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	<title>आचार्य पदारोहण दिवस &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>आचार्य पदारोहण दिवस &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य पदारोहण दिवस पर मुरैना में दी प्रेरणादायी देशना : हम गुरुओं को मानते हैं, लेकिन गुरुओं की नहीं मानते &#8211; जैनाचार्य निर्भयसागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:10:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हम गुरुओं और साधु-संतों की वाणी को सुनते तो हैं, लेकिन उसका अनुसरण नहीं करते। हम गुरुओं को मानते तो हैं, पर उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, जबकि गुरु वाणी के बिना हमारा उद्धार संभव नहीं है। जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना में अपने आचार्य पदारोहण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हम गुरुओं और साधु-संतों की वाणी को सुनते तो हैं, लेकिन उसका अनुसरण नहीं करते। हम गुरुओं को मानते तो हैं, पर उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, जबकि गुरु वाणी के बिना हमारा उद्धार संभव नहीं है। जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना में अपने आचार्य पदारोहण दिवस पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना (मनोज जैन नायक)।</strong> हम गुरुओं और साधु-संतों की वाणी को सुनते तो हैं, लेकिन उसका अनुसरण नहीं करते। हम गुरुओं को मानते तो हैं, पर उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते, जबकि गुरु वाणी के बिना हमारा उद्धार संभव नहीं है। जैनाचार्य, वैज्ञानिक संत आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज ने बड़े जैन मंदिर, मुरैना में अपने आचार्य पदारोहण दिवस पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए यह प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए।</p>
<p><strong>गुरु की आज्ञा का पालन ही आत्मकल्याण का आधार</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि जैन दर्शन में गुरु-आचार्यों को मोक्ष मार्ग का मार्गदर्शक मानकर सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु की आज्ञा की अवहेलना सम्यक ज्ञान और चारित्र की हानि का कारण बनती है, जिससे आत्मा का विकास रुक जाता है। उन्होंने बताया कि गुरु की अवज्ञा से शिष्य की साधना निष्फल हो सकती है, आध्यात्मिक पतन हो सकता है और कर्मों के बंधन के कारण मोक्ष मार्ग में बाधा उत्पन्न होती है। गुरु का अपमान करना गंभीर पाप कर्म है, जो जीव को निम्न गति की ओर ले जा सकता है।</p>
<p><strong>गुरु-शिष्य परंपरा में विश्वास आवश्यक</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा में विश्वास की कमी से ज्ञान मार्ग में अंधकार छा जाता है और सही-गलत की पहचान समाप्त हो जाती है। यदि शिष्य गुरु की आज्ञा का पालन नहीं करता, तो कठोर तपस्या भी निरर्थक हो जाती है। उन्होंने कहा कि गुरु के प्रति अविश्वास या अवज्ञा से सम्यक दर्शन प्रभावित होता है, जो मोक्ष की पहली सीढ़ी है। गुरु के अनुशासन में न रहने से शिष्य के चरित्र में भी दोष उत्पन्न होते हैं।</p>
<p><strong>गुरु कृपा से ही जीवन सफल &#8211; आचार्य श्री</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वे आज जो कुछ भी हैं, वह अपने गुरु आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी एवं आचार्य श्री विपुलसागर जी महाराज के आशीर्वाद से ही हैं।</p>
<p><strong>20वां आचार्य पदारोहण दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया</strong></p>
<p>सकल दिगंबर जैन समाज, मुरैना द्वारा आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज का 20वां आचार्य पदारोहण दिवस विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में मांगलिक क्रियाओं के साथ जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने विश्व शांति और सुख-समृद्धि की कामना के साथ भक्तिमय अनुष्ठान संपन्न किए।</p>
