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	<title>अशोक पाटनी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>अशोक पाटनी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भामाशाह रूप में सेवा-साधना, देशप्रेम एवं धर्मनीति को मिला सम्मान : अशोक पाटनी को “धर्म चक्रवर्ती” की उपाधि से किया अलंकृत </title>
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		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 06:53:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वागड़ अंचल सहित सकल जैन समाज की भावनाओं के अनुरूप, नौगामा जैन समाज द्वारा आदिनाथ जयंती के पावन अवसर पर लिए गए निर्णय के अनुसार समाजसेवी एवं भामाशाह, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के कृपापात्र एवं परम मुनि-भक्त अशोक जी पाटनी को “धर्म चक्रवर्ती” की उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया गया। पढ़िए सुरेश गांधी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वागड़ अंचल सहित सकल जैन समाज की भावनाओं के अनुरूप, नौगामा जैन समाज द्वारा आदिनाथ जयंती के पावन अवसर पर लिए गए निर्णय के अनुसार समाजसेवी एवं भामाशाह, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के कृपापात्र एवं परम मुनि-भक्त अशोक जी पाटनी को “धर्म चक्रवर्ती” की उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सुरेश गांधी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा।</strong> वागड़ अंचल सहित सकल जैन समाज की भावनाओं के अनुरूप, नौगामा जैन समाज द्वारा आदिनाथ जयंती के पावन अवसर पर लिए गए निर्णय के अनुसार समाजसेवी एवं भामाशाह, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के कृपापात्र एवं परम मुनि-भक्त अशोक जी पाटनी को “धर्म चक्रवर्ती” की उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके दीर्घकालीन धर्मसेवा, समाजहित एवं राष्ट्रहित में दिए गए उत्कृष्ट एवं प्रेरणादायी योगदान के लिए प्रदान किया गया। दिगंबर जैन समाज, सुखोदय अतिशय क्षेत्र नौगामा की ओर से आयोजित इस गरिमामयी समारोह में समाज के प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति में अशोक पाटनी को अभिनंदन-पत्र एवं उपाधि प्रदान की गई।</p>
<p><strong> जन-जन के लिए प्रेरणास्रोत </strong></p>
<p>समाज के महासचिव श्रीपाल जैन (आर्किटेक्ट) ने अभिनंदन-पत्र का वाचन करते हुए कहा कि “धर्मराज युधिष्ठिर की भाँति धर्मनीति पर चलते हुए तथा धर्मशास्त्रों और गुरुओं द्वारा बताए मार्ग का अनुसरण करते हुए अशोक जी पाटनी जन-जन के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।” अभिनंदन-पत्र में उल्लेख किया गया कि कोरोना काल जैसे कठिन समय में पाटनी परिवार ने सरकार को आर्थिक सहयोग प्रदान किया। वहीं बाढ़ जैसी आपदाओं में बेघर लोगों को आवास उपलब्ध कराकर मानवता की मिसाल प्रस्तुत की। इसके अतिरिक्त, देशभर में संचालित गोशालाओं में उदारतापूर्वक दान देकर जीवदया की परंपरा को सुदृढ़ किया। जैन समाज द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान, चिकित्सालय, व्रती आश्रम, ब्रह्मचारी आश्रम एवं वृद्धाश्रम जैसे अनेक संस्थानों के संचालन एवं विकास में भी पाटनी परिवार का उल्लेखनीय योगदान रहा है। समाजजनों ने बताया कि अशोक जी पाटनी, सुरेश जी पाटनी एवं विमल जी पाटनी ने पंचमकाल के कुबेर इंद्र के समान अद्वितीय दानशीलता का परिचय देते हुए देशभर में विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों एवं जिनालयों के निर्माण में मुक्तहस्त सहयोग प्रदान किया है</p>
<p><strong>पुण्यार्जन के साथ सक्रिय सहभागिता</strong></p>
<p>वागड़ क्षेत्र में उनके विशेष योगदान का उल्लेख करते हुए बताया गया कि चाहे वीरोदय तीर्थ हो अथवा क्षेत्र के अन्य जिनालय, सभी स्थानों पर पाटनी परिवार ने पुण्यार्जन के साथ सक्रिय सहभागिता निभाई है। मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से सुखोदय तीर्थ क्षेत्र नौगामा में निर्माणाधीन भव्य मुनि सुव्रतनाथ मंदिर के लिए सवा पंद्रह फीट ऊँची श्यामवर्ण पद्मासन प्रतिमा हेतु विशाल पाषाण की आवश्यकता थी, जो लंबे समय तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में पाटनी परिवार ने अपने अथक प्रयासों से उक्त पाषाण उपलब्ध करवाकर निर्माण कार्य को गति प्रदान की। इस कार्य में अशोक जी पाटनी के साथ ही सुरेश जी पाटनी की भी प्रतिमा हेतु पाषाण उपलब्ध कराने में विशेष भूमिका रही है, जिसे समाज सदैव स्मरण रखेगा। समाज ने इस कार्य को उनकी अटूट श्रद्धा, दृढ़ निष्ठा एवं समर्पित सेवा-भावना का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उनके इस योगदान से नौगामा में भव्य मंदिर में प्रतिमा-स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिससे संपूर्ण क्षेत्र में धार्मिक आस्था एवं उत्साह का वातावरण व्याप्त है। अंत में समाजजनों ने एक स्वर में कहा कि अशोक जी पाटनी को “धर्म चक्रवर्ती” की उपाधि प्रदान करना उनके महान कार्यों के प्रति सम्मान ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी है। इस अवसर पर प्रदीप पिंडारमिया, राजेश पिंडारमिया, केसरीमल पंचोली, जीतमल पिंडारमिया, जयन्तिलाल गांधी, नरेश पिंडारमिया एवं हंसमुख गांधी सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>तेरापंथी कोठी में संत निवास एवं गुरु चरण मंदिर का हुआ शिलान्यास आचार्य विद्यासागर जी और शांतिसागर जी महाराज के चरण होंगे प्रतिष्ठित </title>
