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	<title>अयोध्या नगरी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>अयोध्या नगरी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पंचकल्याणक महोत्सव में गूंजा तीर्थंकर जन्म कल्याणक का उल्लास, हाथी पर निकली भव्य शोभायात्रा: सौधर्म इंद्र ने तीर्थंकर बालक को कराया नगर भ्रमण, पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने दिया धर्म और सत्य का संदेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 06:15:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भिंड के निराला रंग विहार में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में तीर्थंकर जन्म कल्याणक का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। हाथी पर सवार तीर्थंकर बालक की शोभायात्रा निकाली गई और धर्मसभा में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने प्रेरक उद्बोधन दिया। भिंड से पढ़िए ,सोनल जैन की यह खबर  भिंड। अयोध्या नगरी निराला [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भिंड के निराला रंग विहार में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में तीर्थंकर जन्म कल्याणक का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ हुआ। हाथी पर सवार तीर्थंकर बालक की शोभायात्रा निकाली गई और धर्मसभा में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने प्रेरक उद्बोधन दिया। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए ,सोनल जैन की यह खबर </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> अयोध्या नगरी निराला रंग विहार में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में रविवार को तीर्थंकर जन्म कल्याणक का आयोजन बड़े ही भव्य और उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। जैसे ही सौधर्म इंद्र बने देवेंद्र जैन ने तीर्थंकर बालक के जन्म की घोषणा की, पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा।</p>
<p><strong>कुबेर इंद्र ने की रत्नों की वर्षा</strong></p>
<p>जन्म कल्याणक की खुशी में चारों ओर उत्सव जैसा वातावरण बन गया। कुबेर इंद्र बने मोहन जैन द्वारा रत्नों की वर्षा की गई। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य दृश्य का आनंद लिया और भगवान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।</p>
<p><strong>हाथी पर निकली भव्य शोभायात्रा</strong></p>
<p>सौधर्म इंद्र ने तीर्थंकर बालक को हाथी पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया। बैंड-बाजों और जयघोष के साथ निकली यह शोभायात्रा अयोध्या नगरी निराला रंग विहार से शुरू होकर महावीर गंज, देव नगर कॉलोनी, इटावा रोड, बताशा बाजार, सदर बाजार और गोल मार्केट होते हुए पुनः आयोजन स्थल पहुंची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह स्वागत किया।</p>
<p><strong>जन्माभिषेक का हुआ आयोजन</strong></p>
<p>नगर भ्रमण के बाद सौधर्म इंद्र द्वारा तीर्थंकर बालक का जन्माभिषेक किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।</p>
<p><strong>भगवान का जन्म विश्व कल्याण के लिए होता है</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकर भगवान का जन्म केवल एक परिवार या समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के कल्याण के लिए होता है। जब तीर्थंकर भगवान जन्म लेते हैं तो चारों ओर खुशियां छा जाती हैं और एक पल के लिए नारकीय जीव भी सुख की अनुभूति करते हैं।</p>
<p><strong>माताओं से कराया गर्भपात न करने का संकल्प</strong></p>
<p>अपने उद्बोधन में पट्टाचार्यश्री ने मातृत्व की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि कौन जानता है किस गर्भ में कोई महापुरुष या भगवान बनने योग्य आत्मा पल रही हो। उन्होंने उपस्थित माताओं से गर्भपात न करने और न कराने का संकल्प दिलाया। सभा में मौजूद महिलाओं ने हाथ उठाकर इस संकल्प को स्वीकार किया।</p>
<p><strong>सत्य को जानने वाला ही पाता है मुक्ति</strong></p>
<p>पट्टाचार्यश्री ने कहा कि जन्म और मृत्यु तो संसार का नियम है, लेकिन जो व्यक्ति सत्य को जान लेता है वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो सकता है। सत्य त्रिकालिक है और उसे समझने वाला जीवन के वास्तविक उद्देश्य को प्राप्त कर लेता है।</p>
<p><strong>पूर्व विधायक संजीव सिंह ने लिया आशीर्वाद</strong></p>
<p>जन्म कल्याणक के अवसर पर पूर्व विधायक संजीव सिंह कुशवाह भी महोत्सव में पहुंचे और पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर महाराजश्री ने उन्हें &#8220;विचार&#8221; नामक पुस्तक भेंट करते हुए नियमित स्वाध्याय का संदेश दिया।</p>
<p><strong>समाज सेवा की मिसाल बनी जलपान सेवा</strong></p>