<p><strong>विधान, पूजन और भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन</strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत श्री महावीर स्वामी विधान में अर्घ्य समर्पित किए गए। तत्पश्चात आचार्य श्री का अष्टद्रव्यों से पूजन कर उनकी महिमा का गुणगान किया गया तथा दीर्घायु की कामना की गई। बालिका मंडल एवं महिला मंडल द्वारा अष्टद्रव्यों से भक्ति भावपूर्वक पूजन कर समस्त मुनिराजों को अर्घ्य समर्पित किए गए। गुरु भक्तों ने संगीत की मधुर धुन एवं जैन भजनों पर नृत्य कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने किया अभिषेक, पाद प्रक्षालन और सम्मान</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। श्रावक श्रेष्ठियों ने आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट किए। धर्मसभा का संचालन पूर्व प्राचार्य महेन्द्रकुमार शास्त्री, संजय शास्त्री, अजय भैयाजी एवं नवनीत शास्त्री द्वारा मंत्रोच्चार के साथ किया गया।</p>
<p><strong>निकलेगी भगवान महावीर की भव्य रथयात्रा</strong></p>
<p>भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर प्रातः श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर, मुरैना से भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी।</p>
<p>इस रथयात्रा में आचार्य श्री निर्भयसागर जी महाराज, मुनि श्री भूदत्तसागर जी महाराज, मुनि श्री सुदत्तसागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री चंद्रदत्तसागर एवं क्षुल्लक श्री यशोदत्तसागर महाराज सान्निध्य प्रदान करेंगे।</p>
<p><strong>भव्य शोभायात्रा और धार्मिक आयोजन रहेंगे आकर्षण</strong></p>
<p>भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा को रथ पर विराजमान कर नगर के प्रमुख मार्गों से शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो पुनः बड़े जैन मंदिर पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित होगी। मंदिर में भगवान को पाण्डुक शिला पर विराजमान कर कलशाभिषेक किया जाएगा। इसके पश्चात सामूहिक वात्सल्य भोज का आयोजन होगा। रात्रि में भगवान महावीर के बालरूप का पालना झुलाया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।</p>
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		<title>आचार्य पदारोहण दिवस मनाया आचार्य श्री विहर्ष सागर जी का मिला सानिध्य : शिक्षक सम्मेलन में गैर सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का सम्मान </title>
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		<pubDate>Sat, 14 Feb 2026 15:12:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री विहर्ष सागरजी का आचार्य पदारोहण दिवस आदिब्रह्मा आदिनाथ फाउंडेशन के तत्वावधान में सन्मति धाम में धूमधाम से मनाया गया। भींडर से पढ़िए, यह खबर&#8230; भींडर। आचार्यश्री विहर्ष सागरजी का आचार्य पदारोहण दिवस आदिब्रह्मा आदिनाथ फाउंडेशन के तत्वावधान में सन्मति धाम में धूमधाम से मनाया गया। आचार्यश्री विहर्ष सागर जी महाराज, मुनिश्री विजयेश सागरजी, ऐलकश्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्यश्री विहर्ष सागरजी का आचार्य पदारोहण दिवस आदिब्रह्मा आदिनाथ फाउंडेशन के तत्वावधान में सन्मति धाम में धूमधाम से मनाया गया। <span style="color: #ff0000">भींडर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भींडर।</strong> आचार्यश्री विहर्ष सागरजी का आचार्य पदारोहण दिवस आदिब्रह्मा आदिनाथ फाउंडेशन के तत्वावधान में</p>
<p>सन्मति धाम में धूमधाम से मनाया गया। आचार्यश्री विहर्ष सागर जी महाराज, मुनिश्री विजयेश सागरजी, ऐलकश्री नमनहर्ष सागरजी, आर्यिका विजेताश्री माताजी, आर्यिका मौलीहर्ष माताजी के सानिध्य में भींडर ब्लॉक के गैर सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों का सम्मेलन रखा गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में विकास जैन इंदौर और रमेश सोनी कूंथवास, महेंद्र स्वर्णकार ने दीप प्रज्वलित किया। मंगलाचरण वर्षारानी जैन और रेखा चौबीसा ने किया। आर्यिका मौलीहर्ष माताजी ने संगीतमय भक्ति आराधना के साथ अष्टद्रव्य से गुरु पूजन करवाया।</p>
<p><strong>बच्चों को गलत और सही की सीख देने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका</strong></p>
