<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%86%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%9C/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Wed, 27 May 2026 13:24:31 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>धर्म तीर्थ का प्रवर्तक जीव, तीर्थंकर कहलाता है : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने तीर्थंकारों के उपदेश, नाम और स्वरूप का किया वर्णन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_living_being_who_establishes_the_dharmatirtha_is_called_a_tirthankara/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_living_being_who_establishes_the_dharmatirtha_is_called_a_tirthankara/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 13:24:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashri Vardhamansagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Ganini Shri Suparshva Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Samadhi Sthali]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Chandraprabh Jinalaya Bad Balaji]]></category>
		<category><![CDATA[Shrifal Jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[गणिनी श्री सुपार्श्व मति माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्री चंद्रप्रभ जिनालय बड़ बालाजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[समाधि स्थली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=107410</guid>

					<description><![CDATA[दर्शन विशुद्धि आदि 16 कारण भावना को चिंतन भाने से तीर्थंकर नाम कर्म की सातिशय पुण्य प्रकृति का बंध होता है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री चंद्रप्रभ जिनालय बड़ के बालाजी में यह उद्बोधन दिया। जयपुर से पढ़िए, डॉ.राजेश पंचोलिया की यह रिपोर्ट&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी गणिनी श्री सुपार्श्व मति [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दर्शन विशुद्धि आदि 16 कारण भावना को चिंतन भाने से तीर्थंकर नाम कर्म की सातिशय पुण्य प्रकृति का बंध होता है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री चंद्रप्रभ जिनालय बड़ के बालाजी में यह उद्बोधन दिया। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, डॉ.राजेश पंचोलिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी गणिनी श्री सुपार्श्व मति माताजी की समाधि स्थली श्री चंद्रप्रभ जिनालय बड़ बालाजी में संघ सहित विराजित हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने धर्म सभा में उपदेश दिया कि सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यकचारित्र से संसार सागर से तरते है, इसलिए इन्हें तीर्थ कहते हैं। जो तीर्थ का उपदेश देते हैं, वे तीर्थंकर कहलाते हैं। जो समवसरण में विराजमान होकर धर्म का सच्चा उपदेश देते हैं जिन्हें तीन लोक के जीव नमस्कार करते हैं वह तीर्थंकर होते है। सुरेश सबलावत भागचंद चुड़ीवाल के अनुसार आचार्य श्री ने कहा कि कोई भव्य सम्यग्दृष्टि जीव तीर्थंकर केवली या श्रुत केवली के पादमूल में दर्शन विशद्धि आदि सोलह कारण भावनाओं को भाता है, तब उसे तीर्थंकर नामकर्म की सातिशय पुण्य प्रकृति का बंध होता है, पुनः वह तीर्थंकर नाम कर्म की प्रकृति जब उदय में आती है। तब उस जीव द्वारा धर्म तीर्थ का प्रवर्तन होता है और वह धर्म तीर्थ का प्रवर्तक जीव, तीर्थंकर कहलाता है। तीर्थंकर वैसे तो अनंत हो चुके, किन्तु भरत और ऐरावत क्षेत्र में अवसर्पिणी के चतुर्थ काल एवं उत्सर्पिणी के तृतीय काल में क्रमशः एक के बाद एक चौबीस तीर्थंकर होते हैं। आचार्य श्री ने भरत क्षेत्र के भूतकाल, वर्तमान काल, भविष्य काल के 24 तीर्थंकर भगवान तथा विद्यमान विदेह क्षेत्र के विद्यमान 20 तीर्थंकरों के नाम की विवेचना की। श्री आदिनाथ, वृषभनाथ और ऋषभनाथ के 3 नाम, श्री पुष्पदंत के अन्य नाम श्री सुविधिनाथ का तथा अंतिम तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी के अन्य नाम वीर, अतिवीर, सन्मति और वर्धमान एवं शेष 21 तीर्थंकर एक ही नाम के है। बाल ब्रह्मचारी तीर्थंकर में श्री वासुपूज्य, श्री मल्लीनाथ ,नेमिनाथ पार्श्वनाथ तथा महावीर भगवान होते हैं।</p>
<p>श्री शांतिनाथ, श्री कुंथुनाथ अरनाथ चक्रवती, तीर्थंकर और कामदेव हैं। तीर्थंकर सामान्य जीव होकर तप, त्याग, धर्म का सच्चा श्रद्धान कर भावो परिणामों से 8 मुख्य कर्मों को नष्ट किया। अपने बच्चों के नाम महापुरुषों भगवान के नाम रखने से मन, जीवन में अच्छा प्रभाव होता है। लौकिक पढ़ाई के साथ धर्म के संस्कार भी जरूरी हैं। कर्म उदय में आने पर असर दिखाते हं।ै भावी तीर्थंकर राजा श्रेणिक ने साधना ,तपस्यारत यशोधर मुनिराज पर 7 वें नरक का बंध किया था। बाद ने पुण्य से आयु कर्म से प्रभाव से पहले नर्क का बंध किया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_living_being_who_establishes_the_dharmatirtha_is_called_a_tirthankara/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नमन भैया ने अक्षय तृतीया पर आचार्य श्री को दिया आहारदान : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी से की आध्यामिक चर्चा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/naman_bhaiya_offered_ahardan_food_donation_to_acharya_shri_on_akshay_tritiya/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/naman_bhaiya_offered_ahardan_food_donation_to_acharya_shri_on_akshay_tritiya/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Apr 2026 13:41:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Vardhman Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Akshaya Tritiya]]></category>
		<category><![CDATA[Child Brahmachari]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Food Donation]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[jaipur]]></category>
		<category><![CDATA[Salutations to brother]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Religious Discussion]]></category>
		<category><![CDATA[अक्षय तृतीया]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आध्यात्मिक धार्मिक चर्चा]]></category>
		<category><![CDATA[आहारदान]]></category>
		<category><![CDATA[जयपुर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[बाल ब्रह्मचारी नमन भैया]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=105322</guid>

