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	<title>आचार्य निमंत्रण &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>आचार्य निमंत्रण &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>71 वर्ष प्राचीन मान स्तंभ के चारों श्री जी का पंचामृत अभिषेक: मान स्तंभ देखकर अहंकार, घमंड नष्ट होकर मन शांत निर्मल होता है  </title>
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		<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:53:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 साधुओं सहित निवाई विराजित हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में 27 जनवरी को महिलाओं की कलशयात्रा से भूमि शुद्धि, याग मंडल विधान हुआ। निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; निवाई। आचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 साधुओं सहित निवाई विराजित हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में 27 जनवरी को महिलाओं की कलशयात्रा से भूमि शुद्धि, याग मंडल विधान हुआ। <span style="color: #ff0000">निवाई से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निवाई।</strong> आचार्य श्री शांतिसागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 32 साधुओं सहित निवाई विराजित हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में 27 जनवरी को महिलाओं की कलशयात्रा से भूमि शुद्धि, याग मंडल विधान हुआ। 28 जनवरी को आचार्य निमंत्रण, ध्वजवंदन, ध्वजारोहण मंदिरजी में कलशारोहण मानसतंभ में विराजित चार श्री जी का भव्य पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा का धार्मिक अनुष्ठान पुण्यार्जक परिवारों द्वारा विधानाचार्य सुरेश के शास्त्री के निर्देशन मंत्रोच्चार से किया गया। मंदिर समिति के मंत्री मोहित चंवरिया, पवन बोहरा अनुसार दिगंबर जैन बड़ा मंदिर कमेटी के तत्वाधान में सकल दिगंबर समाज के सहयोग से 27 एवं 28 जनवरी को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को आचार्य निमंत्रण दिया गया। प्रेमदेवी, चेतन, महेश गिंदौड़ी परिवार ने ध्वजारोहण, मंदिर के शिखर पर नूतन कलशारोहण नरेंद्र, वीरमती चंवरिया परिवार ने किया। 41 फिट ऊपर विराजित श्री आदिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा अरुण, अर्पित लटूरिया परिवार ने श्री चंद्रप्रभ भगवान का पंचामृत अभिषेक विनोद, महेंद्र सुनारा परिवार ने, शांतिधारा सुरेश, महेंद्र रवि पाटनी परिवार ने, श्री शांतिनाथ भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा बिष्णु, राहुल, बोहरा परिवार ने तथा श्री महावीर स्वामी का पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा सुशील नीरा जैन पाइप फैक्ट्री परिवार ने किया। शांतिधारा का मंत्रोच्चार मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-99099" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260128-WA0014-300x253.jpg" alt="" width="300" height="253" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260128-WA0014-300x253.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/01/IMG-20260128-WA0014.jpg 720w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>प्राचीन समय में तीर्थंकर भगवान के समवशरण के बाहर मानस्तंभ होते थे</strong></p>
<p>बड़ा मंदिर कमेटी ने सभी पुण्यार्जक परिवारों का सम्मान कर बहुमान किया। मान स्तंभ क्यों बनाया जाता है इस बारे में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी के शिष्य मुनि श्री हितेंद्रसागर जी ने बताया कि जैन मानस्तंभ जैन मंदिरों के सामने एक ऊंचा स्वतंत्र आध्यात्मिक स्तंभ होता है। मान का आशय अहंकार ,घमंड होता है और स्तंभ का मतलब खंबा होता है अर्थात ऐसा खंबा जो मान और अहंकार को नष्ट करें। वह मानस्तंभ होता है, प्राचीन समय में तीर्थंकर भगवान के समवशरण के बाहर मानस्तंभ होते थे। मान्यता है कि इसे देखकर जीवों का अहंकार घमंड नष्ट हो जाता है। वह विनम्र होकर भगवान के दर्शन करते हैं। मान स्तंभ के शीर्ष पर चारों दिशा में चार भगवान की प्रतिमा होती है निचले हिस्से में तीन सीढ़ियां होती है जो सम्यकदर्शन, सम्यकज्ञान और सम्यक चारित्र का प्रतीक है। मानस्तंभ जैन वास्तु कला का एक हिस्सा है। मानस्तंभ देखकर मंदिर में प्रवेश के पूर्व मन शांत, नम्र, और निर्मल हो जाता है।</p>
