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	<title>‘अहिंसा परमो धर्मः’ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवान महावीर के उपदेश प्राणी के लिए प्रेरणास्रोत: 22 मई को होगी तीर्थंकर महावीर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता </title>
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		<pubDate>Fri, 16 May 2025 09:41:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी विराट व्यक्तित्व के धनी थे। महावीर स्वामी ने अहिंसा, संयम और तप को ही धर्म बताया है। भगवान महावीर कहते हैं, जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं। भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर स्वामी विराट व्यक्तित्व के धनी थे। महावीर स्वामी ने अहिंसा, संयम और तप को ही धर्म बताया है। भगवान महावीर कहते हैं, जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं। भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। यह प्रेरक प्रवचन मुनिश्री विलोकसागरजी ने मुरैना की धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> भगवान महावीर स्वामी विराट व्यक्तित्व के धनी थे। महावीर स्वामी ने अहिंसा, संयम और तप को ही धर्म बताया है। भगवान महावीर कहते हैं, जो धर्मात्मा है, जिसके मन में सदा धर्म रहता है, उसे देवता भी नमस्कार करते हैं। भगवान महावीर ने अपने प्रवचनों में धर्म, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह, क्षमा पर सबसे अधिक जोर दिया। त्याग और संयम, प्रेम और करुणा, शील और सदाचार ही उनके प्रवचनों का सार था। आज के समय में भगवान महावीर की शिक्षाएं पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। हिंसा, लालच और झूठ से भरी दुनिया में उनके सिद्धांत मानवता के कल्याण के लिए आवश्यक हैं। अहिंसा और सत्य का पालन कर हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं। उनकी शिक्षाएं हमें आत्मसंयम, सह-अस्तित्व और दयाभाव सिखाती हैं। भगवान महावीर के विचारों को आत्मसात करने पर हमें शांति की अनुभूति होती है। उन्होंने हमें प्रेम, करुणा, अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। यदि हम उनके सिद्धांतों को अपने जीवन में अपनाएं, तो यह संसार अधिक शांतिपूर्ण और समृद्ध हो सकता है। भगवान महावीर के उपदेश न केवल जैन समुदाय के लिए, बल्कि पूरी मानव जाति के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उक्त उद्गार बड़े जैन मंदिर में विराजमान दिगंबर मुनिश्री विलोकसागर महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।</p>
<p><strong>भगवान महावीर के मुख्य पांच सिद्धांत</strong></p>
<p>भगवान महावीर ने अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और अस्तेय के सिद्धांतों पर जोर दिया। उनके ये उपदेश जैन धर्म के मूलभूत आधार हैं। ‘अहिंसा परमो धर्मः’ भगवान महावीर का सबसे महत्वपूर्ण संदेश अहिंसा था। उन्होंने कहा कि किसी भी जीव को शारीरिक या मानसिक रूप से कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए। उनका मानना था कि सभी जीवों में आत्मा होती है और हमें हर जीव के प्रति करुणा रखनी चाहिए। ‘सत्य’- भगवान महावीर ने कहा कि सत्य को अपनाना ही सच्ची भक्ति है। झूठ बोलना केवल दूसरों को ही नहीं, बल्कि स्वयं को भी धोखा देने के समान है। ‘अपरिग्रह’ उन्होंने सांसारिक वस्तुओं से मोह त्यागने पर बल दिया। मनुष्य को अपनी इच्छाओं और भौतिक सुख-सुविधाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। ‘ब्रह्मचर्य’ ब्रह्मचर्य का अर्थ है अपने विचारों, शब्दों और कर्मों में संयम रखना। भगवान महावीर ने इसे आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण मार्ग बताया। ‘अस्तेय’ उन्होंने कहा कि हमें कभी भी दूसरों की वस्तु या अधिकार का हनन नहीं करना चाहिए। दूसरों की संपत्ति को बिना अनुमति लेना भी चोरी के समान है।</p>