					<description><![CDATA[नगर के गौरव बाल ब्रह्मचारी नमन भैया ने जयपुर जाकर आचार्यश्री वर्धमानसागर जी को आहारदान दिया। साथ ही उन्होंने उनके सानिध्य में आध्यात्मिक चर्चा कर आत्म तत्व को जाना। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। नगर के गौरव बाल ब्रह्मचारी नमन भैया ने जयपुर जाकर आचार्यश्री वर्धमानसागर जी को आहारदान दिया। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर के गौरव बाल ब्रह्मचारी नमन भैया ने जयपुर जाकर आचार्यश्री वर्धमानसागर जी को आहारदान दिया। साथ ही उन्होंने उनके सानिध्य में आध्यात्मिक चर्चा कर आत्म तत्व को जाना। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> नगर के गौरव बाल ब्रह्मचारी नमन भैया ने जयपुर जाकर आचार्यश्री वर्धमानसागर जी को आहारदान दिया। साथ ही उन्होंने उनके सानिध्य में आध्यात्मिक चर्चा कर आत्म तत्व को जाना। उल्लेखनीय है कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री अपूर्व सागर जी महाराज मुनि श्री अर्पित सागर जी महाराज एवं मुनि श्री विवर्जित सागर जी महाराज के संघ का प्रमुख संचालन कर रहे त्याग की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले नगर के गौरव बाल ब्रह्मचारी नमन भैया जी ने अक्षय तृतीया के मंगल पावन दिवस पर जयपुर पहुंच कर आचार्य शांति सागर जी महाराज की परंपरा का निर्वाह कर रहे आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज को आहार दान देकर पुण्य अर्जन किया। इसके बाद उन्होंने आचार्य श्री से आध्यात्मिक धार्मिक चर्चा भी की। जैसा कि ज्ञात है कि पूर्व में ब्रह्मचारी नमन भैया ने आचार्य श्री से 2 प्रतिमा के व्रत धारण कर चुके हैं। आप आगामी दिनों में आचार्य श्री से जैनेश्वरी दीक्षा के लिए निवेदन कर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करने का भाव प्रकट करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/naman_bhaiya_offered_ahardan_food_donation_to_acharya_shri_on_akshay_tritiya/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>देव शास्त्र गुरु की शरण ही सच्ची शरण: आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ने कहा कि आचार्य परमेष्ठी हमें आत्म कल्याण का मार्ग दिखाते हैं </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_refuge_of_the_deity_the_scriptures_and_the_guru_is_the_only_true_refuge/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_refuge_of_the_deity_the_scriptures_and_the_guru_is_the_only_true_refuge/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 08:51:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Vardhmansagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Arihant]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Parmeshthi]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Shyam Nagar Jaipur]]></category>
		<category><![CDATA[Siddha]]></category>
		<category><![CDATA[Spiritual Welfare]]></category>
		<category><![CDATA[Udaipur MLA Tarachand Jain. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Upadhyaya]]></category>
		<category><![CDATA[अरिहंत]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आत्मकल्याण]]></category>
		<category><![CDATA[उदयपुर विधायक ताराचंद जैन]]></category>
		<category><![CDATA[उपाध्याय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंच परमेष्ठी]]></category>
		<category><![CDATA[श्याम नगर जयपुर]]></category>
		<category><![CDATA[सिद्ध]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=104526</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। आज कीे धर्मसभा में प्रवचन में बताया गया कि भगवान, गुरु और धर्म की शरण ही जीवन की सच्ची शरण है। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; जयपुर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। आज कीे धर्मसभा में प्रवचन में बताया गया कि भगवान, गुरु और धर्म की शरण ही जीवन की सच्ची शरण है। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी श्याम नगर जयपुर में संघ सहित विराजित हैं। आज कीे धर्मसभा में प्रवचन में बताया गया कि भगवान, गुरु और धर्म की शरण ही जीवन की सच्ची शरण है। संसार के सभी संबंध और साधन अस्थायी हैं, जबकि आत्मा शाश्वत है। हम सभी नमस्कार महामंत्र का जाप करते हैं, पर उसके गूढ़ अर्थ को समझना भी आवश्यक है। सुरेश सबलावत ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि यह मंत्र पंच परमेष्ठी, अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु की वंदना है, जो हमें आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। सच्चा मंगल केवल बाहरी कार्यों (जैसे विवाह आदि) में नहीं, बल्कि धर्म, संयम और आत्मचिंतन में है। भगवान की भक्ति के साथ विनय (नम्रता) और सही आचरण भी जरूरी है। हमें यह समझना चाहिए कि हर छोटे से छोटे जीव में भी आत्मा है, इसलिए सभी के प्रति करुणा और समान भाव रखना चाहिए। यह शरीर आत्मा का मंदिर है और मनुष्य जन्म अत्यंत दुर्लभ एवं मूल्यवान है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री के दर्शन के लिए भक्त पधार रहे हैं</strong></p>
<p>पूर्वाचार्यों की परंपरा और आगम हमारे मार्गदर्शक हैं, जिन्हें हमें बनाए रखना चाहिए। धर्म के मार्ग में स्त्री और पुरुष दोनों का समान अधिकार और सहभाग है। अतः हमें लज्जा, मर्यादा, भक्ति और सही आचरण के साथ जीवन जीते हुए भगवान की शरण में रहकर आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। प्रतिदिन अनेक नगरों से आचार्य श्री के दर्शन के लिए भक्त पधार रहे है। उदयपुर के विधायक ताराचंद जैन एवं श्राविका रत्न 6 प्रतिमा व्रत धारी सुशीला अशोक पाटनी आरके मार्बल किशनगढ़ दर्शन के लिए पधारे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_refuge_of_the_deity_the_scriptures_and_the_guru_is_the_only_true_refuge/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>तीर्थंकर बालक जन्म से मति, श्रुत और अवधि ज्ञान के धारी होते हैं : भगवान का जन्म कल्याणक श्रद्धा, भक्ति उत्साह से मनाया गया </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/tirthankara_children_are_born_with_knowledge_of_intellect_shruta_and_avadhi/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/tirthankara_children_are_born_with_knowledge_of_intellect_shruta_and_avadhi/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 11:41:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhamansagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Saraswatimati]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Shri Swastibhushan Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[birth anniversary]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphaal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Tirthankar Balak]]></category>
		<category><![CDATA[Vidhinayak Adi Nath]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका सरस्वतीमति]]></category>