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		<pubDate>Mon, 03 Nov 2025 14:03:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सम्मेद शिखर जी के तेरापंथी कोठी परिसर में आज संत निवास एवं गुरु चरण मंदिर का शिलान्यास भव्य रूप से संपन्न हुआ। यह आयोजन संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से संपन्न हुआ। पढ़िए जैन राज अजमेरा की रिपोर्ट… सम्मेद शिखर जी स्थित तेरापंथी कोठी में आज एक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सम्मेद शिखर जी के तेरापंथी कोठी परिसर में आज संत निवास एवं गुरु चरण मंदिर का शिलान्यास भव्य रूप से संपन्न हुआ। यह आयोजन संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद से संपन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जैन राज अजमेरा की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सम्मेद शिखर</strong> जी स्थित तेरापंथी कोठी में आज एक ऐतिहासिक अवसर पर संत निवास एवं गुरु चरण मंदिर का शिलान्यास किया गया। यह पवित्र कार्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज और आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के सान्निध्य एवं आशीर्वाद से सम्पन्न हुआ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर महाराज, मुनि श्री पवित्र सागर महाराज, मुनि श्री पूज्य सागर महाराज, मुनि श्री अतुल सागर महाराज तथा आर्यिका रत्न गुरुमति माताजी और दृढ़मति माताजी ससंघ उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि इस गुरु चरण मंदिर में आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज और आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के पवित्र चरण प्रतिष्ठित किए जाएंगे। इस दिव्य आयोजन का भामाशाह अशोक जी सुशीला पाटनी (आर.के. मार्वल) एवं राजेन्द्र प्रसाद प्रशांत जैन, मुंबई ने विशेष पुण्य भावना से संपादन किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने धर्म, संयम और आचार्यों के प्रति असीम श्रद्धा व्यक्त की। संकलनकर्ता कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज अजमेरा ने बताया कि यह शिलान्यास समारोह समाज के लिए प्रेरणादायी और ऐतिहासिक अध्याय सिद्ध होगा।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन के लिए सपरिवार आए भामाशाह : समाजजनों ने किया भावभीना स्वागत </title>
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		<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 08:32:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी और मुनि श्री पुण्य सागर जी के दर्शन करने के लिए राजस्थान किशनगढ़ के भामाशाह अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी परिवार सहित 18 मार्च को धरियावद पधारे। धार्मिक सामाजिक, प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने अभिनंदन किया। धरियावद से पढ़िए यह खबर&#8230; धरियावद। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी और मुनि श्री पुण्य सागर जी के दर्शन करने के लिए राजस्थान किशनगढ़ के भामाशाह अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी परिवार सहित 18 मार्च को धरियावद पधारे। धार्मिक सामाजिक, प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने अभिनंदन किया। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री पुण्यसागर जी संघ सहित 52 साधु यहां विराजित हैं। चमत्कारी 1008 श्री चंद्र प्रभु एवं आचार्य श्री शांति सागर जी, आचार्य श्री कुंथु सागर जी की पवित्र चरण रज से पवित्र नगरी वास्तव में धर्म नगरी हैं क्योंकि, अनेक आचार्य संघ का सहज आगमन होता है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी और मुनि श्री पुण्य सागर जी के दर्शन करने के लिए राजस्थान किशनगढ़ के भामाशाह अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी परिवार सहित 18 मार्च को धरियावद पधारे।</p>
<p><strong>हेलीपैड पर किया स्वागत</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया ने बताया कि इसके पूर्व नगर के हैलीपेड पर दिगंबर जैन समाज के सेठ एवं पंडित हंसमुख शास्त्री, ब्रह्मचारी गज्जू भैया, ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी सहित अनेक गणमान्य धार्मिक सामाजिक, प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने बैंडबाजे,पुष्पहार गुलदस्ते से अतिथियों का भावभीना स्वागत अभिनंदन किया।</p>
<p><strong>सामाजिक पहलू पर मार्गदर्शन प्राप्त लिया</strong></p>
<p>अशोक पाटनी किशनगढ़ ने आचार्य श्री के दर्शन कर चरण वंदना की। आचार्य श्री से अनेक धार्मिक सामाजिक पहलू पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। अशोक पाटनी ने आचार्य श्री को बताया कि मुनि श्री प्रशम सागर जी हमेशा हमें स्वाध्याय की प्रेरणा देते थे। पिछली बार गामड़ी में दर्शन किए थे।</p>
<p><strong>धार्मिक मंडल ने किया अभिनंदन</strong></p>