<p>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में गोलालारे समाज सेवा समिति भिंड के सदस्यों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए जलपान सेवा भी लगातार संचालित की जा रही है। सेवा कार्य में समाज के सदस्य पूरे समर्पण के साथ जुटे हुए हैं।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु</strong></p>
<p>महोत्सव में प्रतिष्ठाचार्य अभिषेक जैन, आशीष जैन, विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह, मुकेश जैन बड़ेरी, रविसेन जैन, विनोद जैन, पार्षद मनोज जैन, यश जैन, जगदीश जैन, राजेंद्र जैन, महेंद्र जैन, मनीष जैन, मोनू जैन, कमलेश जैन, सोनू जैन, सचिन जैन, वैभव जैन सहित बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे।</p>
<p>पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, उल्लास और धर्मभावना का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।</p>
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		<title>पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का निराला रंग बिहार में भूमि पूजन : निराला रंग बिहार बनेगा अयोध्या नगरी जहां पर भगवान का होगा पंचकल्याणक </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 May 2026 14:19:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पट्टाचार्यश्री विशुद्धसागरजी के ससंग सानिध्य में 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए निराला रंग बिहार बनेगा। अयोध्या नगरी जिसका शुक्रवार को प्रातः काल 8 बजे भूमि पूजन प्रतिष्ठाचार्य अभिषेक जैन ने विधि विधान से किया गया। भिंड से पढ़िए, यह खबर&#8230; भिंड। पट्टाचार्यश्री विशुद्धसागरजी के ससंग सानिध्य में 5 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पट्टाचार्यश्री विशुद्धसागरजी के ससंग सानिध्य में 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए निराला रंग बिहार बनेगा। अयोध्या नगरी जिसका शुक्रवार को प्रातः काल 8 बजे भूमि पूजन प्रतिष्ठाचार्य अभिषेक जैन ने विधि विधान से किया गया। <span style="color: #ff0000">भिंड से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भिंड।</strong> पट्टाचार्यश्री विशुद्धसागरजी के ससंग सानिध्य में 5 से 10 जून तक होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए निराला रंग बिहार बनेगा। अयोध्या नगरी जिसका शुक्रवार को प्रातः काल 8 बजे भूमि पूजन प्रतिष्ठाचार्य अभिषेक जैन ने विधि विधान से किया गया। पार्षद मनोज जैन ने बताया कि आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का होने जा रहा है। जिसका आज भूमि पूजन विधि विधान से किया गया। जिसमें सौधर्म इंद्र इंद्राणी बने देवेंद्र जैन शशि जैन एवं कुबेर मोहन जैन सरोज जैन एवं अन्य पात्रों द्वारा मंडप की शुद्ध एवं भूमि पूजन किया गया। इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य अभिषेक जैन ने कहा कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के शुभारंभ में भूमि पूजन बेदी का निर्माण का कार्य प्रारंभ किया जाता है।</p>
<p>जिस पर भगवान के विधि विधान से कार्यक्रम किए जाएंगे और वहीं पर आचार्य द्वारा मुनि राजांे द्वारा कान में सूर्य मंत्र देकर एक पाषाण पत्थर भगवान बनने की क्रियाएं होगी। वहां पर उपस्थित देवेंद्र जैन, मोहन जैन, दामिनी जैन, मोहित जैन, वैभव जैन, पिंकू जैन, चंद्र मोहन जैन, वीरेंद्र जैन, अनीता जैन, मंजू जैन, मीना जैन, रंजना जैन, रेनू जैन, शिल्पी जैन, शोभा जैन, अनिता जैन, किरण जैन, राजेंद्र जैन, मोनू जैन, पार्षद मनोज जैन, मनीष जैन, श्रेयांश जैन, सोनू जैन विनोद जैन डोचरा आदि उपस्थित थे।</p>
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		<title>प्रभु का ज्ञानकल्याणक महोत्सव श्रद्धा के साथ संपन्न : नवधा भक्ति पूर्वक हुआ महामुनिराज का आहारदान </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Apr 2026 07:03:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ आदर्श नगर, बल्केश्वर स्थित श्री सर्वताभद्र जिनालय द्वारा आयोजित श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन 27 अप्रैल तक एमडी जैन इंटर कॉलेज ग्राउंड, अयोध्या नगरी, हरीपर्वत में किया जा रहा है। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230; आगरा। न्यू आदर्श नगर, बल्केश्वर स्थित श्री सर्वताभद्र जिनालय द्वारा आयोजित श्री आदिनाथ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> आदर्श नगर, बल्केश्वर स्थित श्री सर्वताभद्र जिनालय द्वारा आयोजित श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन 27 अप्रैल तक एमडी जैन इंटर कॉलेज ग्राउंड, अयोध्या नगरी, हरीपर्वत में किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> न्यू आदर्श नगर, बल्केश्वर स्थित श्री सर्वताभद्र जिनालय द्वारा आयोजित श्री आदिनाथ जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य आयोजन 27 अप्रैल तक एमडी जैन इंटर कॉलेज ग्राउंड, अयोध्या नगरी, हरीपर्वत में किया जा रहा है। महोत्सव के चौथे दिन 26 अप्रैल को प्रभु का ज्ञानकल्याणक महोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। उपाध्याय श्री विहसंतसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विश्वसौम्यसागर जी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य तथा प्रतिष्ठाचार्य जय निशांत भैयाजी एवं संदीप जैन शास्त्री के निर्देशन में प्रातःकाल से ही धार्मिक अनुष्ठानों की पावन श्रृंखला प्रारंभ हो गई। सर्वप्रथम पात्रों द्वारा अष्टद्रव्यों से जिनाभिषेक,नित्यार्चना एवं प्रभु के ज्ञानकल्याणक की समस्त मांगलिक क्रियाएं विधि-विधान के साथ संपन्न की गईं।इस अवसर पर सौभाग्य शाली श्रद्धालुओं ने उपाध्यायश्री के चरणों का प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट किए तथा मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>प्रभु को इक्षुरस से प्रथम आहार अर्पित किया</strong></p>
<p>कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वह पावन क्षण रहा जब राजा श्रेयांश एवं सोम के रूप में सुसज्जित पात्रों द्वारा महामुनिराज को इक्षुरस से प्रथम आहार अर्पित किया गया। इसके उपरांत उपस्थित श्रद्धालुओं ने पारंपरिक नवधाभक्ति पूर्वक आहारदान कर धर्मलाभ अर्जित किया।महोत्सव के दौरान भव्य समवशरण की आकर्षक रचना की गई, जहां उपाध्यायश्री विहसंतसागर जी महाराज ने अपनी दिव्य देशना के माध्यम से धर्म, अहिंसा एवं आत्म कल्याण का संदेश दिया। उनके मंगल प्रवचन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत हो उठा। संध्या समय 1008 दीपकों से प्रभु की संगीतमय मंगल आरती की गई। जिससे संपूर्ण परिसर अलौकिक आभा से आलोकित हो उठा।</p>
<p><strong>जैन भजनों की मनमोहक प्रस्तुति</strong></p>
<p>रात्रि 8 बजे भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें इंदौर के सुप्रसिद्ध गायक रूपेश जैन ने अपने लाइव कॉन्सर्ट के माध्यम से जैन भजनों की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी को भावविभोर कर दिया। साथ ही शांतिनाथ महिला मंडल एवं समस्त महिला मंडलों द्वारा भव्य मंगलाचरण एवं आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई,जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।इस अवसर पर बाहर से पधारे सभी अतिथियों का आयोजन समिति द्वारा प्रतीक चिन्ह भेंट कर,माला एवं दुपट्टा पहनाकर भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया।कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल एवं उमेश जैन ने किया।</p>
<p><strong>यह समाज जन रहे उपस्थित</strong></p>
<p>इस अवसर पर प्रदीप जैन पीएनसी, निर्मल मोठया,रोहित जैन अहिंसा, नीरज जैन जिनवाणी चैनल,हीरालाल बैनाड़ा,पन्नालाल बैनाड़ा,रजत जैन, पंकज जैन,पारस जैन कंसल,राजीव बैंक,अनंत कुमार जैन सुमेर जैन पांड्या,नरेंद्र जैन, मनोज जैन बल्लो, पारसमल जैन,शैलेन्द्र जैन,प्रवीन जैन,दीपक जैन,विशाल जैन,कमल जैन,अंकेश जैन,विष्णुभगवान जैन, उषा मारसंस, वंदना जैन,खुशबू जैन,बबिता जैन,स्नेहलता जैन सहित समाज के अनेक गणमान्य सदस्य एवं पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे एवं सभी ने धर्मलाभ प्राप्त किया।</p>
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		<title>घटयात्रा से पंच कल्याणक महामहोत्सव शुरू : श्री जी की शोभायात्रा मुनिसंघ के सानिध्य में माधवगंज जैन मंदिर से निकली </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 08:15:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के आशीर्वाद तथा मुक्तागिरी में विराजमान आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से छह दिवसीय पंचकल्याणक महामहोत्सव का शुभारंभ जैन महाविद्यालय परिसर में निर्मित भव्य अयोध्या नगरी में होने जा रहा है। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के आशीर्वाद तथा मुक्तागिरी में विराजमान आचार्य श्री समयसागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के आशीर्वाद तथा मुक्तागिरी में विराजमान आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से छह दिवसीय पंचकल्याणक महामहोत्सव का शुभारंभ जैन महाविद्यालय परिसर में निर्मित भव्य अयोध्या नगरी में होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के आशीर्वाद तथा मुक्तागिरी में विराजमान आचार्य श्री समयसागर महाराज के आशीर्वाद से छह दिवसीय पंचकल्याणक महामहोत्सव का शुभारंभ जैन महाविद्यालय परिसर में निर्मित भव्य अयोध्या नगरी में होने जा रहा है। आयोजन समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि लगभग 25 हजार वर्गफीट क्षेत्रफल में विशेष डोम के रूप में अयोध्या नगरी का निर्माण किया गया है। जिसमें करीब पांच हजार श्रावक-श्राविकाओं के बैठने की विशेष व्यवस्था है। इसी के साथ तीन भोजनशाला बनाई गई है। जिसमें सभी को शुद्ध सात्विक भोजन कूपन के माध्यम से प्राप्त होगा। बाहर से आने वाले अतिथियों के लिए आवास व्यवस्था शीतल भवन माधवगंज एवं शीतलधाम विदिशा में उपलब्ध रहेगी।</p>