		<category><![CDATA[जन्म कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[तीर्थंकर बालक]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[विधिनायक आदिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=100288</guid>

					<description><![CDATA[संसार समुद्र में दुःख से डूबे हैं, संसार में सुख नहीं है, सुख शाश्वत होना चाहिए और शाश्वत सुख धर्म से मिलता है और धर्म से पुण्य कमाया जाता है और पुण्य से ही सुख के राह मिलती है। यह उद्गार आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने व्यक्त किए। पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>संसार समुद्र में दुःख से डूबे हैं, संसार में सुख नहीं है, सुख शाश्वत होना चाहिए और शाश्वत सुख धर्म से मिलता है और धर्म से पुण्य कमाया जाता है और पुण्य से ही सुख के राह मिलती है। यह उद्गार आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">पदमपुरा से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>पदमपुरा।</strong> आज आपने तीर्थंकर बालक की देव बालकों के साथ क्रीड़ा देखी है। संसार का हर प्राणी क्रीडा करता है, जो किसी भी रूप में होती है। संसार असार है। इस असार संसार में रहने वाले सुख की कल्पना कर लौकिक सुख चाहते हैं। संसार समुद्र में दुःख से डूबे हैं, संसार में सुख नहीं है, सुख शाश्वत होना चाहिए और शाश्वत सुख धर्म से मिलता है और धर्म से पुण्य कमाया जाता है और पुण्य से ही सुख के राह मिलती है। यह उद्गार आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बाल क्रीड़ा में अपने कबड्डी का खेल देखा। संसारी प्राणी भी पुण्य और पाप की कबड्डी में मग्न है। पुण्य प्राप्ति के लिए धर्म की क्रिया करना होगी। पाप हमेशा पुण्य से हारता है पुण्य यदि हारता है तो हमें संसार रूपी समुद्र में दुःख रूपी मगरमच्छ मिलते हैं। ब्रह्मचारी गजू भैय्या ने बताया कि आचार्यश्री ने कहा कि आप संसार में रचे बसे हैं और दुःख में सुख खोज रहे हैं।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100291" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-1024x683.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-1536x1024.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-990x660.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025-1320x880.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260219-WA0025.jpg 1599w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>देव शास्त्र गुरु संत समागम पुण्य धर्म अर्जित करने के साधन</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने बताया कि इंसान से पशु ठीक है क्योंकि, वह दिन भर खाने के बाद भी जुगाली करते हैं। मगर इंसान कभी धर्म रूपी, वैराग्य रूपी, स्वाध्याय रूपी जुगाली नहीं करता। संत आपको अभिषेक, दर्शन, पूजन स्वाध्याय की प्रेरणा देते हैं किंतु, उसमें आपकी रुचि नहीं रहती है। देव शास्त्र गुरु संत समागम पुण्य धर्म अर्जित करने के साधन है। यह रत्नत्रय धर्म के अंग हैं। रत्नत्रय धर्म के अवलंबन से सिद्धालय की राह प्राप्त होती है। पंच कल्याणक से खाली हाथ नहीं जाकर छोटे-छोटे नियम व्रत लेकर प्रतिदिन देव दर्शन, अभिषेक, पूजन, स्वाध्याय, मनन, चिंतन से जीवन में परिवर्तन लाकर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का प्रयास करंे। पदमपुरा अतिशय क्षेत्र में श्रीमद जिनेंद्र चौबीसी का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ, आर्यिका सरस्वतीमति, आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी के संघ सानिध्य में मनाया जा रहा है।</p>
<p><strong>शोभायात्रा का समापन पाण्डुक शिला पर हुआ</strong></p>
<p>गुरुवार को विधिनायक आदिनाथ तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। इसका नाटकीय मंचन सुमधुर स्वर लहरियों में सभी ने मंत्रमुग्ध होकर देखा, सुना। भक्ति से नृत्य कर इंद्रों के साथ सभी ने खुशियां मनाई। शोभायात्रा का समापन पाण्डुक शिला पर हुआ। भगवान को विराजित कर सबसे पहले तीर्थंकर बालक का अभिषेक सौधर्म इंद्र सुरेंद्र शची इंद्राणी मृदुला ने किया। इनके बाद बोली के माध्यम से चयनित राजेश बी शाह अहमदाबाद और अन्य सौभाग्यशाली परिवारों ने किया। सभी इंद्रों के अभिषेक के बाद समाजजनों ने अभिषेक किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट मुनि श्री प्रभव सागरजी, तारा,राजेश, राकेश सेठी जयपुर कोलकाता परिवार ने किया। संयोग से संघस्थ शिष्य मुनि श्री प्रभव सागर जी का भी जन्म एवं दीक्षा दिवस है। इसके पूर्व चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन संतोष सेठी, चिरंजीलाल बगड़ा कोलकाता ने किया। कर्नाटक मठ बद्री के भट्टारक भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>तीर्थकर प्रभु का जन्म सौधर्म इंद्र का आसन कंपायमान </strong></p>
<p>9 माह पूर्ण होने पर तीर्थकर बालक का जन्म होता है। जन्म होते ही तीन लोक के प्राणियों को पल भर के लिए शांति का अनुभव होता है। देवताओं द्वारा 12.30 करोड़ प्रकार के बाजे बजाए जाते हैं। सौधर्म इंद्र का आसन कंपायमान होता है और ध्यान लगाकर सौधर्म इंद्र यह जानते हैं कि अमुक नगरी में तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ है। वह अपने सिंहासन से खड़े होकर सात कदम आगे चलकर स्वर्ग से तीर्थकर बालक को नमस्कार करता है। सौधर्म इंद्र सभी देव परिवार के साथ ऐरावत हाथी पर शचि इंद्राणी के साथ तीर्थकर बालक की जन्म नगरी की ओर प्रस्थान करता है।</p>
<p><strong>तीन परिक्रमा कर शचि इंद्राणी ने किए प्रभु के दर्शन </strong></p>
<p>सौधर्म इंद्र ऐरावत हाथी पर शचि इंद्राणी के साथ सवार होकर तीर्थंकर बालक का जन्म जिस नगरी में हुआ है। उस नगर के तीन परिक्रमा लगाते हैं और शचि इंद्राणी प्रसुति गृह में जाती है, जहां तीर्थकर माता के पास मायावी बालक को सुलाकर तीर्थंकर बालक को अपनी गोद में लेकर बाहर आती है। तीर्थकर बालक के दिव्य मनोहर अलौकिक रूप को देखकर शचि इंद्राणी अत्यंत भाव विभोर होकर परिणाम में विशुद्धि बढ़ जाती है और संसार को केवल दो भव प्रमाण कर लेती है। वर्तमान भव सहित अर्थात तीर्थंकर बालक का दर्शन कितना पुण्यशाली होता है कि शचि इंद्राणी रानी एक भव अवतारी हो जाती है। तीर्थकर बालक को सौधर्म इंद्र जब गोद में लेता है तो दो नेत्रों से उन्हें संतुष्टि नहीं मिलती तो वह अपने 1000 नेत्र लगाकर भगवान को निहारते हैं। तीर्थकर बालक को देखते हैं। इसके बाद सौधर्म इंद्र शचि इंद्राणी के साथ ऐरावत हाथी पर तीर्थंकर बालक को लेकर जाते हैं। रत्न सिहासन पर विराजमान कर क्षीरसागर से 1008 जल के घडो कलशौ से भगवान का जन्म अभिषेक वैभव के साथ करते हैं। बालक के दाहिने पैर पर जो चिन्ह होता है। वही तीर्थकर का लांछन होता है। तीर्थंकर बालक के जन्म अभिषेक के बाद सौधर्म इंद्र तीर्थकर बालक का नामकरण करते हैं।</p>
