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	<title>आचार्य निर्भय सागरजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>अंतरंग की भावना के अनुरूप होती है परिणामों की प्राप्ति : आचार्य निर्भय सागरजी का हुआ भव्य मंगल प्रवेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 10:35:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हमने भगवान महावीर के सिद्धांतों को हृदय से स्वीकार किया होता, उनके सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया होता तो आज सम्पूर्ण विश्व में सत्य अहिंसा का बोलबाला होता । यह उद्गार आचार्य श्रीनिर्भयसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुरैना से पढ़िए, यह खबर&#8230; मुरैना। भगवान महावीर स्वामी ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>हमने भगवान महावीर के सिद्धांतों को हृदय से स्वीकार किया होता, उनके सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया होता तो आज सम्पूर्ण विश्व में सत्य अहिंसा का बोलबाला होता । यह उद्गार आचार्य श्रीनिर्भयसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> भगवान महावीर स्वामी ने जो सिद्धांत हमें दिए, उन सिद्धांतों को हमने हृदय से स्वीकार नहीं किया। उनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों का हमने प्रचार-प्रसार नहीं किया । यदि हमने भगवान महावीर के सिद्धांतों को हृदय से स्वीकार किया होता, उनके सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया होता तो आज सम्पूर्ण विश्व में सत्य अहिंसा का बोलबाला होता । यह उद्गार आचार्य श्रीनिर्भयसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्य श्रीनिर्भयसागर महाराज ने जैन दर्शन को समझाते हुए कहा कि जैन धर्म भावना प्रधान धर्म है। जैसी हमारी भावना होती है, जैसे हमारे अंतरंग में विचार आते है, उसी के अनुरूप हमें परिणाम मिलते हैं। हमें अपने अंतरंग में कभी भी अशुभ अथवा गलत विचार नहीं लाने चाहिए। सदैव हमें शुभ विचारों को अंतरंग में रखना चाहिए। हमें अच्छी भावना रखते हुए प्राणी मात्र के कल्याण हेतु प्रयत्नशील रहना चाहिए। हम लोगों ने जैन धर्म के सिद्धांतों को एक समुदाय विशेष के सिद्धांत मानकर अपने तक ही सीमित कर लिया। अच्छा होता यदि हम उनके सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करते। हम सभी केवल मंदिर के अंदर ही अपने तीर्थंकरों के कल्याणक मनाते हैं, पंच कल्याणक करते हैं, जयंतियां मनाते हैं, किंतु उनके जीवन चरित्र के बारे में, उनके सिद्धांतों के संदर्भ में अथवा उनकी चर्या के संबंध में कोई भी प्रचार-प्रसार नहीं करते। हम सभी का कर्तव्य है कि भगवान महावीर स्वामी के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रयत्नशील रहें।</p>
<p><strong>पाद प्रक्षालन एवं आरती कर अगवानी की</strong></p>
<p>आचार्य श्रीनिर्भयसागरजी महाराज ससंघ का मुरैना नगर में भव्य मंगल आगमन हुआ । आचार्य श्री निर्भयसागर महाराज ने अपने शिष्यों मुनिश्री सुदत्तसागरजी, मुनिश्री भूदत्तसागरजी, क्षुल्लकश्री चंद्रदत्तसागरजी, क्षुल्लकश्री यशोदत्तसागरजी के साथ श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर में धर्म प्रभावना करने के बाद पद विहार करते हुए मुरैना पधारे। मुरैना जैन समाज के साधर्मी बंधुओं ने नगर सीमा में पहुंचकर पूज्यश्री के श्री चरणों में श्रीफल भेंटकर आचार्य संघ की अगवानी की। आचार्यश्री के संघ को पुलिस पेट्रोल पम्प से गाजे-बाजे के साथ भव्य शोभा यात्रा के रूप में नगर के प्रमुख मार्गो से भ्रमण कराते हुए