताजी के रूप में आचार्य श्री के दर्शन होते हैं</strong></p>
<p>आज भी उन आचार्य महाराज की सारी बातें चाहे हमने दर्शन न किए हों, लेकिन गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के मुख से जब हम सुनते हैं तो ऐसा लगता है कि हमने भी आचार्य श्री शांतिसागर महाराज के साक्षात दर्शन ही कर लिए। गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के रूप में आज हमें आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का दर्शन परिलक्षित होता है क्योंकि, ज्ञानमती माता जी ने अपने जीवन में अपने गुरु शांतिसागर जी के हर आदेश को, हर संदेश को, हर उनकी बातों को अपने जीवन में अंगीकार किया है और आज वे उन्हीं शांतिसागर जी महाराज के प्रथम पट्टशिष्य आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित होकर वर्ष 1956 में माधोराजपुरा (राजस्थान) में इनकी दीक्षा हुई और आज भी हम सबको विगत 73 साल से लगातार जैन धर्म के पताका फहराने का संदेश, आदेश और आशीर्वाद दे रही है।</p>
<p><strong>आज ऐसे शिष्यों का मिलना भी बहुत अनूठा है</strong></p>
<p>माताजी आज 92 वर्ष की हो रही हैं। जिन्होंने आचार्य शांतिसागर जी के साक्षात संदेशों को उनके साक्षात दिग्दर्शन को पूरे विश्व में गुंजायमान किया है। माताजी का कोई भी प्रवचन ऐसा नहीं होता है जब वे शांतिसागर जी महाराज के बारे में कोई विषय, कोई बात, ना बताए या उनकी जयजयकार ना करें। आज ऐसे शिष्यों का मिलना भी बहुत अनूठा है। जो अपने गुरु के भी गुरु,गुरुणां गुरु, गुरु और समस्त गुरु परंपरा को आज इस प्रकार से प्रभावित, प्रसारित करती हैं कि पूरे देश में हम सब एक आदर्श गुरु परंपरा को प्राप्त करते हैं। आचार्य शांतिसागर जी हमारी पूरी जैन समाज के आदर्श हैं।</p>
<p><strong>मूलाचार ग्रंथ में बताई बातों का पालन कर रहे हैं</strong></p>
<p>पूरे संत समुदाय के आदर्श हैं। उनकी ही बातों को, उनके ही बताए मार्ग को पालन करते हुए आज हमारे जैन समाज के दिगंबर जैन समाज के सारे संत समुदाय, आर्यिका माताएं, दिगंबर मुनि सभी लोग उनके बताए मार्ग पर मूलाचार ग्रंथ में बताई बातों का पालन कर रहे हैं। ऐसे आचार्य शांतिसागर जी महाराज के प्रति हमारा शत-शत नमन है। आने वाली पीढ़ी भी आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के संदेशों को और उनके बताए मार्ग पर चलते हुए जैन धर्म की पताका को फहराती रहे।ऐसी मंगल भावना है।</p>
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		<title>धर्मप्रभावना समाज के समक्ष उपस्थित हैः आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस भक्तों द्वारा मनाया जायेगा-सिद्ध सागरजी महाराज </title>
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		<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 07:22:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत की पावन वसुंधरा पर अनेकों ऋषि मुनियों ने अपनी पावन चरण धुलि से इस वसुमती को परम पवित्र किया है और समाज को एक नई दिशा प्रदान की है। पढ़िए जालना से अभिषेक अशोक पाटील की यह पूरी खबर&#8230;  जालना। विशुद्ध रत्नश्री सिद्ध सागरजी महाराज ने बताया कि-भारत की पावन वसुंधरा पर अनेकों ऋषि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत की पावन वसुंधरा पर अनेकों ऋषि मुनियों ने अपनी पावन चरण धुलि से इस वसुमती को परम पवित्र किया है और समाज को एक नई दिशा प्रदान की है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जालना से अभिषेक अशोक पाटील की यह पूरी खबर&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जालना।</strong> विशुद्ध रत्नश्री सिद्ध सागरजी महाराज ने बताया कि-भारत की पावन वसुंधरा पर अनेकों ऋषि मुनियों ने अपनी पावन चरण धुलि से इस वसुमती को परम पवित्र किया है और समाज को एक नई दिशा प्रदान की है। इसी श्रृंखला में इक्कीसवीं सदी के एक दूर-दृष्टा, युवाओं के प्रेरणा पुंज, आगमनानुसार आचरण कर के जन-जन को सद्-बोध देने वाले आध्यात्मिक गुरू आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी महाराज द्वारा वर्तमान में की गई धर्म प्रभावना समाज के समक्ष उपस्थित है।</p>