<p><strong> 8 वर्ष की उम्र में अणुवर्ती</strong></p>
<p>8 वर्ष की आयु में तीर्थकर बालक अणुव्रत का पालन करने लग जाते हैं। क्रम से युवावस्था प्राप्त कर कुछ तीर्थकरों का विवाह भी होता है तीर्थकर कुमार माता पिता के इकलौते हैं। उनका राज्याभिषेक किया जाता है। संयोग पाकर वैराग्य का निमित्त मिलता है और वह वन की ओर प्रस्थान करते हैं। तीर्थकर स्वयंभू होते हैं अन्य किसी के संबोधन की आवश्यकता नहीं होती है। केवल सामान्य निमित्त पाकर वह वैराग्य को प्राप्त करते हैं। तीर्थंकर सम्मेद दृष्टि होते हैं तत्वों का यथार्थ चिंतन करते हैं।</p>
<p><strong>तीर्थकर बालक माता पिता की इकलौती संतान</strong></p>
<p>तीर्थकर बालक अपने माता-पिता की इकलौती संतान होते हैं। तीर्थकर बालक के जन्म होने के बाद माता-पिता को अन्य कोई संतान नहीं होती है। तीर्थकर बालक के भोजन भोग उपयोग की सामग्री स्वर्ग से सोधर्म इंद्र भेजते हैं। तीर्थकर बालक के साथ बाल क्रीड़ा जो होती है वह स्वर्ग के देव आकर करते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/tirthankara_children_are_born_with_knowledge_of_intellect_shruta_and_avadhi/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी ससंघ का मंगल प्रवेश को लेकर उत्साह: पीपल्दा गांव में श्रीमज्जिनेंद्र जिन बिंब पंच कल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की चल रही तैयारी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/excitement_over_the_auspicious_entry_of_acharyashree_vardhaman_sagar_ji_sangha/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/excitement_over_the_auspicious_entry_of_acharyashree_vardhaman_sagar_ji_sangha/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 08:54:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Vardhman Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Bid]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Mitrapura Tehsil]]></category>
		<category><![CDATA[Panch Kalyanak Committee]]></category>
		<category><![CDATA[Pipalda Village]]></category>
		<category><![CDATA[Pran Pratishtha Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[Sawai Madhopur]]></category>
		<category><![CDATA[Shrimajjinendra Jin Idol Panch Kalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक समिति]]></category>
		<category><![CDATA[पीपल्दा गांव]]></category>
		<category><![CDATA[प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[बोली]]></category>
		<category><![CDATA[मित्रपुरा तहसील]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीमज्जिनेंद्र जिन बिंब पंच कल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[सवाई माधोपुर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=95035</guid>

					<description><![CDATA[सवाई माधोपुर जिले के मित्रपुरा तहसील स्थित पीपल्दा गांव में श्रीमज्जिनेंद्र जिन बिंब पंच कल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ सान्निध्य में 28 नवंबर से 2 दिसंबर तक आयोजित होगा। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का संघ सहित धार्मिक कार्यक्रम के लिए मंगल विहार चल रहा है। बोली से पढ़िए, राजेश [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सवाई माधोपुर जिले के मित्रपुरा तहसील स्थित पीपल्दा गांव में श्रीमज्जिनेंद्र जिन बिंब पंच कल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ सान्निध्य में 28 नवंबर से 2 दिसंबर तक आयोजित होगा। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का संघ सहित धार्मिक कार्यक्रम के लिए मंगल विहार चल रहा है। <span style="color: #ff0000">बोली से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बोली।</strong> सवाई माधोपुर जिले के मित्रपुरा तहसील स्थित पीपल्दा गांव में श्रीमज्जिनेंद्र जिन बिंब पंच कल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ सान्निध्य में 28 नवंबर से 2 दिसंबर तक आयोजित होगा। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का संघ सहित धार्मिक कार्यक्रम के लिए मंगल विहार चल रहा है। आचार्य श्री का मुनि श्री हितेंद्रसागर जी, मुनि श्री चिंतनसागर जी, मुनि श्री भुवनसागर जी, आर्यिका श्री विन्रममति, आर्यिका श्री प्रणत मति, आर्यिका श्री निर्माेहमति जी 6 साधुओं के साथ मंगल प्रवेश 25 से 26 नवंबर को संभावित है। संघ की अगवानी सकल दिगंबर जैन समाज पीपलदा, पंच कल्याणक समिति एवं सौधर्म इंद्र तथा अन्य इंद्र करेंगे।</p>
<p><strong>कार्यक्रम की सफलता के लिए समितियां गठित </strong></p>
<p>सवाईमाधोपुर जिले के अनेक निकट नगरों के सहयोग से पंच कल्याणक कार्यक्रम के लिए सकल दिगंबर जैन समाज पीपलदा की ओर से कार्यक्रम की सफलता के लिए विभिन्न समितियां का गठन किया गया है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के अध्यक्ष मनोज जैन सोगानी तथा सकल जैन समाज के अध्यक्ष बजरंगलाल महाजन ने बताया कि पंचकल्याणक समिति में उपाध्यक्ष विमलकुमार सिंघल, महामंत्री योगेश सिंघल, सहमंत्री विमल सिंघल, कोषाध्यक्ष शंभू दयाल गुप्ता और प्रचार मंत्री गोपाल सिंघल को बनाया गया है।</p>
<p><strong>व्यवस्था के लिए संयोजक बनाए</strong></p>
<p>पंचकल्याण कार्यक्रम के लिए विभिन्न व्यवस्था भोजन व्यवस्था ,मंच सम्मान ,साधु आहार,पेयजल, टेंट-लाइट, यातायात, आवास, पूजन सामग्री, चिकित्सा सुविधा, प्रचार समिति आदि का गठन कर संयोजक मनोनीत किए गए। समाज के महामंत्री ओम प्रकाश सिंघल, कोषाध्यक्ष राजेंद्र सिंघल, ओमप्रकाश बजाज ने बताया कि बोली, टोंक निवाई, लाखनपुर, मित्रपुरा, सवाईमाधोपुर,लालसोट, चौथ का वरवाडा, खिरनी, भाड़ोती, गंगापुर सिटी, परटाना आदि नगरों से समाजजन भी तन-मन-धन से सहयोग कर रहे हैं।</p>
<p><strong>इंद्र परिवार का हुआ चयन </strong></p>
<p>पंच कल्याणक में मुख्य रूप से विधि नायक चंद्रप्रभु, श्री पद्मप्रभु, श्री शांतिनाथ, श्री महावीर स्वामी सहित अनेक भगवानों के साथ देवी श्री पद्मावती और धर्मेंद्र धरणेंद, यक्ष-यक्षिणों की प्रतिमा भी विराजित होंगी। पंच कल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष मनोज जैन सोगानी ने बताया कि पंच कल्याणक के लिए सौधर्म इंद्र समर कंठाली जैन, पूर्वा कंठाली, भगवान के माता पिता, कुबेर इंद्र, महा यज्ञनायक, ईशान, ब्रह्म इंद्र सहित अन्य इंद्र परिवार का चयन हो गया है।</p>
<p><strong>इनको भी मिला इंद्र बनने का सौभाग्य </strong></p>