<p>आचार्यश्री विहर्ष सागर जी महाराज ने कहा कि भारत देश को आजाद करने के लिए जिन महापुरुषों ने अपना बलिदान दिया। आज भी उनको याद किया जाता है। वैसे ही शिक्षकगणों को चाहिए कि वह पूर्ण जिम्मेदारी के साथ बच्चों को लौकिक शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार देते हुए सदैव लक्ष्य के प्रति प्रेरित करते रहें ताकि जैसे आज महापुरुषों को याद किया जाता है वैसे शिक्षा ग्रहण करने वाला बालक भी अपने शिक्षक को भविष्य में अपना आदर्श मानकर याद करे। इस मोबाइल युग में बच्चों को गलत और सही की सीख देने में शिक्षकों को महत्वपूर्ण भूमिका अदा करनी चाहिए। तभी बालक घर, परिवार और राष्ट्र के लिए एक अच्छा व्यक्तित्व बन पाएगा।</p>
<p><strong>शिक्षकों को प्रतीक चिन्ह, डायरी पेन देकर सम्मानित किया</strong></p>
<p>मुनि श्री विजयेश सागरजी महाराज ने दिगंबर जैन संतों की कठिन तपस्या के बारे में विस्तृत प्रवचन किया।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान भींडर एवं आसपास के गांवों में संचालित गैर सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों का तिलक, उपरणा, प्रतीक चिन्ह, डायरी पेन देकर सम्मानित किया गया। संस्था निदेशक अनिल स्वर्णकार ने कहा कि शिक्षक सम्मान समारोह न केवल शिक्षकों के लिए एक प्रोत्साहन है, बल्कि यह समाज में शिक्षा और शिक्षकों के महत्व को भी रेखांकित करता है।</p>
<p><strong>पाद प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की</strong></p>
<p>धर्मसभा में आचार्य विहर्षसागरजी महाराज का पाद प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। समारोह में स्कूल शिक्षा परिवार ब्लॉक भिंडर अध्यक्ष कुशाल सिंह शक्तावत मांगीलाल सालवी, इंद्रदास वैष्णव, कैलाश शर्मा सहित विभिन्न स्कूलों के शिक्षक गण मौजूद थे। संचालन अनिल स्वर्णकार ने किया।</p>
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		<title>सनावद प्रवास हेतु पूज्य उपाध्याय श्री विश्रुतसागर जी ससंघ को श्रीफल भेंट किया : 2 नवंबर को होगा सनावद की ओर मंगल विहार, 3 नवंबर को विराग सागर जी का पदारोहण दिवस मनाया जाएगा </title>
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		<pubDate>Fri, 31 Oct 2025 11:51:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वाह नगर में विराजमान पूज्य उपाध्याय श्री विश्रुतसागर जी ससंघ को सनावद से पधारे श्रद्धालुओं ने आगामी प्रवास हेतु श्रीफल भेंट किया। उपाध्याय श्री 2 नवंबर को प्रातः सनावद नगर की ओर मंगल विहार करेंगे। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट… सनावद। सिद्धवरकूट से पदविहार कर बड़वाह नगर पहुंचे उपाध्याय श्री विश्रुतसागर जी ससंघ वर्तमान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बड़वाह नगर में विराजमान पूज्य उपाध्याय श्री विश्रुतसागर जी ससंघ को सनावद से पधारे श्रद्धालुओं ने आगामी प्रवास हेतु श्रीफल भेंट किया। उपाध्याय श्री 2 नवंबर को प्रातः सनावद नगर की ओर मंगल विहार करेंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> सिद्धवरकूट से पदविहार कर बड़वाह नगर पहुंचे उपाध्याय श्री विश्रुतसागर जी ससंघ वर्तमान में नगर में विराजमान हैं। उन्होंने इस वर्ष खंडवा में चातुर्मास संपन्न किया है और अब पुनः धर्मयात्रा हेतु खंडवा की ओर विहार करेंगे।</p>
<p>इसी क्रम में आज धर्मनगरी सनावद से पहुंचे श्रद्धालुओं ने पूज्य उपाध्याय श्री को आगामी सनावद प्रवास हेतु श्रीफल भेंट किया।</p>
<p>सन्मति जैन काका ने बताया कि पूज्य श्री का मंगल विहार 2 नवंबर की प्रातः 6:00 बजे सनावद नगर की ओर होगा, जहां चातुर्मासरत पूज्य मुनिश्री विश्वसूर्य सागर जी एवं साध्यसागर जी मुनिराज से मंगल मिलन होगा।</p>
<p>इसके साथ ही 3 नवंबर को सनावद नगर में आचार्य विराग सागर जी महाराज का 33वां आचार्य पदारोहण दिवस बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।</p>
<p>इस अवसर पर मुकेश जैन, सन्मति काका, सुधीर जैन, सरल जटाले, प्रशांत चौधरी, अचिंत्य जैन, सुनील पांवणा और अनुभव सराफ सहित समाज के अनेक श्रेष्ठिजन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>जयपुर हाउस जैन मंदिर में मनाया आयोजन : मनाया आचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज का 15वां आचार्य पदारोहण दिवस समारोह </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Dec 2024 03:29:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समाधिसम्राट गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज एवं उच्चारणाचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से श्रमणी आर्यिका विश्रेयश्री माताजी के मंगल सानिध्य में