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	<title>आचार्य ज्ञानसागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>आचार्य ज्ञानसागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सोनागिर में कर्नाटक की कलाकार पंचमी जैन देंगी नाट्य प्रस्तुति : प्रतिभा सम्मान में 28 को होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम </title>
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		<pubDate>Thu, 18 Dec 2025 13:45:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक की कलाकार पंचमी मरूर जैन सोनागिर में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में 28 दिसंबर को अपनी नाट्यकला का प्रदर्शन करेंगी। जैसवाल जैन उपरोचियां सेवा न्यास ट्रस्ट द्वारा प्रतिभा सम्मान समारोह श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर (दतिया) में होने जा रहा है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। कर्नाटक की कलाकार पंचमी मरूर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कर्नाटक की कलाकार पंचमी मरूर जैन सोनागिर में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में 28 दिसंबर को अपनी नाट्यकला का प्रदर्शन करेंगी। जैसवाल जैन उपरोचियां सेवा न्यास ट्रस्ट द्वारा प्रतिभा सम्मान समारोह श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर (दतिया) में होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> कर्नाटक की कलाकार पंचमी मरूर जैन सोनागिर में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में 28 दिसंबर को अपनी नाट्यकला का प्रदर्शन करेंगी। प्रतिभा सम्मान के संयोजक रविंद्र जैन (जमूसर वाले) भोपाल, सुरेशचंद जैन (सा.एक्स.) एवं रूपेश जैन दिल्ली ने बताया कि विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी जैसवाल जैन उपरोचियां सेवा न्यास ट्रस्ट द्वारा प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन 28 दिसंबर को श्री सिद्धक्षेत्र सोनागिर (दतिया) में होने जा रहा है। जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति के लिए स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ कर्नाटक की भरतनाट्यम, लोकनृत्य, पश्चिमी नृत्य कलाकार पंचमी मरूर जैन को भी आमंत्रित किया है। पंचमी जैन पंच परमेष्ठी, आचार्य विद्यासागर, आचार्य ज्ञानसागर के भजनों पर भक्ति नाट्यनृत्य के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं। अभी तक देश के विभिन्न मंचों पर भरतनाट्यम, यक्षगान, लोकनृत्य एवं पश्चिमी नाट्यकला की 1800 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। एक समर्पित और बहुमुखी कलाकार पंचमी मरूर जैन को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा बाल पुरस्कार एवं कर्नाटक के तत्कालीन राज्यपाल वजुभाई ने कर्नाटक राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया था। 2017 में नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में यक्षगान प्रस्तुत किया। पंचमी जैन को राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और रक्षा मंत्री से भी बातचीत का अवसर भी प्राप्त हुआ। उसी वर्ष, उन्हें 18वीं कर्नाटक बटालियन से सर्वश्रेष्ठ एनसीसी कैडेट चुना गया और उन्होंने तुमकुर में राज्य स्तरीय बाल सम्मेलन की अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 2020 में पंचमी को विवेकोत्सव के दौरान विवेक पुरस्कार युवा पुरस्कार और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भारत सरकार के उद्यम केआईओसीएल लिमिटेड से उत्कृष्टता प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ।</p>
