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	<title>आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>समाधि स्मृति दिवस पर ज्ञानतीर्थ में हुआ पूजन और अभिषेक : गुरु भक्तों ने श्रद्धा से आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज को याद किया </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 13:46:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैनाचार्य सराकोद्धारक श्री ज्ञानसागरजी महाराज के समाधि स्मृति दिवस पर ज्ञानतीर्थ जिनालय में गुरुदेव को श्रद्धा पूर्वक स्मरण किया गया। श्री दिगंबर जैन ज्ञानतीर्थ जिनालय में प्रशाल पूजन कर अष्टद्रव्य अर्पित किए गए। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। जैनाचार्य सराकोद्धारक श्री ज्ञानसागरजी महाराज के समाधि स्मृति दिवस पर ज्ञानतीर्थ जिनालय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैनाचार्य सराकोद्धारक श्री ज्ञानसागरजी महाराज के समाधि स्मृति दिवस पर ज्ञानतीर्थ जिनालय में गुरुदेव को श्रद्धा पूर्वक स्मरण किया गया। श्री दिगंबर जैन ज्ञानतीर्थ जिनालय में प्रशाल पूजन कर अष्टद्रव्य अर्पित किए गए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैनाचार्य सराकोद्धारक श्री ज्ञानसागरजी महाराज के समाधि स्मृति दिवस पर ज्ञानतीर्थ जिनालय में गुरुदेव को श्रद्धा पूर्वक स्मरण किया गया। उत्तर भारत के प्रथम दिगंबराचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज (छाणी) परंपरा के मासोपवासी आचार्यश्री सुमतिसागरजी महाराज के शिष्य आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज के 5वें समाधि स्मृति दिवस पर एबी रोड (धौलपुर आगरा हाइवे) पर स्थित श्री दिगंबर जैन ज्ञानतीर्थ जिनालय में गुरुदेव के भक्तों ने प्रशाल पूजन कर गुरुदेव को याद किया। आचार्यश्री ज्ञानसागरजी के भक्त सुनीत जैन ठेकेदार ने बताया कि गुरुदेव के 5वें स्मृति दिवस पर प्रातः सभी गुरु भक्तों ने सामूहिक रूप से श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया। इसके बाद सभी ने भक्तिभाव एवं श्रद्धा भक्ति के साथ आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज का अष्टद्रव्य से पूजन किया और उनके श्री चरण चिन्हों का पाद प्रक्षालन किया। सभी गुरु भक्तों ने गुरुदेव को स्मरण करते हुए बताया कि पूज्यश्री ने महावीर जन्म कल्याणक पर जैनेश्वरी मुनि दीक्षा स्वीकार की और कार्तिक कृष्ण अमावस्या को भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव की पावन बेला में श्री दिगंबर जैन मंदिर नसिया जी बारां राजस्थान में आपका समाधि पूर्वक देवलोक गमन हो गया। भगवान महावीर स्वामी जी के जन्म कल्याणक पर दीक्षा ग्रहण कर भगवान महावीर निर्वाणोत्सव की पावन बेला में देवलोक गमन करना यह दर्शाता है कि आप वर्तमान के वर्धमान थे।</p>
<p>आपके द्वारा किए गए कार्यों को सदियों तक याद किया जाता रहेगा। सभी ने सराकोद्धारक छाणी परंपरा के षष्ट पट्टाचार्य ज्ञानसागरजी महाराज के 5वें समाधि स्मृति दिवस पर गुरु चरणों में कोटि-कोटि नमन किया। इस अवसर पर एडवोकेट दिनेश जैन वरैया, सुनीत जैन ठेकेदार, बाबूलाल जैन नंदपुरा, सोनू जैन पलपुरा, अखिल जैन, मनीष जैन, धीरज जैन, अभय जैन, कुसुम जैन, बबिता जैन, सीमा जैन सहित काफी संख्या में गुरु भक्त उपस्थित थे।</p>
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		<title>साधु संत अपने एक-एक पल का सदुपयोग करते हैं : 8 दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में रविवार को 64 अर्घ्य होंगे समर्पित  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 11:39:06 +0000</pubDate>
