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	<title>अष्टान्हिका महापर्व &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>अष्टान्हिका महापर्व &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>अष्टानिका महापर्व पर नौगामा नगर में नंदीश्वर महामंडल एवं सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ : नौ दिनों तक होंगे भक्ति, आराधना और धार्मिक आयोजन </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:14:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नौगामा नगर के आदिनाथ जैन मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर भव्य एवं संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान तथा सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ हुआ। 21 से 29 जुलाई तक प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन एवं विधान आयोजित किए जाएंगे। पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट। नौगामा नगर। अष्टान्हिका महापर्व के पावन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नौगामा नगर के आदिनाथ जैन मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर भव्य एवं संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान तथा सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ हुआ। 21 से 29 जुलाई तक प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन एवं विधान आयोजित किए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा नगर।</strong> अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर नौगामा नगर स्थित श्री आदिनाथ जैन मंदिर में भव्य एवं संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान तथा श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। यह आयोजन 21 से 29 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन विविध धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न होगा।</p>
<p><strong>अष्टान्हिका महापर्व का आध्यात्मिक महत्व</strong></p>
<p>जैन धर्म में अष्टान्हिका महापर्व को अत्यंत पवित्र एवं आराधनामय पर्व माना जाता है। यह पर्व श्री नंदीश्वर द्वीप स्थित 52 शाश्वत जिनालयों की दिव्य आराधना का स्मरण कराता है। जैन आगमों के अनुसार सौधर्म इन्द्र सहित असंख्य देवगण वहां भगवान जिनेन्द्र की निरंतर पूजा-अर्चना करते हैं। पृथ्वी पर श्री नंदीश्वर महामंडल विधान उसी दिव्य आराधना का भावपूर्ण अनुकरण है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन होंगे धार्मिक अनुष्ठान</strong></p>
<p>आयोजन के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न होगी। इसके पश्चात प्रातः 7:00 बजे से 9:00 बजे तक संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान, 52 जिनालयों के 52 अर्घ्य, जयमाला तथा अन्य धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न कराई जाएंगी। श्रद्धालु प्रतिदिन पूजन एवं अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित करेंगे।</p>
<p><strong>सिद्धचक्र विधान भी जारी</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्री 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान भी श्रद्धापूर्वक आयोजित किया जा रहा है। दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने 16 अर्घ्य समर्पित किए। साथ ही सुखोदय तीर्थ नसियाजी में सामूहिक पूजन का आयोजन भी निरंतर चल रहा है।</p>
<p><strong>धर्मप्रभावना का अनुपम अवसर</strong></p>
<p>वीणा दीदी ने कहा कि यह महापर्व श्रद्धालुओं के लिए धर्म, भक्ति, साधना और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ अवसर है। महापर्व के माध्यम से जिनभक्ति, आत्मशुद्धि, सम्यक्त्व एवं मोक्षमार्ग की भावना को सुदृढ़ करने का संदेश दिया जा रहा है।</p>
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		<title>सिद्धों की भूमि सम्मेद शिखरजी में 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ : ध्वजारोहण के साथ शुरू हुई नौ दिवसीय सिद्ध आराधना </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 17:08:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के सर्वोच्च सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखरजी में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण, अभिषेक एवं सिद्धभक्ति के साथ हुआ। देशभर से श्रद्धालु आराधना में सहभागी बने। पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट। सम्मेद शिखरजी। जैन धर्म के [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के सर्वोच्च सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखरजी में परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण, अभिषेक एवं सिद्धभक्ति के साथ हुआ। देशभर से श्रद्धालु आराधना में सहभागी बने। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सम्मेद शिखरजी।</strong> जैन धर्म के सर्वोच्च तीर्थ एवं सिद्धों की पावन भूमि सम्मेद शिखरजी में अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर परम पूज्य मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में 108 मंडलीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य शुभारंभ 21 जुलाई को ध्वजारोहण एवं मांगलिक क्रियाओं के साथ श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>भव्य मंगलाचरण एवं ध्वजारोहण</strong></p>
<p>अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि विधान में सहभागी सभी इंद्र-इंद्राणियां सर्वप्रथम गुणायतन में एकत्रित हुए। वहां से 108 जिनप्रतिमाओं एवं मंगल कलशों के साथ शोभायात्रा के रूप में कार्यक्रम स्थल पहुंचे। यहां ध्वजारोहण, पंडाल उद्घाटन तथा मुख्य मंडल सहित सभी 108 मंडलों पर भगवान की प्रतिमाएं विराजमान कर अभिषेक की मंगल क्रियाएं सम्पन्न कराई गईं।</p>
<p><strong>मुनि श्री प्रमाण सागर जी का प्रेरक संदेश</strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने सिद्धभक्ति कराते हुए अपने मंगल प्रवचन में कहा कि सिद्धक्षेत्र पर सिद्धचक्र महामंडल विधान करना अत्यंत पुण्यदायी आराधना है। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान करते हुए कहा कि अष्टान्हिका महापर्व जैन धर्म का महान आध्यात्मिक पर्व है, जिसमें सिद्धों की आराधना से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।</p>
<p><strong>प्रथम दिवस 8 अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>प्रवचन के उपरांत संस्कृत विधि-विधान के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान प्रारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने प्रथम दिवस श्रद्धा एवं भक्ति के साथ 8 अर्घ्य समर्पित कर सिद्ध परमेष्ठियों की आराधना की। देश के विभिन्न राज्यों से आए हजारों श्रावक-श्राविकाएं विधान में सहभागी बने।</p>
<p><strong>विभिन्न स्थलों पर भी हो रहे विधान</strong></p>
<p>सम्मेद शिखरजी स्थित विभिन्न जिनालयों में भी सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजित किए जा रहे हैं। शांति सागर धाम में प्रतिष्ठाचार्य पंडित विमल जी बनेठा वाले के निर्देशन में विधान सम्पन्न हो रहा है, जिसमें जयपुर से अनिल जैन पाटनी काशीपुर वाले के नेतृत्व में सैकड़ों श्रद्धालु सहभागिता कर रहे हैं।</p>
<p>वहीं तेरहपंथी कोठी स्थित सिद्धाचलम में परम पूज्य उपाध्याय श्री वृषभानन्दी जी महाराज एवं मुनि श्री वैराग्यनन्दी जी महाराज के सान्निध्य में भी सिद्धचक्र महामंडल विधान आयोजित किया जा रहा है। महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु तथा भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा की ज्योति पाटनी अपनी टीम के साथ आराधना में सहभागी बनीं। गुणायतन में जयपुर से गुणमाला, सुनील-लता सोगाणी सहित अनेक परिवारों ने विधान में सहभागिता की।</p>
<p><strong>महाआरती एवं आगामी कार्यक्रम</strong></p>
<p>रात्रि में महाआरती एवं सामूहिक जाप का आयोजन भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ। उदयभान जैन ने बताया कि 22 जुलाई को प्रातः 5:30 बजे मांगलिक क्रियाएं एवं 7:30 बजे सिद्धभक्ति के पश्चात विधान के द्वितीय दिवस 16 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
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		<title>सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, शुद्धि, सद्बुद्धि और सिद्धि का महापर्व है : राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 16:44:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मधुबन स्थित गुणायतन में राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण एवं मंडप उद्घाटन के साथ हुआ। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, विवेकपूर्ण श्रद्धा और धर्ममय जीवन का संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी राजकुमार जैन अजमेरा की विशेष रिपोर्ट। मधुबन (गिरिडीह)। अष्टान्हिका [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मधुबन स्थित गुणायतन में राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण एवं मंडप उद्घाटन के साथ हुआ। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, विवेकपूर्ण श्रद्धा और धर्ममय जीवन का संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजकुमार जैन अजमेरा की विशेष रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मधुबन (गिरिडीह)।</strong> अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर गुणायतन में विराजमान राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाण सागर महाराज एवं मुनि श्री 108 संधान सागर महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ ध्वजारोहण एवं मंडप उद्घाटन के साथ श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।</p>
<p>राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन &#8216;विद्यावाणी&#8217; ने बताया कि इस भव्य विधान में देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने 108 मंडलों के साथ आराधना प्रारंभ की।</p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि &#8220;श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, शुद्धि, सद्बुद्धि और सिद्धि की साधना का महापर्व है। यह केवल बाहरी अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मजागरण और आत्मपरिवर्तन का श्रेष्ठ माध्यम है।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि विधान में अंधश्रद्धा नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण श्रद्धा आवश्यक है। अनेक लोग सांसारिक सफलता, समृद्धि एवं बाधाओं के निवारण की भावना से यह विधान करते हैं, जबकि इसका वास्तविक उद्देश्य आत्मा की शुद्धि और जीवन का सकारात्मक रूपांतरण है। विधान की सफलता उसकी भव्यता से नहीं, बल्कि साधक के जीवन में आए आध्यात्मिक परिवर्तन से मापी जानी चाहिए।</p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में पंचपरमेष्ठी एवं नवदेवताओं की आराधना की जाती है। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र और तप ही मोक्षमार्ग के आधार हैं। यदि ये गुण जीवन में विकसित हो जाएँ तो साधक सिद्धि के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान से धन-वैभव के स्थान पर सद्बुद्धि की कामना करने का संदेश दिया।</p>
<p>ध्वजारोहण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुनिश्री ने कहा कि प्रत्येक धार्मिक आयोजन का शुभारंभ ध्वजारोहण से इसलिए किया जाता है क्योंकि यह धर्म को जीवन में सर्वोच्च स्थान देने का संदेश देता है। ध्वज चारों दिशाओं से आने वाली हवाओं के साथ लहराता है, किंतु उसका ध्वजदंड अटल रहता है। इसी प्रकार परिस्थितियाँ कैसी भी हों, धर्म के प्रति श्रद्धा अडिग रहनी चाहिए।</p>
<p>उन्होंने सरल उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बच्चा खंभे को पकड़कर उसके चारों ओर घूमता रहता है और खंभा नहीं छोड़ता तो गिरता नहीं, उसी प्रकार जो व्यक्ति धर्मरूपी आधार को नहीं छोड़ता, वह जीवन की विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित नहीं होता।</p>
<p>मुनिश्री ने श्रद्धालुओं से विधान के दौरान भावों की पवित्रता बनाए रखने, धैर्य, सहयोग और प्रसन्नता के साथ आराधना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि प्रारंभिक दिनों में व्यवस्था में कहीं कमी रह जाए तो उसे सहज भाव से स्वीकार करें और सामूहिक सहयोग से उसे दूर करें</p>
<p>उन्होंने गुणायतन एवं श्री सेवायतन की संपूर्ण टीम तथा स्वयंसेवकों की सेवाभावना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे विराट आयोजन सामूहिक समर्पण और अनुशासन से ही सफल होते हैं। उन्होंने सभी सेवाधर्मियों एवं धार्मिक सेवाओं का सौभाग्य प्राप्त करने वाले परिवारों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p>प्रवचन के उपरांत मुनिश्री के मंगल निर्देशन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की विधिवत आराधना प्रारंभ हुई। अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर संपूर्ण गुणायतन परिसर मंत्रोच्चार, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से गुंजायमान हो उठा।</p>