श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा जैन मंदिर लाया गया । शोभायात्रा में नन्हें-मुन्ने बच्चे हाथों में पचरंगी ध्वजा लेकर चल रहे थे। साधर्मी बंधु एवं महिलाएं श्री जिनेन्द्र प्रभु के जयकारों एवं उनके भक्तिमय भजनों का गायन करती हुई चलायमान थीं। शोभायात्रा के भ्रमण के दौरान विभिन्न स्थानों पर पूज्य आचार्य संघ का पाद प्रक्षालन एवं आरती कर अगवानी की गई। भव्य शोभायात्रा पुलिस पेट्रोल पंप से प्रारंभ होकर सूबात रोड, पुल तिराहा, हनुमान चौराहा, झंडा चौक, सराफा बाजार, लोहिया बाजार होती हुई बड़ा जैन मंदिर पहुंचकर धर्मसभा में परिवर्तित हुई।</p>
<p><strong>आचार्य संघ के श्री चरणों में श्रीफल भेंट</strong></p>
<p>धर्म सभा का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। सभा के प्रारंभ में साधर्मी बंधुओं ने आचार्यश्री निर्भयसागरजी महाराज का पाद प्रक्षालन किया। आचार्य संघ का सान्निध्य भगवान महावीर स्वामी जन्म कल्याणक महोत्सव तक रहेगा। जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के मुख्य संयोजक डालचंद जैन डल्लो, संयोजक मनीष जैन, पदमचंद जैन, नीलेश जैन, पदमचंद चौधरी ने आचार्य संघ के श्री चरणों में श्रीफल भेंटकर जन्म कल्याणक महोत्सव में सान्निध्य प्रदान करने का निवेदन किया। संचालन प्रतिष्ठाचार्य पंडित संजय शास्त्री सिहोनिया ने किया।</p>
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		<title>लालच वासना से ही पनप रहे समाज में अपराध: आचार्य निर्भय सागरजी ने  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 Aug 2025 13:19:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन अटामंदिर में दिगंबर जैन पंचायत समिति के सहयोग एवं अखिल भारतीय जैन बैंकर्स फोरम के संयोजन में आचार्य श्री निर्भयसागरजी ससंघ के सानिध्य में साइबर क्राइम के दुष्प्रभाव पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें बैंकर्स एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने चर्चा की और विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन अटामंदिर में दिगंबर जैन पंचायत समिति के सहयोग एवं अखिल भारतीय जैन बैंकर्स फोरम के संयोजन में आचार्य श्री निर्भयसागरजी ससंघ के सानिध्य में साइबर क्राइम के दुष्प्रभाव पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें बैंकर्स एवं पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने चर्चा की और विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> लालच और वासना को अपराध की जड़ बताते हुए आचार्यश्री निर्भय सागरजी महाराज ने कहा कि इन्हीं से समाज में साइबर क्राइम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बुरी आदतें सुधारने और मन की तरंगों पर नियंत्रण रखने से व्यक्ति अपराधिक प्रवृत्ति पर लगाम लगा सकता है। वर्तमान में मोबाइल जितना जरूरी है। उतना ही इसका दुष्प्रभाव घातक है, जिसके लिए सावधानी बरतनी होगी। जैन अटामंदिर में दिगंबर जैन पंचायत समिति के सहयोग एवं अखिल भारतीय जैन बैंकर्स फोरम के संयोजन में आचार्य श्री निर्भयसागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में साइबर क्राइम के दुष्प्रभाव पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें बैंकर्स एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तार से चर्चा की और इसके विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-87335" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250810-WA0030.jpg" alt="" width="1280" height="591" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250810-WA0030.