<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>अहिंसा शोध संस्थान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%85%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%A7-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Wed, 20 May 2026 12:53:42 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>अहिंसा शोध संस्थान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>वैशाली का प्राकृत जैन शोध संस्थान उच्च शिक्षा से न हटे : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के मुख्यमंत्री को लिखा पत्र </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_prakrit_jain_research_institute_in_vaishali_should_not_be_delisted_from_the_realm_of_higher_education/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_prakrit_jain_research_institute_in_vaishali_should_not_be_delisted_from_the_realm_of_higher_education/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 20 May 2026 12:53:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Ahimsa Research Institute]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Rajendra Prasad. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Higher Education]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Prakrit Jain Research Institute]]></category>
		<category><![CDATA[Prakrit Jain Scriptures]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Union Minister Shivraj Singh Chouhan]]></category>
		<category><![CDATA[Vaishali]]></category>
		<category><![CDATA[अहिंसा शोध संस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[उच्च शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. राजेंद्र प्रसाद]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्राकृत जैन शास्त्र]]></category>
		<category><![CDATA[प्राकृत जैन शोध संस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[वैशाली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=107032</guid>

					<description><![CDATA[केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर वैशाली स्थित प्राकृत जैन शास्त्र एवं अहिंसा शोध संस्थान को उच्च शिक्षा विभाग में ही बनाए रखने का पत्र लिखकर आग्रह निवेदन किया है। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। केंद्रीय कृषि एवं किसान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर वैशाली स्थित प्राकृत जैन शास्त्र एवं अहिंसा शोध संस्थान को उच्च शिक्षा विभाग में ही बनाए रखने का पत्र लिखकर आग्रह निवेदन किया है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर वैशाली स्थित प्राकृत जैन शास्त्र एवं अहिंसा शोध संस्थान को उच्च शिक्षा विभाग में ही बनाए रखने का पत्र लिखकर आग्रह निवेदन किया है। लिखे पत्र में चौहान ने बताया कि राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के ज्ञापन से मुझे अवगत कराया गया है कि संस्थान को उच्च शिक्षा विभाग से हटाकर कला, संस्कृति एवं संग्रहालय निदेशालय को हस्तांतरित करने का सरकार ने निर्णय लिया गया है। शिवराज जी ने आशंका जताई कि इससे संस्थान की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और इसकी मूल पहचान प्रभावित होगी।</p>
<p><strong>1956 में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था शिलान्यास</strong></p>
<p>राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने पत्र में स्मरण कराया कि इस संस्थान का शिलान्यास भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वर्ष 1956 में किया था। यह देश की सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र है। प्राकृत भाषा, जैन दर्शन, संस्कृति एवं अहिंसा के क्षेत्र में इस संस्थान ने अनेक विद्वानों को तैयार कर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। बिहार के मुख्यमंत्री से शिवराज सिंह चौहान ने पुनर्विचार कर गंभीर परीक्षण करने, योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने तथा संस्थान को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट शोध केंद्र बनाने की दिशा में पहल करने का आग्रह किया है। उन्होंने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार सरकार संवेदनशीलता एवं दूरदर्शिता से निर्णय लेगी, जिससे अमूल्य सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे। भारत वर्षीय जैन</p>
<p><strong>समाज ने जताया आभार</strong></p>
<p>केंद्रीय मंत्री के इस पत्र पर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ सहित सकल जैन समाज ने आभार व्यक्त किया है। प्राकृत भाषा के विद्वानों ने भी इस पहल का स्वागत किया है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_prakrit_jain_research_institute_in_vaishali_should_not_be_delisted_from_the_realm_of_higher_education/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान को बंद करने का विरोध : प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर जताई नाराजगी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/protest_against_the_closure_of_the_prakrit_jain_scriptures_and_nonviolence_research_institute/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/protest_against_the_closure_of_the_prakrit_jain_scriptures_and_nonviolence_research_institute/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 May 2026 05:16:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Ahimsa Research Institute]]></category>