<p>कार्यक्रम में झारखंड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, गुजरात, उत्तरप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, समाज के गणमान्यजन एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>नैनागिरि में ध्वजारोहण के साथ श्री सिद्धचक्र: महामण्डल विधान का भव्य शुभारंभ </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Jul 2026 16:41:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर सिद्धक्षेत्र रेशंदीगिरि नैनागिरि में ध्वजारोहण, दीप प्रज्ज्वलन एवं महामस्तकाभिषेक के साथ नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान महोत्सव का शुभारंभ हुआ। 29 जुलाई तक विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। पढ़िए श्रीफल साथी रत्नेश जैन रागी की विशेष रिपोर्ट। बकस्वाहा। अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर सुविख्यात श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर सिद्धक्षेत्र रेशंदीगिरि नैनागिरि में ध्वजारोहण, दीप प्रज्ज्वलन एवं महामस्तकाभिषेक के साथ नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान महोत्सव का शुभारंभ हुआ। 29 जुलाई तक विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी रत्नेश जैन रागी की विशेष रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर सुविख्यात श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र रेशंदीगिरि नैनागिरि में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान महोत्सव का मंगलवार को ध्वजारोहण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन ट्रस्ट एवं प्रबंध समिति के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है, जिसका समापन 29 जुलाई 2026 को विविध धार्मिक कार्यक्रमों के साथ होगा।</p>
<p>विधान महोत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्रीमती विमला जैन, सुरेश जैन (आईएएस), भोपाल तथा डॉ. एस.के. जैन, इंदौर ने ब्रह्मचारी विनय भैया जी (भोपाल) की विशेष उपस्थिति में ध्वजारोहण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। संपूर्ण धार्मिक विधि पंडित अशोक जैन बम्हौरी ने विधि-विधानपूर्वक सम्पन्न कराई।</p>
<p>प्रातःकाल पर्वतराज स्थित चौबीसी जिनालय में भगवान पार्श्वनाथ का महामस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुई। प्रथम अभिषेक का सौभाग्य विद्यासागर गुरुकुलम, बैरसिया रोड (भोपाल) के संचालक ब्रह्मचारी विनय भैया जी ने गुरुकुलम के विद्यार्थियों के साथ प्राप्त किया।</p>
<p>इस अवसर पर कमलकुमार–कपिलकुमार देवड़िया (शाहगढ़), आनंद–सुधा चंदेरिया (भोपाल), सुरेश–वर्षा सिंघई (भोपाल), सौरभ–प्राची जैन (नैनागिरि), सौरभ जैन (इंदौर), सुरेशचंद–कपिलकुमार गूगरा (बण्डा), इंजीनियर महेश कुमार जैन (सागर), रजनीश जैन (छिंदवाड़ा) सहित अनेक श्रद्धालु परिवारों ने अभिषेक एवं शांतिधारा का पुण्य लाभ अर्जित किया। महाकलश स्थापना का सौभाग्य उमेशचंद्र जैन (छतरपुर) को प्राप्त हुआ।</p>
<p>सिद्धक्षेत्र रेशंदीगिरि नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष सुरेश जैन (आईएएस), मंत्री राजेश जैन रागी, प्रबंध समिति अध्यक्ष डॉ. पूर्णचंद्र तथा मंत्री देवेंद्र लुहारी ने देशभर के श्रद्धालुओं से अष्टान्हिका महापर्व के दौरान नैनागिरि पहुंचकर तीर्थ वंदना, सिद्ध आराधना, महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, प्रवचन एवं महाआरती जैसे धार्मिक आयोजनों में सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित करने का आग्रह किया।</p>
<p>इस अवसर पर तीर्थ परिसर भक्तिमय वातावरण, मंगल ध्वनि एवं जयघोषों से गूंज उठा तथा श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, आत्मकल्याण और समस्त जीवों के मंगल की कामना करते हुए सिद्धों की आराधना की।</p>
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		<title>धामनोद जैन मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व पर श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान का आयोजन : 21 से 29 जुलाई तक होंगे विविध धार्मिक अनुष्ठान </title>
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		<pubDate>Mon, 20 Jul 2026 13:53:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धामनोद जैन समाज द्वारा अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर 21 से 29 जुलाई तक श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान का आयोजन किया जाएगा। आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और समाज में विशेषकर महिलाओं में उत्साह का वातावरण है। पढ़िए श्रीफल साथी दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट। धामनोद। अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धामनोद जैन समाज द्वारा अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर 21 से 29 जुलाई तक श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान का आयोजन किया जाएगा। आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और समाज में विशेषकर महिलाओं में उत्साह का वातावरण है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, धामनोद में 21 जुलाई से 29 जुलाई 2026 तक श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं तथा समाज में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना हुआ है।</p>
