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	<title>आचार्यश्री विरागसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्यश्री विरागसागर जी का 33वां आचार्य पदारोहण मनाया: चित्र का अनावरण कर आचार्य भक्ति की  </title>
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		<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 09:35:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धार शहर में विराजित उपाध्याय मुनिश्री विभंजनसागर जी महाराज के सान्निध्य में शनिवार को आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 33वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया। कार्यक्रम दिगंबर जैन समाज के गणमान्य श्रेष्ठीजनों के बीच मामाजी टेंट हाउस के कारखाना स्थल पर किया गया। धार से पढ़िए, साभार यह खबर&#8230; धार। शहर में विराजित उपाध्याय मुनिश्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धार शहर में विराजित उपाध्याय मुनिश्री विभंजनसागर जी महाराज के सान्निध्य में शनिवार को आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 33वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया। कार्यक्रम दिगंबर जैन समाज के गणमान्य श्रेष्ठीजनों के बीच मामाजी टेंट हाउस के कारखाना स्थल पर किया गया। <span style="color: #ff0000">धार से पढ़िए, साभार यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धार।</strong> शहर में विराजित उपाध्याय मुनिश्री विभंजनसागर जी महाराज के सान्निध्य में शनिवार को आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का 33वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया। कार्यक्रम दिगंबर जैन समाज के गणमान्य श्रेष्ठीजनों के बीच मामाजी टेंट हाउस के कारखाना स्थल पर किया गया। कार्यक्रम का आरंभ अद्विता व अद्वेत के मंगलाचरण नृत्य से हुई। इसके बाद छाबड़ा परिवार ने आचार्यश्री के चित्र का अनावरण कर द्वीप प्रज्वलन किया। पाद प्रक्षालन कर उन्हें जिनवाणी भेंट की गई। आचार्यश्री के जीवन प्रसंग के बारे में बताया गया कि वे मात्र 17 वर्ष की आयु में गृह त्यागर कर संयम के मार्ग पर चले थे। 1983 में दीक्षा धारण की और 1992 में आचार्य पद आदि की विभिन्न ऐतिहासिक घटनाएं सामने आईं।</p>
<p>आचार्यश्री ने तीन सौ से अधिक संयमियों को दीक्षा प्रदान की और 170 मुनि वृतियों को सल्लेखना समाधि करवाई। आज उनके शिष्य पूरे देश में जैन धर्म की प्रभावना और प्रचार-प्रसार में अनवरत लगे हैं। छाबड़ा परिवार ने चातुर्मास में मंगल कलश स्थापना का सौभाग्य प्राप्त किया था। इस अवसर पर उन्होंने गुरुदेव की सेवा में विशेष योगदान दिया। कार्यक्रम में समाज अध्यक्ष श्रेणिक गंगवाल, सचिव संजय छाबड़ा सहित अन्य समाजजन और गुरु भक्त मौजूद रहे।</p>
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		<title>आचार्यश्री विरागसागर जी को मुनिराजों ने प्रस्तुत की विनयांजलि: भक्ति भाव से आचार्यश्री का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 03 Nov 2025 11:39:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पद विहार कर पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ एवं यहां चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी सान्निध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव से मनाया [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। पद विहार कर पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी ससंघ एवं यहां चातुर्मासरत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी सान्निध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव से मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> तप, साधना एवं त्याग के लिए जाने वाले इस नगर में आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस मनाया गया। नगर में पद विहार के पधारे उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी महाराज ससंघ एवं नगर में चातुर्मास रत मुनि श्री विश्वसूर्यसागर जी एवं मुनि श्री साध्यसागर जी महाराज के पावन सानिध्य में आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 33 वां आचार्य पदारोहण दिवस सोमवार को पूर्ण भक्ति भाव एवं हर्षाेल्लास से मनाया गया। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर एवं आचार्यश्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में श्री जी का पंचामृत अभिषेक किया गया। जिसमें पूर्ण सुगंधित कलश करने का सौभाग्य सुधीरकुमार प्रशांतकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। शांतिधारा करने करने का सौभाग्य श्रीकांत जटाले परिवार को प्राप्त हुआ। इस क्रम में उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज एवं युगल मुनिराज के सानिध्य में आचार्य छत्तीसी विधान रचाया गया। जिसमें उपाध्याय मुनि श्री द्वारा प्रत्येक अर्घ्य का विशेष महत्व बताया गया। कुल 36 अर्घ्य समर्पित किए गए। उपाध्याय मुनि श्री विश्रुत सागर जी महाराज के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य खुशकवर बाई सुरेशचंद पांड्या अमर ज्योति बस परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p>मुनि श्री निर्वेद सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विपिनकुमार संजयकुमार बदूद परिवार तथा मुनि श्री साध्य सागरजी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विशाल वैभव सराफ परिवार को एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विशाल कुमार बारिश कुमार बदूद परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर विराजमान मुनि श्री निर्वेद सागर जी, मुनि श्री साध्य सागर जी, मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी ने आचार्य श्री विरागसागर जी के प्रति अपनी विनयांजलि समर्पित की।</p>
<p><strong>मुनिराजों ने विनयांजलि में किया गुरु का गुणानुवाद </strong></p>
<p>उपाध्याय मुनि श्री ने अपने गुरु के प्रति विनयांजलि में कहा कि उन्होंने सभी मुनिराजों के साथ आनंद और वात्सल्य के साथ रहना सिखाया है। इस युग प्रतिक्रमण करवाने वाले आचार्य परमेष्टी थे तो वो आचार्य विराग सागर जी महाराज थे। जिन्होंने प्राचीन परंपराओं का उद्वहन पुनः किया है जिससे संघ इकट्ठा होता था। एक बात ध्यान रखना जो काम धन भी नहीं करता वो काम आचार्य श्री ने करके दिखाया। आप ने छोटे से छोटे और बड़े से बड़े दीक्षा लेने वाले उपकारियों पर उपकार किया। वास्तव में वो बुजुर्गाें के देवता कहलाते थे। आप ने कहा कि समाधि मरण कैसे किया जाता है, आचार्य पद कैसे छोड़ा जाता है, संघ व्यवस्थित कैसे किया जाता है, अगर किसी से सीखना हो तो ये आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज ने कर दिखाया। आचार्य भगवन के गुण भी अनंत है, आप के उपकार भी अनंत है। इस अवसर पर प्रशांत चौधरी, कमल केके ब्रह्मचारी पारस भैया, अर्पित भईया द्वारा सुमधुर भजन एवं भक्तिकर सभी को मंत्र मुक्त कर दिया। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
<p><strong>उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी किए केशलोच </strong></p>
<p>दिगंबर साधु समस्त परिग्रह से रहित होते हैं तथा अपने पास केवल एक मयूर पंख से बनी पिच्छी रखते हैं अतः बालों को हटाने के लिए वे उस्तरा आदि अपने पास नहीं रख सकते व ना ही इनका प्रयोग कर सकते और चूंकि साधु स्वावलंबी होते हैं और उनकी चर्या सिंह के समान होती है। इसलिए बाल हटाने के लिए किसी का सहारा भी नहीं लेते। वे अपने हाथों से बालों को नोंच कर उखाड़ते हैं। इस क्रिया को केशलोच कहते हैं। वैसे केशलोच परिषह सहन करने के लिए भी जरूरी होता है। दिगंबर मुनि महाव्रती होते हैं और 22 परिषह को सहज ही सहन करते हैं तथा 28 मूल गुणों का पालन करते हैं। जिसमंे हाथों से केशलोच करना एक आवश्यक क्रिया है और चूंकि केशलोंच करने से भी अनेक परजीवी छोटे जीवों की विराधना होती है। जिसके प्रायश्चित स्वरूप मुनि उस दिन निराहार रह कर उपवास भी रखते हैं। अतः दिगंबर मुनि अहिंसा की जीवंत छवि होते हैं जिनसे किसी भी जीव को किसी तरह का कोई भय नहीं रहता है। मुनि स्वयं भी अभय होते हैं और दूसरों को भी अभय ही प्रदान करते हैं।</p>