<p><strong>क्षुल्लक दीक्षा</strong></p>
<p>राजेंद्र (लला) ने आचार्य विराग सागरजी महाराज के कर कमलो से दिनांक 11 अक्टूबर 1989 को भिंड में भव्य क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण की। उनका नाम रखा गया क्षुल्लक श्री यशोधर सागरजी। उस समय उनकी आयु 18 वर्ष की थी।</p>
<p><strong>ऐलक दीक्षा</strong></p>
<p>परम पूज्य क्षुल्लक श्री यशोधर सागरजी ने आचार्य विराग सागरजी महाराज के कर कमलो से 2 वर्ष बाद दिनांक 19 जून 1981 को भव्य ऐलक दीक्षा पन्ना नगर में ग्रहण की।</p>
<p><strong>मुनि दीक्षा </strong></p>
<p>ऐलक दीक्षा के 6 माह बाद ही परम पूज्य ऐलक श्री यशोधर सागरजी महाराज ने 20 वर्ष की आयु में अपने गुरुवर आचार्यश्री विराग सागरजी महाराज से श्रेयांस गिरी में दिनांक 21.11.1991 को भव्य मुनि दीक्षा ग्रहण की और नाम रखा गया मुनिश्री 1108 विशुद्ध सागरजी महाराज।</p>
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		<title>आचार्य साधु परमेष्ठी चलते-फिरते तीर्थ : 22 वर्षों के बाद पदार्पण पर हुई धर्मसभा </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Feb 2025 10:14:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज अपने 9 मुनिराजों, 22 आर्यिकाओं तथा 2 क्षुल्लकों कुल 34 साधुओं का 22 वर्षों के बाद धरियावाद प्रवेश हुआ। कर जिनवाणी भेंट की। आचार्यश्री ने धर्म सभा को संबोधित किया। धरियावद से पढ़िए राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; धरियावद। धैर्य, धीरज का फल मीठा होता है। आप काफी वर्षों से प्रतीक्षा कर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज अपने 9 मुनिराजों, 22 आर्यिकाओं तथा 2 क्षुल्लकों कुल 34 साधुओं का 22 वर्षों के बाद धरियावाद प्रवेश हुआ। कर जिनवाणी भेंट की। आचार्यश्री ने धर्म सभा को संबोधित किया। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> धैर्य, धीरज का फल मीठा होता है। आप काफी वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे हैं। तीर्थंकरों की वाणी साक्षात में सुनने को नहीं मिलती है किंतु, उनके द्वारा प्रतिपादित उपदेश जिनवाणी ओर गुरुओं के माध्यम से मिलता है। मनुष्य जन्म बहुत ही दुर्लभता से मिला है। मनुष्य जीवन में देव ,शास्त्र गुरुओं के प्रति श्रद्धा,भक्ति विनय से भगवान भी झुक जाते हैं। वश में हो जाते हैं। नगर में काफी भौतिक प्रगति हो रही है। लगभग 21 वर्षों पूर्व नगर में आए थे। श्री चंद्रप्रभु जिनालय और यहां के मैदान में परिवर्तन हो गया है। भगवान का जिनालय अब नवीन जिनालय हो गया है। समय के साथ प्रगति हुई है। प्रगति निरंतर बनी रहना चाहिए देव अर्थात आचार्य साधु परमेष्ठी चलते-फिरते तीर्थ हैं। उनके प्रति श्रद्धा भक्ति और विनय रखना चाहिए। यह धर्म देशना आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज ने नगर में 22 वर्षों के बाद पदार्पण के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में प्रकट की।