<p><strong>माधवगंज से घटयात्रा निकाली</strong></p>
<p>बुधवार को प्रातः 6:15 बजे श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, माधवगंज से घटयात्रा निकाली गई। यह यात्रा मुनि श्री संभवसागरजी महाराज, मुनि श्री निस्सीमसागरजी महाराज एवं मुनि श्री संस्कारसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य तथा प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया सम्राट एवं तरुण भैया (इंदौर) के निर्देशन में प्रारंभ हुई। यात्रा पुराने अस्पताल रोड से होते हुए जैन महाविद्यालय परिसर में निर्मित अयोध्या नगरी पहुंची। अयोध्या नगरी पहुंचने के बाद प्रातः 7:15 बजे ध्वजारोहण हुआ। इसके साथ ही मंडप शुद्धि, पांडाल उद्घाटन, वेदी शुद्धि तथा श्रीजी का अभिषेक हुआ।</p>
<p><strong>कुंडलपुर के बड़े बाबा की जैसी प्राचीनता</strong></p>
<p>विश्व में व्याप्त अशांति का वातावरण शीघ्र समाप्त हो और सभी जीव शांति का अनुभव कर सकें। इस मंगल भावना के साथ मुनि श्री संभवसागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा कराई गई। इसके बाद नित्य नियम पूजन एवं धर्मसभा हुई। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभवसागर महाराज ने कहा कि कुंडलपुर के बड़े बाबा की जैसी प्राचीनता है। वैसी ही प्राचीनता बर्रो वाले बाबा की भी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में जब गुरुदेव गंजबासौदा से विदिशा आए थे। उसी समय बर्रो गांव से भी इस भव्य प्रतिमा को विदिशा लाया गया था। गुरुदेव ने प्रतिमा को देखकर कहा था कि यह कुंडलपुर के बड़े बाबा की प्रतिकृति प्रतीत होती है।</p>
<p><strong>चारों ओर सुख-समृद्धि का वातावरण बनेगा</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि बलुआ पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा अत्यंत आकर्षक है, जिसे देखने वाला देर तक निहारता रह जाता है। गुरुदेव के आशीर्वाद से सभी कार्य समय पर संपन्न हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंच कल्याणक स्थल पर अयोध्या नगरी की रचना होते ही भगवान माता मरुदेवी के गर्भ में विराजमान होंगे और इंद्रों के आसन कंपायमान हो उठेंगे। चारों ओर सुख-समृद्धि का वातावरण बनेगा और कुबेर द्वारा रत्नों की वर्षा का प्रतीकात्मक आयोजन होगा।</p>
<p><strong>सही उत्तर देने वालों को पुरस्कार दिए</strong></p>
<p>मुनि श्री श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि विदिशा में इतना बड़ा धार्मिक आयोजन हो रहा है, इसलिए सभी को किसी न किसी रूप में इसमें अवश्य भाग लेना चाहिए।</p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीमसागर जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं के ज्ञान की परीक्षा लेते हुए कई प्रश्न पूछे। सही उत्तर देने वालों को पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम में मुनि श्री संस्कारसागर महाराज भी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>ध्वजारोहण से शुभारंभ हुआ सलेहा पंचकल्याणक महोत्सव: आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी के सानिध्य में गर्भकल्याणक का जीवंत मंचन </title>
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		<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 07:01:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पावन नगरी सलेहा में आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में ध्वजारोहण के साथ भव्य पंचकल्याणक महोत्सव का शुभारंभ हुआ। तीर्थंकरों के जीवन से परिचय पंचकल्याणक के प्रथम दिन पर मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव आत्मा से परमात्मा बनने की क्रियाओं का चित्रण है। सलेहा से पढ़िए, अभिषेक अशोक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पावन नगरी सलेहा में आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में ध्वजारोहण के साथ भव्य पंचकल्याणक महोत्सव का शुभारंभ हुआ। तीर्थंकरों के जीवन से परिचय पंचकल्याणक के प्रथम दिन पर मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव आत्मा से परमात्मा बनने की क्रियाओं का चित्रण है। <span style="color: #ff0000">सलेहा से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सलेहा।