<p>पंचमी जैन ने उदय टीवी के ‘चिन्नारा लोका’, ज़ी कन्नड़ के ‘कुनियोनु बारा’ और सुवर्णा चैनल के ‘पुटानी पेंट्रू’ जैसे टेलीविजन रियलिटी शो के माध्यम से लोकप्रियता हासिल की है। पिछले कुछ वर्षों में उन्हें साधनाश्री, बाला प्रतिभाश्री, डीके जिला राज्योत्सव साधक पुरस्कार, अलवास विद्यार्थी श्री पुरस्कार, कल्कुरा बालासिरी, करुणादा पद्मश्री पुरस्कार, कीर्ति सम्मान पुरस्कार और कई जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। 2016 में उन्हें कर्नाटक सरकार की केलाडी चेन्नम्मा और होयसला परियोजना के तहत सामाजिक सेवा के लिए जिला पुरस्कार से सम्मानित किया गया और उन्होंने राष्ट्रीय साधन-सह-योग्यता छात्रवृत्ति परीक्षा उत्तीर्ण की। नृत्यकला में अदभुत प्रतिभा की धनी पंचमी मरूर जैन मूलवद्री कर्नाटक की रहने वाली हैं। पिता पार्श्वनाथ जैन, माता दीपाश्री जैन और भाई प्रथम जैन आपके परिवारिक सदस्य हैं। अभी हाल ही में आपकी शादी यतीश एम के साथ हुई हैं। पंचमी जैन ने वाणिज्य में स्नातक की डिग्री पूरी करने के बाद वर्तमान में एमबीए की पढ़ाई कर रही हैं।</p>
<p>वर्तमान में पंचमी जैन अपने पति यतीश एम के साथ बेंगलुरु में श्री परंपरा हेज्जे गेज्जे वाईपी आर्ट फाउंडेशन नामक एक नृत्य संस्थान चलाती हैं। यतीश फिल्म उद्योग में डिजिटल पीआरओ के रूप में भी काम करते हैं, और वे दोनों मिलकर यती इवेंट्स और डिजिटल प्रमोशन टीम का प्रबंधन करते हैं। दोनों समर्पण और लगन के साथ भारतीय कला, संस्कृति, शिक्षा और युवा सशक्तिकरण में योगदान देना जारी रखे हुए हैं।</p>
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		<title>हटा में पर्वराज पर्यूषण पर्व की भव्य शोभा यात्रा निकली : पालकी में विराजित श्री जी के साथ नगर भ्रमण में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से लिया भाग </title>
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		<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 16:03:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हटा (दमोह, मध्य प्रदेश) में पर्वराज पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन श्री जी को पालकी में विराजमान कर भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने रंगोली सजाई और श्री जी की आरती वंदना की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… हटा, दमोह। पर्वराज पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर श्री जी को पालकी में विराजमान कर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हटा (दमोह, मध्य प्रदेश) में पर्वराज पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन श्री जी को पालकी में विराजमान कर भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने रंगोली सजाई और श्री जी की आरती वंदना की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>हटा, दमोह।</strong> पर्वराज पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर श्री जी को पालकी में विराजमान कर भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा श्री श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से प्रारंभ होकर त्रिमूर्ति मंदिर, को-ऑपरेटिव बैंक चौराहा, मुख्य मार्ग से रतन बजरिया और जैन मंदिर होते हुए निकली।</p>
<p>जहाँ ध्वजारोहण और प्रभु दर्शन संपन्न हुए, उसके बाद यात्रा पुनः मुख्य मार्ग से नावघाट, महावीर दिगंबर जैन मंदिर होते हुए बड़ा बाजार स्थित जैन वेदी प्रांगण पहुँची। वहाँ विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।</p>
<p>समाज के युवा संदीप जैन ने बताया कि शोभा यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह रंगोली सजाई और श्री जी की आरती वंदना की। शोभा यात्रा में पालकी में श्री जी विराजमान थे, जबकि बैंड-बाजों की मधुर ध्वनि यात्रा को और भव्य बना रही थी।</p>
<p><strong>धार्मिक भजन प्रस्तुत करते हुए यात्रा में सम्मिलित हुए </strong></p>
