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	<title>अष्टानिका महापर्व &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>अष्टानिका महापर्व &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>धामनोद जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व पर श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान : नौ दिवसीय आराधना का समापन आज होगा </title>
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		<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 09:36:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धामनोद जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत 21 जुलाई से चल रहे नौ दिवसीय श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान में समाजजन श्रद्धा और उत्साह के साथ धर्म आराधना कर रहे हैं। अंतिम दिवस पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विधान का समापन होगा। पढ़िए श्रीफल साथी यश जैन की यह रिपोर्ट। धामनोद। धामनोद जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धामनोद जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत 21 जुलाई से चल रहे नौ दिवसीय श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान में समाजजन श्रद्धा और उत्साह के साथ धर्म आराधना कर रहे हैं। अंतिम दिवस पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ विधान का समापन होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी यश जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> धामनोद जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के अवसर पर 21 जुलाई से आयोजित श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ जारी है। नौ दिवसीय इस धार्मिक आयोजन का समापन अंतिम दिवस विशेष पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होगा।</p>
<p><strong>प्रतिदिन हो रहे अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा</strong></p>
<p>अशोक प्रधान के मार्गदर्शन में आयोजित विधान के दौरान प्रतिदिन भगवान का नित्य अभिषेक, पूजन एवं शांतिधारा सम्पन्न हो रही है। समाज के मीडिया प्रभारी यश जैन एवं अध्यक्ष दीपक प्रधान ने बताया कि प्रातःकाल से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है तथा सुबह 8 बजे से विधान प्रारंभ होता है।</p>
<p><strong>मंत्रोच्चार के साथ हो रही आराधना</strong></p>
<p>विधान में मंडना सजाकर मंत्रोच्चार के साथ अर्घ्य एवं गोला समर्पित किए जा रहे हैं। महिलाएं भक्ति एवं उत्साह के साथ विधान में सहभागिता कर रही हैं, वहीं पुरुष वर्ग भी पूर्ण श्रद्धा से आराधना में लीन है। पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।</p>
<p><strong>महिलाओं के सहयोग से सफल आयोजन</strong></p>
<p>समिति की सचिव प्रभा प्रधान ने बताया कि समाज की महिलाओं के सहयोग से विधान का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो रहा है। अष्टानिका महापर्व के दौरान अनेक श्रद्धालु उपवास एवं तप की साधना भी कर रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं प्रतिदिन मंदिर पहुंचकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।</p>
<p><strong>समाजजनों की सक्रिय सहभागिता</strong></p>
<p>आयोजन में कोषाध्यक्ष विजय जैन, उपाध्यक्ष संदीप मंडलोई, निधि जैन, सहसचिव अजय जैन, पूर्व अध्यक्ष रमेशचंद जैन, नरेंद्र जैन, मुकेश जैन, डॉ. सुरेखा जैन किवावत, सुनील जैन, लोकेंद्र जैन, सुरक्षा जैन, डॉ. प्रीति जैन, सीमा जैन, अंतिम जैन, सुजाता जैन, सीमा मंडलोई, सोना जैन, सोमा जैन, शकुंतला जैन, मंगलेश जैन, प्रभा जैन, सारिका जैन, लीना जैन, दीप्ति जैन, पूर्णिमा जैन, किरण जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>आज होगा विधान का समापन</strong></p>
<p>समति ने बताया कि अंतिम दिवस विशेष पूजा, आराधना एवं धार्मिक कार्यक्रमों के साथ नौ दिवसीय श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान का समापन होगा। समाज के सभी श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया गया है।</p>
