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	<title>आचार्यश्री विनिश्चय सागरजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>आचार्यश्री विनिश्चय सागरजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>वर्तमान की इतनी कदर करो कि भगवान महावीर बन सको : आचार्यश्री विनिश्चय सागरजी ने नैनवा के समाजजनों की मुक्तकंठ से की सराहना  </title>
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		<pubDate>Thu, 04 Dec 2025 11:15:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री विनिश्यसागर जी इन दिनों विहाररत हैं। उनका रात्रि विश्राम अल्फाबेट पब्लिक स्कूल में हुआ। गुरुवार को सुबह 8 बजे देईपोल चौराहे पर जैन समाज की ओर से उनकी भव्य अगवानी की गई। गाजे-बाजे बैंड बाजे के साथ जय जय कार करते उन्हें ले जाया गया। नैनवा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री विनिश्यसागर जी इन दिनों विहाररत हैं। उनका रात्रि विश्राम अल्फाबेट पब्लिक स्कूल में हुआ। गुरुवार को सुबह 8 बजे देईपोल चौराहे पर जैन समाज की ओर से उनकी भव्य अगवानी की गई। गाजे-बाजे बैंड बाजे के साथ जय जय कार करते उन्हें ले जाया गया। <span style="color: #ff0000">नैनवा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नैनवा।</strong> आचार्यश्री विनिश्यसागर जी इन दिनों विहाररत हैं। उनका रात्रि विश्राम अल्फाबेट पब्लिक स्कूल में हुआ। गुरुवार को सुबह 8 बजे देईपोल चौराहे पर जैन समाज की ओर से उनकी भव्य अगवानी की गई। गाजे-बाजे बैंड बाजे के साथ जय जय कार करते उन्हें ले जाया गया। जगह-जगह पर तोरण द्वार लगाए गए और पुष्पवर्षा की गई। आचार्यश्री का जैन समाज के विभिन्न परिवारों ने पाद प्रक्षालन किया। उनियारा चौराहा से शांति वीर धर्म स्थल तक एक दर्जन से अधिक परिवारों ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का पुण्य प्राप्त किया। शांति वीर धर्म स्थल पहुंचने पर आचार्य श्री संघ जिनालय के दर्शन कर गढ़पोल दरवाजा, मालदेव चौक होते हुए अग्रवाल दिगंबर जैन बड़े मंदिर पहुंचे। अगवानी के क्रम में महिलामंडल ने आचार्य श्री संघ को फूलों के थाल सजाकर पदार्पण कराया। संघ में आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी, मुनिश्री प्रांजल सागरजी महाराज, मुनिश्री प्रवीर सागरजी महाराज, मुनिश्री प्रत्यक्ष सागरजी महाराज क्षुल्लक श्री प्रमेश सागरजी महाराज संघ में हैं।</p>
<p><strong>दीप प्रज्वलन इन समाजजनों ने किया </strong></p>
<p>आचार्य श्री विराग सागर जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित अतिथि जयपुर, निवाई, रामगंजमंडी शिवाड़, महासभा तथा नैनवां समाज अध्यक्ष कमल मारवाड़ा ने किया। मंगलाचरण की प्रस्तुति बालिकाओं ने दी। आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य मोहनलाल, कमलकुमार, मनीषकुमार, पम्मी जैन मारवाड़़ा परिवार, शास्त्र भेंट का सौभाग्य सूरजमल जैन, एडवोकेट मुजीब, जयंत, मयंक सोगानी परिवार को प्राप्त हुआ। आचार्य श्री के जीवन पर प्रकाश मोहनलाल मारवाड़़ा, महावीर सरावगी, विनोद बनी, चेतन जैन, निमोडिया महासभा ने डाला।</p>
<p><strong>आचार्य श्री ने नैनवा की तारीफ</strong></p>
<p>आचार्य श्रीविनिश्चय सागर महाराज ने बताया कि जैसा सुना था, वैसा ही नैनवां नगरी पहुंचने पर देखने को मालूम हुआ कि यह धर्म नगरी है, जहां पर मुनिश्री प्रज्ञानसागर, मुनिश्री प्रसिद्ध सागर महाराज मेरी आंखों के दो नैन का वर्षा योग हुआ है। उन्होंने कहा आज का मनुष्य अपनी मंजिल पाने के लिए भटक रहा है। उस मंजिल पहुंचने पर पहले निश्चय करना होगा कि मुझे कौन सी मंजिल तक पहुंचना है।</p>