<p>श्री आचार्य ज्ञान सागर बाल संस्कार पाठशाला के नन्हे बालक, बालिकाएं और शिक्षिकाएं जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। बालिकाएं भजन मंडली और महिला मंडल की महिलाएं धार्मिक भजन प्रस्तुत करते हुए यात्रा में सम्मिलित हुईं। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित रहे और भक्ति एवं श्रद्धा का अनुपम दृश्य नगर में देखने को मिला।</p>
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		<title>धर्मसभा में हुए प्रवचन : आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस धूमधाम से मनाया  </title>
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		<pubDate>Fri, 07 Jun 2024 07:31:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के गुरु आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा, पूजन, विधान हुआ। पढ़िए राजीव सिंघई [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के गुरु आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा, पूजन, विधान हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर(दमोह)</strong>। सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर में युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के गुरु आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का समाधि दिवस आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर प्रातः पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, शांति धारा, पूजन, विधान हुआ। पूज्य आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज,आचार्य श्री समय सागर जी महाराज की भक्ति भाव से पूजा हुई। निर्यापक श्रमण योग सागर जी महाराज द्वारा पूजन का वाचन किया गया। अभय बनगांव द्वारा आचार्य श्री समय सागर जी महाराज को शास्त्र दान किए गए।</p>
<p><strong>नहीं भुला सकते उपकार</strong></p>
<p>इस अवसर पर ज्येष्ठ आर्यिका श्री गुरुमति माताजी ने आचार्य ज्ञान सागर महाराज के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज का यह पर्व जीवन में धर्म रूपी शिखर पर कलशारोहण के समान है। जब मंदिर होगा तो उस पर शिखर होगा, शिखर होगा तो उस पर कलशारोहण भी आवश्यक है। जिन महान आत्माओं ने आज तक जिस रत्नात्रय रूपी धर्म को धारण किया है उनके जीवन में वह शिखर का निर्माण हुआ, उन्होंने कलशारोहण किया है। आज उनका 51 वां समाधि दिवस महान पर्व है। एक पर्व ऐसा है जो जो साधक रहेंगे मुक्ति ना हो जावे जब तक पाने की लालसा रहेगी। गुरु नाम गुरु आचार्य ज्ञान सागर जी थे जो ज्ञान देखा जा रहा है उस ज्ञान को देने वाले स्रोत थे। उनके ज्ञान की सुगंधि सारे ब्रह्मांड में सुगंधित हो रही है। एकमात्र श्रेय आचार्य ज्ञान सागर जी को है। आचार्य ज्ञान सागर जी ने अपने जीवन को ही सुभाषित नहीं किया है उन्होंने कई रत्न दिए और कई रत्नत्रय के पुष्प दिए एक पुष्प वह था चैतन्य महाकाव्य जिसका नाम आचार्य विद्यासागर है जिनको आज भी उनके उपकार को भुलाया नहीं जा सकता।</p>
<p><strong>उनके साहित्य पर हुई पीएचडी</strong></p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री अभय सागर जी महाराज ने कहा कि आचार्य भगवंत ज्ञान सागर जी महाराज के जीवन के कुछ प्रसंग जिनसे लोग अनभिज्ञ से हैं ऐसी दो-चार बातें आपके सामने रखने का प्रयास कर रहे हैं।आचार्य भगवन ज्ञान सागर जी के विषय में भारत शासन से कुछ विशिष्ट कार्य हो एक डाक टिकट जारी करवाने का प्रयास करवाया। एक समस्या खड़ी हुई शासन के रिकॉर्ड अनुसार जन्मदिवस, जन्मस्थान, मृत्यु दिवस, मृत्यु स्थान आवश्यक होता है। जन्म स्थान तो राड़ेली मिल गया, 82 वर्ष उम्र में संल्लेखना हुई होगी। एक पंडित जी से उनकी कुंडली एवं पांचो भाइयों की कुंडली उपलब्ध हुई। तीन भाइयों की कुंडली पंडित भुरामल जी के हाथ की बनी है, मेरे पास उपलब्ध है। 1897 का जन्म था 24 अगस्त 1897 समय 12 बजकर कुछ मिनट पर जन्म हुआ। उन्होंने आचार्य वीर सागर जी के संघस्थ सभी साधुओं को पंडित भूरामल जी ब्रह्मचारी की अवस्था में अध्ययन कराया। संघस्थ साधुओं को विद्या अध्ययन कराते थे। पांच-पांच महाकाव्य का सृजन करने वाले जयोदय महाकाव्य जैसे उत्कृष्ट साहित्य का सृजन करने वाले आचार्य भगवन थे। गंजबासौदा की बहन ने उनके साहित्य पर पीएचडी की है।</p>