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250810-WA0030-300x139.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250810-WA0030-1024x473.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250810-WA0030-768x355.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/08/IMG-20250810-WA0030-990x457.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />किसी प्रकार की घटना होने पर बैंक से मदद लें</strong></p>
<p>कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पुलिस क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम सुनील भारद्वाज एवं क्षेत्रीय प्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक सर्वेश त्रिपाठी रहे। जिन्होंने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। बैंकर्स फोरम के संरक्षक सनत जैन खजुरिया ने कार्यशाला की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समय में जरूरी बताया। कार्यशाला में क्षेत्राधिकारी सुनील भारद्वाज ने सोशल मीडिया का उपयोग सावधानी से करने एवं अनजान व्यक्तियों को व्यक्तिगत जानकारी देने से बचने की सलाह दी। क्षेत्रीय प्रबंधक सर्वेश त्रिपाठी ने बैंकिंग एकाउंट के रखरखाव और इसका सही उपयोग करने की सीख दी तथा किसी प्रकार की घटना होने पर बैंक से मदद लेने को कहा। साइबर क्राइम ब्रांच से अबुल हसन ने मोबाइल आदि के उपयोग के संबंध में होने वाली लापरवाही से उपस्थित जनसमुदाय को जागरूक किया।</p>
<p><strong>अतिथियों का सम्मान किया गया </strong></p>
<p>कार्यशाला में व्यापार मंडल के प्रांतीय चेयरमैन महेंद्र जैन मयूर, इंस्पेक्टर पुलिस वीरेंद्र सिंह, गौतम पुनिया, पवन कुमार, प्रद्युम्न कुमार के अतिरिक्त विभिन्न बैंकों के बैंकर्स अधिकारी उपस्थित रहे। जिनका दिगंबर जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, कैप्टन राजकुमार जैन, अनिल जैन अंचल, सतीश नजा, दिलीप चौधरी, राजेन्द्र जैन थनवारा, अक्षय अलया, आनंद जैन, संजीव जैन ममता स्पोर्ट, अशोक दैलवारा,मनोज जैन बबीना, श्रेयांस जैन गदयाना, धन्यकुमार जैन एवं बैंकर्स फोरम से विजय जैन लागौन अध्यक्ष राजकुमार सराफ, महिपाल जैन, केवलचंद जैन, सुनील जैन, सौरभ जैन ने कार्यशाला के मुख्य अतिथि को सम्मानित किया। संचालन महामंत्री जैन पंचायत आकाश जैन ने किया। कार्यशाला के प्रारंभ में जैन शिक्षक सामाजिक समूह के अध्यक्ष जितेंद्र जैन राजू, राहुल जैन, अन्तिम जैन, सत्येन्द्र जैन गदयाना, धीरेन्द्र जैन, अनूप चौधरी, राहुल जैन, दीप्ति जैन, सोनम जैन,नीता जैन ने आचार्य श्री को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद ग्रहण किया।</p>
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		<title>आचार्य निर्भय सागर का कथन अहंकारी नहीं भक्त बनो : आचार्यश्री ने समाज के विभिन्न रूपों से करवाया परिचय                   </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Jun 2025 14:31:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संत आचार्यश्री निर्भय सागरजी संघ का सहित बडे़ मंदिर महरौनी में 10 दिवसीय प्रवास रहा। प्रतिदिन प्रातः आचार्यश्री के मंगल प्रवचन एवं शाम को शंका समाधान का कार्यक्रम संयोजित किया गया। शुक्रवार को भी यहां धर्म सभा हुई। इसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने उनकी देशना सुन धर्मलाभ अर्जित किया। महरौनी से राजीव सिंघई की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>संत आचार्यश्री निर्भय सागरजी संघ का सहित बडे़ मंदिर महरौनी में 10 दिवसीय प्रवास रहा। प्रतिदिन प्रातः आचार्यश्री के मंगल प्रवचन एवं शाम को शंका समाधान का कार्यक्रम संयोजित किया गया। शुक्रवार को भी यहां धर्म सभा हुई। इसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने उनकी देशना सुन धर्मलाभ अर्जित किया। <span style="color: #ff0000">महरौनी से राजीव सिंघई की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी।</strong> आचार्यश्री निर्भय सागरजी संघ का सहित बडे़ मंदिर महरौनी में 10 दिवसीय प्रवास रहा। प्रतिदिन प्रातः आचार्यश्री के मंगल प्रवचन एवं शाम को शंका समाधान का कार्यक्रम संयोजित किया गया। शुक्रवार को भी यहां धर्म सभा हुई। इसमें बड़ी संख्या में समाजजनों ने उनकी देशना सुन धर्मलाभ अर्जित किया। आचार्यश्री निर्भयसागरजी ने धर्मसभा में उपदेश देते हुए कहा कि समाज अनेक प्रकार के होते हैं। जैसे स्वार्थी समाज, परमार्थी समाज, स्वस्थ समाज, धार्मिक समाज, भक्त समाज, व्यसनी सम, हिंसक समाज, अहिंसक समाज और उपकारी समाज। हमें उपकारी, अहिंसक, स्वस्थ समाज का निर्माण करना है। यही जैन धर्म का मूल उद्देश्य है। जैन समाज स्वयं परमार्थी, उपकारी, धार्मिक और अहिंसक समाज है। परस्पर उपकार करने वाला समाज स्वस्थ समाज कहलाता है। परस्परता के सूत्र में बंध जाने पर परोपकार की भावना पैदा होती है और संघर्ष समाप्त हो जाता है। जो समाज भगवान की भक्ति करता है, परिवार और समाज की सेवा में लीन रहता है। वह भक्त समाज कहलाता है।</p>
<p><strong>विनय को मोक्ष का द्वार कहा है</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने धर्मसभा में कहा कि भक्ति रूपी चाबी से मुक्ति महल में लगा ताला खुल जाता है। विनय करने से मोक्ष महल में लगा हुआ दरवाजा खुलता है, इसलिए विनय को मोक्ष का द्वार कहा है। भक्त और भगवान के बीच संबंध जोड़ने में भक्ति सेतु का काम करती है, भक्ति आत्म उत्थान का सूत्र है। परोपकार समाज उत्थान का सूत्र है। सेवा परिवार के उत्थान का सूत्र है। आचार्य श्री ने कहा कि जिस व्यक्ति के अंदर भक्ति की हवा भरी होती है। वह वालीबाल के समान होता है। उसे लोग गिरने नहीं देते बल्कि हाथों हाथों में लिए रहते हैं, लेकिन जिसके अंदर अहंकार की हवा भरी होती है। वह फुटबाल के समान होता है उसे कोई हाथ नहीं लगाता है। फुटबाल के समान अहंकारी व्यक्ति का स्थान पैरों के नीचे होता है। वह संसार की ठोकर खाता रहता है।</p>
<p><strong>ललितपुर तब तक ना छोड़िए जब तक ना हो उद्धार</strong></p>
<p>अपने जीवन को फुटबाल नहीं वालीबाल बनाना चाहिए। तभी समाज में इज्जत होगी और स्वर्ग की ओर आत्मा की गति होगी। संसारी प्रत्येक मानव को जन्म जरा मृत्यु रोग अनादि काल से लगे हुए है। प्रत्येक संसारी प्राणी आहार, भय, मैथुन और अपरिग्रह संज्ञा से पीड़ित है। इस पीड़ा को धर्म रूप औषधि से दूर किया जा सकता है। आचार्य श्री ने बुंदेलखंड में चलने वाली कहावत के अनुसार कहा कि झांसी गले की फांसी, दतिया गले का हार, ललितपुर तब तक ना छोड़िए जब तक ना हो उद्धार। पूजा, भक्ति एवं आरती की परंपरा अनादि कालीन है। प्रातः काल देवकी पूजा करना चाहिए। दोपहर में गुरु को आहार दान रूपी भक्ति करना चाहिए और शाम को संध्याकाल में धर्मशास्त्र की आरती करना चाहिए। यही त्रिकाल वंदना है। भक्ति है और पूजा है। इसको करने वाला तीन लोक का नाथ बन जाता है। प्रवचन के बाद आचार्य संघ की आहार चर्या हुई। सामायिक करने के बाद आचार्य संघ का ललितपुर की ओर चातुर्मास के लिए मंगल विहार हुआ।</p>
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