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		<title>अष्टानिका महापर्व पर पूज्य श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज का संदेश : “दुःख सहने वाला ही अनंत सुख का अधिकारी बनता है” </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 18:42:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देहरा तिजारा स्थित श्री 1008 चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र में अष्टानिका महापर्व पर आयोजित धर्मसभा में श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने समभाव, तप, त्याग और आत्मकल्याण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दुःख को सहन करने वाला ही शाश्वत सुख और मोक्षमार्ग का अधिकारी बनता है। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>देहरा तिजारा स्थित श्री 1008 चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र में अष्टानिका महापर्व पर आयोजित धर्मसभा में श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने समभाव, तप, त्याग और आत्मकल्याण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दुःख को सहन करने वाला ही शाश्वत सुख और मोक्षमार्ग का अधिकारी बनता है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>देहरा तिजारा (अलवर)।</strong> पावन अष्टानिका महापर्व के अवसर पर श्री 1008 चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र में आयोजित विशाल धर्मसभा में परम पूज्य श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य का वास्तविक सुख बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि दुःख को समभावपूर्वक सहन करने की क्षमता में निहित है।</p>
<p><strong>दुःख आत्मा को बनाता है मजबूत</strong></p>
<p>महाराज श्री ने भगवान महावीर के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में आने वाले कष्ट और संघर्ष आत्मा को तोड़ने नहीं, बल्कि उसे मजबूत और निर्मल बनाने के लिए आते हैं। जो व्यक्ति धैर्य, संयम और समता के साथ विपरीत परिस्थितियों का सामना करता है, वही अंततः स्थायी और वास्तविक सुख का अनुभव करता है।</p>
<p><strong>तप और त्याग से मिलता है आत्मकल्याण</strong></p>
<p>अपने प्रवचन में आचार्य श्री ने माँ के त्याग का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक माँ संतान के सुख के लिए प्रसन्नतापूर्वक कष्ट सहन करती है, वैसे ही आत्मा के अनंत सुख की प्राप्ति के लिए तप, त्याग और कठिनाइयों को स्वीकार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अग्नि में तपकर ईंट मजबूत बनती है और मिट्टी का घड़ा उपयोगी बनता है, उसी प्रकार तप से आत्मा कर्मों का क्षय कर अपने स्वाभाविक गुणों को प्रकट करती है।</p>
<p><strong>समभाव से ही खुलता है मोक्षमार्ग</strong></p>
<p>आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन की प्रत्येक विपरीत परिस्थिति को आत्मकल्याण का अवसर मानें। जो व्यक्ति समभावपूर्वक दुःख सहना सीख लेता है, वह आत्मिक उन्नति करते हुए मोक्षमार्ग का अधिकारी बनता है।</p>
<p><strong>समाजजनों की रही गरिमामयी उपस्थिति</strong></p>
<p>धर्मसभा में मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष शिंब्बू जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन (पटेल), नीरज जैन (कालू), टीटू जैन, संजय जैन, ललित जैन, कुसुम जैन, चाँदनी जैन, सविता जैन, अमृता जैन, मीनू जैन, इंद्रा जैन, सुमन जैन, प्रियंका जैन एवं निशु जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्मसभा का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आत्मचिंतन से ओत-प्रोत रहा।</p>
<p><strong>धर्म और संयम का लिया संकल्प</strong></p>
<p>प्रवचन के उपरांत श्रद्धालुओं ने धर्म, संयम, तप और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया तथा अष्टानिका महापर्व की आराधना को जीवन में उतारने का संकल्प व्यक्त किया।</p>
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		<title>अष्टानिका महापर्व के छठे दिन सिद्धचक्र विधान एवं नंदीश्वर दीप विधान सम्पन्न : 256 महाअर्घ्य समर्पित, बच्चों ने की सामूहिक पूजन </title>
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		<pubDate>Sun, 26 Jul 2026 10:26:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नौगामा स्थित सुखोदय तीर्थ नसिया जी में अष्टानिका महापर्व के छठे दिन सिद्धचक्र विधान एवं नंदीश्वर दीप विधान श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुआ। 256 महाअर्घ्य समर्पित किए गए तथा जैन पाठशाला के बच्चों ने सामूहिक पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया। पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट। नौगामा (जिला बांसवाड़ा, राजस्थान)। अष्टानिका महापर्व के छठे [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नौगामा स्थित सुखोदय तीर्थ नसिया जी में अष्टानिका महापर्व के छठे दिन सिद्धचक्र विधान एवं नंदीश्वर दीप विधान श्रद्धापूर्वक सम्पन्न हुआ। 