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-75216" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />धर्म के माध्यम से रत्नत्रय को धारण करें</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया ने बताया कि आचार्यश्री ने आगे उपदेश में कहा कि अरिहंत भगवान से जो धर्म प्राप्त हुआ है। उस धर्म से जीवन को उन्नत बनाने का पुरुषार्थ करना चाहिए क्योंकि, विनय श्रद्धा और भक्ति मोक्ष के द्वार की चाबी है। इस धर्म रूपी चाबी को भूलना या खोना नहीं चाहिए। इसे संभाल कर रखें तथा धर्म के माध्यम से रत्नत्रय को धारण करें। इसी में मनुष्य जीवन की सार्थकता है। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व पंडित हंसमुख शास्त्री ने आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज से वर्ष 2025 का चातुर्मास एवं प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव का समापन धरियावद में संघ सहित करने का निवेदन किया</p>
<p>मुनिश्री पुण्य सागर जी ने अपने उद्बोधन में समाज को बताया कि जो सोता है वह खोता है। इसलिए आचार्य श्री के पदार्पण से होली के साथ दीपावली पर्व भी प्रारंभ हो गया है।,अब बारिश के समाप्त होने पर धर्म की बारिश होगी। उसमें भीगने से लाभ होगा। सूखे रहोगे तो कोरे रह जाओगे क्योंकि, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी में आचार्य शांति सागर जी से लेकर दीक्षा गुरु आचार्य श्री अजीत सागर जी के गुण समाहित है।</p>
<p><strong>सभी 53 साधुओं ने जिनालयों के दर्शन किए</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की अंतराष्ट्रीय स्तर पर धर्म प्रभावना की है। दशा हमड़ सेठ करणमल, दशा नरसिंहपुरा सेठ दिनेश जेकनावत तथा बीसा नरसिंहपुरा, सेठ गुणवंत डुगावत ने बताया कि आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज अपने 9 मुनिराजों, 22 आर्यिकाओं तथा 2 क्षुल्लकों कुल 34 साधुओं का 22 वर्षों के बाद धरियावाद प्रवेश पर धरियावाद में विराजित मुनिश्री पुण्यसागर जी महाराज ने अपने 18 साधुओं सहित परिक्रमा और चरणवंदना की। पंडित हंसमुख, ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, सम्पूर्ण समाज ने 75 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की 23 फरवरी को आगवानी की। सभी 53 साधुओं ने जिनालयों के दर्शन किए। घरों के सामने रंगोली बनाई गई।</p>
<p><strong>चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की</strong></p>
<p>नगर के पुरुष महिलाएं धार्मिक मंडल निर्धारित वेषभूषा में अगवानी भक्ति नृत्य पूर्वक जयकारों के साथ की। संपूर्ण नगर के हम भक्तों की हैं अभिलाषा धरियावद में हो चौमासा, देखो देखो कौन पधारे भक्तों के भगवान पधारे, भगवान महावीर और आचार्य श्री वर्धमान सागर के जय जयकार से गूंज रहा था। धर्म सभा में प्रवचन के पूर्व मंगलाचरण हुआ। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी एवं पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन आमंत्रित अतिथियों तथा स्थानीय समाज के पदाधिकारी द्वारा किया गया। सौभाग्यशाली परिवार ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। सभा का संचालन पंडित विशाल ने किया।</p>
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		<title>आचार्य पदारोहण समारोह मनाया : जैन धर्म में वह शक्ति सामर्थ है कि वह पाप कर्मों को पुण्य संपदा में बदल सकती हैं &#8211; आचार्य श्री वर्धमान सागर जी </title>