<p><strong>  दिगंबर संत ज्ञान देने के लिए आपके यहां आते हैं</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने कहा कि भगवान महावीर ने अपनी मंजिल पहुंचने के लिए संसार को त्याग दिया था तुम भी वर्तमान की इतनी कदर करो कि तुम भी भगवान महावीर जैसा बन सको। दिगंबर संत सदैव ही ज्ञान देने के लिए आपकी नगरी में आते हैं। आप उसे ज्ञान को जीवन में उतारते ही नहीं, यही कारण है संसार में भटकने का। आचार्य श्री ने बताया कि शुरुआत अच्छी होगी तो अंतिम छोर भी बहुत अच्छा होगा। मनुष्य अपना कद बढ़ाना चाहता है तो वह महावीर की वाणी से बढ़ेगा। आपकी चंचल लक्ष्मी से बढ़ने वाला नहीं है। यह धन तो नाशवान है। एक दिन आया वैसे ही चला जाएगा। धर्म जीवन भर आपका साथी बनाकर आपका साथ निभाएगा।</p>
<p><strong>आचार्यश्री को श्रीफल किया भेंट </strong></p>
<p>इस समारोह में प्रदीप जैन, निर्मल जैन डॉ. विमल जैन, अशोक जैन, चेतन जैन, निमोडिया महासभा सदस्य विमल झोला जैन निवाई मुनि भक्त पधारे। दिगंबर जैन समाज नैनवा, निवाई रामगंजमंडी, शिवाड़ जयपुर आदि स्थानों के भक्तों ने श्रीफल भेंट कर निवेदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म सभा का संचालन विनोद जैन बनी ने किया</p>
<p><strong>श्रद्धा से दर्शन करने पर भवन निर्मल होते हैं </strong></p>
<p>आर्यिका विशुद्धमति माताजी की शिष्या विशेषमति माताजी ने बताया कि श्रद्धा से प्रभु के दर्शन करने से बहुत कुछ प्राप्त होता है। बिना श्रद्धा के कुछ भी प्राप्त नहीं होता। साधु संत के दर्शन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, इसीलिए भक्त साधु-संतों के दर्शन करने के लिए लालायित रहते हैं। सभी बाहर से पधारे भक्तों को आचार्य ने अपना आशीष दिया</p>
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		<title>मेरी भावना पर आलेख फाइल को आचार्यश्रीद्वय का मिला आशीर्वाद: सभी संतों ने सद्प्रयास की सराहना की  </title>
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		<pubDate>Tue, 19 Aug 2025 11:00:20 +0000</pubDate>
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<p><strong>महावीर नगर प्रथम स्थित प्रज्ञा लोक में विराजमान आचार्यश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज एवं रामगंजमंडी में विराजमान आचार्यश्री विनिश्चय सागर जी महाराज ससंघ को मेरी भावना के प्रकाशित आलेख की फाइल राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन पार्श्वमणि एवं सारिका जैन ने भेंट की। <span style="color: #ff0000">कोटा से पढ़िए, विमल कमलेश जैन दरा वाले की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोटा।</strong> महावीर नगर प्रथम स्थित प्रज्ञा लोक में विराजमान आचार्यश्री प्रज्ञा सागर जी महाराज एवं रामगंजमंडी में विराजमान आचार्यश्री विनिश्चय सागर जी महाराज ससंघ के कर कमलों में मेरी भावना समस्त भारत वर्ष की शिक्षण के पाठ्यक्रम में शामिल हो और प्रार्थना के रूप में बोली जाए विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित आलेख की फाइल राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन पार्श्वमणि एवं सारिका जैन ने भेंट की। आचार्य श्री ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। पार्श्वमणि ने मेरी भावना पर अपनी प्रवचन श्रृंखला के माध्यम से दिव्य देशना कोटा समाज को मिले यह भावना व्यक्त की।</p>
<p>इससे पूर्व टोंक में चातुर्मास कर रहे आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ, नैनवा बूंदी में विराजमान मुनि श्री प्रज्ञान सागर जी एवं मुनिश्री प्रसिद्ध सागर जी महाराज ससंघ, देई तहसील नैनवा में विराजमान बालाचार्य निपूर्ण नंदी जी महाराज ससंघ, देवपुरा बूंदी में विराजमान मुनि वैराग्य सागर जी एवं मुनि सुप्रभ सागर महाराज, चमत्कार जी में विराजमान गुरु मां विशुद्ध मति माताजी ससंघ के कर कमलों में ‘मेरी भावना समस्त भारतवर्ष की शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम में शामिल हो एवं प्रार्थना के रूप में बोली जाए’ कवरेज फाइल समर्पित की जा चुकी है। सभी साधु संतों ने अपना मंगल आशीर्वाद इस सद्प्रयास के लिए प्रदान किया है।</p>