उच्चारणाचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज भक्तामर वाले बाबा का 15वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पढ़िये शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230;  आगरा। समाधिसम्राट गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज एवं उच्चारणाचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>समाधिसम्राट गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज एवं उच्चारणाचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से श्रमणी आर्यिका विश्रेयश्री माताजी के मंगल सानिध्य में उच्चारणाचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज भक्तामर वाले बाबा का 15वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िये शुभम जैन की रिपोर्ट&#8230; </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> समाधिसम्राट गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज एवं उच्चारणाचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से श्रमणी आर्यिका विश्रेयश्री माताजी के मंगल सानिध्य में उच्चारणाचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज भक्तामर वाले बाबा का 15वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। यह कार्यक्रम 12 दिसम्बर को श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर समिति के तत्वावधान में जयपुर हाउस स्थित टीचर्स कॉलोनी के श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर में बडे़ ही भक्तिभाव के साथ सानंद सम्पन्न किया गया।जिसमें उपस्थित श्रावक- श्राविकाओं ने नृत्य करते हुए अष्ट द्रव्यों की थाल सजाकर उच्चारणाचार्य श्री विनम्रसागर जी महाराज के चित्र को साक्षी मानकर संगीतमय पूजन किया।इस दौरान सौभाग्यशाली भक्तों ने गुरुमां का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद भक्तों को श्रमणी आर्यिका विश्रेयश्री माताजी की मंगल वाणी श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p>इसके साथ ही श्रमणी आर्यिका विश्रेयश्री माताजी ने भजन के मध्य से उच्चारणाचार्यश्री विनम्रसागर जी महाराज को 15वें आचार्य पदारोहण दिवस की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष राकेश जैन पर्देवाले, सुबोध जैन पाटनी,दीपक जैन नानकचंद पांडया, सुनील जैन ठेकेदार, सतीश जैन, सुशील जैन, अजित जैन,अजय बैनाड़ा,नीरज जैन जिनवाणी चैनल, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, समस्त जयपुर हाउस जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</p>
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		<title>कुंडलपुर में हुआ भव्य आयोजन :  आचार्य पदारोहण दिवस मुनि आर्यिका संघ सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया </title>
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		<pubDate>Mon, 18 Nov 2024 07:20:08 +0000</pubDate>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में परम पूज्य समाधि सम्राट संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस आयोजन में परम पूज्य मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी महाराज, मुनि श्री निर्दोष सागर जी महाराज, और आर्यिकारत्न श्री मृदुमति माताजी ससंघ के सानिध्य में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।<span style="color: #ff0000"> पढ़िए राजीव सिंघई की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर, (दमोह)।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में परम पूज्य समाधि सम्राट संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस आयोजन में परम पूज्य मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी महाराज, मुनि श्री निर्दोष सागर जी महाराज, और आर्यिकारत्न श्री मृदुमति माताजी ससंघ के सानिध्य में विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इस अवसर पर प्रातः काल भक्तामर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा, पूजन और विधान का आयोजन किया गया, जिसमें आचार्य श्री विद्यासागर जी की पूजन विधि भी संपन्न हुई। पूज्य मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी महाराज और आर्यिका श्री मृदुमति माताजी के सानिध्य में कार्यक्रम की धारा आगे बढ़ी।</p>