<p><strong>तैयारियां अंतिम चरण में</strong></p>
<p>मंदिर परिसर को आकर्षक रूप से सजाया जा रहा है तथा विधान को भव्य एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए विभिन्न समितियां अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही हैं। आयोजन के दौरान प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, पूजन एवं विधान आयोजित होंगे।</p>
<p><strong>महिलाओं में विशेष उत्साह</strong></p>
<p>अष्टान्हिका महापर्व को लेकर महिला मंडल की सदस्यों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। महिलाएं विधान की तैयारियों, धार्मिक व्यवस्थाओं एवं विभिन्न सेवाकार्यों में सक्रिय सहभागिता निभा रही हैं, जिससे आयोजन को सफल बनाने की दिशा में व्यापक सहयोग मिल रहा है।</p>
<p><strong>समाजजन निभा रहे सक्रिय भूमिका</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी यश जैन, समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान, उपाध्यक्ष संदीप मंडलोई, सचिव प्रभा अशोक प्रधान, कोषाध्यक्ष विजय जैन, सहसचिव अजय जैन सहित समाज की कार्यकारिणी, महिला मंडल, मुनि सेवा समिति एवं विभिन्न पदाधिकारी आयोजन को सफल बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।</p>
<p><strong>धर्म लाभ का किया आह्वान</strong></p>
<p>समाज के वरिष्ठजनों एवं पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान में सहभागिता करने तथा धर्मलाभ अर्जित करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि अष्टान्हिका महापर्व आत्मशुद्धि, आराधना और पुण्य संचय का श्रेष्ठ अवसर है।</p>
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		<title>अष्टान्हिका महापर्व में सिद्धों की आराधना हेतु जयपुर से सैकड़ों श्रद्धालु सम्मेद शिखर जी रवाना : 21 से 29 जुलाई तक सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं सिद्ध आराधना में होंगे सहभागी </title>
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		<pubDate>Sat, 18 Jul 2026 16:51:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर जयपुर से सैकड़ों श्रद्धालु सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र के लिए रवाना हुए। विभिन्न दलों के श्रद्धालु सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं सिद्ध आराधना में भाग लेकर आत्मकल्याण की साधना करेंगे। पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट। जयपुर। जैन धर्म के महापर्व अष्टान्हिका के अवसर पर सिद्धों की आराधना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर जयपुर से सैकड़ों श्रद्धालु सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र के लिए रवाना हुए। विभिन्न दलों के श्रद्धालु सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं सिद्ध आराधना में भाग लेकर आत्मकल्याण की साधना करेंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी उदयभान जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> जैन धर्म के महापर्व अष्टान्हिका के अवसर पर सिद्धों की आराधना के लिए जयपुर से सैकड़ों श्रद्धालुओं का एक विशाल यात्री दल शनिवार, 18 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे जयपुर जंक्शन से अजमेर–सियालदह एक्सप्रेस द्वारा झारखंड स्थित जैन धर्म के सर्वोच्च शाश्वत तीर्थ क्षेत्र श्री सम्मेद शिखर जी के लिए रवाना हुआ। यात्री 19 जुलाई को तीर्थ पहुंचेंगे तथा 20 जुलाई को पावन सम्मेद शिखर जी की वंदना करेंगे।</p>
<p><strong>अष्टान्हिका महापर्व में होगी सिद्ध आराधना</strong></p>
<p>अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन युवा परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन ने बताया कि 21 जुलाई से 29 जुलाई तक आयोजित अष्टान्हिका महापर्व के दौरान श्रद्धालु सिद्धों की आराधना, पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागी बनेंगे।</p>
<p><strong>दो दलों के नेतृत्व में होगी साधना</strong></p>