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		<title>भगवान से बड़ा है गुरु का पद, जो उनके निकट ले जाते हैं: सनावद में विनयांजलि और गुणानुवाद सभा हुई </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 10:36:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गणाचार्य विराग सागर जी का प्रथम समाधि दिवस मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में शुक्रवार को संत भवन में मनाया गया। साथ ही मंदिर जी में विराजित मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का 73 वां अवतरण दिवस भी मनाया गया। सनावद से पढ़िए, सन्मति [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गणाचार्य विराग सागर जी का प्रथम समाधि दिवस मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में शुक्रवार को संत भवन में मनाया गया। साथ ही मंदिर जी में विराजित मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का 73 वां अवतरण दिवस भी मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> गणाचार्य विराग सागर जी का प्रथम समाधि दिवस मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में शुक्रवार को संत भवन में मनाया गया। साथ ही मंदिर जी में विराजित मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का 73 वां अवतरण दिवस भी मनाया गया। प्रातः श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में हेमंत काका, वीरेंद्र बाबा, प्रवीण जैन, सुनील पांवणा, नवनीत जैन, सुरेश मुंशी ,सुनील मास्टर साब, हर्षित जैन ने श्री जी का पंचामृत अभिषेक कर शांति धारा की। संत निलय में समाधि दिवस एवं अवतरण दिवस पर सभा का शुभारंभ आचार्य विराग सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष प्रदीप पंचोलिया, कमल केके, सुदेश जटाले, प्रशांत जैन, संगीता पाटोदी ने दीप प्रज्वलन कर किया। मंगलाचरण प्रदीप पंचोलिया ने किया।</p>
<p>आचार्य विराग सागर जी महाराज का पूजन किया गया। जिसमें समाज के सभी उम्र वर्ग के सदस्यों ने अलग-अलग क्रम में अर्घ्य समर्पित किए। मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी का अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य मधु निर्मलचंद भूच परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिराजों के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य सुधीरकुमार प्रशांतकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने सौभाग्य अक्षयकुमार सराफ एवं संजयकुमार चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>समाजजनों ने किया गुणानुवाद </strong></p>
<p>इस अवसर पर राजेंद्र जैन महावीर ने आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के प्रति अपनी विनयांजलि एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज के प्रति अपना गुणानुवाद प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिस प्रकार विश्व को सूर्य राह दिखाता है। सूर्य पथ प्रदर्शित करता है। ऐसे ही मुनि विश्व सूर्य सागर जी महाराज अपनी चर्या के माध्यम से साम्य स्थापित करते हुए हम सब को उपदेश दे रहे है। जैन ने आचार्य विराग सागर जी के जीवन पर प्रकाश डाल अपने अनुभव साझा किए। इसी क्रम में नरेंद्र भारती,अनुभव जैन, संगीता पाटोदी, प्रशांत जैन ने भी अपनी विनयांजलि एवं मुनिश्री का गुणानुवाद किया।</p>