<p>भगवान के माता-पिता शांति देवी प्रदीप कुमार वेद, कुबेर रजत, महिमा बोहरा आनंदपुर, कालू, महायज्ञ नायक मीना, दीपक प्रधान धामनोद मध्यप्रदेश, यज्ञ नायक राजेंद्र प्रीति पीपल्दा, ईशान इंद्र ओम शांति सिंघल, सनत इंद्र रमेश संतोष सिंघल पीपल्दा, माहेंद्र इंद्र सुबोध छाबड़ा राजनंदगांव, ब्रह्म इंद्र रामपाल कंचन देवी चवरिया निवाई सहित अनेक इंद्र बने हैं। आगंतुकों के आवास और भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/excitement_over_the_auspicious_entry_of_acharyashree_vardhaman_sagar_ji_sangha/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>धर्म रूपी विश्व विद्यालय से ज्ञान मिलता है : आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने श्री शांतिनाथ भगवान और आचार्य श्री शांति सागर जी का संयोग बताया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/knowledge_is_obtained_from_the_university_of_religion/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/knowledge_is_obtained_from_the_university_of_religion/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 13:20:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shanti Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Vardhmansagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Aryika Shri Deshna Mati Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Atishay Kshetra]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[First Tirthankara Rishabhdev]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Shramana Tradition]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Shantinath Bhagwan]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Shantisagar Discourse Mala]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अतिशय क्षेत्र]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आर्यिका श्री देशना मति जी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव]]></category>
		<category><![CDATA[श्रमण परंपरा]]></category>
		<category><![CDATA[श्री शांतिनाथ भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[श्री शांतिसागर प्रवचन माला]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=91443</guid>

					<description><![CDATA[राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव में हमारे नहीं है नश्वर है। श्री शांतिसागर प्रवचन माला के तहत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कर्मबंध के बारे में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव में हमारे नहीं है नश्वर है। श्री शांतिसागर प्रवचन माला के तहत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने कर्मबंध के बारे में बताया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> राग और द्वेष से कर्म बंध होते हैं। इससे सुख का नाश होता है। संसार में जन्म मरण का परिभ्रमण होता रहता है। हमें जो भौतिक पदार्थ पुरुषार्थ से मिले हैं। वह वास्तव में हमारे नहीं है नश्वर है। घर जिसमें आप रहते हैं। यह भी जेल के समान है। घर में रहना भी बंधन है, इन परिवार ,परिग्रह, राग द्वेष के बंधन कारण आप पराधीन है। इससे उदासीन होकर वैराग्य लेना ही वास्तविक यथार्थ ज्ञान है। यह मंगल देशना श्री शांतिसागर प्रवचन माला के तहत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने अतिशय क्षेत्र में धर्मसभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने श्री शांतिनाथ भगवान और प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी का संयोग बताया कि श्री शांतिनाथ भगवान के समय से धर्म परिवर्तन निरंतर चल रहा है। उसी प्रकार 20वीं सदी में प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी ने श्रमण परंपरा को परावर्तन कर पुनर्जीवित किया। तब से श्रमण परंपरा भी निर्बाध जारी है।</p>
<p><strong>पुरुषार्थ करने पर मोक्ष की राह प्रशस्त होगी</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने उपदेश में आगे बताया कि प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव ने एक लाख वर्ष पूर्व की आयु शेष रहने पर 84 खंड के भवन राज पाठ वैभव को त्याग कर निमित्त से जैनेश्वरी दीक्षा धारण की। आप भी मन, शरीर और आत्मा रूपी तीन खंड के भवन में रहते हैं। आत्मा को सब भूल रहे हैं। आत्मा के स्वरूप का यथार्थ ज्ञान प्राप्त करने का पुरुषार्थ करने पर मोक्ष की राह प्रशस्त होगी। जिनशासन ज्ञान में है। धर्म रूपी विश्व विद्यालय से ज्ञान मिलता है। शासन ज्ञान से चलता है, ज्ञान से शांति मिलती है ज्ञान नियमित बनने का मार्ग देता है। संसारी भव्य प्राणियों के लिए धर्म ही मंगलमय और शरणभूत है।</p>
<p><strong>आर्यिका श्री देशना मति जी ने क्रोध और क्षमा की विवेचना की</strong></p>
<p>समाज प्रवक्ता पवन कंटान और विकास जागीरदार, कमल सराफ ने बताया कि आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री देशना मति जी ने क्रोध और क्षमा की विवेचना की। अपेक्षा की उपेक्षा होने से क्रोध आता है। पवन और अंजना सती की कहानी के माध्यम से बताया कि 22 वर्ष तक पति का वियोग सिर्फ इस कारण से हुआ कि उन्होंने जिनेंद्र भगवान की प्रतिमा को 22 मिनट के लिए छुपा दिया था। उन कर्मों के बंधन ने उन्हें यह दुःख दिया। जिसे उन्होंने समता से शांति से सहन किया। क्रोध जब बैर का रूप लेता है तो एक भव नहीं अनेक जन्मों के भव बिगड़ जाते हैं। 2 अक्टूबर को होने वाली अवनीश भाई दीक्षार्थी के परिजनों द्वारा 30 सितंबर को धार्मिक भजन का कार्यक्रम किया गया। दीक्षार्थी परिवार की ओर से प्रभावना का वितरण किया गया। रात्रि में दीक्षार्थी का हल्दी और मेंहदी का कार्यक्रम हुआ।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/knowledge_is_obtained_from_the_university_of_religion/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्यश्री के वचन-साधु समाधि साधना से मरण को सुमरण बनाते हैं: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने भक्ति और साधना का महात्म्य बताया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashrees_words_sadhus_make_death_a_remembrance_by_doing_samadhi_sadhana/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashrees_words_sadhus_make_death_a_remembrance_by_doing_samadhi_sadhana/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 Aug 2025 11:57:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashri Vardhaman Sagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Hitopadeshi]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jin Dharma]]></category>
		<category><![CDATA[Kevalgyan]]></category>
		<category><![CDATA[Munishree Darshit Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Ratnakaran]]></category>
		<category><![CDATA[Sarvajna]]></category>
		<category><![CDATA[Shravakachar]]></category>
		<category><![CDATA[Shreefal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Vitraagi]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[केवलज्ञान]]></category>