<p>दोपहर 1:30 बजे विद्या भवन में मुनि संघ और आर्यिका संघ के सानिध्य में आचार्य पदारोहण दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन और मुनि-आर्यिका संघ को शास्त्र भेंट करने की पवित्र परंपरा का पालन किया गया। पूज्य आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज और पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की भक्ति भाव से पूजन किया गया। इसके बाद, पूज्य मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी महाराज, आर्यिकारत्न श्री मृदुमति माताजी, और आर्यिकारत्न श्री निर्णय मति माताजी ने मंगल प्रवचन किए। इस अवसर पर 53 दीपों से संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की महाआरती की गई, जो श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है। संध्याकाल में भक्तामर दीप अर्चना और पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महा आरती का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी, तीर्थ यात्री, कुंडलपुर जैन समाज के सदस्य, ब्रह्मचारी भैया जी और दीदी जी, साथ ही महिला वर्ग की भी उपस्थिति रही, जिन्होंने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।</p>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन :  आचार्य श्री विद्यासागर जी हम शिष्यों व भक्तों के पुण्य से आचार्य बने- मुनि श्री सुधासागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Mon, 18 Nov 2024 07:16:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महान व्यक्ति दो प्रकार के होते हैं। एक वह जो अपनी साधना, तपस्या और पुण्य से महान बनते हैं। वे अपनी आत्मिक यात्रा में आगे बढ़ते हैं। दूसरी प्रकार की महान आत्माएं वे होती हैं, जो निमित्त की शक्ति से महान बनती हैं। निमित्त की शक्ति उपादान शक्ति को जाग्रत करती है। निमित्त का अपना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महान व्यक्ति दो प्रकार के होते हैं। एक वह जो अपनी साधना, तपस्या और पुण्य से महान बनते हैं। वे अपनी आत्मिक यात्रा में आगे बढ़ते हैं। दूसरी प्रकार की महान आत्माएं वे होती हैं, जो निमित्त की शक्ति से महान बनती हैं। निमित्त की शक्ति उपादान शक्ति को जाग्रत करती है। निमित्त का अपना इतना बड़ा पुण्य होता है कि वह महान आत्मा की शक्ति को जाग्रत कर देता है, जो शक्ति उस आत्मा में पहले से थी, लेकिन वह स्वयं उसे जागृत नहीं कर पाता। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्म सभा में कही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> महान व्यक्ति दो प्रकार के होते हैं। एक वह जो अपनी साधना, तपस्या और पुण्य से महान बनते हैं। वे अपनी आत्मिक यात्रा में आगे बढ़ते हैं। दूसरी प्रकार की महान आत्माएं वे होती हैं, जो निमित्त की शक्ति से महान बनती हैं। निमित्त की शक्ति उपादान शक्ति को जाग्रत करती है। निमित्त का अपना इतना बड़ा पुण्य होता है कि वह महान आत्मा की शक्ति को जाग्रत कर देता है, जो शक्ति उस आत्मा में पहले से थी, लेकिन वह स्वयं उसे जागृत नहीं कर पाता। यह बात मुनि श्री सुधासागर महाराज ने धर्म सभा में कही। उन्होंने कहा कि जैसे तीर्थंकरों की प्रकृति कभी आत्मकल्याण के भाव से जागृत नहीं होती, वह केवल भव्य जीवों के पुण्य से तीर्थंकर की शक्ति को प्राप्त करती है। वह महावीर स्वामी का पुण्य नहीं होता, बल्कि वह पुण्य भक्तों के पुण्य से उन आत्माओं में बंधता है।</p>
<p><strong>पुण्य और पुरुषार्थ से तपस्या</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि मैंने आचार्य श्री से कहा था कि आपने मुनि बनने के लिए अपने पुण्य और पुरुषार्थ से तपस्या की, लेकिन आचार्य बनने के लिए आप हमारे सभी भक्तों के पुण्य से बने हैं। हमारी भवितव्यता ने एक मुनि महाराज को आचार्य पद पर प्रतिष्ठापित किया। तीर्थंकर और आचार्य पद दोनों ही नैमित्तिक पद होते हैं, जो आत्मकल्याण में कोई सहायक नहीं होते। हम उत्तरभारत के लोगों का इतना पुण्य था कि हमसे दक्षिण में जन्म लेने वाले एक व्यक्ति को उत्तर में आकर आचार्य पद पर प्रतिष्ठित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज के मन में सन 1968 तक आचार्य बनने का कोई विचार नहीं था। जब उन्होंने मुनि विद्यासागर का पूरा व्यक्तित्व और ज्ञान देखा, तो उन्होंने मन बना लिया। अच्छे साधुओं को आचार्य पद पर प्रतिष्ठित करने के लिए समाज और संघ का संकल्प होता है। प्रायः आचार्य पद उन साधुओं को ही दिया जाता है, जो महान होते हैं। पूज्य आचार्य शांतिसागर जी महाराज को उनके दीक्षित शिष्य ही आचार्य बना पाए थे, क्योंकि उस समय कोई स्पष्ट परंपरा नहीं थी। वीरसागर जी की समाधि के बाद शिवसागर जी को और शिवसागर जी की समाधि के बाद धर्मसागर जी को संघ ने आचार्य बनाया क्योंकि उनके आचार्य की आकस्मिक समाधि हो गई थी।</p>