<p><strong>मरण का स्वागत करें</strong></p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनिश्री नियम सागर जी महाराज ने बताया कि संल्लेखना मरण का प्रसंग है। संल्लेखना उन जीवों की अनिवार्य आवश्यक विशेष मरण है जिस मरण को वह साधक अपने जीवन को त्याग और तपस्या के मार्ग पर समर्पित करता है। त्याग और तपस्या मय जीवन संल्लेखना मरण के द्वारा सार्थक होता है। मंदिर बनता है समय अपेक्षित होता है, अपेक्षित समय पर ही मंदिर की पूर्णता होती है। जितना समय मंदिर निर्माण के लिए लगता है उतना समय मृत्यु के लिए नहीं लगता। मैं आ रहा हूं कह कर भी आ सकता हूं और कहे बिना भी आ सकता हूं। साधक सावधान होकर मरण का स्वागत करता है। मरण का स्वागत करने के लिए समय लग सकता है और नहीं भी लग सकता है।स्वागत किया मरण कब होगा निश्चित नहीं स्वागत किया इसी वक्त मरण होगा आकस्मिक मरण की घटना घट सकती है। मृत्यु ही मृत्यु को दूर करने का साधन है इसमें कोई संदेह नहीं हम भी वही अवस्था प्राप्त करें जो अरिहंत प्रभु कर रहे हैं। यही उद्देश्य सभी साधक का रहता है। मरण के पांच प्रकार हुआ करते हैं। गुरु को हम याद करते हैं।</p>
<p><strong>मृत्यु महोत्सव मनाने का लाभ</strong></p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री योग सागर जी महाराज ने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि आज पावन पर्व है महोत्सव है आज तो मृत्यु महोत्सव है। जिन्होंने अपने जीवन में जिनवाणी की आराधना करते-करते मृत्यु महोत्सव मनाने का लाभ हुआ आचार्य ज्ञान सागर महाराज का समाधि दिवस है। 1968&#8211; 69 में 2 साल उनके चरण वंदन करने चरण रज लगाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आचार्य ज्ञान सागर महाराज प्रवचन करते तो णमोकार मंत्र का मंगलाचरण करते थे। उनके मुख से सुनते सुनते मुझे ज्ञान हुआ और मैं विद्या सरोवर में समा गया। ज्ञान सागर जी महाराज का दर्शन किया आज भी वह दृश्य हमें दिखाई देता है। उनकी कृपा से उनके आशीष से हम लोग यहां आए जिस निधि को उन्होंने प्राप्त किया है उस निधि को हमें भी प्राप्त करना है।</p>
<p style="padding-left: 40px"><strong>शोक न करें</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य भगवन श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा जिनके जीवन में वैराग्य के क्षण नहीं आते उसका उपादान बहुत कमजोर है निमित्त मिलने के बाद भी वैराग्य के क्षण मिले। शब्द के माध्यम से अर्थ की गति हो अर्थ से भाव की गति होती जिस ज्ञान बोलते। योग उपादान से ही कार्य संपादित होते। शब्द कुछ नहीं करते ऐसा नहीं किंतु शब्द एकमात्र माध्यम है शब्द के माध्यम से अर्थ को गति मिलती। शोक करने की आवश्यकता नहीं जिसका मरण हुआ उसका जन्म हुआ है किंतु मरण के उपरांत जन्म हो यह निश्चित नहीं। पंडित पंडित मरण है मरण याने विश्राम विराम लग जाता है ।बार-बार जन्म और मरण का जो प्रसंग आता है आज तक संसारी प्राणी का जीवन चल रहा है।आयु समाप्त होते ही आगे भव का उदय होता है। नया जीवन प्रारंभ होता पुराना विस्मृत हो जाता। संवेदन अलग संवेदन वर्तमान का होता है। किंतु अतीत में जो पर्याय होती है ज्ञान का विषय बन सकती है। आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज की 75&#8211;80 की उम्र थी। आकुलता ना करें, साथ-साथ प्रमाद न करें निरंतर पुरुषार्थ शील बने रहें।</p>
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