		<category><![CDATA[जिन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री दर्शित सागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[रत्नाकरण]]></category>
		<category><![CDATA[वीतरागी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रावकाचार]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[सर्वज्ञ]]></category>
		<category><![CDATA[हितोपदेशी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=88052</guid>

					<description><![CDATA[वीतरागी, सर्वज्ञ और हितोपदेशी भगवान द्वारा प्रतिपादित जिन धर्म केवलज्ञान रूपी लक्ष्मीयुक्त है। जो धर्मधारण पालन करने से मिलती है। धर्म का संग्रह और धन के संग्रह में अंतर होता है। धर्म संग्रह से पुण्य की वृद्धि होती हैं क्योंकि, धर्म मोक्ष का पथ प्रदर्शक है। यह उद्बोधन आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने बुधवार को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वीतरागी, सर्वज्ञ और हितोपदेशी भगवान द्वारा प्रतिपादित जिन धर्म केवलज्ञान रूपी लक्ष्मीयुक्त है। जो धर्मधारण पालन करने से मिलती है। धर्म का संग्रह और धन के संग्रह में अंतर होता है। धर्म संग्रह से पुण्य की वृद्धि होती हैं क्योंकि, धर्म मोक्ष का पथ प्रदर्शक है। यह उद्बोधन आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने बुधवार को धर्मसभा में दिए। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> वीतरागी, सर्वज्ञ और हितोपदेशी भगवान द्वारा प्रतिपादित जिन धर्म केवलज्ञान रूपी लक्ष्मीयुक्त है। जो धर्मधारण पालन करने से मिलती है। धर्म का संग्रह और धन के संग्रह में अंतर होता है। धर्म संग्रह से पुण्य की वृद्धि होती हैं क्योंकि, धर्म मोक्ष का पथ प्रदर्शक है। धार्मिक मंडल विधान की प्रभावना से पुण्य मिलता है। आत्मा की प्रभावना संयम दीक्षा से होती है। साधु समाधि के परम लक्ष्य को लेकर संयम धारण करते हैं। समतापूर्वक साधना को समाधि कहते हैं। इससे मरण भी सुमरण हो जाता हैं। यह मंगल देशना सोलह कारण भावना पर्व पर राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने धर्मसभा में प्रकट की। आचार्य श्री ने आगे कहा कि आप लोग जन्मदिन मनाते हैं। वास्तव में साधु की दीक्षा लेते ही उसका नया जन्म प्रारंभ होता है। जितने वर्ष का जन्मदिन आप मनाते हो वास्तव में उतनी आयु आपकी कम होती जाती है। आयु हर पल हर क्षण कम होती है। जिंदगी भर आपका कार्य कैसा रहा है? इसकी परीक्षा मृत्यु अथवा संल्लेखना समाधि के समय होती है।</p>
<p><strong>साधु परमेष्ठि धर्मतीर्थ होते हैं</strong></p>
<p>प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज गृहस्थ और साधु जीवन में शांति के सागर रहे। उन्होंने जीवन भर समता धारण कर अनेक उपवास कर उपसर्ग, परिषह को समता से सहन किया। साधु के 10 प्रकार की विवेचना में आचार्य श्री ने बताया कि साधु की सेवा वैयावृत्ति करते समय उनके गुण ग्रहण अर्थात उनके समान वैराग्य धारण करने के भाव परिणाम रखना चाहिए। साधु की सेवा स्वाध्याय के समय आहार, विहार, निहार के समय श्रद्धा, प्रसन्नता, भक्ति, वात्सल्य एवं बिना ग्लानि के करना चाहिए क्योंकि, साधु परमेष्ठि धर्मतीर्थ होते हैं।</p>
<p><strong>मुनिश्री दर्शित सागर जी के उपदेश भी हुए</strong></p>
<p>सभी को रत्नाकरण श्रावकाचार और प्रथमानुयोग के ग्रंथों का स्वाध्याय कर मनन चिंतन करना चाहिए। इससे धर्म में वृद्धि होती हैं। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री दर्शित सागर जी के उपदेश हुए। बुधवार को प्रातः मुनि श्री हितेंद्र सागर जी के केशलोचन हुए। आचार्य श्री शांति सागर जी आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत आगामी 22 और 23 अगस्त को विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। इसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री, टोंक के विधायक सहित अनेक राजनीतिक सामाजिक पदाधिकारियों के शुभकामना संदेश भी प्राप्त हो रहे हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/acharyashrees_words_sadhus_make_death_a_remembrance_by_doing_samadhi_sadhana/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>टोंक में आचार्यश्री वर्धमानसागर जी का मंगल प्रवेश : नगर में आकर्षक सजावट के साथ उत्साह का माहौल  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_in_tonk/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_in_tonk/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 07 Jul 2025 07:42:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[36 Pichhika]]></category>
		<category><![CDATA[36 पिच्छिका]]></category>
		<category><![CDATA[57th Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[57वां चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[75th Diamond Birth Jubilee Festival]]></category>
		<category><![CDATA[75वां हीरक जन्म जयंती महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Padarohan Centenary Festival]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Shantisagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Acharyashree Vardhmansagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[jain samaj]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=84584</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में भी आपने चातुर्मास किया था। वर्ष 2025 में पूरे 55 वर्षों के बाद जैन समाज सहित नगरवासियों को यह ऐतिहासिक अवसर पुनः प्राप्त हुआ है। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ससंघ (36 पिच्छिका) का मंगल विहार इस वर्ष टोंक नगर में 57वें चातुर्मास के लिए चल रहा है। आचार्य श्री का यह तीसरी बार टोंक नगर में आगमन हो रहा है। इससे पूर्व वर्ष 1970 एवं 2016 में भी आपने चातुर्मास किया था। वर्ष 2025 में पूरे 55 वर्षों के बाद जैन समाज सहित नगरवासियों को यह ऐतिहासिक अवसर पुनः प्राप्त हुआ है। ऐतिहासिक संयोग और तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रम होंगे। इस अवसर पर टोंक नगर को तीन अद्वितीय सौभाग्य एक साथ प्राप्त हो रहे हैं। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 75वां हीरक जन्म जयंती महोत्सव, संयम वर्ष का 57वां चातुर्मास होगा।</p>
<p><strong>मंगल प्रवेश और शोभायात्रा निकाली  </strong></p>
<p>9 जुलाई को चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना के लिए 7 जुलाई को प्रातः भव्य नगर प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के अवसर पर कल्पना गार्डन से जैन नसिया तक लगभग डेढ़ किमी लंबी दिव्य शोभायात्रा निकाली गई। पूरे मार्ग पर 31 भव्य स्वागत द्वार, आकर्षक विद्युत सजावट एवं पुष्पवर्षा की विशेष तैयारियां की गई थीं। जैन नसिया को आकर्षक सजावट से दुल्हन की तरह सुसज्जित किया गया था। जैसे ही आचार्य श्री ससंघ नगर सीमा में पहुंचेंगे, शाही बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों, जयघोष और भक्ति के स्वर वातावरण में गूंज उठे। किशनगढ़, नेनवा एवं टोंक के शाही बैंड अपनी मधुर सुर लहरियों से स्वागत कर रहे थे।</p>