		<category><![CDATA[Chief Minister]]></category>
		<category><![CDATA[Closure]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[memorandum]]></category>
		<category><![CDATA[Opposition. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Prakrit Jain Scriptures]]></category>
		<category><![CDATA[Prime Minister]]></category>
		<category><![CDATA[protest]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[अहिंसा शोध संस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[ज्ञापन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[प्राकृत जैन शास्त्र]]></category>
		<category><![CDATA[बंद करने]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री]]></category>
		<category><![CDATA[विरोध]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=106411</guid>

					<description><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी की पावन जन्मस्थली बासोकुंड, वैशाली स्थित ऐतिहासिक ‘प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान’ को बंद करने की सरकारी अधिसूचना पर देशभर में तीखा विरोध शुरू हो गया है। इंदौर/बदनावर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर/बदनावर। भगवान महावीर स्वामी की पावन जन्मस्थली बासोकुंड, वैशाली स्थित ऐतिहासिक ‘प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान’ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भगवान महावीर स्वामी की पावन जन्मस्थली बासोकुंड, वैशाली स्थित ऐतिहासिक ‘प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान’ को बंद करने की सरकारी अधिसूचना पर देशभर में तीखा विरोध शुरू हो गया है। <span style="color: #ff0000">इंदौर/बदनावर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर/बदनावर।</strong> भगवान महावीर स्वामी की पावन जन्मस्थली बासोकुंड, वैशाली स्थित ऐतिहासिक ‘प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान’ को बंद करने की सरकारी अधिसूचना पर देशभर में तीखा विरोध शुरू हो गया है। स्थानीय वर्द्धमानपुर शोध संस्थान एवं सकल जैन समाज ने माननीय प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री बिहार एवं राज्यपाल महोदय को ज्ञापन भेजकर अधिसूचना तत्काल रद्द करने की मांग की है।</p>
<p><strong>क्या है मामला</strong></p>
<p>इस संस्थान का शुभारंभ स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने महावीर जन्म कल्याणक उत्सव, चौत्र शुक्ल त्रयोदशी वीर निर्वाण संवत 2482, तदनुसार 23 अप्रैल 1956 को किया था। लगभग 70 वर्षों से यह संस्थान प्राकृत भाषा, जैन आगम और अहिंसा दर्शन पर शोध का विश्व का एकमात्र केंद्र रहा है। वर्तमान में एक सरकारी प्रस्ताव के तहत इसे बंद करने की अधिसूचना जारी की गई है, जिसका जैन समाज और भाषा प्रेमियों ने सख्त विरोध जताया है। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि 70 वर्ष पूर्व भारत सरकार ने संस्कृत, प्राकृत और पाली की त्रिवेणी को संरक्षित करने के लिए तीन अलग शोध केंद्र स्थापित किए थे। इन केंद्रों ने हजारों विद्वान देश को दिए। प्राकृत भाषा का प्रतिनिधित्व करने वाले इस इकलौते संस्थान को षड्यंत्रपूर्वक बंद करना भारतीय ज्ञान परंपरा को नष्ट करने का उपक्रम है। इसे कोई भी भारतीय विद्वान बर्दाश्त नहीं कर सकता। मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से आंदोलन गतिमान है, राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के आह्वान पर देशभर के प्राकृत प्रेमियों एवं जैन समाज ने केंद्र व बिहार सरकार को ज्ञापन सौंपकर अधिसूचना रद्द करने की मांग की है।</p>
<p><strong>ज्ञापन</strong> में मांग</p>
<p>वर्द्धमानपुर शोध संस्थान एवं दिगम्बर जैन समाज, बदनावर सहित अन्य सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि संस्थान बंद करने की अधिसूचना तत्काल रद्द की जाए। प्राकृत भाषा के विकास हेतु संस्थान को पुनः शुरू कर सुदृढ़ बनाया जाए। पिछले 20 वर्षों से रिक्त पदों पर नियुक्ति कर संस्थान का पुनरुत्थान किया जाए। ज्ञापन भेजने वालों में संस्थान के भोपाल इंदौर बदनावर के कार्यकर्ता और समाजजनों में राजेश जैन फूलजी बा, राजमल सूर्या, मुकेश विनायका, सुरेन्द्र मूणत, राजेश मोदी, विजय बाफना, महेन्द्र सुंदेचा, राजेन्द्र सराफ, अनिल लुनिया, सर्वेश मंडलेचा, सौरभ जैन बिट्टू, हेमंत मोदी, अभिषेक टल्ला, सुशील जैन, पवन पाटोदी, सुशील मोदी, ललित गोधा, विपिन पाटनी, स्वप्निल जैन, ओम पाटोदी सहित नगर के गणमान्य नागरिक शामिल थे।</p>
<p><strong>पृष्ठभूमि</strong></p>
<p>यह संस्थान 19 हजार दुर्लभ पुस्तकों व पांडुलिपियों से सुसज्जित है। यहां जापान, श्रीलंका, कंबोडिया तक के शोधार्थी अध्ययन करते रहे हैं। जैन समाज का आरोप है कि दरभंगा के संस्कृत संस्थान और नालंदा के पाली संस्थान को चलाया जा रहा है लेकिन, प्राकृत संस्थान के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/protest_against_the_closure_of_the_prakrit_jain_scriptures_and_nonviolence_research_institute/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जैन धरोहर को हटाने की कोशिश से जैन समाज में नाराजगी: जैन समाजजनों ने देश व्यापी आंदोलन की चेतावनी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/resentment_within_the_jain_community_over_attempts_to_remove_jain_heritage/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/resentment_within_the_jain_community_over_attempts_to_remove_jain_heritage/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 07:52:00 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Ahimsa Research Institute. श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Government Decree]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[National Jinshasan Unity Association]]></category>