<p>एक यात्री दल का नेतृत्व गायत्री नगर, महारानी फार्म निवासी आलोक शाह एवं प्रमिला शाह कर रहे हैं। यह दल गुणायतन में परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित सिद्धचक्र महामंडल विधान में सहभागिता करेगा।</p>
<p>दूसरे दल का नेतृत्व दुर्गापुरा निवासी अनिल जैन पाटनी (काशीपुरा वाले) कर रहे हैं। इस दल के प्रतिष्ठाचार्य पंडित विमल कुमार जैन बनेठा वाले हैं, जिनके निर्देशन में शान्तिसागर धाम स्थित सिद्धभूमि पर सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विशेष पूजा-अर्चना सम्पन्न होगी।</p>
<p><strong>यात्रियों का हुआ सम्मान</strong></p>
<p>यात्रा प्रस्थान से पूर्व गायत्री नगर महारानी फार्म मंदिर प्रबंध समिति के संयुक्त मंत्री संजय ठोलिया, पदम झांझरी, सुनील सोगानी एवं सोनाली ठोलिया सहित समाजजनों ने यात्रियों का माल्यार्पण कर अभिनंदन किया तथा मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं दीं।</p>
<p><strong>एक अगस्त को लौटेगा यात्री दल</strong></p>
<p>आयोजकों के अनुसार यह धार्मिक यात्रा 1 अगस्त को सम्पन्न होगी, जिसके बाद सभी श्रद्धालु जयपुर लौटेंगे। इस यात्रा को लेकर समाज में विशेष उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण है।</p>
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		<title>बनेडिया अतिशय क्षेत्र में नित्य अभिषेक और शांतिधारा से धर्म प्रभावना: सिद्धचक्र महामंडल विधान में हो रहे विविध धार्मिक कार्यक्रम, एक मार्च को पूर्णाहुति  </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 13:41:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बनेडिया गांव के दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व पर गोधा परिवार की ओर से सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ किया जा रहा है। इसका शुभारंभ मंगलवार को संगीतमय पूजा-अर्चना के साथ किया गया। बनेडिया से पढ़िए, यह खबर&#8230; बनेडिया। बनेडिया गांव के दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बनेडिया गांव के दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व पर गोधा परिवार की ओर से सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ किया जा रहा है। इसका शुभारंभ मंगलवार को संगीतमय पूजा-अर्चना के साथ किया गया। <span style="color: #ff0000">बनेडिया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बनेडिया।</strong> बनेडिया गांव के दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व पर गोधा परिवार की ओर से सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ किया जा रहा है। इसका शुभारंभ मंगलवार को संगीतमय पूजा-अर्चना के साथ किया गया। 1008 सिद्ध महामंडल विधान के प्रथम दिन मंदिर में सुबह घटयात्रा, श्रीजी के कलशाभिषेक, मंडल शुद्धिकरण तथा सभी इंद्र-इंद्राणियों ने संकल्प के साथ विधान का पूजन कर अर्घ्य अर्पित किए। विधान की क्रियाएं पंडित योगेंद्र काला के सानिध्य में हो रही है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100859" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017-1320x990.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260227-WA0017.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>यह समाजजन और परिवार रहे शामिल </strong></p>
<p>इस अवसर पर मुख्य रूप से बसंतमाल नेमीचंद गोधा, पद्मा बड़जात्या, महावीर सुनीता लुहाड़िया, जितेंद्र प्र्रमिला बाकलीवाल, महेश नीलू शाह, मुकेश अनामिका काला, अनिल हेमलता बड़जात्या, तल्लीन निशा बड़जात्या, गुलाबचंद, कैलाश, सुशील गोधा परिवार सहित इंदौर, देपालपुर, बड़नगर, देवास, सोनकच्छ, औरंगाबाद से भी समाजजन शामिल हुए। यह आयोजन एक मार्च को पूर्ण होगा।</p>
<p><strong>महामंडल विधान बनाया </strong></p>
<p>मुकेश काला ने बताया कि सोमवार को 10 किलो रंग-बिरंगी चावल की चूरी से महामंडल विधान बनाया गया था। इसे बनाने के लिए संयज जैन एवं कमल बैरागी का विशेष सहयोग रहा।</p>
<p><strong>मंदिर प्रांगण में ध्वजा चढ़ाई </strong></p>
<p>मंदिर मैनेजर सतीश जैन ने बताया कि विधान के प्रथम दिन मंगलवार को सुबह 7 बजे मंदिर प्रांगण में ध्वजा चढ़ाई गई। साथ ही कलशयात्रा, देव आज्ञा, मंडप शुद्धि, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा, सकलीकरण जाप, स्थापना, नित्य नियम पूजन एवं विधान हुआ। 28 फरवरी तक सुबह 7 बजे शांतिधारा अभिषेक किया जाएगा। शाम को 7.30 बजे आरती के बाद शास्त्र प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। रविवार को नित्य नियम, पूजन, जिनवाणी पूजन, विश्व शांति महायज्ञ एवं श्रीजी की शोभायात्रा के बाद अभिषेक और वात्सल्य भोज होगा।</p>