<p><strong>36 साधु-साध्वी का दिव्य ससंघ आगमन</strong></p>
<p>इस मंगल विहार में आचार्य श्री के साथ 10 मुनि, 22 आर्यिका, 1 ऐलक एवं 2 क्षुल्लक सहित कुल 36 साधु-साध्वी सम्मिलित हैं। नगर में अद्भुत उत्साह का वातावरण है। नगर के सभी धार्मिक-सामाजिक संगठन तन, मन, धन से जुटकर तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। ऐसा वातावरण है मानो नगरवासी अनेक पर्वों को एक साथ उल्लासपूर्वक मना रहे है। कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति इस ऐतिहासिक अवसर पर रहेगी। टोंक-सवाई माधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, जिला प्रमुख सरोज नरेश बंसल, पूर्व विधायक अजीतसिंह मेहता, नगर परिषद की पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी जैन, टोडारायसिंह के पूर्व चेयरमैन संतकुमार जैन, भाजपा युवा नेता विनायक जैन, संजय संघी, सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहकर आचार्य श्री ससंघ के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>चातुर्मास समिति के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे</strong></p>
<p>चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष भागचंद फूलेता, कार्यकारी अध्यक्ष धर्मचंद दाखिया, मंत्री राजेश सर्राफ, संयोजक कमल आंडरा, राजेश बोरदा, पप्पू नमक, लालचंद फूलेता, सुरेश संघी, सीटू आरटी, अनिल कंटान, सुमित दाखिया, अम्मु छामुनिया, नरेंद्र दाखिया, सुनील सर्राफ, पारस बहड़, विनोद कल्ली, प्रदीप सर्राफ, मुकेश करवर, टोनू सर्राफ, कमल सर्राफ, अंकित बगड़ी, किन्नी शिवाड़िया, मुकेश बरवास, सोनू बरवास, पंकज फूलेता, लोकेश कल्ली, राजेश शिवाड़िया, ओम ककोड़, नीटू छामुनिया, अर्पित पासरोटियां, ज्ञान संघी, कुंदन आंडरा, देवेंद्र आंडरा, उमेश संघी, मुकेश दतवास, वीरेंद्र संघी, पदमपुरा पदयात्रा संघ के सदस्य, शांतिधारा परिवार समिति के सदस्य, महिला मंडल, बालिका मंडल उपस्थित रहे। यह पुण्य अवसर टोंक नगर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत बन रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/auspicious_entry_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_in_tonk/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी के चातुर्मास की घोषणा 27 को:  आचार्य पदारोहण जहाजपुर में मनेगा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/announcement_of_the_chaturmas_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_on27_th/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/announcement_of_the_chaturmas_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_on27_th/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 07:43:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Padrohan]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar JI]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Jahazpur]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य पदारोहण]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जहाजपुर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=83783</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। जहाजपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; जहाजपुर। आचार्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। <span style="color: #ff0000">जहाजपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जहाजपुर।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। आर्यिका माताजी श्री स्वस्ति भूषण माताजी अन्य साधुओं प्रियंका दीदी एवं किशोर जैन इंदौर ने जहाजपुर मंदिर आगमन पर आचार्य श्री के 9 प्रकार के रत्नों केशर से चरण प्रक्षालन किए। आचार्य श्री वर्धमानसागरजी ने प्रवचन में दर्शन, अभिषेक,पूजन, आहारदान, सांसों का महत्व, वास्तविक दान ,समवशरण की रचना, दर्शन का महत्व ,पंचकल्याणक का महत्व, स्वयं के चिंतन, ब्यावर में आचार्य शांतिसागर जी के चातुर्मास, साधु के साधु के प्रति विनम्रता और विनय भाव, चक्रवर्ती शब्द का महत्व, जहाज का वास्तविक अर्थ ,संस्कृति और धर्म की रक्षा में आचार्य शांतिसागर जी के योगदान, जीवन में सांस का सदुपयोग आदि पर विस्तृत उपदेश दिया। आचार्य श्री ने बताया कि तीर्थंकर चक्रवर्ती एक समय में एक होते हैं। चक्रवर्ती 6 खंड पर विजय प्राप्त करते हैं।</p>
<p><strong>जीवन में जितनी सांसे बची है उन सांसों को धर्म में लगाएं </strong><br />
प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने चारित्र के 6 खंडों पर विजय प्राप्त की थी। इसीलिए उन्हें चक्रवर्ती की उपमा दी गई। उनके जीवनकाल में अन्य कोई मुनि आचार्य चक्रवर्ती नहीं हुए। श्री शांति सागर जी ने धर्म और संस्कृति की रक्षा की। साधु दूसरे साधु के प्रति विनम्रता और भक्ति प्रदर्शित करते हैं साधुओं में आचार्य श्री शांति सागर जी और सिद्ध क्षेत्रों में श्री सम्मेद शिखर जी के दर्शन सभी को अवश्य करना चाहिए। धर्मात्मा सर्व को प्रेरणा और उपदेश देते हैं। जीवन में जितनी सांसे बची है उन सांसों को धर्म में लगाना चाहिए। तीर्थ क्षेत्र संयम साधना के स्थल है खाने पीने आमोद प्रमोद के स्थल श्रावकों ने बना दिया।इससे धर्म नहीं होता आपके विचारों क्रियाओं से हमारे तीर्थ क्षेत्र सुरक्षित नहीं हैं जीवन में धर्म को अपना कर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का पुरुषार्थ करना चाहिए। यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने स्वस्ति धाम जहाजपुर में आयोजित धर्म सभा में प्रगट की।</p>
<p><strong>सभी 5 मिनट स्वयं के बारे में चिंतन करें </strong><br />
आचार्य श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि न्याय और नीति से अर्जित द्रव्य को दान देना चाहिए दान धर्म कार्य में देना चाहिए। समवशरण मंदिर धर्म का प्रतीक है जिन बिंब दर्शन से सम्यक ज्ञान होता है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में सूर्य मंत्र से प्रतिमाओं में देवत्व के गुण आरोपित किए जाते हैं। जिनालय जिन बिंब के दर्शन श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए सभी को 5 मिनट स्वयं के बारे में चिंतन करना चाहिए। भगवान की प्रतिमा संदेश देती है। आचार्य श्री ने बताया कि 40 वर्ष पूर्व हमने जहाजपुर गांव में भगवान श्री नेमिनाथ और श्री मुनिसुब्रत नाथ भगवान के दर्शन किए थे।</p>
<p><strong>सच्ची श्रद्धा सम्यक दर्शन है</strong><br />
