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	<title>आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>टोंक में आचार्यश्री वर्धमानसागर जी का मंगल प्रवेश : नगर में आकर्षक सजावट के साथ उत्साह का माहौल  </title>
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		<pubDate>Mon, 07 Jul 2025 07:42:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में भी आपने चातुर्मास किया था। वर्ष 2025 में पूरे 55 वर्षों के बाद जैन समाज सहित नगरवासियों को यह ऐतिहासिक अवसर पुनः प्राप्त हुआ है। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में भी आपने चातुर्मास किया था। वर्ष 2025 में पूरे 55 वर्षों के बाद जैन समाज सहित नगरवासियों को यह ऐतिहासिक अवसर पुनः प्राप्त हुआ है। ऐतिहासिक संयोग और तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे। इस अवसर पर टोंक नगर को तीन अद्वितीय सौभाग्य एक साथ प्राप्त हो रहे हैं। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 75वां हीरक जन्म जयंती महोत्सव, संयम वर्ष का 57वां चातुर्मास होगा।</p>
<p><strong>मंगल प्रवेश और शोभायात्रा निकाली  </strong></p>
<p>9 जुलाई को चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना के लिए 7 जुलाई को प्रातः भव्य नगर प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के अवसर पर कल्पना गार्डन से जैन नसिया तक लगभग डेढ़ किमी लंबी दिव्य शोभायात्रा निकाली गई। पूरे मार्ग पर 31 भव्य स्वागत द्वार, आकर्षक विद्युत सजावट एवं पुष्पवर्षा की विशेष तैयारियां की गई थीं। जैन नसिया को आकर्षक सजावट से दुल्हन की तरह सुसज्जित किया गया था। जैसे ही आचार्य श्री ससंघ नगर सीमा में पहुंचेंगे, शाही बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों, जयघोष और भक्ति के स्वर वातावरण में गूंज उठे। किशनगढ़, नेनवा एवं टोंक के शाही बैंड अपनी मधुर सुर लहरियों से स्वागत कर रहे थे।</p>
<p><strong>36 साधु-साध्वी का दिव्य ससंघ आगमन</strong></p>
<p>इस मंगल विहार में आचार्य श्री के साथ 10 मुनि, 22 आर्यिका, 1 ऐलक एवं 2 क्षुल्लक सहित कुल 36 साधु-साध्वी सम्मिलित हैं। नगर में अद्भुत उत्साह का वातावरण है। नगर के सभी धार्मिक-सामाजिक संगठन तन, मन, धन से जुटकर तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। ऐसा वातावरण है मानो नगरवासी अनेक पर्वों को एक साथ उल्लासपूर्वक मना रहे है। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति इस ऐतिहासिक अवसर पर रहेगी। टोंक-सवाई माधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, जिला प्रमुख सरोज नरेश बंसल, पूर्व विधायक अजीतसिंह मेहता, नगर परिषद की पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी जैन, टोडारायसिंह के पूर्व चेयरमैन संतकुमार जैन, भाजपा युवा नेता विनायक जैन, संजय संघी, सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहकर आचार्य श्री ससंघ के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>चातुर्मास समिति के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे</strong></p>
<p>चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष भागचंद फूलेता, कार्यकारी अध्यक्ष धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सर्राफ, संयोजक कमल आंडरा, राजेश बोरदा, पप्पू नमक, लालचंद फूलेता, सुरेश संघी, सीटू आरटी, अनिल कंटान, सुमित दाखिया, अम्मु छामुनिया, नरेंद्र दाखिया, सुनील सर्राफ, पारस बहड़, विनोद कल्ली, प्रदीप सर्राफ, मुकेश करवर, टोनू सर्राफ, कमल सर्राफ, अंकित बगड़ी, किन्नी शिवाड़िया, मुकेश बरवास, सोनू बरवास, पंकज फूलेता, लोकेश कल्ली, राजेश शिवाड़िया, ओम ककोड़, नीटू छामुनिया, अर्पित पासरोटियां, ज्ञान संघी, कुंदन आंडरा, देवेंद्र आंडरा, उमेश संघी, मुकेश दतवास, वीरेंद्र संघी, पदमपुरा पदयात्रा संघ के सदस्य, शांतिधारा परिवार समिति के सदस्य, महिला मंडल, बालिका मंडल उपस्थित रहे। यह पुण्य अवसर टोंक नगर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत बन रहा है।</p>