<p>आचार्य श्री संघ के दर्शन बाद मुनि श्री पुण्य सागर जी एवं समाधि साधना कर रहे मुनि श्री पूर्ण सागर जी के दर्शन किए। धार्मिक मंडल द्वारा अशोक, सुशीला एवं शांता पाटनी किशनगढ़ का अभिनंदन किया। पंडित हंसमुख के निवेदन पर आचार्य श्री एवं संघ के दर्शन कर अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी, शांता पाटनी सपरिवार नंदन वन एवं हिमवन भी गए। दोनों क्षेत्र के दर्शन कर प्रसन्नता प्रकट की।</p>
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		<title>आचार्य विद्यासागर समाधि स्मृति दिवस पर विशेष : ज्ञान, आध्यात्मिकता और मानवता के महान प्रतीक थे आचार्य श्री </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Feb 2025 03:37:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जीवन हमें यह सिखाता है कि जीवन को एक उद्देश्य के साथ जीना चाहिए। उन्होंने हमें यह समझाया कि धर्म और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी केवल आस्थाएँ तक सीमित नहीं है, बल्कि हमें इन आस्थाओं को अपने जीवन में लागू करना भी चाहिए। उनका योगदान न केवल धार्मिक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जीवन हमें यह सिखाता है कि जीवन को एक उद्देश्य के साथ जीना चाहिए। उन्होंने हमें यह समझाया कि धर्म और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी केवल आस्थाएँ तक सीमित नहीं है, बल्कि हमें इन आस्थाओं को अपने जीवन में लागू करना भी चाहिए। उनका योगदान न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक है। उनके विचार और कार्य आज भी हमें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। <span style="color: #ff0000">उनके प्रथम समाधि दिवस पर पढ़िए डॉक्टर जैनेंद्र जैन का विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज श्रमण संस्कृति के महामहिम संत, समाज और राष्ट्र के हित चिंतक थे। उन्होंने न केवल आत्मकल्याण के लिए साधना की, बल्कि लोककल्याण की भावना से भी समृद्ध जीवन जीते। वह जैन श्रमणों में ज्येष्ठ एवं सर्वश्रेष्ठ संत थे, जिनके प्रति जैन और जैनेत्तर समाज के सभी वर्गों के नागरिकों के साथ-साथ भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रक्षामंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, कई राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल, राजनेता और शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी अगाध श्रद्धा रखते थे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आचार्य श्री के बारे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि वह स्वयं में इतिहास थे। उनका व्यक्तित्व इतना आकर्षक था कि उनकी कार्यशैली और चिंतन में वसुधैव कुटुंबकम और विश्व कल्याण की भावना समाहित थी। उन्होंने पांच दशकों से अधिक समय तक देश के विभिन्न शहरों में बिहार या चातुर्मास करते हुए अपने त्याग, तपस्या, ज्ञान साधना और करुणा से न केवल जैन धर्म को आलोकित किया, बल्कि श्रमण संस्कृति (जिन शासन) को भी गौरवान्वित किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने अपने 56 वर्षों के साधना काल में अनेकों मील के पत्थर स्थापित किए। धर्म, समाज, राष्ट्र, राष्ट्रभाषा, साहित्य, गौरक्षा, स्त्री शिक्षा, चिकित्सा, और हथकरघा आदि क्षेत्रों में उनका जो योगदान रहा है, वह राष्ट्र और समाज के लिए अनमोल रहेगा। उनका योगदान हमें सदियों तक याद रहेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आचार्य श्री की प्रेरणा से पांच नवीन तीर्थों की स्थापना हुई, 12 पाषाण जिनालयों का निर्माण हुआ और पांच तीर्थों का जीर्णोद्धार किया गया। कुंडलपुर तीर्थ पर स्थित बड़े बाबा के विशाल, ऐतिहासिक और सुंदर मंदिर की पुनर्स्थापना इसका ताजा उदाहरण है। इसके अलावा, आचार्य श्री की प्रेरणा और आशीर्वाद से देशभर में शताधिक गौशालाओं की स्थापना हुई। स्त्री शिक्षा हेतु धर्म और संस्कारों से समृद्ध गुरुकुल पैटर्न पर इंदौर, जबलपुर, रामटेक, सागर, डोंगरगढ़ जैसे शहरों में प्रतिभास्थली (आवासीय कन्या विद्यालय) की स्थापना की गई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>शुद्ध सूत और वस्त्र निर्माण के लिए कई शहरों में हथकरघा उद्योग की स्थापना की गई। पीड़ित मानवता की सेवा के लिए सागर में भाग्योदय हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर और जबलपुर में पूर्णायु (आयुर्वेदिक हॉस्पिटल एवं अनुसंधान केंद्र) की स्थापना आचार्य श्री की प्रेरणा और आशीर्वाद का ही फल है। आचार्य श्री ने 450 से अधिक मुनि एवं आर्यिका को दीक्षा देकर श्रमण परंपरा को वृद्धिगत किया। फलस्वरूप, इस पंचम काल में भी हमें जगह-जगह मुनियों और आर्यिकाओं के दर्शन, सांनिध्य और आशीर्वाद मिल रहे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आचार्य श्री का श्रमण संस्कृति के उन्नयन और अहिंसा की स्थापना में जो योगदान है, वह भविष्य में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा और उनकी स्मृति को सदैव जीवित रखेगा। इन सभी उल्लेखित सर्वहितेषी कार्यों के दृष्टिगत आचार्य श्री के योगदान को देखते हुए, भारत सरकार द्वारा आचार्य श्री को समाधि उपरांत भारत रत्न अलंकरण से सम्मानित किया जाना चाहिए, यह एक कृतज्ञता की भावना होगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक के सदलगा ग्राम में हुआ। माघ शुक्ल नवमी (17 फरवरी 2024) को उन्होंने चंद्रगिरी तीर्थ, डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़) में संलेखना पूर्वक मृत्युंजयी बनकर समाधिस्थ हो गए। उनके प्रथम समाधि स्मृति दिवस पर हम उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हैं।</p>