256 महाअर्घ्य समर्पित किए गए तथा जैन पाठशाला के बच्चों ने सामूहिक पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा (जिला बांसवाड़ा, राजस्थान)।</strong> अष्टानिका महापर्व के छठे दिन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं श्री 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया जी में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। प्रातः विशेष अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात नंदीश्वर दीप विधान एवं सिद्धचक्र विधान में श्रद्धालुओं ने 256 महाअर्घ्य समर्पित किए।</p>
<p><strong>भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ विधान</strong></p>
<p>वाद्ययंत्रों की मधुर स्वर लहरियों एवं मंगलमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने सिद्धचक्र विधान एवं नंदीश्वर दीप विधान में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति एवं आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।</p>
<p><strong>अष्टानिका महापर्व का बताया महत्व</strong></p>
<p>इस अवसर पर वीणा दीदी एवं दृष्टि दीदी ने अष्टानिका महापर्व की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का संबंध श्रीपाल एवं मैना सुंदरी की प्रेरणादायी कथा से है। उन्होंने कहा कि यह विधान आत्मशुद्धि, पुण्यार्जन तथा विश्व शांति की मंगलकामना का महत्वपूर्ण माध्यम है।</p>
<p><strong>चातुर्मास और अहिंसा का संदेश</strong></p>
<p>प्रवचन में बताया गया कि अष्टानिका महापर्व के साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ होता है। वर्षा ऋतु में सूक्ष्म जीवों की रक्षा एवं अहिंसा के पालन के लिए दिगंबर साधु-संत चार माह तक एक ही स्थान पर विराजमान रहकर स्वाध्याय, साधना एवं धर्म प्रभावना करते हैं।</p>
<p><strong>जैन पाठशाला के बच्चों ने की सामूहिक पूजन</strong></p>
<p>रविवार को आयोजित जैन पाठशाला में मनीषा नानावटी के सान्निध्य में बच्चों ने सामूहिक रूप से पूजन कर धर्मलाभ अर्जित किया। कार्यक्रम के अंत में बच्चों को अल्पाहार एवं पुरस्कार प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।</p>
<p><strong>समाज ने किया धर्मलाभ</strong></p>
<p>अष्टानिका महापर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर विधान, पूजन एवं धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया तथा विश्व शांति, सुख-समृद्धि और आत्मकल्याण की मंगलकामना की।</p>
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		<title>राजामंडी जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत सिद्धचक्र विधान का पांचवां दिन सम्पन्न : श्रद्धा, भक्ति और विश्व शांति की मंगलकामना के साथ उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:43:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, राजामंडी में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत आयोजित सिद्धचक्र विधान के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजन-अर्चना कर विश्व शांति एवं आत्मकल्याण की मंगलकामना की। आयोजन में महिला मंडल की सक्रिय भूमिका रही। पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट। आगरा। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, राजामंडी में महिला [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगरा के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, राजामंडी में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत आयोजित सिद्धचक्र विधान के पांचवें दिन श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजन-अर्चना कर विश्व शांति एवं आत्मकल्याण की मंगलकामना की। आयोजन में महिला मंडल की सक्रिय भूमिका रही। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, राजामंडी में महिला मंडल के तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय अष्टानिका महापर्व एवं सिद्धचक्र विधान के पांचवें दिन शनिवार को श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चना सम्पन्न हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने विधान में सहभागिता कर भगवान की आराधना की तथा विश्व शांति, धर्म प्रभावना एवं समस्त प्राणियों के कल्याण की मंगलकामना की।</p>
<p><strong>भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुए धार्मिक अनुष्ठान</strong></p>