</strong> पावन नगरी सलेहा में आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में ध्वजारोहण के साथ भव्य पंचकल्याणक महोत्सव का शुभारंभ हुआ। तीर्थंकरों के जीवन से परिचय पंचकल्याणक के प्रथम दिन पर मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी महाराज ने कहा कि पंचकल्याणक महोत्सव आत्मा से परमात्मा बनने की क्रियाओं का चित्रण है। वहां तीर्थंकरों के जीवन चरित्र लोगों को परिचित कराया जाता है। पंचकल्याणक के प्रथम दिवस पर पूर्व गर्भकल्याणक की क्रियाओं के अंतर्गत सौधर्म इंद्र, कुबेर इंद्र आगमन, अयोध्या नगरी की रचना, अष्टकुमारियों द्वारा माता की सेवा, सोलह स्वप्न, गर्भकल्याणक की आंतरिक क्रियाओं का जीवंत मंचन किया गया। सलेहा पंचकल्याणक महोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का वातावरण है। आचार्य श्री विशुद्धसागर जी के मंगल आशीर्वाद एवं सानिध्य में यह दिव्य आयोजन होने जा रहा है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुजन सलेहा पहुंचे</strong></p>
<p>यह पंचकल्याणक महोत्सव नव निर्मित जिनालय में अत्यंत श्रद्धा और वैदिक विधि-विधान के साथ किया गया। कार्यक्रम में गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान एवं मोक्ष इन पांचों कल्याणकों की भव्य क्रियाएं होंगी। दूर-दूर से श्रद्धालुजन सलेहा पहुंचकर धर्मलाभ ले रहे हैं।</p>
<p><strong>धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम के रंग छाए </strong></p>
<p>आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज जी के आगमन को लेकर नगर में व्यापक स्तर पर स्वागत की तैयारियां की गईं। मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट से सजाया गया तथा विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हं। रांछी से पधारी हुई मनाली पाटणी ने कहा कि यह महोत्सव न केवल सलेहा, बल्कि समस्त विंध्य क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण है। धर्म, संयम और साधना की इस पावन धारा में सहभागी बनकर श्रद्धालु अपने जीवन को धन्य कर रहे हैं।</p>
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		<title>14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का ज्ञान एवं मोक्ष कल्याणकः इस बार तिथि के अनुसार 29 मार्च को आ रहा है  </title>
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		<pubDate>Sat, 29 Mar 2025 06:11:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का ज्ञान और मोक्ष कल्याणक चैत्र कृष्ण अमावस के दिन आ रहा है। यह तिथि इस बार 29 मार्च शनिवार को आ रही है। इस भगवान की आराधना, पूजा और अभिषेक आदि के कार्यक्रम पूरे विधान के अनुसार किए जाएंगे। जिनालयों में भगवान का ज्ञान और मोक्ष [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का ज्ञान और मोक्ष कल्याणक चैत्र कृष्ण अमावस के दिन आ रहा है। यह तिथि इस बार 29 मार्च शनिवार को आ रही है। इस भगवान की आराधना, पूजा और अभिषेक आदि के कार्यक्रम पूरे विधान के अनुसार किए जाएंगे। जिनालयों में भगवान का ज्ञान और मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रंखला में आज पढ़िए उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संयोजित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के अनुयायियों को सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा देने वाले और जीवनपर्यन्त सत्य और अहिंसा के पथ पर अग्रसर रहने वाले 14वें तीर्थंकर भगवान अनंतनाथ जी का 29 मार्च को ज्ञान और मोक्ष कल्याणक महोत्सव आ रहा है। तीर्थंकर भगवानों में अनंतनाथ जी का स्थान भी बहुत अहम रहा है। उन्होंने धर्म उपदेशों के माध्यम से तीर्थ की रचना की और तीर्थंकर कहलाए। भगवान अनंतनाथ जी चैत्र कृष्ण अमावस के दिन खड़गासन अवस्था में सम्मेदशिखर पर्वत से मोक्ष प्राप्त किया। भगवान अनंतनाथ जी को कैवल्य ज्ञान भी चैत्र कृष्ण अमावस के दिन ही प्राप्त हुआ था। इसलिए इस दिन भगवान अनंतनाथ की ज्ञान और मोक्ष कल्याणक एक साथ मनाया जाता है। जैन धर्म ग्रंथों में वर्णित जानकारी के आधार पर श्री अनंतनाथ भगवान वर्तमान काल चक्र के 14वें तीर्थंकर थे। उनकी ऊंचाई 50 धनुष थी। भगवान श्री अनंतनाथ का प्रतीक बाज़ है। पाताल यक्ष देव और अंकुश यक्षिणी देवी क्रमशः उनके शासन देव और शासन देवी हैं। घातकी खंड के प्राग्विदेह क्षेत्र में स्थित ऐरावत विजय की अरिष्ट नगरी में राजा पद्मरथ थे। उन्होंने सांसारिक जीवन में राज सिंहासन प्राप्त करने के बाद दीक्षा ली। बड़ी भक्ति से उन्होंने तीर्थंकर गोत्र का बंधन किया और देवलोक में पुनर्जन्म लिया। दिव्य जीवन पूर्ण करने के बाद तीर्थंकर भगवान श्री अनंतनाथ ने भरत क्षेत्र की अयोध्या नगरी में राजा सिंहसेन एवं रानी सुयशा के घर जन्म लिया। तभी राजा सिंह सेन ने शत्रुओं की असीम शक्ति पर विजय प्राप्त की और तभी से भगवान का नाम ‘अनंतनाथ’ पड़ा। युवावस्था में ही उनका विवाह हुआ और फिर वे राज सिंहासन पर बैठे। कुछ समय बाद देवताओं के अनुरोध पर उन्होंने दीक्षा ले ली। तीन वर्षों तक श्री अनंतनाथ भगवान एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करते रहे। दीक्षा लेने के तीन वर्ष बाद उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई। भगवान को केवल ज्ञान प्राप्त होने पर देव गणों ने एक समवसरण बनाया। जहां से भगवान ने देशना दी।</p>