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		<title>आचार्य विद्यासागर समाधि स्मृति दिवस पर विशेष : आचार्य श्री के चरणों में समर्पित रचना </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Feb 2025 03:34:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी का जीवन एक आदर्श है, जिसमें धर्म, समाज और मानवता के प्रति उनका समर्पण स्पष्ट दिखाई देता है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि सही मार्ग पर चलते हुए, ज्ञान, अहिंसा और सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनकी उपदेशों और कार्यों का प्रभाव [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी का जीवन एक आदर्श है, जिसमें धर्म, समाज और मानवता के प्रति उनका समर्पण स्पष्ट दिखाई देता है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि सही मार्ग पर चलते हुए, ज्ञान, अहिंसा और सेवा के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनकी उपदेशों और कार्यों का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर अनंतकाल तक रहेगा। <span style="color: #ff0000">प्रथम समाधि स्मृति दिवस पर पढ़िए कवि, लेखक व समीक्षक संजय एम तराणेकर की विशेष रचना&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>इस नवयुग के ही थे महावीर&#8230;!</p>
<p>वह इस नवयुग के ही थे महावीर,</p>
<p>सत्य, अहिंसा व कल्याण के तीर।</p>
<p>जन्म और परिवार कर्नाटक राज्य,</p>
<p>बेलगांव में सदलगा गांव चिकोड़ी।</p>
<p>दस-दस छियालीस में शरद पूर्णिमा,</p>
<p>शिशुरूप में एक चांद का अवतरण।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वह इस नवयुग के ही थे महावीर,</p>
<p>सत्य, अहिंसा व कल्याण के तीर।</p>
<p>संत शिरोमणि पूज्य समाधिस्थ संत,</p>
<p>आचार्य विद्यासागरजी भक्ति ग्रंथ।</p>
<p>सभी भक्तों को राह दिखाते गुरुदेव,</p>
<p>सभी उनकी शरण में देखते एकमेव।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वह इस नवयुग के ही थे महावीर,</p>
<p>सत्य, अहिंसा व कल्याण के तीर।</p>
<p>गुरुदेव के ज्ञान एवं चिंतन प्रभाव,</p>
<p>नई शिक्षा नीति मार्गदर्शक में भाव।</p>
<p>उन्हें न केवल दूजा स्थान मिला,</p>
<p>निर्देशों का अक्षरशः पालन किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वह इस नवयुग के ही थे महावीर,</p>
<p>सत्य, अहिंसा व कल्याण के तीर।</p>
<p>गुरुजी विराट व्यक्तित्व का प्रभाव,</p>
<p>प्रधानमंत्रीजी संबोधन में श्रद्धा भाव।</p>
<p>जीवनगाथा, गुणवर्णन होता असंभव,</p>
<p>व्यक्तित्व, तप, संयम व त्याग हैं संभव।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-73801" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0002.jpg" alt="" width="1131" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0002.jpg 1131w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0002-212x300.jpg 212w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0002-724x1024.jpg 724w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0002-768x1086.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0002-1086x1536.jpg 1086w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250206-WA0002-990x1401.jpg 990w" sizes="(max-width: 1131px) 100vw, 1131px" />वह इस नवयुग के ही थे महावीर,</p>
<p>सत्य, अहिंसा व कल्याण के तीर।</p>
<p>हम सब हैं तुच्छ, क्या कहे गुरुदेव,</p>
<p>अनासक्त महायोगी, अपराजेय साधक,</p>
<p>संत शिरोमणि हो पूज्य हे युगदृष्टा!</p>
<p>प्रखर तपस्वी, महा-मनीषी, निस्यूही।</p>
<p>(संदर्भ: आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज)</p>
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		<title>पारसोला पहुंचें आचार्यश्री वर्धमान सागरजी से वर्ष 2025 का वर्षायोग किशनगढ़ में करने का निवेदनः प्रथमाचार्यश्री शांति सागर भवन का हुआ लोकार्पण </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/acharya_shri_vardhman_sagarji_reached_parsola_and_requested_him_to_organize_varshayoga_of_the_year_2025_in_kishangarh/</link>