<p><strong>आपके नगर में ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं</strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनिश्री साध्य सागर जी ने कहा की आज वो दिन है। जिसमें जैन धर्म की धरोहर में वृद्धि हुई थी। आज के दिन हमारे जैन धर्म की धरोहर मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी का अवतरण दिवस है। आज विराग सागर जी के आशीर्वाद से मुनिश्री ने दीक्षा लेकर आपके नगर में ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं। आचार्य विराग सागर जी ने जीवन काल में इतनी अच्छी रचना की। जिसमें सभी साधुओं को अपनी अपनी योग्यता के अनुसार पद देकर आज जैन धर्म के झंडे को बुलंद कर रहे हैं। इनमें से एक हैं मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी, जो आप अपने ज्ञान के प्रकाश को चहुं ओर फैला रहे हैं।</p>
<p><strong>गुरु का उपकार भुलाए नहीं भूलाता </strong></p>
<p>मुनि श्री विश्वसूर्य सागर ने आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज को अपनी विनयांजलि समर्पित करते हुए कहा कि आचार्य श्री ने जो उपकार हमारे ऊपर किए हैं। उनको हम नहीं भुला सकते है। हमारे गुरु की महिमा अपरंपार है। मुनिश्री ने कहा की गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागूं पांव, बलिहारी गुरु आपकी गोविंद दियो बताय की लाइनों को चरितार्थ करते हुए गुरु ही वह व्यक्ति है जो अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं। ऐसे गुरुदेव को हम बारम्बार नमोस्तु करते हैं। आचार्य वर्धमान सागर युवा संघ के द्वारा प्रभावना वितरण की गई। संचालन प्रशांत चौधरी ने किया। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>आचार्यश्री विरागसागर जी को विनयांजलि अर्पित की: पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Jul 2025 08:02:09 +0000</pubDate>
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<p><strong>नगर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी व मुनिश्री साध्य सागर जी के सानिध्य में आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में समाधि दिवस एवं 73 वां अवतरण दिवस मनाया गया। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> नगर में गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी व मुनिश्री साध्य सागर जी के सानिध्य में आचार्य शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में समाधि दिवस एवं 73 वां अवतरण दिवस मनाया गया। 4 जुलाई गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस एवं मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज का 73 वां अवतरण दिवस पर का आचार्य शांतिसागर वर्धमान देशना संत निलय में कार्यक्रम हुए।</p>
<p>प्रातः 7 बजे से पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में मुनि संघ के सानिध्य में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। प्रातः 8.30 बजे से गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज का विशेष पूजन मुनिश्री के पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, पिच्छी परिवर्तन, विनयांजलि सभा में मुनिद्वय ने आशीर्वचन दिए। प्रातः 10 बजे आहारचर्या हुई।</p>
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		<title>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी वर्तमान में शिखर संत हैं:  आचार्यश्री ने साधकों को दीक्षा देकर मोक्ष मार्गी बनाया </title>