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		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 07:38:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बनेडिया गांव के दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व पर गोधा परिवार की ओर से सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ किया जा रहा है। इसका शुभारंभ मंगलवार को संगीतमय पूजा-अर्चना के साथ किया गया। बनेडिया से पढ़िए, यह खबर&#8230; बनेडिया। बनेडिया गांव के दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बनेडिया गांव के दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व पर गोधा परिवार की ओर से सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ किया जा रहा है। इसका शुभारंभ मंगलवार को संगीतमय पूजा-अर्चना के साथ किया गया। <span style="color: #ff0000">बनेडिया से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बनेडिया।</strong> बनेडिया गांव के दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व पर गोधा परिवार की ओर से सिद्धचक्र महामंडल विधान और विश्व शांति महायज्ञ किया जा रहा है। इसका शुभारंभ मंगलवार को संगीतमय पूजा-अर्चना के साथ किया गया। 1008 सिद्ध महामंडल विधान के प्रथम दिन मंदिर में सुबह घटयात्रा, श्रीजी के कलशाभिषेक, मंडल शुद्धिकरण तथा सभी इंद्र-इंद्राणियों ने संकल्प के साथ विधान का पूजन कर अर्घ्य अर्पित किए। विधान की क्रियाएं पंडित योगेंद्र काला के सानिध्य में हो रही है।</p>
<p><strong>यह समाजजन और परिवार रहे शामिल </strong></p>
<p>इस अवसर पर मुख्य रूप से बसंतमाल नेमीचंद गोधा, पद्मा बड़जात्या, महावीर सुनीता लुहाड़िया, जितेंद्र प्र्रमिला बाकलीवाल, महेश नीलू शाह, मुकेश अनामिका काला, अनिल हेमलता बड़जात्या, तल्लीन निशा बड़जात्या, गुलाबचंद, कैलाश, सुशील गोधा परिवार सहित इंदौर, देपालपुर, बड़नगर, देवास, सोनकच्छ, औरंगाबाद से भी समाजजन शामिल हुए। यह आयोजन एक मार्च को पूर्ण होगा।</p>
<p><strong>महामंडल विधान बनाया </strong></p>
<p>मुकेश काला ने बताया कि सोमवार को 10 किलो रंग-बिरंगी चावल की चूरी से महामंडल विधान बनाया गया था। इसे बनाने के लिए संयज जैन एवं कमल बैरागी का विशेष सहयोग रहा।</p>
<p><strong>मंदिर प्रांगण में ध्वजा चढ़ाई </strong></p>
<p>मंदिर मैनेजर सतीश जैन ने बताया कि विधान के प्रथम दिन मंगलवार को सुबह 7 बजे मंदिर प्रांगण में ध्वजा चढ़ाई गई। साथ ही कलशयात्रा, देव आज्ञा, मंडप शुद्धि, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा, सकलीकरण जाप, स्थापना, नित्य नियम पूजन एवं विधान हुआ। 28 फरवरी तक सुबह 7 बजे शांतिधारा अभिषेक किया जाएगा। शाम को 7.30 बजे आरती के बाद शास्त्र प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होगा। रविवार को नित्य नियम, पूजन, जिनवाणी पूजन, विश्व शांति महायज्ञ एवं श्रीजी की शोभायात्रा के बाद अभिषेक और वात्सल्य भोज होगा।</p>
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		<title>भक्ति, उत्साह और श्रद्धा से सराबोर रहा श्री इंद्रध्वज विधान का दसवां दिन : भव्य पिच्छी परिवर्तन और मंगल आरती से गूंज उठा हरीपर्वत परिसर </title>
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		<pubDate>Sun, 02 Nov 2025 14:35:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा में श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान का दसवां दिन भक्ति, उत्साह और श्रद्धा से परिपूर्ण रहा। आचार्यश्री चैत्य सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में हुए पिच्छी परिवर्तन और 458 दीपों की मंगल आरती ने पूरे परिसर को भक्ति और दिव्यता से भर दिया। पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट… आगरा। आचार्यश्री चैत्य सागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आगरा में श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान का दसवां दिन भक्ति, उत्साह और श्रद्धा से परिपूर्ण रहा। आचार्यश्री चैत्य सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में हुए पिच्छी परिवर्तन और 458 दीपों की मंगल आरती ने पूरे परिसर को भक्ति और दिव्यता से भर दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए शुभम जैन की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> आचार्यश्री चैत्य सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में, स्व. स्वरूपचंद जैन मारसंस की पावन स्मृति में मारसंस परिवार द्वारा एम.डी. जैन इंटर कॉलेज ग्राउंड, हरीपर्वत में आयोजित अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर चल रहे श्री इंद्रध्वज महामंडल विधान का दसवां दिवस आस्था, भक्ति और उत्साह से परिपूर्ण रहा।</p>