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		<pubDate>Mon, 27 Jan 2025 13:29:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने संघ के शिष्यों 15 साधुओं सहित गामड़ी में विराजित हैं। गामड़ी संघस्थ आर्यिकाश्री शीतलमतिजी की गृहस्थ अवस्था की कर्म भूमि हैं। प्रसिद्ध भामाशाह आर के मार्बल ग्रुप के आदरणीय अशोक पाटनी, मदनगंज, किशनगढ़ के नेतृत्व में लगभग 600 से अधिक भक्त आचार्यश्री वर्धमान सागरजी को चातुर्मास मदनगंज, किशनगढ़ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने संघ के शिष्यों 15 साधुओं सहित गामड़ी में विराजित हैं। गामड़ी संघस्थ आर्यिकाश्री शीतलमतिजी की गृहस्थ अवस्था की कर्म भूमि हैं। प्रसिद्ध भामाशाह आर के मार्बल ग्रुप के आदरणीय अशोक पाटनी, मदनगंज, किशनगढ़ के नेतृत्व में लगभग 600 से अधिक भक्त आचार्यश्री वर्धमान सागरजी को चातुर्मास मदनगंज, किशनगढ़ में करने हेतु रजत श्रीफल भेंट किया। प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी नवनिर्मित भवन का लोकार्पण एवं वात्सल्य वारिधी आचार्यश्री वर्धमान सागर संत भवन का शिलान्यास प्रसिद्ध उद्योगपति अशोकजी पाटनी, किशनगढ़ द्वारा आचार्यश्री के सानिध्य में किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश पंचोलिया द्वारा पारसोला की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आचार्यश्री ने पुनः पारसोला के लिए किया मंगल विहार </strong></p>
<p><strong>पारसोला।</strong> पंचम पट्टाधीश आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज अपने संघ के शिष्यों मुनिश्री हितेंद्र सागर ,श्रीदर्शितसागर, श्री प्रबुद्ध सागर, क्षुल्लकश्री विशालसागर, श्रीप्राप्ति सागरजी तथा आर्यिकाश्री शीतलमति, श्रीचैत्यमति श्रीवत्सलमति, श्रीविलोकमति, श्रीविचक्षणमति, श्रीविन्रममति, श्रीदर्शनामति, श्रीदेशनामति, श्रीनिर्माेहमती, श्रीपद्मयशमति 15 साधुओं सहित गामड़ी में विराजित हैं। गामड़ी संघस्थ आर्यिकाश्री शीतलमतिजी की गृहस्थ अवस्था की कर्म भूमि हैं।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में श्रद्धालु गामड़ी आए</strong></p>
<p>विनोद, गौरव पाटनी के अनुसार मुनि सुब्रतनाथ, दिगंबर जैन पंचायत, तथा आदिनाथ दिगंबर जैन पंचायत मदनगंज किशनगढ़ सहित सभी दिगंबर मंदिरों के सानिध्य एवं प्रसिद्ध भामाशाह आर के मार्बल ग्रुप के आदरणीय अशोक पाटनी, मदनगंज किशनगढ़ के नेतृत्व में लगभग 600 से अधिक भक्त आचार्यश्री वर्धमान सागरजी को संघ सहित वर्ष 2025 का चातुर्मास मदनगंज, किशनगढ़ में करने हेतु रजत श्रीफल भेंट किया। इसके लिए 8 बड़ी बसे तथा 40 से अधिक कार से श्रद्धालु 26 जनवरी को किशनगढ़ से प्रस्थान कर 27 जनवरी को गामड़ी आए।</p>
<p><strong>किशनगढ़ पधारने का अनुरोध कर पाटनी भावुक हुवे</strong></p>
<p>इस अवसर पर अशोक पाटनी आर के मार्बल ने अपने भावुक शब्दों में बताया कि गुरुदेव आपने वर्ष 2014 में किशनगढ़ में वर्षा योग किया था। किंतु तब हम प्यासे रह गए थे, आपने आचार्यश्री वर्धमान सागरजी से वर्ष 2025 की ग्रीष्मकालीन वाचना। वर्ष 2025 का चातुर्मास प्रथमाचार्यश्री शांति सागरजी महाराज का आचार्य पद प्रतिस्थापना शताब्दी महोत्सव कार्यक्रम शीतकालीन प्रवास तथा आचार्य श्रीवर्धमान सागर की जन्म जयंती का हीरक महोत्सव किशनगढ़ में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से मनाने हेतु किशनगढ़ पधारने का अनुरोध किया।</p>
<p><strong>आचार्यश्री के सानिध्य में भवन का शिलान्यास</strong></p>
<p>दशा हूमड समाज गामड़ी के पंच सूरजमल, संदीप, ऋषभ, जयंतीलाल ने बताया कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागरजी नवनिर्मित भवन का लोकार्पण एवं वात्सल्य वारिधी आचार्यश्री वर्धमान सागर संत भवन का शिलान्यास प्रसिद्ध उद्योगपति अशोकजी पाटनी, किशनगढ़ द्वारा आचार्यश्री वर्धमान सागरजी के सानिध्य में किया गया।</p>
<p><strong>आचार्यश्री का मंगल विहार हुआ </strong></p>
<p>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी का संघ सहित पुनः पारसोला के लिए 27 जनवरी दोपहर को मंगल विहार हुआ। इसके पूर्व 25 जनवरी को आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी के शिष्य मुनिश्री आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज के पवित्र पावन चरणों की वंदना दर्शनार्थ पधारे।</p>
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		<title>भारतवर्षीय जैन समाज में हर्ष की लहर : आर के मार्बल परिवार को श्रावक चक्रवर्ती की उपाधि से किया सम्मानित </title>
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		<pubDate>Tue, 05 Nov 2024 05:11:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चर्या चक्रवर्ती आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के ससंघ पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन सानंद संपन्न हुआ। इस समारोह में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छी लेने का परम सौभाग्य सुशीला अशोक पाटनी और आर के मार्बल परिवार को प्राप्त हुआ। इस विशेष अवसर पर पाटनी परिवार और आर के मार्बल [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चर्या चक्रवर्ती आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के ससंघ पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन सानंद संपन्न हुआ। इस समारोह में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छी लेने का परम सौभाग्य सुशीला अशोक पाटनी और आर के मार्बल परिवार को प्राप्त हुआ। इस विशेष अवसर पर पाटनी परिवार और आर के मार्बल को श्रावक चक्रवर्ती की उपाधि से नवाजा गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>किशनगढ़।