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		<title>108 दिवसीय भक्तामर दीप आराधना का समापन 16 मई को : गुरुवार को हुआ श्री ऋषभदेव मंडल विधान </title>
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		<pubDate>Thu, 15 May 2025 09:25:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[108 दिवसीय भक्तामर महास्तोत्र दीप आराधना की जा रही है। इसका समापन गुरुवार को सामूहिक प्रयास से पूर्ण होने जा रहा है। संरक्षक आरती सनत ने बताया कि गुरुवार प्रातः पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के बाद श्री ऋषभदेव विधान की विशेष पूजन विधानाचार्य अजय पंचोलिया के निर्देशन में कर अर्घ्य मंडल पर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>108 दिवसीय भक्तामर महास्तोत्र दीप आराधना की जा रही है। इसका समापन गुरुवार को सामूहिक प्रयास से पूर्ण होने जा रहा है। संरक्षक आरती सनत ने बताया कि गुरुवार प्रातः पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के बाद श्री ऋषभदेव विधान की विशेष पूजन विधानाचार्य अजय पंचोलिया के निर्देशन में कर अर्घ्य मंडल पर अर्पित किए गए। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी के आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव एवं पंचम पट्टाधीश श्री वर्धमान सागर जी के अवतरण के 75 वंे वर्ष के उपलक्ष्य में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के आशीर्वाद एवं मुनि श्री चारित्र सागर जी महाराज की प्रेरणा, मुनि श्री निजानंद सागर जी महाराज के सानिध्य में निर्मित श्री आदिनाथ दिगंबर चैत्यालय, स्कीम नंबर 71 में प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक माघ कृष्ण चतुर्दशी 28 जनवरी से प्रतिदिन शाम 7.30 बजे से श्रीजी की आरती, भक्ति एवं 48 दीपकों से 108 दिवसीय भक्तामर महास्तोत्र दीप आराधना की जा रही है। इसका समापन गुरुवार को सामूहिक प्रयास से पूर्ण होने जा रहा है। संरक्षक आरती सनत ने बताया कि गुरुवार प्रातः पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के बाद श्री ऋषभदेव विधान की विशेष पूजन विधानाचार्य अजय पंचोलिया के निर्देशन में कर अर्घ्य मंडल पर अर्पित किए गए। शाम 7.30 बजे से 108 दीपकों से श्री जी की, मां जिनवाणी तथा आचार्य श्री की आरती एवं भक्ति की गई। इसके बाद 48 दीपकों से भक्तामर महास्तोत्र दीप आराधना समस्त भक्तामर महास्तोत्र आराधना भक्त परिवार जन द्वारा की गई।</p>
<p><strong>भक्तामर महास्तोत्र विधान शुक्रवार को </strong></p>
<p>अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम और पूजन तथा 108 दिवसीय भक्तामर महास्तोत्र आराधना के समापन के उपलक्ष्य में भक्तामर महास्तोत्र विधान शुक्रवार सुबह किया जाएगा। अध्यक्ष महेंद्र टी एवं सुनील ईशान सचिव ने बताया कि कार्यक्रम के बाद प्रभावना स्वरुप वात्सल्य भोजन पुण्यार्जक निखिल, रिया जैन, विशाल जैन, अविचल जैन ने रखा है। शाम 7.30 बजे से श्रीजी की, मां जिनवाणी की आरती एवं भक्ति समस्त भक्तामर महास्तोत्र आराधना भक्त परिवार जन द्वारा की जाएगी। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी के आचार्य पद शताब्दी महोत्सव अंतर्गत 108 दिवसीय कार्यक्रमों में विभिन्न भक्तों द्वारा आचार्य, मुनिराज,आर्यिका माताजी के जन्म, दीक्षा, समाधि दिवस परिजनों के जन्म, विवाह सालगिरह, पुण्य तिथि पर प्रतिदिन 48 दीपकों से आराधना कर प्रभावना वितरण की गई।</p>