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		<pubDate>Mon, 28 Apr 2025 07:01:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर के सुमतिधाम में चल रहे पट्टाचार्य महोत्सव में साधुओं के दर्शन से सकल जैन समाज कृतार्थ हो रहा है। आचार्यश्री विशुद्धसागर जी का पट्टाचार्य पदारोहण 30 अप्रैल को होने जा रहा है। इस अवसर पर आचार्यश्री के गुणानुवाद भक्त जन कर रहे हैं। छत्रपति संभाजीनगर के नरेंद्र अजमेरा ने यहां अपने विचार व्यक्त किए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>इंदौर के सुमतिधाम में चल रहे पट्टाचार्य महोत्सव में साधुओं के दर्शन से सकल जैन समाज कृतार्थ हो रहा है। आचार्यश्री विशुद्धसागर जी का पट्टाचार्य पदारोहण 30 अप्रैल को होने जा रहा है। इस अवसर पर आचार्यश्री के गुणानुवाद भक्त जन कर रहे हैं। छत्रपति संभाजीनगर के नरेंद्र अजमेरा ने यहां अपने विचार व्यक्त किए हैं। <span style="color: #ff0000">छत्रपति संभाजी नगर से पढ़िए, अभिषेक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>छत्रपति संभाजीनगर।</strong> संसार की सभी संस्कृतियों में जैन संस्कृति प्राचीन है। इस सम्यक पुरुषार्थ प्रधान जैन संस्कृती में अनेक महापुरुषांे ने जन्म लेकर पुरुषार्थ के बल पर तथा उज्ज्वल चरित्र को धारण कर संसार के सम्मुख आदर्श प्रस्तुत किया। उनकी साधना कथनी की एकता ने सारे विश्व को ज्ञान से आलोकित किया है तथा परमात्म पद को प्राप्त किया। इन महापुरुषों, साधु-संतों की श्रेणी में जैन धर्म की आस्थाओं को जोड़ने वाले महायोगी, जन-जन को सन्मार्ग बताने वाले सन्यासी, अध्यात्म पद के सच्चे उपासक, आत्मान्वेषी, संत शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी वर्तमान में शिखर संत हैं एवं इस धरती पर साक्षात चलते-फिरते देवता हैं। यह बात नरेंद्र अजमेरा ने कही। श्रमण संस्कृति के ज्योतिर्मय नक्षत्र आचार्य श्री इस भवसागर में स्वयं भी तरते हैं और दूसरों को भी तार रहे हैं। आप नौका के समान हैं। आपने अब तक अनेक साधकों को दीक्षा देकर मोक्ष मार्गी बनाया है। अनेक बाल ब्रह्मचारी युवा दिगंबर मुनि, अनेक शिष्य समुदाय आपके आंतरिक वात्सल्य से परिपूरित हैं और आपकी संघ संचालक की कुशलता का परिचायक है। इसलिए तो कहते हैं कि कुशल शिल्पी के हाथ पत्थर लग जाए तो वह मूर्ति बन जाती है। बीज को कुशल माली मिल जाए तो वह वट वृक्ष में रूपांतरित हो जाता है। वैसे ही पतन में डूब रही युवा पीढ़ी और समाज को आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के वाणी का सहारा मिल जाए तो उनके जीवन की दशा और दिशा ही बदल जाती है।</p>
<p><strong>आचार्यश्री विरागसागर जी ने समाज को अनमोल हीरा सौंपा</strong><br />
अजमेरा ने कहा कि जिसमें पृथ्वी की क्षमा, आकाश की निर्मलता, चंद्रमा की शीतलता और सागर से गंभीरता है। जिनका आदर्श हिमालय से टक्कर लेता है। जिनका जीवन ज्ञान दिवाकर के रश्मियों से अलौकिक है। ऐसे निष्काम साधक, प्रेरणा स्रोत, युग सर्वस्व, शुद्धात्मध्यानी, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र जैसे अनमोल रत्नों को अपने अंतरात्मा में छुपाए हुए रत्नाकर को दीक्षा गुरु आचार्यश्री विरागसागर जी ने समाधि मरण के पूर्व ही अपना उत्तरदायित्व को सौंपकर समाज के लिए एक अनमोल हीरा सौंपा है। जिनके नेतृत्व में अब जैन धर्म एक नई ऊचाई धारण कर सारे विश्व में जिन शासन की पताका को युगों युगों तक फहराते रहेगा।</p>
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		<title>ताजगंज में यागमंडल विधान भक्तों ने की मांगलिक क्रियाएं: मधुर भजनों पर नृत्य कर प्रभु पार्श्वनाथ की भक्ति का आनंद </title>
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		<pubDate>Mon, 24 Feb 2025 12:25:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री पार्श्वनाथ जिनालय का अस्थाई चैत्यालय जिनबिंब स्थापना एवं मुख्य वेदी शिलान्यास समारोह ताजगंज स्थित मदन मोहन धर्मशाला में चल रहा है। इसमें कार्यक्रम के दूसरे दिन 24 फरवरी को सर्वप्रथम इंद्रों ने उपाध्याय श्री के मुखारविंद से उच्चारित मंत्रोच्चारण के साथ श्रीजी की प्रतिमाओं की वृहद शांतिधारा की। भक्तों ने अर्घ्य अर्पित किए। भजनों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री पार्श्वनाथ जिनालय का अस्थाई चैत्यालय जिनबिंब स्थापना एवं मुख्य वेदी शिलान्यास समारोह ताजगंज स्थित मदन मोहन धर्मशाला में चल रहा है। इसमें कार्यक्रम के दूसरे दिन 24 फरवरी को सर्वप्रथम