</strong> चर्या चक्रवर्ती आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के ससंघ पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन सानंद संपन्न हुआ। इस समारोह में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की पुरानी पिच्छी लेने का परम सौभाग्य सुशीला अशोक पाटनी और आर के मार्बल परिवार को प्राप्त हुआ। इस विशेष अवसर पर पाटनी परिवार और आर के मार्बल को श्रावक चक्रवर्ती की उपाधि से नवाजा गया। यह सम्मान प्राप्त करने से भारतवर्षीय जैन समाज में हर्ष की लहर है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69303" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0007.jpg" alt="" width="1080" height="628" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0007.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0007-300x174.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0007-1024x595.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0007-768x447.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0007-990x576.jpg 990w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /> इंदौर दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका, फेडरेशन के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू, हंसमुख गांधी, टीके वेद, आजाद जैन, एवं परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन, सारिका जैन (फेडरेशन की शिरोमणि संरक्षिका) पुष्पा कासलीवाल ने पाटनी परिवार को बधाई दी और आचार्य श्री जी की पुरानी पिच्छी प्राप्त करने पर उनके सत्कर्मों की सराहना की।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69302" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0006.jpg" alt="" width="1080" height="631" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0006.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0006-300x175.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0006-1024x598.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0006-768x449.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241105-WA0006-990x578.jpg 990w" sizes="(max-width: 1080px) 100vw, 1080px" />इस अवसर पर पूरे परिवार ने भक्ति नृत्य के साथ पिच्छी को घर में प्रवेश कराया और आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रमाण सागर ने दिया आशीर्वाद : मध्यप्रदेश शासन के केबिनेट मंत्री गुरु चरणों में </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Jul 2024 02:30:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर। नगर में विराजित परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी संसघ के मध्यप्रदेश सरकार के केबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं दिगम्बर जैन समाज के समाज गौरव भामाशाह अशोक पाटनी (आर.के. मार्बल्स) ने चातुर्मास स्थल मोहता भवन, इन्दौर दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया इस अवसर पर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर।</strong> नगर में विराजित परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी संसघ के मध्यप्रदेश सरकार के केबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल एवं दिगम्बर जैन समाज के समाज गौरव भामाशाह अशोक पाटनी (आर.के. मार्बल्स) ने चातुर्मास स्थल मोहता भवन, इन्दौर दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया इस अवसर पर चातुर्मास कमेटी के प्रमुख नवीन गोधा, मनोज बाकलीवाल ने स्वागत अभिनन्दन किया।</p>
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		<title>5 से 7 जुलाई तक 35वां आचार्य पदारोहण बांसवाड़ा में : देव शास्त्र गुरु के प्रति भक्ति से पुण्य अर्जित कर मनुष्य जीवन को सार्थक करें &#8211; आचार्य श्री वर्धमान सागर  </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Jun 2024 13:52:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी में 1008 श्री श्रेयांशनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। आज मुनि श्री पुण्यसागर जी का 18 साधु सहित गुरु चरण वंदना हेतु 17 वर्षों के बाद मिलन हुआ। इस [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी में 1008 श्री श्रेयांशनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। आज मुनि श्री पुण्यसागर जी का 18 साधु सहित गुरु चरण वंदना हेतु 17 वर्षों के बाद मिलन हुआ। इस धर्म के अवसर को देखने के लिए बांसवाड़ा राजस्थान के अनेक नगर, मध्य प्रदेश, असम, कोलकाता, महाराष्ट्र, गुजरात आदि विभिन्न नगरों से हजारों भक्त उपस्थित थे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बांसवाड़ा।</strong> प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बालब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी में 1008 श्री श्रेयांशनाथ जिनालय में संघ सहित विराजित हैं। आज मुनि श्री पुण्यसागर जी का 18 साधु सहित गुरु चरण वंदना हेतु 17 वर्षों के बाद मिलन हुआ। इस धर्म के अवसर को देखने के लिए बांसवाड़ा राजस्थान के अनेक नगर, मध्य प्रदेश, असम, कोलकाता, महाराष्ट्र, गुजरात आदि विभिन्न नगरों से हजारों भक्त उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध भामाशाह आर के मार्बल ग्रुप के अशोक पाटनी, सुरेश पाटनी, कटारिया ग्रुप अहमदाबाद के सौभाग्य मल कटारिया, राकेश सेठी कोलकाता, दिनेश खोड़निया सागवाड़ा सहित हजारों भक्त इस अवसर पर उपस्थित थे।</p>