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		<title>आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव में होंगे कई कार्यक्रम : आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का 152वां वर्ष वर्धन 27 जून को </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/birth_anniversary_of_acharya_shri_shantisagar_ji_maharaj_to_be_celebrated_on_june_27/</link>
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		<pubDate>Thu, 27 Jun 2024 06:23:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलेख]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती गुरुणाम गुरु आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का 152वां वर्ष वर्धन &#8220;दिवस आषाढ़ कृष्णा छठ 6 दिनांक अनुसार 27 जून 2024 को है। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद वर्ष 1924 में हुआ वर्ष 2024 में आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मार्गदर्शन में अखिल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती गुरुणाम गुरु आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का 152वां वर्ष वर्धन &#8220;दिवस आषाढ़ कृष्णा छठ 6 दिनांक अनुसार 27 जून 2024 को है। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद वर्ष 1924 में हुआ वर्ष 2024 में आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मार्गदर्शन में अखिल भारतीय स्तर पर अक्टूबर 24 से अक्टूबर 25 तक मनाया जावेगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सुनील जैन संचय का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती गुरुणाम गुरु आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का 152वां वर्ष वर्धन &#8220;दिवस आषाढ़ कृष्णा छठ 6 दिनांक अनुसार 27 जून 2024 को है। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद वर्ष 1924 में हुआ वर्ष 2024 में आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के मार्गदर्शन में अखिल भारतीय स्तर पर अक्टूबर 24 से अक्टूबर 25 तक मनाया जाएगा। आपसे मुनि दीक्षा गुरु श्री देवेंद्र कीर्ति स्वामी ने पुनः दीक्षा ली इस कारण आपको गुरुणाम गुरु की उपाधि दी गई। श्री सातगोंडा जी का जन्म सन 1872 में हुआ आपने सन 1915 में क्षुल्लक दीक्षा ,सन 1919 में ऐलक दीक्षा ,सन 1920 में मुनि दीक्षा ली ।और सन 1924 में आपको आचार्य पद पर विभूषित किया गया।</p>
<p><strong>आहारदान के कठोर नियम</strong></p>
<p>प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा को जानने का प्रयास करें। प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज द्वारा जो आहार लिया जाता था।वह आहार कुएं के पानी का कोयले की सिगडी पर बनता है जो आज भी वही परंपरा है। आहार देने वालो को आजीवन शूद्र जल त्याग त्याग का नियम होता है, वह सामूहिक रसोई में खाना नहीं खाते और अंग्रेजी लिक्विड दवाई का प्रयोग भी नहीं करते हैं। अंतरजातीय विवाह, विधवा विवाह वालों को आहार देने की तब से आज तक अनुमति नहीं हैं। आहार के वस्त्र पॉलीथिन में मान्य नहीं हैं। आहार के वस्त्र भी सूत नारियल की रस्सी या लोहे के तार पर सुखाना होते हैं । संघ में साधुओं का पड़गाहन कर परिक्रमा कर नवधाभक्ति, चरण प्रक्षालन, पूजन अर्घ्य चढ़ाया जाता हैं। संघ में जब आचार्य श्री दक्षिण से उत्तर भारत सम्मेद शिखर जी की यात्रा पर गए तब के पहले से संघ के साथ चलित मंदिर चेत्यालय भी साथ में रखा जिस पर पंचामृत और महिला अभिषेक होता रहा, जो आज भी आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा में जितने भी आचार्य साधु हुए हैं उन सभी के संघ में श्री जी के चेत्यालय आज भी रहते हैं जिनमें पंचामृत अभिषेक महिला अभिषेक हरे फल नारियल फल फूल नैवेद्य चढ़ाए जाते हैं।शासन देवी देवताओं का अनादर नही होता है</p>