<p><strong>भगवान की देशना के अनुसार मोक्ष दो चरणों में है</strong></p>
<p>भगवान अनंतनाथ जी ने बताया कि मोक्ष की पहली अवस्था, जिसका अनुभव हम यहीं जीवित रहते हुए करते हैं, उसे मुक्ति की अवस्था कहते हैं। सभी दुखों से मुक्ति ही मोक्ष की पहली अवस्था है। मोक्ष की दूसरी अवस्था में हमारे सारे कर्म, सारी आसक्ति समाप्त हो जाती है। सारे परमाणु ( निर्जीव पदार्थ के कण जो शुद्ध रूप में नहीं हैं) समाप्त हो जाते हैं। व्यक्ति केवल परम आत्मा की अवस्था में आता है। उसके बाद जब अंतिम आयुष्य कर्म (जीवन-काल निर्धारित करने वाला कर्म) समाप्त हो जाता है तो व्यक्ति मोक्ष में चला जाता है। यह परम मोक्ष है। सभी आत्माएं सिद्ध क्षेत्र में विराजमान हैं। भगवान अनंतनाथ की देशना सुनकर लोगों के हृदय परिवर्तित हो गए। तीर्थंकर की वाणी इतनी शक्तिशाली होती है कि वह श्रोता के भीतर के सभी कर्मों के आवरणों को चीरकर सीधे उसकी आत्मा तक पहुंच जाती है। उस वाणी को सुनकर अनेक लोग जीवन-मृत्यु के भवसागर से पार होकर मोक्ष को प्राप्त हुए हैं। वह ‘स्याद्वाद वाणी’ (जिससे किसी भी जीव के अहंकार को किंचित भी ठेस न पहुंचे) वह देशना इस संसार में कहीं भी देखने को नहीं मिलती।</p>
<p><strong>श्री अनंतनाथ भगवान निर्वाण</strong></p>
<p>भगवान श्री अनंतनाथ ने अपना शेष जीवन देशना में बिताया। उनके संघ में 50 गणधर (तीर्थंकर के मुख्य शिष्य) थे। लाखों लोगों ने भगवान की वाणी का लाभ उठाया और दीक्षा लेकर मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़े। पुरुषोत्तम वासुदेव और सुप्रभ बलदेव भी अनंतनाथ भगवान के पास गए और उनके शक्तिशाली वचनों को सुनकर सही दृष्टि प्राप्त की। सुप्रभ बलदेव उनके शिष्य बन गए और अपने सभी कर्मों को साफ करने के बाद मोक्ष प्राप्त किया। अनंतनाथ भगवान हजारों साधुओं, साध्वियों और केवलियों के साथ शिखरजी पर्वत से मोक्ष की ओर चले गए।</p>
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		<title>डॉ. पन्नालाल पापड़ीवाल ने किया स्वर्ग प्रयाण : विख्यात समाजसेवी और प्रखर व्यक्तित्व के रूप में थी पहचान </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Feb 2025 15:06:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मांगीतुंगी में 108 फीट की भगवान ऋषभदेव की मूर्ति निर्माण समिति के अध्यक्ष डॉ. पन्नालाल बालचंद पापड़ीवाल (91) का 7 फरवरी को देहावसान हो गया। वे अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए। वे विभिन्न समितियों के अध्यक्ष, पार्षद और विख्यात समाजसेवी रहे। पढ़िए छत्रपति संभाजीनगर से अभिषेक पाटील की खबर&#8230;. छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र )। मांगीतुंगी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मांगीतुंगी में 108 फीट की भगवान ऋषभदेव की मूर्ति निर्माण समिति के अध्यक्ष डॉ. पन्नालाल बालचंद पापड़ीवाल (91) का 7 फरवरी को देहावसान हो गया। वे अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गए। वे विभिन्न समितियों के अध्यक्ष, पार्षद और विख्यात समाजसेवी रहे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए छत्रपति संभाजीनगर से अभिषेक पाटील की खबर&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र )</strong>। मांगीतुंगी में 108 फीट की भगवान ऋषभदेव की मूर्ति निर्माण समिति के अध्यक्ष डॉ. पन्नालाल बालचंद पापड़ीवाल (91) ने 7 फरवरी को सुबह करीब 11 बजे स्वर्ग के लिए प्रयाण किया। उन्होंने आदिवासी क्षेत्र मांगीतुंगी में अपने जीवन के 20 वर्ष बिताकर भगवान ऋषभदेव की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बनवाने का असंभव कार्य पूरा कर दिखाया। यह उपलब्धि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज की गई है। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटे, तीन बेटियां और नाती-पोतों का परिवार छोड़ गए हैं।</p>
<p><strong>पशु-पक्षियों की बलि रोकने का किया उत्तम कार्य</strong></p>
<p>डॉ. पापड़ीवाल महाराष्ट्र पशु एवं पक्षी बलि प्रतिबंधक समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने 1990 से 1995 के बीच मांगीर बाबा यात्रा, चिवरी यात्रा आदि कई स्थानों पर जागरूकता अभियान चलाकर भक्तों को पशु-पक्षियों की बलि से रोकने का कार्य किया। लगातार 27 वर्षों तक दिगंबर जैन तीर्थयात्रा समिति, महाराष्ट्र के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जैन समुदाय की विभिन्न समितियों में लंबे समय तक भूमिका निभाई।</p>