इंद्रों ने उपाध्याय श्री के मुखारविंद से उच्चारित मंत्रोच्चारण के साथ श्रीजी की प्रतिमाओं की वृहद शांतिधारा की। भक्तों ने अर्घ्य अर्पित किए। भजनों पर श्रद्धालुओं ने भक्ति की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए आगरा से शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसौम्य सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य तथा श्री पार्श्वनाथ जिनालय ट्रस्ट परिवार के तत्वावधान में गुड़िहाई स्थित श्री पार्श्वनाथ जिनालय का अस्थाई चैत्यालय जिनबिंब स्थापना एवं मुख्य वेदी शिलान्यास समारोह ताजगंज स्थित मदन मोहन धर्मशाला में चल रहा है। इसमें कार्यक्रम के दूसरे दिन 24 फरवरी को सर्वप्रथम इंद्रों ने उपाध्याय श्री के मुखारविंद से उच्चारित मंत्रोच्चारण के साथ श्रीजी की प्रतिमाओं की वृहद शांतिधारा की। इसके बाद महोत्सव के सभी पात्रों ने विधानचार्य आशुतोष जैन शास्त्री के निर्देशन में अष्ट द्रव्यों के साथ श्रीजी के समक्ष अर्घ्य अर्पित कर यागमंडल विधान की मांगलिक कियाएं पूरी कीं। विधान में मौजूद सभी भक्तजनों ने संगीतकार हेमलता जैन के मधुर भजनों पर नृत्य कर प्रभु पार्श्वनाथ की भक्ति का आनंद लिया।</p>
<p>कार्यक्रम में मध्य में भक्तों को उपाध्यायश्री ने धर्म पर चलने का मार्ग बताया। मीडिया प्रभारी शुभम जैन ने बताया कि अस्थाई चैत्यालय जिनबिंब स्थापना एवं मुख्य वेदी शिलान्यास समारोह के अंतिम दिन 25 फरवरी को उपाध्यायश्री के मंगल सानिध्य में जिनबिंबों को नवीन वेदी पर विधि-विधान के साथ विराजमान किया जाएगा। इस अवसर पर अपूर्व जैन, कृष्णकुमार जैन, सोनू जैन, अतुल जैन, संजीव जैन, नीरज जैन, बीनू जैन, राजू गोधा, रेनू जैन, रीमा जैन, सुनीता जैन, हेमलता जैन, प्रियंका जैन, पूर्वा जैन, ताजगंज जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</p>
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		<title>घटयात्रा एवं रथयात्रा के साथ हुआ चैत्यालय जिनबिंब स्थापना समारोह: समाजजनों ने लिया समारोह में धर्मलाभ </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Feb 2025 15:46:43 +0000</pubDate>
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<p><strong>उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसौम्य सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य एवं श्री पार्श्वनाथ जिनालय ट्रस्ट परिवार ताजगंज के तत्वावधान में गुड़िहाई स्थित श्री पार्श्वनाथ जिनालय में अस्थाई चैत्यालय जिनबिंब स्थापना एवं मुख्य वेदी शिलान्यास समारोह का शुभारंभ हुआ। इसमें समाजजनों ने बढ़चढ़कर भाग लिया। <span style="color: #ff0000">आगरा से शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसंत सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसौम्य सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य एवं श्री पार्श्वनाथ जिनालय ट्रस्ट परिवार ताजगंज के तत्वावधान में ताजगंज के गुड़िहाई स्थित श्री पार्श्वनाथ जिनालय में अस्थाई चैत्यालय जिनबिंब स्थापना एवं मुख्य वेदी शिलान्यास समारोह का शुभारंभ 23 फरवरी को हुआ। जिसकी शुरुआत भव्य घटयात्रा और रथयात्रा के साथ हुई। जिसमें बड़ी संख्या में सौभाग्यवती महिलाएं केसरिया साड़ियों में मांगलिक द्रव्य से भरे मंगल कलश लेकर घटयात्रा में चल रही थीं। साथ ही सौभाग्यशाली भक्त प्रभु पार्श्वनाथ की प्रतिमा को रथ में विराजमान कर उपाध्यायश्री के साथ रथयात्रा में चल रहे थे। घटयात्रा एवं रथयात्रा में सौधर्म इंद्र, यज्ञनायक कुबेर इंद्र, ईशान इंद्र,सानद इंद्र, महेन्द्र इंद्र के स्वरूप बग्घियों में सवार थे।</p>
<p><strong>इन्होंने ने लिया सौभाग्य</strong></p>