<p><strong>निकाली गई शोभायात्रा</strong></p>
<p>दिन की शुरुआत 1008 श्री श्रेयांश नाथ भगवान के अभिषेक बाद श्री जी की शांतिधारा का सौभाग्य आर के मार्बल ग्रुप के अशोक, सुरेश पाटनी परिवार, किशनगढ़ को प्राप्त हुआ। अन्य पुण्यार्जक परिवारों द्वारा भी शांतिधारा की गई। इसके बाद सिंटेक्स गेट पर संघ के सभी 28 साधु आचार्य श्री अजीत सागर जी के शिष्य मुनि श्री पुण्य सागर जी महाराज की अगवानी हेतु उपस्थित हुए। इस अवसर पर सुबह से ही भक्तों का तांता स्वागत और अगवानी करने के लिए लगा था।मुनि हितेंद्र सागर जी सहित सभी साधुओं ने मुनि पुण्यसागर जी की अगवानी की। शोभायात्रा का समापन श्री श्रेयांसनाथ जिनालय में हुआ, जहां पर विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की चरणवंदना चरणाभिषेक पंचामृत द्रव्यों से की। इस के पश्चात संघ के सभी साधुओं ने आचार्य श्री की वन्दना की। आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के चित्र का अनावरण आर के मार्बल ग्रुप के अशोक, सुरेश, सुशीला, तारिका पाटनी एवं परिवार के सदस्यों द्वारा किया गया। उनके साथ में बाहर से पधारे अतिथि सौभाग्यमल कटारिया अहमदाबाद, राकेश सेठी कोलकाता सहित सुरेश खोड़निया सागवाड़ा ,सुरेश सबलावत, वीणा दीदी, गज्जू भैया तथा आचार्य श्री के गृहस्थ अवस्था के भतीजे पारस पंचोलिया, अखिलेश जैन इंदौर ने किया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन आरके मार्बल परिवार द्वारा किया गया। जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य सौभाग्य मलजी कटारिया अहमदाबाद को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>पुण्य का अर्जन करें</strong></p>
<p>श्रीमद् जैन धर्म की व्याख्या करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि हमारा धर्म लक्ष्य लक्ष्मी वान है। हमारा आशय भौतिक लक्ष्मी से नहीं होकर केवल ज्ञान मोक्ष रूपी लक्ष्मी से है जो विनाश को प्राप्त नहीं होती। प्रथमाचार्य आचार्य शांति सागर जी की कृपा हुई कि उन्होंने लुप्त होते मुनि धर्म को संबल अपनी क्रियायो से दिया उन्होंने अपने जीवन को प्रयोगशाला बनाया। चारित्र के सभी अंगों का पालन किया। आज जो स्वतंत्र मुनियों का विहार हो रहा है। यह आचार्य शांति सागर जी की देन है। समाज सेठ अमृतलाल अनुसार आचार्य श्री ने बताया कि आप लौकिक लोगों को परिवार के रिश्तेदारों से मिलने पर खुशी होती है। हम साधुओं को भी साधुओं से मिलने में प्रसन्नता होती है। आचार्य अजीत सागर जी के शिष्य मुनि पुण्य सागर जी अपने संघ सहित 17 वर्षों के बाद हमारे दर्शन चरण वंदना हेतु पधारे हैं आप संघ परंपरा के शिष्य मुनि है जब संघ के साधु मिलते हैं तब हृदय में प्रसन्नता होती है और मुनि श्री पुण्य सागर जी संघ की वृद्धि करके आए हैं स्वयं के साथ शिष्यों को भी दर्शन कराए हैं। आचार्य अजीत सागर जी ने हमें आचार्य पद का भार सौंपा। हर परिवार का मुखिया चाहता है कि परिवार से दूर सदस्य वापस परिवार में रहे ऐसे ही संघ नायक भी चाहते हैं कि उनकी परंपरा की उनके साधु साथ में रहे। अभी आचार्य शांति सागर जी महाराज का आचार्य शताब्दी महोत्सव की शुरुआत अक्टूबर 2024 से अक्टूबर 2025 तक चलेगी इस विशाल संघ सानिध्य में प्रभावना पूर्वक मनाने की हमारी भावना है। आज के शुभ अवसर पर यही आशीर्वाद हम देना चाहते हैं कि आप सभी देव शास्त्र गुरु के प्रति भक्ति और श्रद्धा रखकर पुण्य का अर्जन करें पुण्य अर्जन करने से मनुष्य जीवन सार्थकता को प्राप्त होगा।</p>
<p><strong>आचार्य श्री में अनुपम वात्सल्य</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया इंदौर, अक्षय डांगरा अनुसार आपके पूर्व मुनि श्री पुण्य सागर जी ने गुरु वर्धमान सागर जी के प्रति अपनी भावांजलि में बताया कि हमारे दीक्षा गुरु आचार्य श्री अजीत सागर जी का सानिध्य हमें केवल 3 वर्ष मिला किंतु हमारे दीर्घकालीन संयम दीक्षा अवधि में हमें आचार्य वर्धमान सागर जी का सहारा मिला आज उनके आशीर्वाद से हम चारित्र मार्ग है।आचार्य श्री के हम प्रतिदिन परोक्ष गुरु वंदना करते थे अब हमें साक्षात में गुरु वंदना करने का अवसर मिला। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी में अनुपम वात्सल्य है ,करुणा है ,प्रेम है ,ज्ञान है हमें उनका मार्गदर्शन हमेशा मिलता है गुरु की कृपा से अंधेरे में भी टकराने का डर नहीं लगता है, गुरु की कृपा से हमारी गाड़ी निरंतर चल रही है। पंडित हसमुख जी शास्त्री ने कहा कि गुरु का गुणानुवाद सुमेरु पर्वत के समान पत्ते रुपी कागज पर हो सारे विश्व के समुद्र की स्याही बना ली जाए और विश्व के वृक्षों की टहनी रूपी कलम से गुरु का गुणानुवाद नहीं कर सकते हैं। आचार्य श्री शांति सागर जी एवम आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की पूजन थांदला ,धरियावद, पारसोला,बांसवाड़ा सहित अन्य नगर की समाज ने की।पूजन आर्यिका श्री महायश मति माताजी और वीणा दीदी ने कराई। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 35 वा आचार्य पदारोहण बांसवाड़ा की बाहुबली कालोनी में 3 दिवसीय कार्यक्रम के पोस्टर का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। कमल सारगिया ने बताया कि आगामी जुलाई माह की 5 से 7 जुलाई आषाढ़ शुक्ल 2 दूज को 35 वा आचार्य पदारोहण विभिन्न कार्यक्रमो के साथ मनाया जाएगा। वैसे अंग्रेजी दिनांक अनुसार 24 जून 1990 आषाढ़ सुदी 2 को आचार्य पद मिला। खांदू कालोनी समाज द्वारा 24 जून को विशेष गुणानुवाद सभा रखी गई हैं जिसमे श्रावकों के साथ साधुगण भी भावांजलि अर्पित करेंगे</p>