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		<title>आचार्यश्री विनिश्चय सागर महाराज ने कहा-ध्यान मतलब मन की एकाग्रता : ध धर्मसभा में मन, ध्यान और मानसिकता के बारे में दिए संदेश  </title>
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		<pubDate>Mon, 07 Jul 2025 14:33:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सोमवार सुबह श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। मंगलाचरण सुधा डूंगरवाल ने किया। धर्म सभा का संचालन राजकुमार गंगवाल ने किया। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने ध्यान के विषय में प्रकाश डाला। रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाडिया की यह खबर&#8230; रामगंजमंडी। नगर में सोमवार सुबह श्री शांतिनाथ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सोमवार सुबह श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। मंगलाचरण सुधा डूंगरवाल ने किया। धर्म सभा का संचालन राजकुमार गंगवाल ने किया। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने ध्यान के विषय में प्रकाश डाला। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाडिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रामगंजमंडी।</strong> नगर में सोमवार सुबह श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। मंगलाचरण सुधा डूंगरवाल ने किया। धर्म सभा का संचालन राजकुमार गंगवाल ने किया। आचार्य श्री विनिश्चय सागरजी महाराज ने ध्यान के विषय में प्रकाश डाला। आचार्य श्री ने ध्यान का मतलब समझाते हुए कहा कि किसी एक विषय में एकाग्र होना ध्यान है। मन की एकाग्रता से ही ध्यान प्रारंभ होता है। ध्यान में सबसे बड़ी समस्या मन का दोष है लेकिन, यह दोष मन का नहीं हमारा है क्योंकि, हमने मन को स्वतंत्रता इतनी दे रखी है कि हम कंट्रोल नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंद्रिय विषयों में हम आसक्त हैं। इसलिए बार-बार मन उस पर जाता है। संपूर्ण समस्या की जड़ मन है। यदि हमारी इच्छा शक्ति को दृढ़ कर ले तो तो यह संभव है। हमारी इच्छा शक्ति कमजोर होती है। मन में दृढ़ता नहीं होती है तो मन चंचल होता जाता है। मन को कंट्रोल करना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा कि मन वचन काया इन तीनों चीजों पर कंट्रोल करना ध्यान है। इन पर कंट्रोल करें थोड़ी तकलीफ परिषह सहकर हम कंट्रोल कर सकते हैं। हम मन में विकल्प बना लेते हैं और समय इस विषय वस्तु में निकल जाता है।</p>
<p><strong>ध्यान की भूमिका प्रत्येक व्यक्ति को बनाना चाहिए</strong></p>
<p>आचार्यश्री ने मोबाइल के विषय में कहा कि मोबाइल आने पर 100 प्रतिशत मन चंचल होता जा रहा है जो जानने योग्य नहीं है वह विकल्प जाने लगते हैं। मन के विकल्प का विच्छेद समाप्त करना ध्यान है। मन को विश्वास में लेना ध्यान है। मन इंद्रिय की सुन लेता है लेकिन, आत्मा की नहीं सुनता। ध्यान सुकून का कारण है। सुकून ध्यान से ही प्राप्त होता है। यह लोगों की भ्रांति है कि पर पदार्थ में आसक्ति है तो सुकून मिलता है। जिस समय आसक्ति आती है उस समय त्याग कर दो। जब तक आसक्ति नहीं जाएगी तब तक मन पर कंट्रोल नहीं कर सकते। हमें अनासक्ति का भाव बनाना पड़ेगा। सबको सुकुन चाहिए, सुकून आपको खुद को जागृत करना है। ध्यान की भूमिका प्रत्येक व्यक्ति को बनाना चाहिए। उन्होंने कहा रोगों का कारण शरीर नहीं हमारी मानसिकता है मस्तिष्क की भी एक सीमा है आप मन में विकल्प लेते जा रहे हैं। इसीलिए आप रोगों से ग्रसित हो रहे हैं। दिमाग खजाना है। आपने इसे कबाड़खाना बना रखा है। मानसिकता यदि खराब होगी तो मन एकाग्र नहीं हो सकता और वह ध्यान नहीं कर सकता और सुकून दिमाग में नहीं फैलता है।</p>