<p>कार्यक्रम के दौरान मंत्रोच्चार, पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों से मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने पूर्ण श्रद्धा एवं उत्साह के साथ सिद्धचक्र विधान की पूजा में सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>महिला मंडल की सक्रिय सहभागिता</strong></p>
<p>आयोजन को सफल बनाने में महिला मंडल की अध्यक्ष मधु जैन, मंत्री सुषमा जैन, कोषाध्यक्ष संगीता जैन तथा संरक्षक चंद्रकांता जैन, चंद्रा जैन, मंजू जैन, सुनीता जैन, नीलम जैन, वीणा जैन वास्तु, भावना जैन, वीणा जैन सहित समस्त महिला मंडल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।</p>
<p><strong>धर्म और आत्मकल्याण का सशक्त माध्यम</strong></p>
<p>महिला मंडल ने बताया कि अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत आयोजित आठ दिवसीय सिद्धचक्र विधान श्रद्धालुओं में धर्म, भक्ति, आत्मकल्याण एवं आध्यात्मिक जागृति का प्रभावी माध्यम है। आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान एवं पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>अधिकाधिक सहभागिता का आह्वान</strong></p>
<p><strong>आयोजन</strong> समिति ने सभी धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से आगामी कार्यक्रमों में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।</p>
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		<title>सिद्धचक्र विधान में बृहद् पंच परमेष्ठी के 251 अर्घ्य समर्पित : विश्व शांति एवं सर्वजन मंगल की भावना से सम्पन्न हुआ पंचम दिवस </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:39:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुचामन सिटी में आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के पंचम दिवस श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ विविध धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। बृहद् पंच परमेष्ठी के 251 अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति एवं सर्वजन मंगल की मंगलकामना की गई। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट। कुचामन सिटी। श्री 1008 भगवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कुचामन सिटी में आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के पंचम दिवस श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ विविध धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। बृहद् पंच परमेष्ठी के 251 अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति एवं सर्वजन मंगल की मंगलकामना की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> श्री 1008 भगवान महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, डीडवाना रोड में विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं अमन-चैन की मंगलकामना से आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के पंचम दिवस विविध धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा एवं भक्ति के साथ सम्पन्न हुए।</p>
<p><strong>कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य</strong></p>
<p>प्रातःकाल भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया। कलशाभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी सुरेश कुमार–संदीप कुमार पांड्या परिवार तथा माणकचंद–राकेश कुमार–भव्य कुमार काला परिवार (सबलपुरा) को प्राप्त हुआ। सभी ने श्रद्धापूर्वक शांतिधारा कर धर्मलाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने किया पूजन एवं पुण्यार्जन</strong></p>
<p>लालचंद पहाड़िया एवं तेजकुमार बड़जात्या ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व वर्ष में तीन बार आता है और इन अवसरों पर नंदीश्वर द्वीप विधान तथा सिद्धचक्र विधान का विशेष महत्व माना जाता है। विधान पूजन में चिरजीलाल, अमित, मनोज, अशोक, भव्य पाटोदी, भवरलाल झाझरी, विमल कुमार पाटोदी, महेंद्र, विकास, नीरज पहाड़िया, मनीष गंगवाल, संतोष, विकास काला सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने श्रद्धापूर्वक पूजन कर पुण्यार्जन किया। शांतिधारा का वाचन श्रीमती ममता पांड्या ने किया।</p>
<p><strong>बृहद् पंच परमेष्ठी के 251 अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>सुरेश पांड्या एवं माणकचंद काला ने बताया कि कलशाभिषेक के पश्चात नवदेवता पूजन, पंचमेरु पूजन, मुनीश्वरनाथ भगवान पूजन, मूलनायक भगवान महावीर स्वामी की पूजा एवं सिद्धचक्र पूजन सम्पन्न हुआ। इसके उपरांत आयोजित विधान में बृहद् पंच परमेष्ठी के 251 अर्घ्य विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं सर्वजन मंगल की भावना के साथ समर्पित किए गए।</p>