<p><strong>जैन कौन कहलाते हैं ? </strong></p>
<p>जैन शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘जिन’ से हुई है। यह किसी व्यक्ति-विशेष का नाम नहीं है, वरन जो लोग आत्म-विकारों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं, जो अपनी इंद्रियों को वशीभूत कर लेते हैं, ऐसे आत्मजयी व्यक्ति ‘जिन’ कहलाते हैं। जैन धर्म का सही नाम जिन धर्म है जिसका अर्थ मन और इंद्रियों को जीतने वाला अर्थात आत्मजयी होता है। जैन धर्म भारत श्रमण परम्परा से निकला प्राचीन धर्म और दर्शन है। जैन अर्थात् कर्मों का नाश करनेवाले ‘जिन भगवान’ के अनुयायी कहलाते हैं।</p>
<p><strong>22 मई को होगी तीर्थंकर महावीर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता</strong></p>
<p>प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. मनोज जैन ने बताया कि मुनिश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज की प्रेरणा से भगवान महावीर स्वामी के जीवन चरित्र पर आधारित 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की प्रतियोगिता 22 मई को शाम 7 से 8 बजे तक बड़े जैन मंदिर में होगी। जिसमें जैन-अजैन कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है। प्रतियोगिता का उद्देश्य आमजन को भगवान महावीर के जीवन चरित्र एवं सिद्धांतों से अवगत कराना है। परीक्षा के बाद उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लगभग 100 प्रतियोगियों को अतिशय क्षेत्र टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी, रवींद्र जैन गोसपुर, प्रेमचंद जैन वंदना साड़ी, राकेश जैन टायर वाले,पंकज जैन मेडिकल, एडवोकेट महेंद्र जैन, डालचंद जैन एवं अन्य समाजसेवियों के सहयोग से पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।</p>
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		<title>विश्व शांति के अग्रदूत भगवान महावीर की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक : भगवान महावीर के जयकारों से संपूर्ण वातावरण आनंदित </title>
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		<pubDate>Thu, 10 Apr 2025 08:05:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज भगवान महावीर का जन्म महोत्सव समूचे देश और विश्व पटल पर पारंपरिक धार्मिक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा, कलश, पूजन, आरती और प्रभावना के आयोजन हो रहे हैं। जगह-जगह शोभायात्राओं में विश्व लोक नायक भगवान महावीर के जयकारों से संपूर्ण वातावरण आनंदित हो रहा है। भगवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आज भगवान महावीर का जन्म महोत्सव समूचे देश और विश्व पटल पर पारंपरिक धार्मिक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा, कलश, पूजन, आरती और प्रभावना के आयोजन हो रहे हैं। जगह-जगह शोभायात्राओं में विश्व लोक नायक भगवान महावीर के जयकारों से संपूर्ण वातावरण आनंदित हो रहा है। भगवान महावीर के दिव्य संदेश, उपदेश और शिक्षाओं को स्मरण करा रहे हैं डॉ. राजेश जैन शास्त्री ललितपुर। <span style="color: #ff0000">आज पढ़िए उनकी कलम से यह विशेष प्रस्तुति&#8230;..। राजीव सिंघई मे हमें भेजा हैं.