<p><strong>नपा में समिति अध्यक्ष और पार्षद रहे</strong></p>
<p>डॉ. पापड़ीवाल पैठण नगरपालिका की विभिन्न समितियों के अध्यक्ष और लगातार 27 वर्षों तक पार्षद रहे। वह पैठण में प्रतिष्ठान कॉलेज के संस्थापक सचिव थे। उन्होंने राजस्थान युवा परिषद के अध्यक्ष का पद भी संभाला। उन्होंने पैठण जैन तीर्थ स्थल पर विभिन्न पदों पर 60 वर्षों तक काम किया।</p>
<p><strong>अंतिम संस्कार अयोध्यानगरी श्मशान घाट पर हुआ</strong></p>
<p>उनकी अंतिम यात्रा शाम चार बजे आर्यनंदी कालोनी, वेदांत नगर स्टेशन रोड से रवाना हुई। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार अयोध्या नगरी श्मशान घाट पर किया गया। इस अवसर पर राजनीतिक, धार्मिक, व्यापारिक, सामाजिक एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े हजारों नागरिक उपस्थित थे।</p>
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		<title>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक भक्ति भाव से गया मनाया भगवान आदिनाथ की जयंती पर जैन मंदिर में हुआ अनुष्ठान </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Apr 2024 16:39:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान श्री आदिनाथ की जयंती पर बड़े जैन मंदिर में बुधवार को महा अनुष्ठान आयोजित कर विश्व शांति जन कल्याण की कामना की गई मंदिर में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक भक्ति भाव से मनाया गया।पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट……. अम्बाह ।भगवान श्री आदिनाथ की जयंती पर बड़े [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान श्री आदिनाथ की जयंती पर बड़े जैन मंदिर में बुधवार को महा अनुष्ठान आयोजित कर विश्व शांति जन कल्याण की कामना की गई मंदिर में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक भक्ति भाव से मनाया गया।<span style="color: #ff0000">पढ़िए अजय जैन की रिपोर्ट…….</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अम्बाह ।</strong>भगवान श्री आदिनाथ की जयंती पर बड़े जैन मंदिर में बुधवार को महा अनुष्ठान आयोजित कर विश्व शांति जन कल्याण की कामना की गई मंदिर में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान का जन्म और तप कल्याणक भक्ति भाव से मनाया गया। इसमें सर्वप्रथम आदिनाथ भगवान की प्रतिमा पर अभिषेक भक्तजनों द्वारा किया गया। इसके बाद रजत कलशों से महामस्तिकाभिषेक किया गया एवं वृहद शांतिधारा की गई।अभिषेक के बाद संगीतमय पूजा पंडित महेंद्र कुमार शास्त्री के मुखारबिंद से कराई गई, जिसमें सभी भक्तों ने झूम-झूम कर एक- एक अर्घ्य श्रीजी के चरणों में समर्पित किया। इस अवसर पर जैन साध्वी विश्रेय श्री माता जी ने कहा कि अनादिकाल से जैन धर्म चल रहा है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-58184" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240403-WA0071.jpg" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240403-WA0071.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240403-WA0071-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240403-WA0071-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240403-WA0071-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240403-WA0071-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240403-WA0071-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240403-WA0071-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240403-WA0071-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/04/IMG-20240403-WA0071-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /> 48 दीपकों से भक्तामर पाठ हुआ आयोजित</strong></p>
<p>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ने सभी को असि, मसि, कृषि आदि की शिक्षा देकर जीवनयापन सिखाया और भारत देश का नाम आदिनाथ भगवान के पुत्र भरत के नाम से भारत देश पडा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती अंजली जैन ने कहा कि आदिनाथ भगवान का जन्म अयोध्या नगरी में हुआ था,तब से हम सभी चैत्र कृष्ण नवमी को अयोध्या के साथ पूरे विश्व में जन्म कल्याणक महोत्सव भक्ति भाव के साथ मनाते हैं। जन्म कल्याणक महोत्सव से पहले संध्या में 48 दीपकों से भक्तामर पाठ आयोजित हुआ। रात्रि में पालना झुलाने के साथ आरती और भजनों का कार्यक्रम हुआ।</p>