<p><strong>महाआरती में उमड़ा श्रद्धा का सागर</strong></p>
<p>सायंकाल सिद्धचक्र विधान की भव्य महाआरती सम्पन्न हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया तथा विश्व कल्याण, शांति और सद्भाव की मंगलकामना की।</p>
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		<title>29 जुलाई को होगा श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का समापन : अष्टानिका महापर्व पर नेहानगर जैन मंदिर में चल रहे हैं भव्य धार्मिक अनुष्ठान </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 14:28:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सागर के श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नेहानगर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत आयोजित श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ 29 जुलाई को हवन एवं जलविहार के साथ संपन्न होगा। चातुर्मास की धार्मिक महत्ता भी बताई गई। पढ़िए श्रीफल साथी मनीष जैन विद्यार्थी की यह रिपोर्ट। सागर। अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सागर के श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नेहानगर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत आयोजित श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ 29 जुलाई को हवन एवं जलविहार के साथ संपन्न होगा। चातुर्मास की धार्मिक महत्ता भी बताई गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी मनीष जैन विद्यार्थी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> अष्टानिका महापर्व के पावन अवसर पर श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नेहानगर में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन देश के ख्यातिप्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पं. पवन दीवान के निर्देशन में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ जारी है। नौ दिवसीय यह धार्मिक आयोजन 21 जुलाई से प्रारंभ होकर 29 जुलाई 2026 को हवन एवं जलविहार के साथ संपन्न होगा।</p>
<p><strong>सिद्धचक्र विधान की महिमा</strong></p>
<p>विधान की महिमा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का संबंध श्रीपाल एवं मैनासुंदरी की प्रेरणादायी कथा से जुड़ा है। अष्टानिका महापर्व के दौरान यह विधान आत्मशुद्धि, पुण्यार्जन एवं विश्व शांति की मंगलकामना के लिए विशेष महत्व रखता है।</p>
<p><strong>प्रमुख पात्रों ने संभाली धार्मिक जिम्मेदारियां</strong></p>
<p>महामंडल विधान में विभिन्न धार्मिक पात्रों की जिम्मेदारियां समाज के श्रद्धालुओं को प्रदान की गई हैं। इनमें सौधर्म इन्द्र, ध्वजारोहणकर्ता, श्रीपाल–मैनासुंदरी, कुबेर, महायज्ञ नायक, यज्ञ नायक, ईशान इन्द्र, सनत कुमार इन्द्र, माहेंद्र इन्द्र, भरत, बाहुबली एवं अनंतवीर्य सहित अनेक पात्र श्रद्धापूर्वक अपनी भूमिका निभा रहे हैं।</p>
<p><strong>चातुर्मास का धार्मिक महत्व</strong></p>
<p>आयोजकों ने बताया कि अष्टानिका महापर्व के साथ ही चातुर्मास का शुभारंभ होता है। वर्षा ऋतु में सूक्ष्म जीवों की रक्षा एवं अहिंसा के पालन हेतु दिगंबर साधु-संत चार माह तक एक ही स्थान पर विराजमान रहकर धर्मप्रभावना, स्वाध्याय एवं साधना करते हैं।</p>
<p><strong>सागर में विभिन्न स्थानों पर होंगे चातुर्मास</strong></p>
<p>इस वर्ष सागर में गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज, भाग्योदय तीर्थ में निर्यापक मुनि श्री अभयसागर जी महाराज, वर्धमान कॉलोनी में मुनि श्री पदमसागर जी महाराज तथा सुभाष नगर जैन मंदिर में मुनि श्री शाश्वतसागर जी महाराज का चातुर्मास संपन्न होगा।</p>
<p><strong>26 जुलाई को होगी कलश स्थापना</strong></p>
<p>आचार्य श्री विभवसागर जी महाराज के चातुर्मास की मंगल कलश स्थापना 26 जुलाई 2026, रविवार को गौराबाई दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में आयोजित की जाएगी। समाजजनों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया गया है।</p>
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		<title>अष्टानिका महापर्व पर पूज्य विमर्शसागर जी महाराज ने समझाया मोक्षमार्ग का रहस्य : गुप्ति, सम्यक्त्व और निष्काम धर्म ही आत्मकल्याण का आधार </title>