<p><strong>मान स्तंभ का धार्मिक इतिहास </strong></p>
<p>71 वर्ष पूर्व प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के प्रथम, द्वितीय और तृतीय पट्टाधीश मुनि अवस्था के मंगल पावन सानिध्य में 30 जनवरी 1955 माध शुक्ला सप्तमी विक्रम संवत 2010 वीर निर्वाण 2480 स्व रतनलाल गिदौड़ी द्वारा अपने पिता स्व. गजानंद की स्मृति में आचार्य कल्प श्री वीरसागर जी, मुनि श्री शिव सागर जी, मुनि श्री धर्मसागर जी, आर्यिका श्री वीरमति, श्री सिद्ध मति, श्री सुमति मति, श्री पार्श्व मति, श्री शांति मति एवं क्षुल्लक श्री पदम सागर जी 8 साधुओं की उपस्थिति में 41 फीट के मानस्तंभ की प्रतिष्ठा सूरजमल प्रतिष्ठाचार्य द्वारा हुई। 41 फिट के संगमरमर के सफेद पत्थरों के मानस्तंभ पर 1008 श्री आदिनाथ, श्री चंद्र प्रभु, श्री शांति नाथ और श्री महावीर स्वामी की चार प्रतिमाएं चारों दिशा में विराजित हैं तथा धार्मिक अनेक चित्र अंकित है। जिसमें सीता जी की अग्नि परीक्षा, षट् लेश्या, दिगंबर मुनियों के तप प्रभाव से सिंह और गाय एक साथ पानी पीते हुए, सम्राट चंद्रगुप्त के 16 सपने, संसार दर्शन मोह मधु बिंब आदि का चित्रण किया गया है।</p>
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		<title>पंचकल्याणक एवं मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शान्ति महायज्ञ महोत्सव की शुरुआत हुईः पाटोदी परिवार का अमूल्य योगदान </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Mar 2025 09:01:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री 108 श्री सिद्धांत सागरजी के शिष्य बाल योगी आचार्यश्री 108 श्री सौभाग्य सागरजी की प्रेरणा से प्रभावित होकर पाटोदी परिवार ने श्री 108 महावीर जिनबिम्ब पंचकल्याणक एवं मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शान्ति महायज्ञ के आयोजन के निर्मल भाव किये। अन्य पदाधिकारियों के अतुलनीय सहयोग से व आचार्यश्री के परम आशीर्वाद से इस धार्मिक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री 108 श्री सिद्धांत सागरजी के शिष्य बाल योगी आचार्यश्री 108 श्री सौभाग्य सागरजी की प्रेरणा से प्रभावित होकर पाटोदी परिवार ने श्री 108 महावीर जिनबिम्ब पंचकल्याणक एवं मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शान्ति महायज्ञ के आयोजन के निर्मल भाव किये। अन्य पदाधिकारियों के अतुलनीय सहयोग से व आचार्यश्री के परम आशीर्वाद से इस धार्मिक अनुष्ठान को सफलीभूत किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जयपुर से महावीर मंजू जैन सेवावाल की यह पूरी खबर</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>दिल्ली।</strong> परम पूज्य आचार्यश्री 108 श्री सिद्धांत सागरजी के प्रभावक शिष्य बाल योगी आचार्यश्री 108 श्री सौभाग्य सागरजी की प्रेरणा से प्रभावित होकर अनिल पाटोदी वीणा पाटोदी गौरव पाटोदी राखी पाटोदी एवं पाटोदी परिवार ने श्री 108 महावीर जिनबिम्ब पंचकल्याणक एवं मानस्तम्भ प्रतिष्ठा महोत्सव एवं विश्व शान्ति महायज्ञ के आयोजन के निर्मल भाव किये तथा खण्डेलवाल दिगम्बर जैन मंदिर (धर्माेदय तीर्थ) दिल्ली के दिल, राजा बाजार, कनाट प्लेस, नई दिल्ली जैन समाज व प्रबंधन समिति अध्यक्ष जिनेन्द्र नरपतिया, महामंत्री धीरज कासलीवाल व अन्य पदाधिकारियों के अतुलनीय सहयोग से व आचार्यश्री के परम आशीर्वाद से इस धार्मिक अनुष्ठान को सफलीभूत किया। पंच कल्याणक प्रारम्भ होने कि पूर्व संध्या पर हल्दी, मेहंदी सभी पात्रों का गरिमामय सम्मान पूर्ण उत्साह व उल्लासमय वातावरण में किया गया।</p>