<p><strong>सभी रसों का किया त्याग</strong></p>
<p>प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी वर्ष 1924 से वर्ष 1955 तक आचार्य पद पर रहे। संल्लेखना के कारण अपने प्रथम मुनि शिष्य श्री वीरसागर को लिखित पत्र से आचार्य पद दिया ।आचार्य श्री वीर सागर जी परंपरा के प्रथम पट्टाधीश सन 1955 से सन 1957 तक रहे। आपकी समाधि के बाद आपकी भावना इक्छा अनुसार शिष्य श्री शिव सागर जी परंपरा के सन 1957 से 16 फरवरी सन 1969 तक दिव्तीय पट्टाधीश होकर आचार्य पद पर रहे ।आपकी भावना अनुसार परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी 24 फरवरी 1969 को बनाए गए । यहां यह महत्वपूर्ण है कि आचार्य श्री शिव सागर जी के विद्यमान संयम साधना में रहते मुनि श्री ज्ञान सागर जी को नसीराबाद समाज ने 7 फरवरी 1969 को आचार्य बनाया। अर्थात आचार्य श्री शिव सागर जी की समाधि 16फरवरी 1969 के पूर्व श्री ज्ञान सागर जी आचार्य बने। आचार्य श्री धर्म सागर जी 24 फरवरी 1969 से 22 अप्रैल 1987 समाधि तक परंपरा के तृतीय पट्टाधीशआचार्य रहे। आपकी समाधि के बाद चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी संघ द्वारा बनाए गए। परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी 7 जून 1987 से समाधि होने सन 1990 तक आचार्य रहे। आपकी समाधि के बाद आचार्य श्री अजित सागर जी के लिखित आदेश पत्र अनुसार परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 24 जून 1990 आषाढ़ सुदी दूज से वर्तमान तक संयम साधना से धर्म प्रभावना कर रहे हैं ।श्री सातगोंडा जी का जन्म सन 1872 में हुआ। 9 वर्ष की उम्र में 6 वर्ष की कन्या से विवाह हुआ जो 6 माह जीवित रही। आपने 18 वर्ष की उम्र में आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत लिया। 32 वर्ष की उम्र से धी और तेल का आजीवन त्याग और एक समय भोजन का नियम लिया।आपने सन 1915 में क्षुल्लक दीक्षा ,सन 1919 में ऐलक दीक्षा ,सन 1920 में मुनि दीक्षा ली और सन 1924 में आपको आचार्य पद पर विभूषित किया गया। आपने 88 भव्य प्राणियों को संयम दीक्षा दी । 26 मुनि 5 आर्यिका ,16 ऐलक ,28 क्षुल्लक और 13 क्षुल्लिका दीक्षा दी । संयम काल में 9938 से अधिक उपवास किए। जैन मंदिर में विजातीय प्रवेश के विरोध में 1105 दिन अन्न आहार का त्याग किया । जिनालय ,जैन धर्म की संस्कृति जिनवाणी के संरक्षण के लिए आपकी प्रेरणा मील का पत्थर होकर स्वर्णिम इतिहास हैं ।आपने 18 करोड़ से अधिक मंत्र जाप किए। जीवन में सर्प,सिंह मकोड़े , चीटी मानव जन्य उपसर्ग समता भाव से सहन किए। अनेक बार आहार की विधि कई दिनों तक नही मिलने से आपके उपवास हुए। मिट्टी के कलश से पड़गाहन की विधि 8 दिन बाद मिली।अनेक वर्षों तक आहार में केवल दूध चावल पानी ही दिया। एक बार 8 दिनों तक आहार में पानी नही दिया 9 वे दिन आहार में केवल पानी ही लिया । एक बार अंजुली में अत्यधिक गर्म दूध देने से आप मूर्छित हो गए । आप उपवास इतने करते थे कि एक नगर में चातुर्मास में 6 माह में से 4 माह उपवास में निकल गए। देहली में शासकीय महत्वपूर्ण इमारतों के समक्ष इस कारण फोटो निकलवाए ताकि दिगंबर साधुओं का विहार में बाधा नहीं हो। निजाम राज्य में भी दिगंबर साधुओं के विहार पर रोक थी देवी सपने से निजाम अधिकारी ने आदेश वापस लिया ।</p>
<p>आचार्य श्री के बचपन,खेती के कपड़ा दुकान के स्वाध्याय संबंधी ,दूरदर्शिता बुद्धि कोशल, आहार चर्या,उपवास,उपसर्ग बाल विवाह पर रोक, अन्य समाज को मांसाहार के त्याग आदि बहुत प्रसंग दिल को द्रवित करते हैं । नेत्रों में मोतियाबिंद होने पर स्वस्थ होने के बाद भी संल्लेखना लेकर 36 दिनों में मात्र 12 बार जल लिया । एक नगर में चातुर्मास में पूरी अवधि सभी साधुओं ने रस का त्याग किया। आपकी समाधि सन1955 में हुई।</p>
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