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<p><strong>आठ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के दूसरे दिवस मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो समय का सदुपयोग करते हैं, वो इतिहास रचते हैं और जो समय का दुरपयोग करते हैं, वे मानव पर्याय को यूं हीं बर्बाद करते हैं। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना</strong>। आठ दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के दूसरे दिवस मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जो समय का सदुपयोग करते हैं, वो इतिहास रचते हैं और जो समय का दुरपयोग करते हैं, वे मानव पर्याय को यूं हीं बर्बाद करते हैं। साधु संत अपने एक-एक पल का सदुपयोग करते हैं, वे चलते-फिरते, उठते-बैठते, सोते-जागते यानि कि प्रतिपल, हर समय प्रभु का स्मरण, प्रभु की स्तुति और मंत्रों का जप करते हुए संयम की साधना में लीन रहते हैं। सांसारिक प्राणियों को भी अपनी व्यस्तम जिंदगी में समय का सदउपयोग करना चाहिए। जैन धर्म में समय का उपयोग मुख्य रूप से सामायिक, दैनिक जीवन में मौन और स्वाध्याय के माध्यम से बताया गया है। सामायिक में धर्म-ध्यान, आत्म-चिंतन और संसार की नश्वरता पर विचार किया जाता है। सांसारिक प्राणीयो द्वारा व्यस्त दिनचर्या में भी, जैसे मॉर्निंग वॉक या यात्रा के दौरान, मौन रहकर, प्रभु का स्मरण करते हुए णमोकार मंत्र आदि का जाप करके समय का सदुपयोग किया जा सकता है। सामायिक एक प्रतिदिन की जाने वाली धार्मिक क्रिया है। जिसमें समतापूर्वक शांत होकर धर्म-ध्यान किया जाता है, जो कि गृहस्थ और साधु दोनों के लिए अनिवार्य है। जैन धर्म में समय का सदुपयोग आत्म-शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सामायिक जैसी क्रियाएं व्यक्ति को धार्मिक जीवन के करीब लाती हैं और उसे आध्यात्मिक प्रगति में मदद करती हैं।</p>
<p><strong> आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज का 5 वां समाधि दिवस</strong></p>
<p>मुरैना में जन्में सराकोद्धारक आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज की 5वीं समाधि स्मृति दिवस पर मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य ज्ञानसागरजी महाराज ने जैनेश्वरी दीक्षा लेकर जीवनपर्यंत भगवान महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित सत्य, अहिंसा, जीवदया, शाकाहार और जियो और जीने दो के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार करते हुए प्राणी मात्र को संयम और सादगी के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। जैन सिद्धांतों से भटके हुए सराक बंधुओं को धर्म की मूलधारा में शामिल करने का कारण वे सराकोद्धारक के नाम से संपूर्ण भारत में प्रसिद्ध हुए। पूज्य श्री की प्रेरणा से अनेकों मंदिरों, धर्मशालाओं, तीर्थों, संस्थाओं का निर्माण हुआ। आचार्यश्री ज्ञानसागर जी ने मुरैना को जैन तीर्थ के रूप में ‘ज्ञानतीर्थ’ जैसी अनुपम कृति प्रदान की। आज भले ही पूज्यश्री हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके उपदेश, उनकी शिक्षाएं, उनके द्वारा दिए गए संस्कार उन्हें सदैव सदैव हमारे हृदय में जीवंत बनाए रखेंगे। हम सभी को चाहिए कि एकजुटता के साथ उनके द्वारा छोड़े गए कार्यों को पूर्ण करते हुए उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने का प्रयास करें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।</p>
<p><strong> विधान में रविवार को 64 अर्घ्य होगे समर्पित</strong></p>