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		<pubDate>Tue, 25 Jun 2024 09:19:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 30 साधुओं और मुनि श्री पुण्य सागर जी 19 साधुओं सहित बांसवाड़ा की खांदू कालोनी में विराजित हैं। सन् 1950 में जन्मे, सन् 1969 में दीक्षित, सन् 1990 सेआचार्य पद पर पदस्थ पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान जी का 35वां आचार्य पदारोहण भक्तिपूर्वक चरण वंदना, जिनवाणी भेंट, पूजन गुणानुवाद सभा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 30 साधुओं और मुनि श्री पुण्य सागर जी 19 साधुओं सहित बांसवाड़ा की खांदू कालोनी में विराजित हैं। सन् 1950 में जन्मे, सन् 1969 में दीक्षित, सन् 1990 सेआचार्य पद पर पदस्थ पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान जी का 35वां आचार्य पदारोहण भक्तिपूर्वक चरण वंदना, जिनवाणी भेंट, पूजन गुणानुवाद सभा सहित मनाया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 30 साधुओं और मुनि श्री पुण्य सागर जी 19 साधुओं सहित बांसवाड़ा की खांदू कालोनी में विराजित हैं। सन् 1950 में जन्मे, सन् 1969 में दीक्षित, सन् 1990 सेआचार्य पद पर पदस्थ पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान जी का 35वां आचार्य पदारोहण भक्तिपूर्वक चरण वंदना, जिनवाणी भेंट, पूजन गुणानुवाद सभा सहित मनाया। आर्यिका श्री महायशमति माताजी ने गुणानुवाद सभा का संचालन कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी में पूर्वाचार्यों के सभी गुण होना बताया।</p>
<p><strong>संस्मरण सुनाए </strong></p>
<p>जो संयम धारण करते हैं वह आत्मा को पूज्यता पर ले जाने का पुरुषार्थ करते हैं। बांसवाड़ा का पुण्य है कि यहां आचार्य शांति सागर जी महाराज की परंपरा के सभी आचार्यों का आगमन हुआ है। जैन धर्म में वह शक्ति है कि आप पाप क्रियायो को पुण्य संपदा में परिवर्तित कर सकते हैं। पाप में लिप्त जीवन में जैन धर्म वह साधन है जिससे पाप पुण्य में बदलता है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने धर्म सभा में प्रकट की। आपने आगे बताया कि प्रथमाचार्य शांतिसागर जी का जैन धर्म पर बहुत उपकार है। वर्तमान साधु परंपरा उन्हीं की देन है।आचार्य श्री ने बताया कि यद्यपि आचार्य पद आषाढ़ शुक्ल दूज को आता है पर श्रावकों को अंग्रेजी मास से मनाने की आदत हो गई है। आचार्य श्री ने आचार्य शिवसागर जी ,आचार्य धर्म सागर जी, आचार्य अजित सागर जी महाराज के अनेक संस्मरण भाव विभोर होकर सुनाएं।आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि के बाद संघ के साधु अजमेर में थे तब पंडित हंसमुख शास्त्री, आचार्य अजीतसागर जी का एक पत्र लेकर आए जिसका आशय यह था कि मिलाने वाला तो दुर्लभ है, किंतु मैं प्रतीक्षा कर रहा हूं। आचार्य संघ के सभी साधु पत्र पढ़कर भाव विह्वल हो गए और संघ ने त्वरित गति से भिंडर की ओर विहार किया। आचार्य श्री ने गुरु शिष्य के रिश्ते बाबत संस्मरण बताया कि शिष्य के ऊपर गुरु की कितना वात्सल्य होता है, जब हमने आचार्य श्री अजीतसागर जी के जब चरणों को स्पर्श किया तब हमारे नेत्रों की अश्रुधारा उनके चरण का प्रक्षालन अभिषेक कर रही थी। वहीं हमारे गुरु आचार्य श्रीअजीतसागर जी के नेत्रों से प्रेमाश्रु की धारा हमारे मस्तक को भिगो रही थी। आचार्य श्री ने हमें आचार्य पद देने का निर्णय साबला में किया था।</p>
<p><strong>गुणानुवाद भी किया</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया ,समाज सेठ अमृत लाल अनुसार इसके पूर्व मुनि श्री पुण्य सागर जी ने गुणानुवाद में बताया कि सनावद में जन्मे बालक श्री यशवंत जी ने धार्मिक शिक्षा आर्यिका श्री सुपार्श्व मति एवम आर्यिका श्री ज्ञानमति जी ने दी आचार्य कल्प श्री श्रुत सागर जी ने संघ में अध्ययन कराया। आपने आचार्य वर्धमान सागर जी के वात्सल्य ,सरलता,श्रुतज्ञान संयम साधना,समन्यवता गुण दृढ़ता,गुरुभक्ति,समर्पण भाव का गुणानुवाद किया। वर्ष 1993,2006 वर्ष 2018 में श्री बाहुबली भगवान के महामस्तकाभिषेक में सभी साधुओं के साथ समन्वय गुण की प्रशंसा की। आपने बताया हमारे दीक्षा गुरु जी 3 वर्ष में समाधि होने पर 13 वर्षो तक पुत्रवत स्नेह ,संबल दिया। श्री पुण्य सागर जी ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के हृदय में हिमालय विशालता, सिंह समान पराक्रम, है आपके पैर में चक्र का निशान हैं जो धर्म प्रभावना का द्योतक हैं।