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> वर्तमान में संपूर्ण विश्व हिंसा, आतंकवाद, युद्ध, असमानता और तनाव जैसी समस्याओं से ग्रस्त है। कोई स्वाभिमान की पूर्ति के लिए तो कुछ अभिमान को पुष्ट करने के लिए राग ,द्वेष, ईर्ष्या, मद जैसे मानसिक विकारों से ग्रसित हैं। विश्व पटल ऐसे समय में शांति, अहिंसा और सहअस्तित्व के मार्ग को अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। भगवान महावीर द्वारा प्रदत्त सिद्धांत और उनकी शिक्षाएं न केवल आत्मिक और आध्यात्मिक शांति का मार्ग दिखाती हैं, बल्कि वैश्विक शांति और सद्भाव स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भगवान महावीर ने अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के जिन सिद्धांतों का प्रतिपादन किया वे आज भी विश्व में शांति और सद्भाव के लिए प्रासंगिक हैं। भगवान महावीर स्वामी का जन्म ईसा से लगभग 599 वर्ष पूर्व बिहार के कुंडग्राम (वैशाली) में राजा सिद्धार्थ और माता त्रिशला के पुत्र के रूप में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को हुआ था। भगवान महावीर को वीर, अतिवीर, सन्मति, वर्धमान नाम से भी जाना जाता हैं। उन्होंने 30 वर्ष तक राजसी जीवन व्यतीत कर आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर सत्य, अहिंसा और तपस्या का मार्ग अपनाया। उन्होंने अपने तप और ध्यान के माध्यम से ज्ञान प्राप्त किया और जैनधर्म के 24 वें तीर्थंकर के रूप में विश्व को अहिंसा, सत्य और संयम का संदेश दिया। उनकी शिक्षाएं न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए थीं, बल्कि समाज के नैतिक और व्यावहारिक सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>भगवान महावीर की प्रमुख शिक्षाए और विश्वशांति के प्रति उनका योगदान</strong></p>
<p>अहिंसा: भगवान महावीर का सबसे महत्वपूर्ण संदेश अहिंसा था। उन्होंने कहा ‘अहिंसा परमो धर्मः’</p>
<p>इसका अर्थ है कि अहिंसा परम धर्म है। भगवान महावीर का उपदेश था कि संसार के प्रत्येक जीव में आत्मा होती है, इसलिए किसी भी जीव को मानसिक, शारीरिक या वाणी द्वारा हानि नहीं पहुंचानी चाहिए। आज के समय में युद्ध, आतंकवाद और हिंसा की समस्या को अहिंसा के मार्ग से ही समाप्त किया जा सकता है। यदि सभी राष्ट्र और समाज अहिंसा के सिद्धांत को अपनाएं तो वैश्विक स्तर पर स्थायी शांति स्थापित हो सकती है। ‘जिओ और जीने दो’ जैसे संदेश ही समाज के आपसी संबंधों को चिरस्थायी बना सकते हैं।</p>
<p>सत्य: भगवान महावीर ने सत्य को आत्मिक शांति और सामाजिक सद्भाव का आधार माना। सत्य का पालन करने से आपसी विश्वास बढ़ता है और समाज में पारदर्शिता आती है। वर्तमान समय में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर झूठ और धोखाधड़ी से जो संघर्ष उत्पन्न होते हैं। वे सत्य के मार्ग को अपनाकर समाप्त किए जा सकते हैं। सत्य से वैश्विक स्तर पर भरोसा और शांति का वातावरण तैयार किया जा सकता है। जिससे अविश्वास ,धोखा जैसे अनैतिक मार्ग स्वयमेव समाप्त हो सकते हैं।</p>
<p>अचौर्य: भगवान महावीर ने कहा कि किसी भी वस्तु को बिना अनुमति या अनैतिक तरीके से प्राप्त करना चोरी के समान है। आर्थिक असमानता, भ्रष्टाचार और संसाधनों के अनुचित वितरण से विश्व में अशांति फैलती है। वर्तमान में प्रत्येक अखबार में टैक्स की चोरी और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले प्रतिदिन प्रकाशित होते रहते हैं। समाज मे फैली ऐसी घटनाएं ही उसके विकास में बाधक है। यदि व्यक्ति और राष्ट्र अचौर्य के सिद्धांत को अपनाएं तो आर्थिक संतुलन स्थापित होगा और इससे सामाजिक समरसता और स्थिरता आएगी।