<p>प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी ने बताया कि 8 दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में रविवार को तृतीय दिन सिद्धों की आराधना, पूजा, भक्ति, उपासना, स्तुति करते हुए इंद्र इंद्राणियों ने अष्टद्रव्य के साथ 64 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। प्रारंभ में जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा, नित्यमह पूजन के बाद पुण्यार्जक परिवार कैलाशचंद राकेशकुमार जैन पूणारावत परिवार ने मंचासीन मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज के पाद प्रक्षालन करते हुए उन्हें शास्त्र भेंट किए। धर्मसभा के मध्य सराकोद्धारक आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलित किया गया। भक्तिरस में सरोवर सभी लोग सिद्ध परमेष्ठियों का गुणगान कर रहे थे।</p>
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		<title>अतिशय क्षेत्र रानीला में आर्यिका आर्षमति माताजी का प्रथम चातुर्मास: जैन तीर्थ रानीला- एक नजर में </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 03:14:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानीला के इतिहास में 2024 तक किसी साधु या साध्वी का चातुर्मास नहीं हुआ था। क्षेत्र में 2025 में प्रथम चातुर्मास करने का सौभाग्य आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज की शिष्या आर्यिका आर्षमति माताजी ससंघ को प्राप्त हुआ। रानीला/हरियाणा से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; रानीला/हरियाणा। श्री दिगंबर जैन अतिशय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानीला के इतिहास में 2024 तक किसी साधु या साध्वी का चातुर्मास नहीं हुआ था। क्षेत्र में 2025 में प्रथम चातुर्मास करने का सौभाग्य आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज की शिष्या आर्यिका आर्षमति माताजी ससंघ को प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">रानीला/हरियाणा से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>रानीला/हरियाणा।</strong> श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र रानीला के इतिहास में 2024 तक किसी साधु या साध्वी का चातुर्मास नहीं हुआ था। क्षेत्र में 2025 में प्रथम चातुर्मास करने का सौभाग्य आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज की शिष्या आर्यिका आर्षमति माताजी ससंघ को प्राप्त हुआ। क्षेत्र पर चातुर्मासरत गुरु मां आर्यिका आर्षमति माताजी ने बताया कि वर्ष 2025 के चातुर्मास का समय नजदीक था। विभिन्न शैलियों की समाज के लोग वर्षायोग के लिए श्रीफल अर्पित कर निवेदन कर रहे थे लेकिन, एक अदृश्य शक्ति हमें किसी स्थान विशेष की ओर खींच रही थी। हम निर्णय नहीं कर पा रहे थे कि कहां जाएं, किधर जाएं। जब हमने रानीला क्षेत्र की ओर विहार किया तब लोगों ने हमें बताया कि अतिशय क्षेत्र रानीला के आसपास न कोई बस्ती है, न कोई दुकान है, न कोई मार्केट है। चारों तरफ सुनसान इलाका है। यहां के लगभग 40 किमी के क्षेत्र में कोई जैन परिवार भी निवासरत नहीं हैं। न चाहते हुए भी अनायास ही हमारे कदम रानीला की ओर बढ़ने लगे कहने वालों से हमने कहा कि संयम के मार्ग का पथिक बनने के लिए 19 वर्ष पूर्व गृह त्याग कर आचार्य श्री ज्ञानसागरजी महाराज का चरण सान्निध्य प्राप्त किया था। पूज्य गुरुदेव के साथ भी और गुरुदेव के बाद भी हमने बहुत भीड़ और बहुत भव्यता देखी है लेकिन, इस बार अतिशय क्षेत्र रानीला के बड़े बाबा की छत्र छाया में यहां के सुरभ्य प्राकृतिक मनोहारी एकांतमय वातावरण में साधना करनी हैं। ये हमारा ध्येय भी है और दृढ़ संकल्प भी है।</p>
<p><strong>बड़े बाबा श्री आदिनाथ जी का चमत्कार ही है</strong></p>