आपने आचार्य पद का 50 वर्ष का पदारोहण मनाने की शुभ मंगल भावना प्रगट की। आर्यिका श्री सौरभ मति माताजी ने नेत्र ज्योति जाने और अनेक संस्मरण अश्रु पूर्ण नेत्रों से भाव विहल होकर बताए। दीक्षा के पूर्व के संस्मरण बताए।आज प्रातकाल गुरु वंदना में सभी 48 साधुओं ने 36 मुलगुण आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज की चरण वंदना प्रक्षालन परिक्रमा लगाकर भक्ति प्रदर्शित की।</p>
<p><strong>ये कार्यक्रम भी हु</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया एवं अक्षय डांगरा अनुसार इसके पूर्व प्रातः शांतिधारा के पश्चात आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 35वां आचार्य पदारोहण पूर्ण श्रद्धा और भक्ति पूर्वक मनाया गया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य पुण्य शाली परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री को शास्त्र 35 पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भेंट किए गए जिसमें इंदौर केराजेश पंचोलिया, सनावद के वारिस जैन, धरियावद से पधारे महावीर चंपावत सहित अनेक श्रावकों ने आचार्य श्री को जिनवाणी भेंटकर अपनी भक्ति प्रदर्शित की।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का पूजन सौधर्म इंद्र बनकर करने का सौभाग्य नरेंद्र रारा परिवार गुवाहाटी को प्राप्त हुआ ।विभिन्न नगरों और स्थानीय समाज द्वारा आचार्य श्री की पूजन में विभिन्न द्रव्य चढ़ाए गए। पूजन मुनि श्री पुण्य सागर जी एवम आर्यिका श्री महायश मति जी ने कराई।</p>
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		<title>आचार्य पदारोहण के बाद प्रथम केशलोंचन : नव आचार्य श्री का केशलोंच किया  </title>
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		<pubDate>Thu, 25 Apr 2024 07:03:11 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कुंडलपुर</strong>। नव आचार्य श्री समयसागर जी महामुनिराज जी का आचार्य पदारोहण के बाद प्रथम केशलोंचन कुंडलपुर तीर्थ में सुबह हुआ। समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि नव आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने उपवास रखा।</p>
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		<title>आचार्य पदारोहण को बनाया यादगार :  डाक तार विभाग ने स्पेशल कवर जारी किया </title>
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		<pubDate>Thu, 18 Apr 2024 07:40:35 +0000</pubDate>
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<p><strong>इंदौर।</strong> महामहिम आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य परम पूज्य नव आचार्य मुनि श्री समय सागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण महोत्सव को यादगार बनाने हेतु, संस्कृति संरक्षण हेतु भारतीय डाक तार विभाग द्वारा विशेष आवरण जारी किया गया। इसका अनावरण इंदौर जीपीओ से पोस्टमास्टर जनरल प्रीति अग्रवाल, प्रवर अधीक्षक डाकघर इंदौर, पोस्टमास्टर इंदौर एवं टीम इंदौर एवं इस आवरण हेतु विशेष प्रयास रत /प्रायोजक निर्मल पाटौदी द्वारा किया गया। इस अवसर पर चंद्रेश जैन, सहायक पोस्टमास्टर जनरल, मध्यप्रदेश परिमंडल,डाक विभाग भी उपस्थित थे।</p>
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