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		<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 13:44:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[देहरा तिजारा में अष्टानिका महापर्व के अवसर पर श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने मोक्षमार्ग, गुप्ति, सम्यक्त्व, निर्जरा और निष्काम धर्म का गहन विवेचन किया। श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में उपस्थित होकर आत्मकल्याण की प्रेरणा प्राप्त की। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट। देहरा तिजारा (अलवर)। पावन अष्टानिका महापर्व के अवसर पर अतिशय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>देहरा तिजारा में अष्टानिका महापर्व के अवसर पर श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने मोक्षमार्ग, गुप्ति, सम्यक्त्व, निर्जरा और निष्काम धर्म का गहन विवेचन किया। श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में उपस्थित होकर आत्मकल्याण की प्रेरणा प्राप्त की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>देहरा तिजारा (अलवर)।</strong> पावन अष्टानिका महापर्व के अवसर पर अतिशय क्षेत्र श्री 1008 चन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित विशाल धर्मसभा में जिनागम पंथ प्रवर्तक, संघ शिरोमणि, परम पूज्य भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महाराज ने महाकाव्य &#8220;जीवन है पानी की बूँद&#8221; के माध्यम से मोक्षमार्ग पर अत्यंत गूढ़ एवं प्रेरणादायी प्रवचन प्रदान किए।</p>
<p><strong>गुप्ति ही बनती है निर्जरा का साधन</strong></p>
<p>पूज्य गुरुदेव ने कहा कि यदि कोई जीव सच्चे भाव से मोक्ष की कामना करते हुए मन, वचन एवं काया की गुप्ति का आश्रय लेता है, तो वही गुप्ति नए कर्मबंध का कारण न बनकर पूर्व संचित कर्मों की निर्जरा का साधन बन जाती है। सम्यग्दृष्टि की धर्मक्रियाएँ मुख्यतः आत्मशुद्धि और निर्जरा का मार्ग प्रशस्त करती हैं।</p>
<p><strong>निष्काम धर्म ही वास्तविक साधना</strong></p>
<p>गुरुदेव ने कहा कि सम्यग्दृष्टि धर्म का पालन फल, यश अथवा पुण्य की इच्छा से नहीं करता। वह धर्म में प्रवृत्त रहते हुए भी भीतर से राग-द्वेष रहित और उदासीन रहता है। यही निष्काम भावना मोक्षमार्ग की वास्तविक साधना है।</p>
<p><strong>पुण्य का महत्व और अंतिम लक्ष्य</strong></p>
<p>प्रवचन के दौरान पुण्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव ने कहा कि शुभ पुण्य आत्मा को धर्म, संयम और सम्यक्त्व के अनुकूल अवसर प्रदान करता है, किन्तु साधक का अंतिम लक्ष्य पुण्य और पाप—दोनों कर्मों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करना होना चाहिए।</p>
<p><strong>आत्मशुद्धि का संदेश</strong></p>
<p>उन्होंने बताया कि उत्कृष्ट शुभ पुण्य के उदय से चक्रवर्ती पद प्राप्त होता है, जबकि हिंसा, क्रोध, मान, माया, लोभ और घोर पाप कर्म नरक गति का कारण बनते हैं। प्रत्येक जीव को शुभ परिणामों के साथ आत्मशुद्धि एवं आत्मकल्याण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना चाहिए।</p>
<p><strong>समाजजनों की रही सक्रिय सहभागिता</strong></p>
<p>धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के मंगल प्रवचनों का श्रवण कर आत्मकल्याण की प्रेरणा प्राप्त की तथा भगवान श्री 1008 चन्द्रप्रभु जिनेन्द्र भगवान के श्रीचरणों में वंदन कर धर्मलाभ अर्जित किया। इस अवसर पर देहरा जैन मंदिर समिति एवं चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों सहित समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, चातुर्मास अध्यक्ष सुरेश जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, नरेंद्र जैन, सुरेंद्र जैन, निर्मल जैन, सचिन जैन, अमन जैन, बाबूलाल जैन, संदीप जैन एवं शिभू जैन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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		<title>बिखरोंन श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय मंदिर में अष्टानिका महापर्व की भक्तिमय आराधना : अभिषेक, शांतिधारा एवं नंदीश्वर द्वीप पूजन से गूंजा जिनालय </title>