<p><strong>भव्य शोभायात्रा के साथ मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>इस शाम को और आकर्षक व संगीतमय करने का सुअवसर मंजू जैन सेवावाले, जयपुर को प्रदान किया। प्रस्तुत भजनों का साजों के साथ नृत्यों से सभी ने भरपूर आनन्द लिया। परम पूज्य बाल योगी आचार्यश्री 108 श्री सौभाग्य सागरजी ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश हुआ, घटयात्रा, श्रीजी की भव्य शोभा यात्रा निकली, समाजजनो में महोत्सव को लेकर अभूतपूर्व उत्साह था नतीजतन बड़ी संख्या में समाजजनों ने विधान में उपस्थिति दर्ज करवाई।</p>
<p><strong>मांगलिक क्रियाएं संपन्न</strong></p>
<p>प्रतिष्ठाचार्य पंडित सतीश शास्त्री ‘सरल‘ के मुख्य निर्देशन में पंचकल्याणक महोत्सव विधान की मांगलिक क्रियायें सम्पन्न हुई। प्रातःकाल 6.30 बजे से मंगलाष्टक, देव आज्ञा, गुरु आज्ञा, दिग्बन्धन, सकलीकरण, आचार्य निमंत्रण, इन्द्र प्रतिष्ठा, मण्डप प्रतिष्ठा, जाप्यानुष्ठान, आदि के पश्चात् ध्वजारोहण की क्रियायें सानंद सम्पन्न हुई। तत्पश्चात नित्य पूजा, मूलनायक श्री महावीर भगवान पूजा, नन्दीश्वर पूजा, सिद्ध भक्ति, महाराज श्री के प्रवचन, गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान, मोक्ष कल्याणकों की प्रक्रियाओं की संगीतकार श्री धर्मवीर एण्ड पार्टी के साजों से स्वर लहरियों के माध्यम से आनन्द छा गया।</p>
<p><strong>सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए</strong></p>
<p>मुख्य आकर्षण भजन गायक श्री रुपेश जैन के द्वारा भजनों की प्रस्तुति नाटक चन्दनबाला आदि रहे। सौधर्म इंद्र गौरव पाटोदी ,सचि इन्द्राणी राखी पाटोदी के द्वारा संवाद, तांडव नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। प्रशंसा के भावों व दिली प्रसन्नता के साथ यह जानकारी साझा करते हुये अत्यन्त हर्ष है कि पंच कल्याणक के आयोजन व मानस्तंभ के निर्माण का समस्त खर्चा पाटोदी परिवार ने अपनी ओर से किया है, पुण्योदय से प्राप्त लक्ष्मी का इन पुण्य क्रियाओं में उपयोग कर अनिल वीणा पाटोदी व उनके सुपुत्र गौरव, राखी पाटोदी द्वारा पुण्यानुबंधी पुण्यार्जन किया। मन्दिर प्रबंधक समिति के पदाधिकारीगणों का पाटोदी परिवार ने आभार माना।</p>
<p><strong>महोत्सव की व्यवस्थाएं सराहनीय</strong></p>
<p>पंचकल्याणक विधान में बैठने हेतु यथोचित वस्त्र उपलब्ध करवाने के अलावा, दैनिक आधार पर पर्याप्त गुणवक्तायुक्त अष्टद्रव्य सामग्री तथा केला, सतरा, चीकू, लड्डू, के साथ, प्रसन्नता व आनन्द के माहौल में सभी क्रियायें सम्पन्न करवाई। वह भी अविस्मरणीय है और काबिले तारीफ है। पूरे पंचकल्याण महोत्सव मे सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन, सायंकालीन चाय, स्नेक्स, भोजन सभी अत्यंत स्वादिष्ट, लजीज एवं बहुत ही हाइजेनिक एवं उच्च क्वालिटी का रहा। ठहरने की व्यवस्थायें अति सुन्दर व आरामदायक थी यातायात, मेडिकल एड, साउण्ड सिस्टम, बिजली सजावट सारी व्यवस्थायें बहुत ही सराहनीय रही।</p>
<p><strong>सभी का अविस्मरणीय योगदान </strong></p>
<p>कुल मिलाकर इस यादगार पंचकल्याणक महोत्सव में हर व्यक्ति ने हर समय जश्न सा लुत्फ उठाया और इस सबका श्रेय परम पूज्य बाल योगी आचार्यश्री 108 श्री सौभाग्य सागर महाराज, पं सतीश शास्त्री, धर्मवीर एण्ड पार्टी, रूपेश जैन, आपकी व परिजनों की संयोजन क्षमता दूरदृष्टि, अथक मेहनत तथा मन्दिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष, महामंत्री व पदाधिकारियों के अतुलनीय सहयोग को जाता है।</p>
<p><strong>पाटोदी परिवार के अमूल्य योगदान प्रशंसनीय</strong></p>
<p>हम हमारे प्रिय अनिल वीणा पाटोदी, गौरव, राखी पाटोदी एवं परिजनों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। दो शब्दो में यही कह सकते हैं कि हम आपके स्नेह, सहयोग से आनंदित हैं, भाव विभोर हैं एवं हृदय से कृतज्ञ हैं। पंचपरमेष्टियों की असीम अनुकंपा सदैव आच्छादित रहे।</p>
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