<p><strong>हमारी मानसिकता अमूल्य है</strong></p>
<p>तीन रोग सबसे ज्यादा हैं मानसिक, हार्ट और शुगर। हमारी मानसिकता हमने ही खराब कर रखी है। उन्होंने कहा तुम ही तुम्हारी मानसिकता के वैद्य हो। जब तक दिमाग की गंदगी नहीं निकालेगे अच्छाई नहीं आएगी। हमारी मानसिकता अमूल्य है। इसका कोई मूल्य नहीं है। मानसिकता का ध्यान नहीं रख रहे हैं कबाड़खाना बना रहे हैं ध्यान मानसिकता का विराम है। दुनिया में सबसे ज्यादा जरूरत ध्यान की है यदि ध्यान करना आ जाएगा तो आपको दवा की जरूरत नहीं होगी। आपकी मानसिकता निश्चित ध्यान में होगी। संपूर्ण लाभ देने वाला भी मन है और अनर्थ की ओर ले जाने वाला भी मन है, मन जड़ है। जिधर मुड़ जाओ उधर मुड़ जाएगा।</p>
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		<title>तिर्यच प्राणी भी आचार्यश्री विनिश्चय सागरजी के मंगल विहार में समर्पित: हर कोई जीव संतों का आशीष पाता है </title>
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		<pubDate>Sun, 01 Jun 2025 08:22:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रविवार की बेला में दिखा जब आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज का मंगल विहार तनोडिया से पॉलिटेक्निक कॉलेज के लिए चल रहा था। इस बीच मूक तिर्यच प्राणी कुत्ता गुरुदेव के चरणों में आया और सेवा में समर्पित हो गया। आचार्य श्रीएवं समस्त संघ ने अपना आशीर्वाद भी प्रदान किया। आचार्य श्री का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>रविवार की बेला में दिखा जब आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज का मंगल विहार तनोडिया से पॉलिटेक्निक कॉलेज के लिए चल रहा था। इस बीच मूक तिर्यच प्राणी कुत्ता गुरुदेव के चरणों में आया और सेवा में समर्पित हो गया। आचार्य श्रीएवं समस्त संघ ने अपना आशीर्वाद भी प्रदान किया। आचार्य श्री का मंगल विहार इंदौर से उज्जैन होते हुए रामगंजमंडी के लिए हो रहा है। जहां वर्षा योग 2025 होगा। <span style="color: #ff0000">रामगंजमंडी से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>तनोदिया।</strong> दिगंबर संत साधना का जीवंत प्रमाण है। उनके लिए उनके लिए आकाश ओढ़न है, धरती बिछोना है। तपती धूप हो, भीषण सर्दी हो, बस राग रंग से परे होकर बस अपनी साधना करना निर्माेहिता निष्प्रहता इनमें होती है। हर कोई जीव उनका आशीष पाता है एवं सेवा में तत्पर हो जाता है। मूक प्राणी भी उनका आशीष वात्सल्य को पाकर अपने को धन्य मानता है। ऐसा ही पल रविवार की बेला में दिखा जब आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी महाराज का मंगल विहार तनोडिया से पॉलिटेक्निक कॉलेज के लिए चल रहा था। इस बीच मूक तिर्यच प्राणी कुत्ता गुरुदेव के चरणों में आया और सेवा में समर्पित हो गया।</p>
<p>ऐसा लगा जैसे सबकुछ उसने गुरुदेव को समर्पित कर दिया हो और गुरुदेव के मंगल विहार में चलता रहा। आचार्य श्रीएवं समस्त संघ ने अपना आशीर्वाद भी प्रदान किया। आचार्य श्री का मंगल विहार इंदौर से उज्जैन होते हुए रामगंजमंडी के लिए हो रहा है। जहां वर्षा योग 2025 होगा। आचार्य श्री के मंगल विहार में ऋषभ जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन गर्ग, नितिन जैन सबदरा शामिल रहे।</p>
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