<p>घटयात्रा एवं रथयात्रा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर ताजगंज से शुरू होकर विभिन्न मार्गो से होती हुई कार्यक्रम स्थल पहुंची। जहां पर कार्यक्रम का ध्वजारोहण राहुल जैन एवं शिल्पी जैन परिवार द्वारा किया गया। आचार्यश्री विरागसागर जी महाराज के चित्र का अनावरण श्री पार्श्वनाथ जिनालय ट्रस्ट परिवार ताजगंज द्वारा किया गया। बालिकाओं ने नृत्य कर मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। इसके बाद महोत्सव के सभी पात्रों ने विधानचार्य आशुतोष जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में नवीन मुख्य वेदी की शिला स्थापित कर वेदी शिलान्यास की क्रियाएं संपन्न की। कार्यक्रम में मध्य में भक्तों को उपाध्यायश्री की मंगल वाणी श्रवण करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस कार्यक्रम में संगीत हेमलता जैन एंड पार्टी द्वारा दिया गया।</p>
<p><strong>यह समाजजन रहे मौजूद</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी शुभम जैन ने बताया कि अस्थाई चैत्यालय जिनबिंब स्थापना एवं मुख्य वेदी शिलान्यास समारोह के दूसरे दिन 24 फरवरी को उपाध्यायश्री के सानिध्य में श्रीजी का अभिषेक एवं याग मंडल विधान का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सोनू जैन अतुल जैन, विवेक जैन, संजीव जैन, नीरज जैन, बीनू जैन, राहुल जैन,रेनू जैन, रीमा जैन, अंजलि जैन, बबीता जैन, हेमलता जैन, प्रियंका जैन, शिल्पी जैन समस्त ताजगंज जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।</p>
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		<title>श्री सर्वतोभद्र जिनालय का संपन्न हुआ भूमि शिलान्यास समारोह: मंदिर में पूजा करने से धर्म और पुण्य प्राप्त होता है </title>
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		<pubDate>Sat, 11 May 2024 07:12:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में आगरा के बल्केश्वर स्थित गंगेगौरी बाग के निकट न्यू आदर्श नगर में प्रस्तावित भूमि पर आगरा का प्रथम बल्केश्वर ग्रेटर कमलानगर में नवनिर्मित [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में आगरा के बल्केश्वर स्थित गंगेगौरी बाग के निकट न्यू आदर्श नगर में प्रस्तावित भूमि पर आगरा का प्रथम बल्केश्वर ग्रेटर कमलानगर में नवनिर्मित होने जा रहे श्री सर्वतोभद्र जिनालय का भूमि शिलान्यास समारोह अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 10 मई को बल्केश्वर स्थित गंगेगौरी पार्क में बने विशाल पंडाल पर आयोजित किया गया | <span style="color: #ff0000">पढि़ए शुभम जैन की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा ।</strong>समाधिस्थ आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री विहसन्त सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में आगरा के बल्केश्वर स्थित गंगेगौरी बाग के निकट न्यू आदर्श नगर में प्रस्तावित भूमि पर आगरा का प्रथम बल्केश्वर ग्रेटर कमलानगर मे नवनिर्मित होने जा रहे श्री सर्वतोभद्र जिनालय का भूमि शिलान्यास समारोह अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 10 मई को बल्केश्वर स्थित गंगेगौरी पार्क में बने विशाल पंडाल पर आयोजित किया गया| जिसमें प्रहलाद जैन ने विशाल पंडाल का फीता खोलकर समारोह का शुभारंभ किया| शिलान्यास समारोह का ध्वजारोहण अतुल जैन एव अमन जैन परिवार ने किया| ध्वजारोहण के बाद श्री सर्वतोभद्र दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने गणाचार्यश्री विराग सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलित किया| सौभाग्यशाली भक्तों ने उपाध्याय श्री विहसन्तसागर जी महाराज के चरणों का पाद प्रक्षालन किया| पीएनसी परिवार की महिलाओं ने उपाध्यायश्री को शास्त्र भेंट किया| महिलाओं ने भक्ति गीत पर नृत्य कर मंगलाचरण की प्रस्तुति दी|</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-60325" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM.jpeg" alt="" width="1280" height="852" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM.jpeg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-768x511.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.15-PM-990x659.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />दान करने से अगले भव का होता है निर्माण</strong></p>