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		<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 10:01:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धामनोद के समीप बिखरोंन स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय मंदिर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत प्रतिदिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं नंदीश्वर द्वीप पूजन श्रद्धाभाव से सम्पन्न हो रहा है। श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। पढ़िए श्रीफल साथी दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट। धामनोद। धामनोद के समीप स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धामनोद के समीप बिखरोंन स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय मंदिर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत प्रतिदिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजन एवं नंदीश्वर द्वीप पूजन श्रद्धाभाव से सम्पन्न हो रहा है। श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> धामनोद के समीप स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय मंदिर, बिखरोंन में अष्टानिका महापर्व के अवसर पर प्रतिदिन विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया जा रहा है। मंदिर परिसर में धर्ममय वातावरण के बीच बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।</p>
<p><strong>अभिषेक एवं शांतिधारा का हुआ आयोजन</strong></p>
<p>जैन समाज के मीडिया प्रभारी यश जैन एवं समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान ने बताया कि श्री चौबीस तीर्थंकर भगवान की प्रतिमाओं का अभिषेक एवं शांतिधारा बोली के माध्यम से सम्पन्न हुई। इसके पश्चात श्रद्धापूर्वक आरती एवं नित्य पूजन किया गया।</p>
<p><strong>नंदीश्वर द्वीप पूजन में उमड़ा उत्साह</strong></p>
<p>महापर्व के अंतर्गत श्री नंदीश्वर द्वीप पूजन भी विधि-विधान से सम्पन्न हुआ। पूजन के दौरान उपस्थित श्रावक-श्राविकाएं भक्ति में भावविभोर होकर जिनेन्द्र भक्ति में लीन दिखाई दिए। रिमझिम वर्षा के बीच मंदिर परिसर का वातावरण और भी आध्यात्मिक एवं आनंदमय बन गया।</p>
<p><strong>मंदिर की आकर्षक सजावट</strong></p>
<p>समाज सचिव प्रभा प्रधान ने बताया कि अष्टानिका महापर्व के उपलक्ष्य में मंदिर को आकर्षक सजावट एवं रोशनी से अलंकृत किया गया है, जिससे पूरे परिसर में धार्मिक उल्लास का वातावरण बना हुआ है।</p>
<p><strong>समाज का मिल रहा सहयोग</strong></p>
<p>कार्यकारिणी सदस्य विनय जैन, मुकेश भाई जैन एवं पंडित नितिन जैन ने बताया कि महापर्व के सफल आयोजन में समाज कमेटी एवं सभी समाजजनों का सराहनीय सहयोग प्राप्त हो रहा है। सभी श्रद्धालु उत्साहपूर्वक धार्मिक आयोजनों में सहभागिता निभा रहे हैं।</p>
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		<title>धामनोद में अष्टानिका महापर्व का उल्लास : नंदीश्वर दीप महामंडल विधान में भक्ति का उमड़ा सैलाब </title>
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		<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 09:45:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धामनोद के जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के तृतीय दिवस नंदीश्वर दीप महामंडल विधान श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ। महिलाओं और पुरुषों ने उत्साहपूर्वक पूजन-अर्चना में सहभागिता की। पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट। धामनोद। धामनोद स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत तृतीय दिवस श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान श्रद्धा, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धामनोद के जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के तृतीय दिवस नंदीश्वर दीप महामंडल विधान श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ। महिलाओं और पुरुषों ने उत्साहपूर्वक पूजन-अर्चना में सहभागिता की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> धामनोद स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में अष्टानिका महापर्व के अंतर्गत तृतीय दिवस श्री नंदीश्वर दीप महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में आयोजित किया गया। विधान अशोक प्रधान के सानिध्य में संपन्न हो रहा है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।</p>
<p><strong>भक्ति से सराबोर हुआ मंदिर परिसर</strong></p>
<p>प्रातःकाल भगवान श्री 1008 शांतिनाथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न होने के बाद विधिवत पूजन एवं नंदीश्वर दीप महामंडल विधान प्रारंभ हुआ। मंदिर परिसर पूरे समय भक्ति, आराधना और मंगल ध्वनियों से गुंजायमान रहा।</p>
<p><strong>जन्मदिवस पर मिला प्रथम अभिषेक का सौभाग्य</strong></p>