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		<title>1आदिनाथ का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव सकल जैन समाज ने मनाया से भक्ति भाव  भगवान का अभिषेक पूजन हुआ धूमधाम से </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Apr 2024 16:36:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आज से लाखों वर्ष पूर्व अयोध्या नगर में जन्म लेकर इच्छाकु वंश की स्थापना करने वाले प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव श्री 1008 आदिनाथ भगवान जी जिनको श्री ऋषभ देव जी भी कहा जाता है उनका जन्म कल्याणक एवं तप कल्याणक महोत्सव पूरे भारत के साथ शिवपुरी में भी विश्व जैन संगठन एवं सकल जैन समाज शिवपुरी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आज से लाखों वर्ष पूर्व अयोध्या नगर में जन्म लेकर इच्छाकु वंश की स्थापना करने वाले प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव श्री 1008 आदिनाथ भगवान जी जिनको श्री ऋषभ देव जी भी कहा जाता है उनका जन्म कल्याणक एवं तप कल्याणक महोत्सव पूरे भारत के साथ शिवपुरी में भी विश्व जैन संगठन एवं सकल जैन समाज शिवपुरी द्वारा मनाया गया ।<span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…….</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>शिवपुरी ।</strong>आज से लाखों वर्ष पूर्व अयोध्या नगर में जन्म लेकर इच्छाकु वंश की स्थापना करने वाले प्रथम तीर्थंकर देवाधिदेव श्री 1008 आदिनाथ भगवान जी जिनको श्री ऋषभ देव जी भी कहा जाता है उनका जन्म कल्याणक एवं तप कल्याणक महोत्सव पूरे भारत के साथ शिवपुरी में भी विश्व जैन संगठन एवं सकल जैन समाज शिवपुरी द्वारा मनाया गया। सकल जैन समाज महापंचायत समिति शिवपुरी के अध्यक्ष दिनेश जैन एवं कार्यअध्यक्ष महेंद्र जैन भैयन ने बताया कि वर्तमान चौबीसी के प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव जी का जन्म आज से लाखों वर्ष पूर्व अयोध्या नगरी में हुआ था उनके पिता का नाम श्री नाभिराय जी एवं माता का नाम मरु देवी जी थाराजा ऋषभ देव जी ने लाखों वर्ष तक अयोध्या नगरी में राज्य किया।</p>
<p>इसके उपरांत एक दिन नीलांजना नाम की नृत्यांगना का नृत्य देखते हुए उसकी मृत्यु हो गई इसी कारण से राजा ऋषभदेव जी को वैराग्य हो गया था और उन्होंने चैत्र कृष्ण नवमी को अपने राज पाठ को ज्येष्ठ पुत्र भरत एवं द्वितीय पुत्र बाहुबली को देकर के 1000 राजाओं के साथ दीक्षा ले ली थी उन्होंने दीक्षा के उपरांत छः माह तक कठोर साधना की इसके उपरांत 6 माह तक उन्होंने मुनि परंपरा चलाने के लिए आहार के लिए विहार किया और एक वर्ष 18 दिन के उपरांत हसितनापुर के राजा श्रेयांस एवं सोम के यहां पर उनका आहार हुआ।</p>
<p><strong> प्राणियों को बताया कल्याण का मार्ग </strong></p>
<p>उन्होंने अनेक वर्षों तक तपस्या करके जैन धर्म का प्रचार प्रसार किया और प्राणियों को कल्याण का मार्ग बताया। अंत में आयु कर्म पूर्ण जानकर उन्होंने कैलाश पर्वत से माघ कृष्ण चतुर्दशी को मोक्ष प्राप्त किया। उनके दोनों पुत्रों ने अनेक वर्षों तक राज्य किया अयोध्या के राजा भरत जी ने भी राज्य करने के उपरांत दीक्षा ले ली भरत जी का जन्म भी चैत्र कृष्ण नवमी को ही हुआ था भरत जी को भगवान आदिनाथ जी ने अयोध्या का राज्य दिया था और द्वितीय पुत्र बाहुबली जी को पोदननपुर का राज दिया था दोनों पुत्रों ने भी अपने पिता का अनुसरण करते हुऎ अपने अंत समय से पूर्व ही दिगंबर दीक्षा ले ली थी और पिता की तरह कठोर तप करके निर्वाण को प्राप्त किया। श्री आदिनाथ भगवान के ज्येष्ठ पुत्र श्री भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम भारत पढ़ा था।</p>
<p><strong> धूमधाम एवं भक्ति भाव से गया मनाया </strong></p>
<p>संपूर्ण भारत के साथ-साथ शिवपुरी में भी भगवान श्री आदिनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक विश्व जैन संगठन एवं सकल जैन समाज शिवपुरी द्वारा अत्यधिक धूमधाम एवं भक्ति भाव से मनाया गया मुख्य कार्यक्रम श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर छत्री रोड शिवपुरी पर हुआ जहां पर प्रातः काल भगवान का अभिषेक पूजन एवं विधान आदि करके भगवान की भक्ति की गई इसके साथ ही मरू देवी महिला मंडल के द्वारा भगवान का पालना झुलाने का कार्यक्रम किया गया और दोपहर में सभी जनालयों में महिला मंडलों के द्वारा भजन कीर्तन का आयोजन किया गया रात्रि काल में सोनू जैन एंड पार्टी आगरा द्वारा श्री आदिनाथ जैनालय शिवपुरी में आरती एवं भजन संध्या का कार्यक्रम रखा गया साथ ही श्री मरूदेवी महिला मंडल द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम में केंद्रिय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री ज्योतिरावदित्य सिंधिया जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुये उनके द्वारा भी सकल जैन समाज शिवपुरी को श्री आदिनाथ भगवान जी के जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव की शुभकामनाएं प्रदान की गई</p>
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