<p>प्रातःकाल श्रद्धालुओं द्वारा जिनप्रतिमाओं का अभिषेक एवं वृहद शांतिधारा की गई। विधानाचार्य डॉ. आनंदप्रकाश जैन शास्त्री के निर्देशन में भक्तों ने 458 जिन प्रतिमाओं से अलंकृत पंचमेरू एवं नन्दीश्वर द्वीप की दिव्य रचना के समक्ष अर्घ्य अर्पित किए। विश्वशांति और कल्याण की भावना से ओतप्रोत होकर श्रद्धालुओं ने भक्ति में सहभागिता की।</p>
<p>इसके उपरांत आगरा दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आचार्यश्री चैत्य सागर जी महाराज ससंघ का भव्य पिच्छी परिवर्तन समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर पर भक्तों ने नियमपूर्वक आचार्यसंघ को नवीन पिच्छी भेंट की। कार्यक्रम के दौरान भावभीने वातावरण में आचार्यश्री के चरणों का पक्षालन, शास्त्र भेंट और मंगल आशीर्वाद प्राप्ति की अनुष्ठानिक क्रियाएं सम्पन्न हुईं</p>
<p><strong>दिव्यता और प्रकाश से नहाया परिसर </strong></p>
<p>संध्याकाल में पूरे परिसर का वातावरण दिव्यता और प्रकाश से नहाया नजर आया जब 458 दीपों से 458 जिनप्रतिमाओं की मंगल आरती संपन्न हुई। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर प्रभु की आराधना की और भक्ति संगीत के साथ आरती में भाग लिया। पूरा परिसर भक्ति, संगीत और प्रभु आराधना से गूंज उठा।</p>
<p><strong>यह रहे कार्यक्रम में उपस्थित </strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी शुभम जैन ने बताया कि इस भव्य श्री इंद्रध्वज विधान का समापन 3 नवम्बर को विश्वशांति महायज्ञ एवं विशाल रथयात्रा के साथ होगा। इस अवसर पर विमलेश जैन, ऊषा जैन, नितिन जैन, मेघना जैन, नीतू जैन, संजय जैन, नीलू जैन, कमल ठोलिया, निशि जैन, अंजू जैन, डॉ. जितेन्द्र जैन, जगदीशप्रसाद जैन, राकेश जैन, मनीष जैन, विमल जैन, रमेश जैन, पंकज जैन, हुकम जैन, संजय जैन, राजेंद्र जैन, शुभम जैन सहित समस्त आगरा जैन समाज के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सांसारिक प्राणिओं में शुभ और अशुभ परिणाम निरंतर होते रहते हैं: 1 नवंबर को भगवान का मस्तकाभिषेक होगा  </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Oct 2025 12:11:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिन सिद्ध परमात्मा की हम लोग आज आराधना कर रहे हैं। वह भी कभी संसार चक्र में ही फंसे हुए थे। उन्होंने इस संसार चक्र को भेदा और सिद्धचक्र में अपना स्थान बना लिया। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी ने अष्टान्हिका महापर्व के तहत व्यक्त किए। भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230; भोपाल। जिन सिद्ध परमात्मा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जिन सिद्ध परमात्मा की हम लोग आज आराधना कर रहे हैं। वह भी कभी संसार चक्र में ही फंसे हुए थे। उन्होंने इस संसार चक्र को भेदा और सिद्धचक्र में अपना स्थान बना लिया। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी ने अष्टान्हिका महापर्व के तहत व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> जिन सिद्ध परमात्मा की हम लोग आज आराधना कर रहे हैं। वह भी कभी संसार चक्र में ही फंसे हुए थे। उन्होंने इस संसार चक्र को भेदा और सिद्धचक्र में अपना स्थान बना लिया। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने अष्टान्हिका महापर्व के तहत व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सांसारिक प्राणिओं में शुभ और अशुभ परिणाम निरंतर होते रहते हैं। उन परिणामों से ही कर्मबंध होकर नए-नए शरीर की प्राप्ति होती रहती है तथा मन विषयों में रमकर राग द्वेष की उत्पत्ति करता है। जिससे जन्म मरण का यह चक्र निरंतर चलता रहता है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 31 अक्टूबर को दोपहर 1.30 बजे से एमए सिटी (मेनिट) महाविधालय में युवा शक्ति को आत्म जाग्रति की ओर दिशा बोध कराते हुए संबोधन होगा।</p>
<p>जिससे वह अपने भविष्य को तय कर सकें तथा मुनिश्री का 3 बजे मंगल विहार श्री नेमीनाथ दिगंबर जैन झिरनो मंदिर की ओर होगा तथा सांयकालीन शंका समाधान एवं रात्रि विश्राम होकर 1 नवंबर शनिवार को भगवान का मस्तकाभिषेक एवं शांतिधारा तथा श्री गणधर वलय विधान होगा एवं आहार चर्या होगी।</p>
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