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-78746" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250410-WA0004.jpg" alt="" width="395" height="599" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250410-WA0004.jpg 395w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250410-WA0004-198x300.jpg 198w" sizes="(max-width: 395px) 100vw, 395px" />ब्रह्मचर्यः भगवान महावीर ने इंद्रियों और इच्छाओं पर संयम रखने का संदेश दिया। भौतिक सुखों की अति लालसा से मानसिक अशांति उत्पन्न होती है। जिससे समाज में असंतोष और हिंसा का वातावरण बनता है। वर्तमान काल मे अब्रह्म के कारण ही पांच पापों के कृत्यों में वृद्धि हुई है। उदाहरण स्वरूप अखबार के अधिकतर पृष्ठ ऐसे ही खबरों से भरे हुए हैं। जबकि ब्रह्मचर्य के पालन से व्यक्ति मानसिक रूप से संतुलित रहेगा और समाज में स्थायी शांति का वातावरण बनेगा।</p>
<p>अपरिग्रह: भगवान महावीर ने कहा कि आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह तथा भौतिक वस्तुओं के प्रति मोह,अशांति और संघर्ष का कारण बनता है। यदि व्यक्ति और समाज अपरिग्रह का पालन करें तो आर्थिक और सामाजिक असमानता को कम किया जा सकता है। इससे समाज में संतोष और सौहार्द्रता का भाव बढ़ेगा, जो विश्व शांति की नींव बनेगा।</p>
<p><strong>भगवान महावीर की शिक्षाओं की आधुनिक प्रासंगिकता</strong></p>
<p>वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भगवान महावीर की शिक्षाएँ अत्यंत प्रासंगिक हैं। आतंकवाद, युद्ध, सांप्रदायिकता और पर्यावरण संकट जैसी समस्याएं विश्व शांति के मार्ग में बाधा बनी हुई हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति भगवान महावीर स्वामी के अहिंसा,सत्य,अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों को अपनाएं तो वह जीवन में सुख प्राप्त कर सकता है।</p>
<p>भगवान महावीर की शिक्षाएं किसी विशेष धर्म, जाति या समाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए हैं। अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के सिद्धांतों का पालन करके न केवल व्यक्तिगत जीवन में शांति और संतुलन स्थापित किया जा सकता है। बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शांति और सद्भाव का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। आधुनिक युग की समस्याओं का समाधान महावीर की शिक्षाओं में निहित है। यदि विश्व समुदाय उनके सिद्धांतों को अपनाए तो एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और समरस विश्व का निर्माण संभव है।</p>
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		<title>तीर्थंकर महावीर के विचार आज भी हैं प्रासंगिक: श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र ने बताया महावीर ने भारत के विचारों को उदारता दी </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 09:34:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक पर उनके आदर्शों को याद किया जा रहा है। वास्तव में भगवान महावीर के संदेश, उपदेश और उनकी देशनाएं आज भी मानव मात्र का मार्ग प्रशस्त कर रही है। इन्हीं के बारे में पढ़िए इस खबर में&#8230; इंदौर। श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र ने जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक पर उनके आदर्शों को याद किया जा रहा है। वास्तव में भगवान महावीर के संदेश, उपदेश और उनकी देशनाएं आज भी मानव मात्र का मार्ग प्रशस्त कर रही है। <span style="color: #ff0000">इन्हीं के बारे में पढ़िए इस खबर में&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र ने जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक (जयंती) के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाए दी। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने जो शिक्षाएं और संदेश दिया वह आज भी प्रासंगिक हैं। अहिंसा, अपरिग्रह, करुणा और क्षमा के विचार जनमानस की जीवन पद्धति बन गए हैं। महावीर स्वामी ने मानवता को शांति, प्रेम, सौहार्द और बंधुत्व की भावना के साथ जीवन जीने का मार्ग बताया। संपूर्ण विश्व एक है और सभी प्राणी एक ही परिवार के सदस्य हैं। एक का सुख सबका सुख है। एक की पीड़ा सभी की पीड़ा है, उनका यह संदेश आज भी पूरी दुनिया के लिए आदर्श है। उन्होंने आगे कहा कि आज पूरे विश्व में अशांति फैली हुई है। अनिश्चितता का दौर है। भय का माहौल है। एक दूसरे के प्रति अविश्वास की भावना है। अहिंसा, अपरिग्रह, जियो और जीने दो आदि सभी महत्वपूर्ण तीर्थंकर महावीर के सिद्धांत अनेकांतवाद की नींव पर ही टिके हैं। अनेकांतवाद का अर्थ है कि किसी भी एक पक्ष को सही मानकर नहीं चलना वरन सभी के मतों को, सभी के पक्षों को समाहित करते हुए तथ्यों तक पहुंचना। आज सभी समस्याओं की यही जड़ है कि सभी केवल अपनी बात को ही सही मानते हैं, दूसरों के सापेक्ष से उसे नहीं समझते यही दुःख का कारण है, अशांति का कारण है।</p>
<p><strong>प्रयोग वीरों की आवश्यकता </strong></p>
<p>महावीर ने भारत के विचारों को उदारता दी, आचार को पवित्रता दी जिसने इंसान का गौरव बढ़ाया। उसके आदर्श को परमात्मा पद की बुलंदी तक पहुंचाया, जिसने सभी को धर्म और स्वतंत्रता का अधिकारी बनाया और जिसने भारत के आध्यात्मिक संदेश को अन्य देशों तक पहुंचाने की शक्ति दी। यही कारण है कि आज विश्व में तीर्थंकर महावीर के सिद्धांतों की ओर लोगों का ध्यान गया है। जहां अनेकांतवाद के सिद्धांतों का पालन नहीं हो रहा है वहां आतंकवाद की जड़ें मजबूत हो रही हैं। भगवान महावीर ने कहा था कि मूल बात दृष्टि की होती है। हम किस दृष्टि से अपने आसपास समाज में हो रही व्यवस्थाओं व घटनाओं को देखते हैं। उन्होंने बताया कि हम भीतर से अपने को देखें एवं उसकी सापेक्षता में इस जगत को समझें। आज महावीर के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए महावीरों की आवश्यकता है, प्रयोग वीरों की आवश्यकता है।</p>
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		<title>विश्व कल्याण के पथ प्रदर्शक हैं भगवान महावीर स्वामी: मूक पशु पक्षियों तथा मनुष्य को एक माला में पिरोकर जोड़ने का किया प्रयास </title>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 09:18:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक गुरुवार को संपूर्ण जगत में धार्मिक आस्था और श्रद्धा से मनाया जाएगा। इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिर और चैत्यालयों में विशेष तैयारियां की जा रही है। सकल जैन समाज में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक मनाने के लिए उत्साहित हैं। भगवान महावीर के संदेशों के बारे में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक गुरुवार को संपूर्ण जगत में धार्मिक आस्था और श्रद्धा से मनाया जाएगा। इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिर और चैत्यालयों में विशेष तैयारियां की जा रही है। सकल जैन समाज में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक मनाने के लिए उत्साहित हैं। <span style="color: #ff0000">भगवान महावीर के संदेशों के बारे में स्मरण करा रहे हैं इंदौर से हरिहरसिंह चौहान पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान महावीर स्वामी ने अहिंसा और सच्चाई की राह पर चलकर धर्म को दिशा दिखाई थी और आज वर्तमान को उसी वर्धमान, महावीर, वीर, अतिवीर, सन्मति की आवश्यकता है। समाजिक दूरियों के बढ़ने के कारण झूठ, फरेब, लालच का बोलबाला हो रहा है। ऐसे समय में वीर प्रभु के उपदेशों और उनके बताए मार्ग पर हम सभी के लिए बहु उपयोगी है। जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म चैत्र शुक्ल तेरस को पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के यहां हुआ था। क्षत्रिय राजकुमार होते हुए भी आप ने हिंसा का साथ कभी भी नहीं दिया। वर्धमान महावीर ने 12 वर्ष तक मौन तपस्या की थी। उन्हें बहुत कठिनाइयों से केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। उन्होंने पांच मूलभूत सिद्धांतों का पालन किया। वह अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य(अस्तेय) और ब्रह्मचर्य से नाता जोड़े रखा। तभी वह जगत के पालनहार बनकर आप ने समन्वय भाव रखते हुए सभी मूक पशु पक्षियों तथा मनुष्य को एक माला में पिरोकर जोड़ने का प्रयास किया। आपके त्याग, संयम, प्रेम और करुणा शील सदाचार ने जियो और जीने दो का संदेश दिया था।</p>
<p><strong>हम सभी में जनकल्याण के भाव हों</strong></p>
<p>प्रभु महावीर जहां तपस्या करते थे। उस स्थान पर गाय, बकरी, बंदर, चिड़िया, हाथी और हिंसक जीव शेर आदि एक साथ आते थे और प्रभु महावीर स्वामी के सामने बैठकर उनके चरणों में समर्पण भाव से बैठे रहते थे। उनकी अहिंसा और आध्यात्मिक स्वतंत्रता से ही विश्व-कल्याण के भाव जगत में आए। इसका मतलब भी यही होता है कि सभी जीवों पर दया भाव रखो। उन्हें भी जीने का अधिकार है। महावीर स्वामी और उनकी तपस्या का प्रतिफल है अहिंसा धर्म। जिस युग में हिंसा और पशु बलि, जात-पात का भेदभाव बढ़ रहा था। ऐसे समय में जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी विश्व कल्याण के पथ प्रदर्शक बन ‘अहिंसा परमो धर्मः’ का दिव्य संदेश दिया। उन्होंने कहा था ‘जियो और जीने दो’ हम सभी में जनकल्याण के भाव होना चाहिए। हमेशा से प्रेम और क्षमा के साथ रहते हुए प्रभु महावीर स्वामी कहते थे कि हम सच्चे ह्रदय से गलतियों के लिए क्षमा करें तो वह हमें जगत में सम्मान दिलाएगा।</p>
<p><strong>अहिंसा और विश्व कल्याण के पथ पर आगे बढ़ें</strong></p>
<p>मैत्री भाव जगत कल्याण के लिए बहुत जरूरी है। विचारों की हिंसा से बचें। सच्चाई की राह पर मानव प्रेम के भाव जागृत करें। वीर शासन में महावीर स्वामी के भाव और दिव्य संदेश क्षमा और सहनशीलता रहना, वर्तमान में बहुत जरूरी है। हम सभी निडर होकर अहिंसा और विश्व कल्याण के पथ पर आगे बढ़ें तो ही हमें जिनवाणी का मोल समझ में आएगा। जैन धर्म और महावीर स्वामी के बताए हुए मार्ग पर चलने से ही जीवन में उज्जवलता के साथ वैचारिक मतभेद भी दूर होंगे।</p>
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		<pubDate>Wed, 09 Apr 2025 08:53:48 +0000</pubDate>