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		<title>आचार्य पद पदारोहण महामहोत्सव 16 अप्रेल को : महोत्सव के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पाटनी ने कुण्डलपुर में ली समीक्षा बैठक </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Apr 2024 11:21:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में 16 अप्रैल को आयोजित आचार्य पद पदारोहण महामहोत्सव को लेकर एक समीक्षा बैठक कुंडलपुर कार्यालय में महामहोत्सव समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पाटनी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। पढ़िए रत्नेश जैन रागी की रिपोर्ट&#8230; कुण्डलपुर। श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में 16 अप्रैल को आयोजित आचार्य पद पदारोहण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में 16 अप्रैल को आयोजित आचार्य पद पदारोहण महामहोत्सव को लेकर एक समीक्षा बैठक कुंडलपुर कार्यालय में महामहोत्सव समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पाटनी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए रत्नेश जैन रागी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>कुण्डलपुर।</strong> श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में 16 अप्रैल को आयोजित आचार्य पद पदारोहण महामहोत्सव को लेकर एक समीक्षा बैठक कुंडलपुर कार्यालय में महामहोत्सव समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पाटनी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में पाटनी के साथ , प्रभात मुंबई , एडिशनल कमिश्नर पवन जैन , अध्यक्ष सतना जैन समाज, प्रेमचंद प्रेमी कटनी, कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष चंद्र कुमार सराफ, संयोजक वीरेश सेठ आदि मंचासीन रहे। बैठक में संयोजक ने बताया कि 16 अप्रैल के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना है। लगभग 400 साधुगण आएंगे। 400 चौकों की व्यवस्था की जा रही है। लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं हेतु व्यवस्थाएं बनाई जा रही हैं। अहमदाबाद की कंपनी आवास हेतु कमरा तैयार कर रही है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-58276" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0045.jpg" alt="" width="1080" height="482" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0045.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0045-300x134.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0045-1024x457.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0045-768x343.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0045-990x442.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" /> कुंडलपुर में एवं दमोह में व्यवस्थाएं की जा रही हैं। एसी कमरे तैयार किये जा रहे हैं। पंडाल ,भोजनशाला नजदीक बनाए जा रहे हैं। शामयाने पंडाल लगाकर आवासीय एरिया तैयार हो रहा है। जगह-जगह छाया, प्रसाधन, कैंटीन की व्यवस्था जुटाई जा रही हैं। गाड़ी पार्किंग स्थल बनाए जा रहे हैं। दमोह में यात्रियों को रोकने एवं वहीं तैयार होने के लिए व्यवस्था दी जा रही है। 45 समिति प्रभारी एवं सदस्यों को रुकने बेस कैंप में व्यवस्था की जा रही है। कमेटी अध्यक्ष ने सभी से तन मन से सहयोग कर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है। अशोक पाटनी ने कहा कि इतने कम समय में सारी व्यवस्था कर रहे हैं, सुंदर से सुंदर व्यवस्था हो आप सभी सहयोग करें , आपके सहयोग से ही कार्यक्रम संभव होगा।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-58277" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0046.jpg" alt="" width="1080" height="658" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0046.jpg 1080w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0046-300x183.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0046-1024x624.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0046-768x468.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240405-WA0046-990x603.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1080px) 100vw, 1080px" />आचार्य पद पदारोहण हेतु कुंडलपुर को चुना है हम सभी मिलकर कार्यक्रम को अनूठा बना दें । इस बैठक में बड़ी संख्या में कुंडलपुर कमेटी के पदाधिकारी सदस्य एवं महामहोत्सव समिति प्रभारी व सदस्यों की उपस्थिति रही।</p>
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