		<category><![CDATA[Prakrit Jain Scriptures]]></category>
		<category><![CDATA[Prakrit Research Institute]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Vaishali (Bihar)]]></category>
		<category><![CDATA[अहिंसा शोध संस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्राकृत जैन शास्त्र]]></category>
		<category><![CDATA[प्राकृत शोध संस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ]]></category>
		<category><![CDATA[वैशाली बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[सरकारी फरमान]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=104656</guid>

					<description><![CDATA[वैशाली बिहार के प्राकृत शोध संस्थान को बंद करने के सरकारी फरमान पर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ का कड़ा आक्रोश देखने में आ रहा है। भगवान महावीर की पावन जन्मस्थली बासोकुंड, वैशाली स्थित प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान को बंद करने के बिहार सरकार के हालिया प्रस्ताव एवं एक पक्षीय निर्णय से जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>वैशाली बिहार के प्राकृत शोध संस्थान को बंद करने के सरकारी फरमान पर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ का कड़ा आक्रोश देखने में आ रहा है। भगवान महावीर की पावन जन्मस्थली बासोकुंड, वैशाली स्थित प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान को बंद करने के बिहार सरकार के हालिया प्रस्ताव एवं एक पक्षीय निर्णय से जैन समाज और बुद्धिजीवियों के बीच भारी आक्रोश है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> धरोहर मिटाने की साजिश? वैशाली बिहार के प्राकृत शोध संस्थान को बंद करने के सरकारी फरमान पर राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ का कड़ा आक्रोश देखने में आ रहा है। भगवान महावीर की पावन जन्मस्थली बासोकुंड, वैशाली स्थित प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा शोध संस्थान को बंद करने के बिहार सरकार के हालिया प्रस्ताव एवं एक पक्षीय निर्णय से जैन समाज और बुद्धिजीवियों के बीच भारी आक्रोश है। राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के इंदौर इकाई के अध्यक्ष मयंक जैन और राजेश जैन दद्दू ने इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे जैन संस्कृति और प्राचीन भाषाई विरासत को मिटाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। पूर्व राष्ट्रपति की विरासत और समाज का त्याग दांव पर राष्ट्रीय जिन शासन संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह संस्थान कोई साधारण सरकारी इमारत नहीं है। इसका शिलान्यास 1956 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था और इसके निर्माण में दानवीर साहू शांति प्रसाद जैन का अतुलनीय वित्तीय योगदान रहा है। सरकार का इसे बंद करने का निर्णय उन महापुरुषों के विजन और जैन समाज की भावनाओं का खुला अपमान है।</p>
<p><strong>सरकार के तर्क तथ्यहीन- राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ</strong></p>
<p>प्रशासन द्वारा पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के नाम पर संस्थान को कला एवं संस्कृति विभाग को सौंपने के तर्क को संघ ने पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। संघ का स्पष्ट कहना है कि संस्थान के पुस्तकालय में ऐसी कोई पांडुलिपि उपलब्ध ही नहीं है, जिसका हवाला देकर इसे खाली कराया जा रहा है। यह केवल संस्थान की जमीन और परिसर को हड़पने का एक प्रशासनिक बहाना मात्र प्रतीत होता है।</p>
<p><strong>संस्थान को बीमार बनाने की जिम्मेदार खुद सरकार </strong></p>
<p>राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 20 वर्षों से संस्थान में शिक्षकों और कर्मचारियों की भर्ती जानबूझकर नहीं की गई ताकि इसे निष्क्रिय घोषित किया जा सके। दरभंगा के संस्कृत संस्थान और नालंदा के पाली संस्थान को चलाया जा रहा है, लेकिन जैन दर्शन से जुड़े प्राकृत संस्थान को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? दद्दू ने भारत वर्षीय जैन समाज से आह्वान करते हुए राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए मांग की है कि इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए। संस्थान की शैक्षणिक स्वायत्तता को यथावत रखा जाए। खाली पड़े शैक्षणिक पदों पर तत्काल विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाए। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के श्जैनोलॉजी रिसर्च सेंटरश् के रूप में विकसित किया जाए। जैन समाज की उदारता को हमारी कमजोरी न समझा जाए। यदि सरकार ने इस ऐतिहासिक शोध केंद्र को बंद करने का निर्णय नहीं बदला, तो राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ देशभर में सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करने को बाध्य होगा। संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले में चुप नहीं बैठेगा। बिहार सरकार से अपील की गई है कि वह विकास के नाम पर विनाश की नीति छोड़कर, भगवान महावीर की विरासत को संरक्षित करने का अपना राजधर्म निभाए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/resentment_within_the_jain_community_over_attempts_to_remove_jain_heritage/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
