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	<title>अधर्म &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>अधर्म &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>देश भर में जैन पाठशालाएं खोलने की जरूरत : बच्चों को धर्म की शिक्षा नही देंगे तो औरों के लिए उसे अधर्म की शिक्षा देना बहुत ही आसान होगा </title>
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		<pubDate>Thu, 01 Jun 2023 10:12:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हाल में कुछ लोगों के जैन धर्म को छोड़कर अन्य धर्म को अपनाने के मामले सामने आए हैं। इस बारे में जैन संतों का एक स्वर में कहना है कि जब तक जैन पाठशालाओं का विस्तार नहीं होगा, तब तक बच्चों को इस तरह से बरगलाना आसान रहेगा। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; जयपुर। हाल ही [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हाल में कुछ लोगों के जैन धर्म को छोड़कर अन्य धर्म को अपनाने के मामले सामने आए हैं। इस बारे में जैन संतों का एक स्वर में कहना है कि जब तक जैन पाठशालाओं का विस्तार नहीं होगा, तब तक बच्चों को इस तरह से बरगलाना आसान रहेगा। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> हाल ही उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक परिवार ने आरोप लगाया है कि उनके नाबालिग बेटे का कथित धर्म परिवर्तन कराया गया है. परिवार वालों ने बताया कि उनका बेटा घर से पांच बार जिम के नाम पर निकलता था और मस्जिद में नमाज पढ़ने जाता था। बाद में उसके गैजेट्स की जांच की तो पता चला कि वो मुंबई के एक व्यक्ति के संपर्क में आया था और जाकिर नाइक से भी प्रभावित था। लड़के के पिता की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि दो साल पहले ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान उनका बेटा मुंबई के बद्दो नामक युवक के संपर्क में आया था। दोनों में घंटों बातें होने लगीं। बद्दो उसे वाट्सऐप और ई-मेल से धार्मिक सामग्री भेजने लगा। धीरे-धीरे बेटे का ब्रेन वॉश कर दिया गया। जाकिर नाईक की तकरीर सुना करता था। इस्लाम धर्म के बारे में उसके सामने कुछ कहा जाता तो वह चिढ़ जाता था। इससे पहले भी मध्यप्रदेश में इसी तरह का मामला सामने आया था।</p>
<p>विभिन्न जैन मुनियों का कहना है कि जब तक हम बच्चों को जैन पाठशालाओं से नहीं जोड़ेंगे, तब तक ऐसे मामले आते रहेंगे। उनका कहना है कि भौतिक पढ़ाई हेतु कई विद्यालय मौजूद हैं, उनकी संख्या में प्रतिदिन वृद्धि भी होती जा रही है। बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर जीवन में आगे बढ़ने के अवसर भी पा रहे हैं लेकिन उन्हें शांत, निर्मल, स्वच्छ, सुंदर जीवन, तनाव रहित जीवन का भी ज्ञान नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p><strong>कराती हैं दिशा बोध</strong></p>
<p>अपने धर्म के मूलभूत सिद्धांतों की जानकारी बिना कई बच्चे धर्म से विमुख भी होते जा रहे हैं। सभी जैन संतों का एकमत में कहना है कि जैन पाठशाला बच्चों को कई महत्त्वपूर्ण जानकारी देती है। इनमें मुख्य रूप से बाल पीढ़ी के संस्कारों को सुदृढ़ करने की सार्थक कोशिश, जैन तत्व दर्शन के आधारशिला का निर्माण और स्वस्थ एवं संतुलित जीवन क्रम का दिशा बोध कराने के लिए जीवन विज्ञान का प्रशिक्षण शामिल है।</p>
<p><strong>धर्म का ज्ञान देना जरूरी</strong></p>
<p><strong>पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव</strong></p>