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<p><strong>भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक गुरुवार को संपूर्ण जगत में धार्मिक आस्था और श्रद्धा से मनाया जाएगा। इंदौर सहित देशभर के दिगंबर जैन मंदिर और चैत्यालयों में विशेष तैयारियां की जा रही है। सकल जैन समाज में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक मनाने के लिए उत्साहित हैं। <span style="color: #ff0000">भगवान महावीर के संदेशों के बारे में स्मरण करा रहे हैं इंदौर से हरिहरसिंह चौहान पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान महावीर स्वामी ने अहिंसा और सच्चाई की राह पर चलकर धर्म को दिशा दिखाई थी और आज वर्तमान को उसी वर्धमान, महावीर, वीर, अतिवीर, सन्मति की आवश्यकता है। समाजिक दूरियों के बढ़ने के कारण झूठ, फरेब, लालच का बोलबाला हो रहा है। ऐसे समय में वीर प्रभु के उपदेशों और उनके बताए मार्ग पर हम सभी के लिए बहु उपयोगी है। जैन धर्म के 24 वें तीर्थकर भगवान महावीर स्वामी का जन्म चैत्र शुक्ल तेरस को पिता सिद्धार्थ और माता त्रिशला के यहां हुआ था। क्षत्रिय राजकुमार होते हुए भी आप ने हिंसा का साथ कभी भी नहीं दिया। वर्धमान महावीर ने 12 वर्ष तक मौन तपस्या की थी। उन्हें बहुत कठिनाइयों से केवल ज्ञान प्राप्त हुआ। उन्होंने पांच मूलभूत सिद्धांतों का पालन किया। वह अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अचौर्य(अस्तेय) और ब्रह्मचर्य से नाता जोड़े रखा। तभी वह जगत के पालनहार बनकर आप ने समन्वय भाव रखते हुए सभी मूक पशु पक्षियों तथा मनुष्य को एक माला में पिरोकर जोड़ने का प्रयास किया। आपके त्याग, संयम, प्रेम और करुणा शील सदाचार ने जियो और जीने दो का संदेश दिया था।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-78642" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0027.jpg" alt="" width="860" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0027.jpg 860w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0027-202x300.jpg 202w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0027-688x1024.jpg 688w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250409-WA0027-768x1143.jpg 768w" sizes="(max-width: 860px) 100vw, 860px" />हम सभी में जनकल्याण के भाव हों</strong></p>
<p>प्रभु महावीर जहां तपस्या करते थे। उस स्थान पर गाय, बकरी, बंदर, चिड़िया, हाथी और हिंसक जीव शेर आदि एक साथ आते थे और प्रभु महावीर स्वामी के सामने बैठकर उनके चरणों में समर्पण भाव से बैठे रहते थे। उनकी अहिंसा और आध्यात्मिक स्वतंत्रता से ही विश्व-कल्याण के भाव जगत में आए। इसका मतलब भी यही होता है कि सभी जीवों पर दया भाव रखो। उन्हें भी जीने का अधिकार है। महावीर स्वामी और उनकी तपस्या का प्रतिफल है अहिंसा धर्म। जिस युग में हिंसा और पशु बलि, जात-पात का भेदभाव बढ़ रहा था। ऐसे समय में जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी विश्व कल्याण के पथ प्रदर्शक बन ‘अहिंसा परमो धर्मः’ का दिव्य संदेश दिया। उन्होंने कहा था ‘जियो और जीने दो’ हम सभी में जनकल्याण के भाव होना चाहिए। हमेशा से प्रेम और क्षमा के साथ रहते हुए प्रभु महावीर स्वामी कहते थे कि हम सच्चे ह्रदय से गलतियों के लिए क्षमा करें तो वह हमें जगत में सम्मान दिलाएगा।</p>
<p><strong>अहिंसा और विश्व कल्याण के पथ पर आगे बढ़ें</strong></p>
<p>मैत्री भाव जगत कल्याण के लिए बहुत जरूरी है। विचारों की हिंसा से बचें। सच्चाई की राह पर मानव प्रेम के भाव जागृत करें। वीर शासन में महावीर स्वामी के भाव और दिव्य संदेश क्षमा और सहनशीलता रहना, वर्तमान में बहुत जरूरी है। हम सभी निडर होकर अहिंसा और विश्व कल्याण के पथ पर आगे बढ़ें तो ही हमें जिनवाणी का मोल समझ में आएगा। जैन धर्म और महावीर स्वामी के बताए हुए मार्ग पर चलने से ही जीवन में उज्जवलता के साथ वैचारिक मतभेद भी दूर होंगे।</p>
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