<p><strong>गुरु भक्ति जरूरी</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जब आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज ने सहज रूप से आचार्य पद स्वीकार किया, तो किसी ने पूछा कि आपने तो स्वयं आचार्य पद स्वीकार किया, आप तो जैसे इसके लिए तैयार ही थे। यह तो आपका समय था, लेकिन उन्होंने कहा, &#8220;यह आचार्य पद मैंने अपने लिए नहीं, मुनि विद्यासागर के लिए लिया है।&#8221; पूरी समाज और संसार का लगाव कभी आचार्य बनने के लिए नहीं हो सकता, न ही कोई आचार्य बना सकता है। इसके लिए गुरु भक्ति का ही उपयोग करना पड़ता है। उन्होंने निमित्त से यह जान लिया था कि यदि मुनि विद्यासागर आचार्य बन गए, तो न जाने कितनों का कल्याण होगा।</p>
<p><strong>खुशी का दिन</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि आचार्य ज्ञानसागर जी के मन में यह विचार आया कि यदि मुनि विद्यासागर आचार्य बन गए, तो लोग कहेंगे कि कुन्दकुन्द का जीवंत अवतार हुआ है। कुन्दकुन्द जीवित हो जाएंगे। गुरु आज्ञा का पालन करते हुए, आचार्य श्री के इस समर्पण का लाभ आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने लिया और 22 नवम्बर, मगसिर कृष्णा द्वादशी के दिन, जैसे भरत और राम का कार्य हुआ था, वैसे ही आचार्य ज्ञानसागर और मुनि विद्यासागर का कार्य हुआ। यह कोई साधारण शक्ति नहीं थी, जिसने बुंदेलखंड से इतने रत्न निकाले। इतने आर्यिकाएं, इतने मुनि महाराज, और बड़े-बड़े संघ आए, लेकिन बुंदेलखंड की खदान को कोई नहीं खोल पाया। आचार्य श्री का यह खुशी का दिन है, आषाढ़ सुदी पंचमी और आज का दिन है, हम सभी शिष्यों और भक्तों की खुशी का दिन है, क्योंकि आचार्य श्री हमारे पुण्य से आचार्य बने।</p>
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		<title>मुनि श्री सुधासागर महाराज की रहेगी प्रेरणा :  आचार्य विद्यासागर जी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा </title>
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		<pubDate>Thu, 14 Nov 2024 11:06:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर (राजेश जैन दद्दू)। परमपूज्य, विश्ववंदनीय और युगश्रेष्ठ आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस पूरे भारतवर्ष में जैन समाज द्वारा अपने-अपने मंदिरों और घरों में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर परमपूज्य निर्यापक श्रमण जगतपूज्य मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज के आशीर्वाद और प्रेरणा से [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर (राजेश जैन दद्दू)।</strong> परमपूज्य, विश्ववंदनीय और युगश्रेष्ठ आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस पूरे भारतवर्ष में जैन समाज द्वारा अपने-अपने मंदिरों और घरों में बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर परमपूज्य निर्यापक श्रमण जगतपूज्य मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज के आशीर्वाद और प्रेरणा से यह दिन विशेष रूप से मनाया जाएगा।</p>
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		<title>समाजजनों ने किया भव्य पंचामृत अभिषेक : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 35वां आचार्य पदारोहण दिवस भक्ति भाव से मनाया </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Jul 2024 07:00:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ निमाड़ की माटी के लाल नगर गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 35ंवा आचार्य पदारोहण दिवस समाज जनों के द्वारा बड़े हर्सोल्लास व भक्तिभाव से मनाया। आचार्य श्री का सामूहिक पूजन में भिन्न भिन्न प्रकार के अर्घ्य व नेवैद्य समर्पित किए गए। पढ़िए सन्मति जैन की रिपोर्ट&#8230; सनावद। निमाड़ की माटी के लाल नगर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> निमाड़ की माटी के लाल नगर गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 35ंवा आचार्य पदारोहण दिवस समाज जनों के द्वारा बड़े हर्सोल्लास व भक्तिभाव से मनाया। आचार्य श्री का सामूहिक पूजन में भिन्न भिन्न प्रकार के अर्घ्य व नेवैद्य समर्पित किए गए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>सनावद।