आचार्य श्री ने बताया कि ब्यावर राजस्थान में आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी ने एक साथ चातुर्मास किया था। इसके पूर्व गणिनी आर्यिकाश्री स्वस्ति भूषण माताजी ने सम्यक दर्शन, ज्ञान, चारित्र की विवेचना की। देव शास्त्र गुरु वितरागी और होते हैं, उनके प्रति दृढ़ श्रद्धा रखना चाहिए। तत्वार्थ सूत्र के छठे अध्याय में विवेचना है कि सच्ची श्रद्धा सम्यक दर्शन है। माताजी ने बताया कि सिद्धि और प्रसिद्धि में अंतर है लौकिक ज्ञान से प्रसिद्धि मिलती है किंतु रत्नत्रय धर्म से सिद्धि प्राप्त होती है।</p>
<p><strong>साधुओं ने किया विहार </strong><br />
माताजी ने आचार्य श्री के प्रशंसा कर बताया कि मंगलवार चतुर्दशी को आचार्य श्री सहित सात साधुओं के उपवास थे। उसके बावजूद संघ ने प्रतिकूल मौसम में विहार किया। 27 जून को 36 वां आचार्य पदारोहण जहाजपुर में मनाया जाएगा। अनेक नगरों से भक्त चातुर्मास का पुनः निवेदन करेंगे। आचार्य श्री 27 जून को वर्ष 2025 के चातुर्मास स्थल की घोषणा करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/announcement_of_the_chaturmas_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_on27_th/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी के चातुर्मास की घोषणा 27 को: आचार्य पदारोहण जहाजपुर में मनेगा  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/announcement_of_the_chaturmas_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_on_27_th/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/announcement_of_the_chaturmas_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_on_27_th/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Jun 2025 09:19:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Padrohan]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vardhman Sagar JI]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Jahazpur]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य पदारोहण]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जहाजपुर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=83702</guid>

					<description><![CDATA[आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। जहाजपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; जहाजपुर। आचार्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। <span style="color: #ff0000">जहाजपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जहाजपुर।</strong> आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की अगवानी आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी परंपरा की गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने संघ सहित जहाजपुर आगमन के पूर्व की। आपने आचार्य वंदना और आचार्य भक्ति परिक्रमा लगाकर की। आर्यिका माताजी श्री स्वस्ति भूषण माताजी अन्य साधुओं प्रियंका दीदी एवं किशोर जैन इंदौर ने जहाजपुर मंदिर आगमन पर आचार्य श्री के 9 प्रकार के रत्नों केशर से चरण प्रक्षालन किए। आचार्य श्री वर्धमानसागरजी ने प्रवचन में दर्शन, अभिषेक,पूजन, आहारदान, सांसों का महत्व, वास्तविक दान ,समवशरण की रचना, दर्शन का महत्व ,पंचकल्याणक का महत्व, स्वयं के चिंतन, ब्यावर में आचार्य शांतिसागर जी के चातुर्मास, साधु के साधु के प्रति विनम्रता और विनय भाव, चक्रवर्ती शब्द का महत्व, जहाज का वास्तविक अर्थ ,संस्कृति और धर्म की रक्षा में आचार्य शांतिसागर जी के योगदान, जीवन में सांस का सदुपयोग आदि पर विस्तृत उपदेश दिया। आचार्य श्री ने बताया कि तीर्थंकर चक्रवर्ती एक समय में एक होते हैं। चक्रवर्ती 6 खंड पर विजय प्राप्त करते हैं।</p>
<p><strong>जीवन में जितनी सांसे बची है उन सांसों को धर्म में लगाएं </strong></p>
<p>प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने चारित्र के 6 खंडों पर विजय प्राप्त की थी। इसीलिए उन्हें चक्रवर्ती की उपमा दी गई। उनके जीवनकाल में अन्य कोई मुनि आचार्य चक्रवर्ती नहीं हुए। श्री शांति सागर जी ने धर्म और संस्कृति की रक्षा की। साधु दूसरे साधु के प्रति विनम्रता और भक्ति प्रदर्शित करते हैं साधुओं में आचार्य श्री शांति सागर जी और सिद्ध क्षेत्रों में श्री सम्मेद शिखर जी के दर्शन सभी को अवश्य करना चाहिए। धर्मात्मा सर्व को प्रेरणा और उपदेश देते हैं। जीवन में जितनी सांसे बची है उन सांसों को धर्म में लगाना चाहिए। तीर्थ क्षेत्र संयम साधना के स्थल है खाने पीने आमोद प्रमोद के स्थल श्रावकों ने बना दिया।इससे धर्म नहीं होता आपके विचारों क्रियाओं से हमारे तीर्थ क्षेत्र सुरक्षित नहीं हैं जीवन में धर्म को अपना कर मनुष्य जीवन को सार्थक करने का पुरुषार्थ करना चाहिए। यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने स्वस्ति धाम जहाजपुर में आयोजित धर्म सभा में प्रगट की।</p>
<p><strong>सभी 5 मिनट स्वयं के बारे में चिंतन करें </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने आगे प्रवचन में बताया कि न्याय और नीति से अर्जित द्रव्य को दान देना चाहिए दान धर्म कार्य में देना चाहिए। समवशरण मंदिर धर्म का प्रतीक है जिन बिंब दर्शन से सम्यक ज्ञान होता है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में सूर्य मंत्र से प्रतिमाओं में देवत्व के गुण आरोपित किए जाते हैं। जिनालय जिन बिंब के दर्शन श्रद्धा पूर्वक करना चाहिए सभी को 5 मिनट स्वयं के बारे में चिंतन करना चाहिए। भगवान की प्रतिमा संदेश देती है। आचार्य श्री ने बताया कि 40 वर्ष पूर्व हमने जहाजपुर गांव में भगवान श्री नेमिनाथ और श्री मुनिसुब्रत नाथ भगवान के दर्शन किए थे।</p>
<p><strong>सच्ची श्रद्धा सम्यक दर्शन है</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने बताया कि ब्यावर राजस्थान में आचार्य श्री शांति सागर जी छाणी ने एक साथ चातुर्मास किया था। इसके पूर्व गणिनी आर्यिकाश्री स्वस्ति भूषण माताजी ने सम्यक दर्शन, ज्ञान, चारित्र की विवेचना की। देव शास्त्र गुरु वितरागी और होते हैं, उनके प्रति दृढ़ श्रद्धा रखना चाहिए। तत्वार्थ सूत्र के छठे अध्याय में विवेचना है कि सच्ची श्रद्धा सम्यक दर्शन है। माताजी ने बताया कि सिद्धि और प्रसिद्धि में अंतर है लौकिक ज्ञान से प्रसिद्धि मिलती है किंतु रत्नत्रय धर्म से सिद्धि प्राप्त होती है।</p>
<p><strong>साधुओं ने किया विहार </strong></p>
<p>माताजी ने आचार्य श्री के प्रशंसा कर बताया कि मंगलवार चतुर्दशी को आचार्य श्री सहित सात साधुओं के उपवास थे। उसके बावजूद संघ ने प्रतिकूल मौसम में विहार किया। 27 जून को 36 वां आचार्य पदारोहण जहाजपुर में मनाया जाएगा। अनेक नगरों से भक्त चातुर्मास का पुनः निवेदन करेंगे। आचार्य श्री 27 जून को वर्ष 2025 के चातुर्मास स्थल की घोषणा करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/announcement_of_the_chaturmas_of_acharya_shri_vardhman_sagar_ji_on_27_th/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