<p>श्री सुरेशचंद जैन ने अपने 73वें जन्मदिवस के अवसर पर इंद्र बनकर भगवान शांतिनाथ के मस्तक पर प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त किया। उन्होंने ₹1008 की बोली लगाकर प्रथम अभिषेक तथा शांतिधारा का पुण्य भी अर्जित किया।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं की बढ़ती सहभागिता</strong></p>
<p>विधान में प्रमिला जैन, अभिषेक जैन, दीपक प्रधान, राजेश जैन, पीयूष जैन, अजय जैन, पारस जैन, सुनील जैन, पंडित नितिन जैन, डॉ. प्रकाश किवायत, अनिल जैन, नरेंद्र जैन, राकेश जैन, संदीप मंडलोई, ऊषा जैन, प्रभा प्रधान, सुरक्षा जैन, शोभा जैन, मीना जैन, बड़कुल बैजी सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
<p><strong>दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा उत्साह</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी यश जैन ने बताया कि नंदीश्वर दीप महामंडल विधान में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। समाज की महिलाओं एवं पुरुषों में धर्म, भक्ति और आराधना के प्रति विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। अष्टानिका महापर्व के अवसर पर पूरे नगर में धार्मिक वातावरण बना हुआ है।</p>
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		<title>अष्टानिका महापर्व पर भेद विज्ञान और सम्यग्दर्शन का संदेश : श्रमणाचार्य विमर्शसागर जी ने बताया आत्मकल्याण का मार्ग </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:10:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, देहरा तिजारा में अष्टानिका महापर्व पर श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने भेद विज्ञान, सम्यग्दर्शन और आत्मकल्याण पर आधारित प्रेरणादायी प्रवचन दिए। उन्होंने सिद्धत्व प्राप्ति के लिए मिथ्यादर्शन के त्याग और सम्यग्दर्शन को जीवन का आधार बताया। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट। देहरा तिजारा। श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, देहरा तिजारा में अष्टानिका महापर्व पर श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने भेद विज्ञान, सम्यग्दर्शन और आत्मकल्याण पर आधारित प्रेरणादायी प्रवचन दिए। उन्होंने सिद्धत्व प्राप्ति के लिए मिथ्यादर्शन के त्याग और सम्यग्दर्शन को जीवन का आधार बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>देहरा तिजारा।</strong> श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, देहरा तिजारा में विराजमान जिनागम पंथ प्रवर्तक संघ शिरोमणी, परम पूज्य भवलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ ने पावन अष्टानिका महापर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण, भेद विज्ञान और मोक्षमार्ग का प्रेरणादायी संदेश प्रदान किया।</p>
<p><strong>भेद विज्ञान से सिद्धत्व की प्राप्ति</strong></p>
<p>अपने मंगल प्रवचन में श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने कहा कि</p>
<p>&#8220;भेद ज्ञान की शक्ति से सहज गुणों से सजना है, सिद्धों की भक्ति गुणवान बनाए रे। जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाए रे, होनी-अनहोनी कब क्या घट जाए रे।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि यदि सिद्ध परमात्मा बनना है तो भेद विज्ञान का आश्रय लेना अनिवार्य है। आत्मा और शरीर का भेद जाने बिना मोक्षमार्ग की यात्रा संभव नहीं है। आज तक जितनी भी आत्माएँ सिद्ध बनी हैं, उन्होंने भेद विज्ञान के माध्यम से ही अपने शुद्ध स्वरूप को प्राप्त किया है।</p>
<p><strong>सम्यग्दर्शन है मोक्षमार्ग का प्रथम द्वार</strong></p>
<p>महाराजश्री ने कहा कि सिद्ध भगवान का संदेश स्पष्ट है कि आत्मकल्याण के लिए सबसे पहले मिथ्यादर्शन का त्याग कर सम्यग्दर्शन को धारण करना आवश्यक है। सम्यग्दर्शन ही मोक्षमार्ग का प्रथम द्वार है और यही आत्मा को शुद्धता एवं सिद्धत्व की ओर अग्रसर करता है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ</strong></p>
<p>अष्टानिका महापर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रवचन का लाभ प्राप्त किया। उपस्थित धर्मप्रेमियों ने भक्ति, स्वाध्याय एवं आत्मचिंतन के माध्यम से अपने जीवन को धर्ममय बनाने का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>समाजजन रहे उपस्थित</strong></p>
<p>इस अवसर पर देहरा जैन मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष पटेल जैन, अंशुल जैन, नवीन जैन, संजय जैन, वरुण जैन सहित अनेक धर्मप्रेमी श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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