<p>भारतवर्ष में अतिशय क्षेत्र तो बहुत हैं लेकिन, रानीला की बात ही निराली है। बताया जाता है कि यहां की भूमि बंजर थी लेकिन, जब बड़े बाबा आदिनाथ भगवान भूगर्भ से प्रगट हुए तो चमत्कार ये हुआ कि चारों ओर हरियाली छा गई। यहां के अतिशय का मूल कारण है कि रानीला क्षेत्र भौतिकतावादी चकाचौध, विभिन्न प्रकार की विषमताओं और गंदगी से कोसों दूर है। यही कारण है कि इस क्षेत्र की सकारात्मक वर्णनाएं चमत्कार को बनाए हुए हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु और दर्शनार्थी बताते है कि हम जा तो कहीं और रहे थे, लेकिन अचानक विचार बदला और हम रानीला आ गए। यह सब उस अदृश्य शक्ति का या कहो बड़े बाबा श्री आदिनाथ जी का चमत्कार ही तो है, जो आपको यकायक यहां ले आया।</p>
<p><strong>अतिशयकारी भगवान आदिनाथ जी की भक्ति से सुखद अनुभूति </strong></p>
<p>जो भी व्यक्ति यहां पर भूगर्भ से प्राप्त अतिशयकारी भगवान आदिनाथ जी स्वामी का श्रद्धा और भक्ति पूर्वक मस्तकाभिषेक, शांतिधारा, पूजन करता है, उसे एक विशेष अनुभूति की प्राप्ति होती है। अतिशयकारी बड़े बाबा के दर्शन मात्र से मन प्रफुल्लित हो जाता है। बड़े बाबा के दर्शन करके ऐसा महसूस होता है, जैसे आज हमारा जैन कुल में जन्म लेना सार्थक हो गया।</p>
<p><strong>अतिशय क्षेत्र रानीला का संक्षिप्त परिचय</strong></p>
<p>हरियाणा प्रांत के चरखी दादरी के पास रानीला गांव में एक विशाल एवं भव्य जिनालय बना हुआ है। काफी दूर से ही जिनालय के आकर्षक गुंबद जिनालय की भव्यता की गाथा बताते हुए दिखते हैं। इस जिनालय को अतिशय क्षेत्र रानीला के नाम से जाना जाता है। यह जिनालय जैन श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है। यह प्राचीन मंदिर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को समर्पित है और अपनी जटिल वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि 18 अक्टूबर 1991 को एक किसान को अपने खेत में भगवान आदिनाथ स्वामी एवं चक्रेश्वरी देवी की मूर्ति प्राप्त हुई थी, जो लाल बलुआ पत्थर से तराशकर बनाई गई थी। इतिहासकारों के अनुसार यह मूर्ति छठी-सातवीं शताब्दी की हो सकती है। भू-गर्भ से प्राप्त एक ही पाषाण के केंद्र में भगवान आदिनाथ की एक प्रतिमा है, जिसके चारों और पद्मासन और कायोत्सर्ग मुद्राओं में 24 तीर्थंकरों की आकृतियां हैं। मूर्ति में आदिनाथ की छाती पर श्रीवत्स चिह्न और पीठिका के नीचे एक बैल की नक्काशी भी है। मूर्ति के चारों ओर की नक्काशी में यक्ष, उड़ते हुए जोड़े और जैन प्रतिमाओं से जुड़े अन्य प्रतीक अंकित हैं।</p>
<p><strong>क्षेत्र का सौंदर्य और प्राचीनता </strong></p>
<p>श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र रानीला में प्राकृतिक सौंदर्य एवं जिनालयों की नक्काशी अदभुद एवं मनोहारी है। एक भव्य हॉल में वेदिका पर भू-गर्भ से प्राप्त भगवान आदिनाथ की मूर्ति के साथ अन्य तीर्थंकरों की मूर्तियां विराजमान हैं। साथ ही चक्रेश्वरी देवी का भी मंदिर बना हुआ है। माना जाता है कि ऐतिहासिक महत्व के इस अतिशय क्षेत्र में भूगर्भ से प्राप्त मूलनायक आदिनाथ स्वामी की मूर्ति एक हज़ार साल से भी अधिक पुरानी बताई जाती है।</p>
<p><strong>यात्रियों के लिए क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएं</strong></p>
<p>अतिशय क्षेत्र रानीला के सुरभ्य शांतिप्रिय वातावरण संयम की साधना के लिए सर्वाेत्तम स्थान माना जा सकता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास के लिए सर्वसुविधायुक्त धर्मशाला बनी हुई है। क्षेत्र पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजनाशाला संचालित की जाती है। भोजनशाला के लिए प्रतिदिन 10 किमी दूर से रसोइया आता है और 20 कि मी. दूर से सब्जी आदि लाई जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि रानीला क्षेत्र की प्रबंध समिति के लोग भी क्षेत्र से 50 और 100 किमी दूर से आकर सभी व्यवस्थाओं को देखते हैं। अतिशय क्षेत्र रानीला दिल्ली से 118 किमी, भिवानी से 30 किमी और रोहतक से 45 किमी की दूरी पर स्थित है। नजदीकी रेलवे स्टेशन चरखी दादरी है।</p>
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