<p>समारोह के मध्य में भक्तों को उपाध्यायश्री विहसन्तसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि नवीन मंदिर बनाने से जीवन में सुख ,शांति की प्राप्त होती है।मंदिर में पूजा करने से धर्म की प्राप्ति होती है और पुण्य प्राप्त होता है। दान करने से अगले भव का निर्माण होता है। इस अवसर पर आयोजन समिति ने सभी अतिथियों को माला,पगड़ी पहनाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत सम्मान किया| इस दौरान श्री सर्वतोभद्र दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ के समक्ष श्रीफल भेंटकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया| इसके बाद विधानाचार्य संदीप जैन शास्त्री मेहगांव वालों के कुशल निर्देशन में मंत्रोच्चारण के साथ नवनिर्मित श्री सर्वतोभद्र जिनालय के भूमि शिलान्यास की मांगलिक क्रियाएं संपन्न हुई ।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-60324" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM.jpeg" alt="" width="1280" height="852" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM.jpeg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-300x200.jpeg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-1024x682.jpeg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-768x511.jpeg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-414x276.jpeg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-470x313.jpeg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-640x426.jpeg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-130x86.jpeg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-187x124.jpeg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/05/WhatsApp-Image-2024-05-11-at-12.37.16-PM-990x659.jpeg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />एनसी जैन इंजीनियर एवं हिमांशु जैन परिवार एवं सभी सौभाग्यशाली भक्तों ने शिला रखकर संपन्न कीं| शिलान्यास समारोह में सभी मुख्य शिला नरेंद्र कुमार जैन परिवार ने प्राप्त की| जिसमें श्रद्धालुओं ने बढ़- चढ़कर दान दिया| इस दौरान,एटा,मैनपुरी फिरोजाबाद,ग्वालियर,सोनागिर,मुरैना,भिंड,इटावा,कुरावली,मेहगांव,बरासो,आगरा के अलावा विभिन्न नगरों के जैन समाज ने उपाध्यायश्री विहसंत सागर जी महाराज ससंघ के समक्ष वर्षायोग 2024 हेतु श्रीफल भेंटकर निवेदन किया| शिलान्यास समारोह का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल एव उमेश जैन भिंड वालों द्वारा किया गया| कार्यक्रम के समापन के बाद साय: 5:00 बजे उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर, कचौड़ा बाजार बेलनगंज के लिए हुआ|</p>
<p>उपाध्यायश्री 108 विहसंतसागर जी महाराज ससंघ का दो दिन का मंगल प्रवास राजा की मंडी, जैन मदिर में रहेगा| इसके बाद 13 और 14 मई को मोती कटरा, जैन मंदिर 15 और 16 मई को छीपीटोला जैन मंदिर में मंगल प्रवास रहेगा|इस अवसर पर कार्यक्रम में आगरा दिगंबर जैन परिषद के अध्यक्ष जगदीशप्रसाद जैन,राकेश जैन पर्देवाले,प्रदीप जैन पीएनसी ,निर्मल मौठ्या,नीरज जैन जिनवाणी चैनल,पंकज जैन,पारस जैन,शिखरचंद जैन सिंघई,राजीव जैन,दिलीप जैन उत्तम उघोग,रजत जैन, सचिन जैन, प्रमोद जैन,अमित जैन चांदी वाले, अनिल कागज,राजेन्द्र जैन,सुरेश पांड्या,सुमेर पांडया,राजू गोधा,संजू गोधा,मीडिया प्रभारी शुभम जैन, समस्त बल्केश्वर एवं ग्रेटर कमला नगर जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर पुण्यार्जन किया।</p>
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