<p>सभी का कहना है कि आज के वर्तमान जीवन में आधुनिक आबोहवा व पाश्चात्य संस्कृति से हमारा वातावरण धूमिल हो रहा है। हमारे संस्कारों की तिलांजली दी जा रही है। उनका कहना है कि यदि आप सोचते हैं कि बच्चों को केवल स्कूल भेज देने और किताबें पढ़ाने से ही वे एक अच्छे व्यक्ति बन जाएंगे तो आप गलत हैं। उनके अंदर नैतिक शिक्षा का विकास करने के लिए धर्म का ज्ञान देना अति-आवश्यक हो जाता हैं। इस बात का मुख्यतया ध्यान रखिए कि यदि आप शुरुआत से ही उसे धर्म की शिक्षा नही देंगे तो औरों के लिए उसे अधर्म की शिक्षा देना बहुत ही आसान हो जाएगा।</p>
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		<title>श्रद्धा ने होने से सुख, शांति और समृद्धि में कमीःआचार्य श्री  सुन्दर सागर महाराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 26 Jul 2022 13:46:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[अधर्म]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुन्दर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़ चातुर्मास]]></category>
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					<description><![CDATA[आज का विचार अगर जीवन में दुःख नहीं हो तो धर्म कोई करता ही नहीं न्यूज सौजन्य- कुणाल जैन प्रतापगढ़। आचार्य श्री सुन्दर सागर महाराज ने कहा है कि आज वैराग्य के भाव नहीं हो पा रहे हैं। धर्म, देव,गुरु पर श्रद्धा ही नहीं बन पा रही है। धर्म पर शंका हो रही है। इसीलिए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज का विचार</p>
<blockquote><p><span style="color: #008000">अगर जीवन में दुःख नहीं हो तो धर्म कोई करता ही नहीं</span></p></blockquote>
<p><span style="color: #ff0000">न्यूज सौजन्य- कुणाल जैन</span></p>
<p><strong>प्रतापगढ़।</strong> आचार्य श्री सुन्दर सागर महाराज ने कहा है कि आज वैराग्य के भाव नहीं हो पा रहे हैं। धर्म, देव,गुरु पर श्रद्धा ही नहीं बन पा रही है। धर्म पर शंका हो रही है। इसीलिए परिवार में सुख, शांति और समृद्धि भी कम हो गई है। आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी ने 11 वर्ष के आयु में दीक्षा धारणकर और आत्मा का उपदेश दिया। इतनी कम उम्र में वैराग्य होना पुण्य का ही फल है।</p>
<p>दिगम्बर जैन नया मन्दिर में प्रवचन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि धर्मयात्रा पर जाना हो और अचानक तुम्हारा कार्यक्रम कैंसल हो जाए। लेकिन पूरा परिवार चला जाए। दो दिन बाद खबर आए कि गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। गाड़ी में सवार सभी मरण को प्राप्त हो गए हैं। क्यों तुमने यह सोच लिया कि अगर यात्रा पर नहीं जाते तो यह नहीं होता। यह इसलिए हो क्योंकि तुम आजतक धर्म के प्रति श्रद्धावनत नहीं हुए और न ही तुम धर्म के सिद्धांतों को समझ पाए।<br />
आचार्य श्री सुन्दर सागर महाराज ने आगे कहा कि अगर जीवन में दुःख नहीं हो तो तुम धर्म करो ही नहीं। अगर दुख है तो धर्म के नाम पर जो करना हो, कर लेते हो। जैसा गुरु कहते हैं, वह भी सब कर लेते हो। दान भी दे देते हो। अगर पास में नहीं है तो कहीं से लाकर दोगे। पर जब सुखी हो तो यह नहीं होता है। कई बहाने होते हैं।</p>
<p>यह भी कहा कि दुखों से वही बच सकता है जो अपनी आत्मशक्ति बढ़ाता है। आत्मशक्ति आत्मा की चर्चा करने से बढ़ती है। आत्मा का चिंतन संसार के कार्य करते नहीं हो सकते। आत्मचिंतन तो साधु अवस्था में ही सम्भव है। आचार्य जी ने अंत में कहा कि बात आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी और उनके आध्यात्मिक ग्रंथों की करते हैं पर उन जैसा आचार्य, त्याग और वैराग्य के भाव नहीं बना पा रहे हैं। जब तक उन जैसी श्रद्धा,आस्था नहीं होगी, तब तक उन जैसा नही बन पाएंगे। जैनधर्म चर्चा का चर्या का धर्म है।</p>
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