</strong> निमाड़ की माटी के लाल नगर गौरव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का 35ंवा आचार्य पदारोहण दिवस समाज जनों के द्वारा बड़े हर्सोल्लास व भक्तिभाव से मनाया। सन्मति जैन ने बताया कि इस अवसर पर दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में प्रातः7 बजे से सुनील मास्टर साब, अचिंत्य जैन, नवनीत जैन, रदेश जैन, कमल जटाले सहित सभी समाजजनों द्वारा भव्य पंचामृत अभिषेक किया गया। तत्पश्चात आचार्य श्री का सामूहिक पूजन में भिन्न भिन्न प्रकार के अर्घ व नेवैद्य,पुष्पा जैन, मीना जटाले,अंजू पाटनी, पुष्पा जैन ,सरला जैन,के द्वारा समर्पित किये गए।</p>
<p>तत्पश्चात सभी भक्तों के द्वारा आचार्य श्री के चित्र के समक्ष सभी के द्वारा भक्ति की गई। जैसा कि सभी को ज्ञात है कि आज साक्षात चारित्र चक्रवर्ती 20 वी सदी के प्रथमआचार्य शान्ति सागर जी के चरित्र को चरितार्थ कर पूरे विश्व मे वो उनकी परम्परा का निर्वहन कर रहे हैं। एक ऐसी शान एक ऐसी विभूति जिन्होंने एक नहीं दो नहीं तीन तीन बार बाहुबली भगवान के महा मस्तकाभिषेक करवाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। लोग एक बार जाने को तरसते हैं कि एक बार गोमटेश्वर बाहुबली भगवान के दर्शन हो जाएं लेकिन जब भी इतिहास लिखा जाएगा जब जब बाहुबली भगवान के साथ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का नाम भी लिखा जाएगा।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-63120" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240708-WA0018.jpg" alt="" width="600" height="800" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240708-WA0018.jpg 600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/07/IMG-20240708-WA0018-225x300.jpg 225w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" />एक ऐसे आचार्य जिन्होंने एक साथ तीन-तीन बार भगवान बाहुबली के पंचकल्याणक महा मस्तकाभिषेक कराने का सौभाग्य प्राप्त किया है। ऐसे आचार्य का गुणगान करना अतिशयोक्ति नही होगी। 35वर्ष पूर्व आषाढ़ सुदी दूज व तारीख  के हिसाब से 24 जून 1990 को पारसोला राजस्थान में आचार्य श्री 108 अजीत सागर जी महाराज के द्वारा आपको आचार्य पद प्रदान किया गया था। आप वर्तमान में बांसवाड़ा में विराजमान होकर धर्म की प्रभावना कर रहे हैं।</p>
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		<title>समाजजनों ने की अनुमोदना : बाल ब्रह्मचारी नमन भैया ने 2 प्रतिमा के व्रत ग्रहण किया </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Jul 2024 06:56:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ नगर के युवा संयमी ब्रह्मचारी नमन भैया ने परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज के 35 वें आचार्य पदारोहण दिवस (आषाढ़ शुक्ल दूज) के पावन शुभ अवसर बांसवाड़ा, राजस्थान में परम पूज्य गुरुवर से श्रावक के दो प्रतिमा के व्रत ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य किया। पढ़िए सन्मति जैन रिपोर्ट.. सनावद। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> नगर के युवा संयमी ब्रह्मचारी नमन भैया ने परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज के 35 वें आचार्य पदारोहण दिवस (आषाढ़ शुक्ल दूज) के पावन शुभ अवसर बांसवाड़ा, राजस्थान में परम पूज्य गुरुवर से श्रावक के दो प्रतिमा के व्रत ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सन्मति जैन रिपोर्ट..</span></strong></p>
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<p><strong>सनावद।</strong> नगर के युवा संयमी ब्रह्मचारी नमन भैया ने परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज के 35 वें आचार्य पदारोहण दिवस (आषाढ़ शुक्ल दूज) के पावन शुभ अवसर बांसवाड़ा, राजस्थान में परम पूज्य गुरुवर से श्रावक के दो प्रतिमा के व्रत ग्रहण कर अपने जीवन को धन्य किया।</p>
<p>उनके इन उज्ज्वल भावों की सभी समाज जनों ने अनुमोदना की। सन्मति जैन काका ने बताया कि आप नगर के श्रीकांत प्रिति जटाले पुत्र हैं। आप वर्तमान में सनावद नगर के ही युगल मुनि परम पूज्य मुनि 108 अपूर्व सागर जी एवं मुनि श्री 108 अर्पित सागर जी महाराज के संघ में रह कर धर्म की प्रभावना कर रहे हैं।</p>
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		<title>श्रद्धा और भक्ति की बहेगी बयार : 35वां 35वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया जाएगा अनेक धार्मिक कार्यक्रमों के साथ </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jul 2024 07:42:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का त्रिदिवसीय 35वां आचार्य पदारोहण दिवस बांसवाड़ा में मनाया जाएगा। प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के 74 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 48 साधु सहित बाहुबली कॉलोनी बांसवाड़ा में विराजित हैं। पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट&#8230; बांसवाड़ा। पंचम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का त्रिदिवसीय 35वां आचार्य पदारोहण दिवस बांसवाड़ा में मनाया जाएगा। प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के 74 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 48 साधु सहित बाहुबली कॉलोनी बांसवाड़ा में विराजित हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का त्रिदिवसीय 35वां आचार्य पदारोहण दिवस बांसवाड़ा में मनाया जाएगा। प्रथमाचार्य चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के 74 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 48 साधु सहित बाहुबली कॉलोनी बांसवाड़ा में विराजित हैं। सकल दिगंबर जैन समाज बाहुबली कॉलोनी बांसवाड़ा द्वारा आगामी 5 जुलाई से 7 जुलाई तीन दिवसीय आचार्य पदारोहण कार्यक्रम श्रद्धा और भक्ति भावपूर्वक मनाया जाएगा। समाज अध्यक्ष महेंद्र वोरा कमल सगरीया एवं समाज प्रवक्ता महेंद्र कवालिया ने बताया कि इस अवसर पर तीनों दिन कार्यक्रम होंगे। इस मंगल मय पावन प्रसंग पर श्री क्षेत्र श्रवण बेलगोला के भट्टारक स्वामी जी सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रहेगी।</p>
<p>पांच जुलाई को प्रातकाल श्रीजी के अभिषेक शांतिधारा, पूजन और विन्याजंलि सभा पश्चात आचार्य श्री के प्रवचन होंगे। दोपहर को श्री शांतिविधान और शाम को श्रीजी एवम आचार्य श्री आरती एवं भजन संध्या होगी, ।6 जुलाई को प्रातःकाल अभिषेक ,शांति धारा ,पूजन के पश्चात आचार्य श्री के विन्यांजली सभा होगी पश्चात आचार्य श्री के प्रवचन होंगे ।दोपहर को आचार्य वर्धमान सागर मंडल विधान पर पूजन होगी शाम को श्री जी एवंम आचार्य श्री की आरती पश्चात वात्सल्य वारिधी आचार्य वर्धमान सागर जी के जीवन पर भव्य नाटिका की प्रस्तुति की जाएगी। अंतिम दिवस 7 जुलाई को प्रातः काल अभिषेक पूजन शांति धारा के पश्चात विनयाजंलि सभा आचार्य श्री के प्रवचन होंगे दोपहर को विशाल शोभायात्रा का समापन पांडाल में होगा। आचार्य श्री की 35 द्रव्यों से भव्य पूजन की जावेगी। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरणप्रक्षालन, जिनवाणी भेंट और नवीन मयूर पिच्छी पुण्यार्जक परिवार द्वारा दी जाएगी, शाम को 108 दीपक से आरती होगी। राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का जन्म सनावद मध्यप्रदेश में 18 सितम्बर 1950 को हुआ। आपने 18 वर्ष की उम्र में गृह त्याग कर मात्र 19 वर्ष की आयु में तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी से महावीर जी में 24 फरवरी 1969 को सीधे मुनि दीक्षा ली।</p>
<p>चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी की समाधि पश्चात लिखित पत्र में आदेश अनुसार 24 जून 1990 आषाढ़ शुक्ला दूज को पारसोला में आचार्य पद दिया गया।आपने वर्ष 1993,वर्ष 2006 वर्ष 2018 में भगवान श्री बाहुबली का तथा वर्ष 2022 में श्री महावीर स्वामी का महामस्तकाभिषेक आपके प्रमुख सानिध्य में हुआ। अभी तक 56 वर्षायोग हुए हैं। इन 56 वर्षों में 107 दीक्षाए प्रदान की हैं। आपकी प्रेरणा से प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी का आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव अक्टूबर माह वर्ष 2024 से अक्टूबर माह 2025 तक सम्पूर्ण देश में मनाया जाएगा।</p>
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