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	<title>अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>धर्म जागृति संस्थान प्रांत राजस्थान को देश में प्रथम पुरस्कार : पदम जैन बिलाला पुनः प्रांतीय अध्यक्ष नियुक्त  </title>
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		<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 14:08:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान का नवम राष्ट्रीय रजत अधिवेशन जैन तीर्थ स्थान अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ (यूपी) में रविवार को आचार्य श्री वसुनंदी महाराज ससंघ (22 पिच्छी) के पावन सानिध्य में हुआ। इस अधिवेशन में समाजहित के कई बिंदुओं और मुद्दों पर चर्चा की गई। धर्म जागृति संस्थान प्रांत राजस्थान को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान का नवम राष्ट्रीय रजत अधिवेशन जैन तीर्थ स्थान अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ (यूपी) में रविवार को आचार्य श्री वसुनंदी महाराज ससंघ (22 पिच्छी) के पावन सानिध्य में हुआ। इस अधिवेशन में समाजहित के कई बिंदुओं और मुद्दों पर चर्चा की गई। धर्म जागृति संस्थान प्रांत राजस्थान को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। पदन जैन बिलाला को पुनः अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। <span style="color: #ff0000">अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ।</strong> अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान का नवम राष्ट्रीय रजत अधिवेशन जैन तीर्थ स्थान अहिक्षेत्र पार्श्वनाथ (यूपी) में रविवार को आचार्य श्री वसुनंदी महाराज ससंघ (22 पिच्छी) के पावन सानिध्य में हुआ। अधिवेशन में जैन समाज की घटती जनसंख्या, भगवान आदिनाथ के जन्मोत्सव पर अवकाश, जैन हो तो नाम में जैन लिखे, युवाओं को संस्कारित करें। जरूरतमंद को शिक्षा चिकित्सा आदि में सहायता, नारी शक्ति व युवा शक्ति को सशक्त करें आदि विषयों पर गंभीर चिंतन हुआ। संस्थान के संयुक्त महामंत्री संजय जैन बडजात्या कामा एवं कोषाध्यक्ष पंकज जैन लुहाड़िया थड़ी मार्केट के अनुसार आचार्य श्री ने जैसे ही राजस्थान प्रांत का नाम लगातार तीसरे वर्ष पूरे भारत वर्ष में प्रथम पुरस्कार के लिए घोषित किया।</p>
<p>पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। केन्द्रीय कार्यकारिणी के अध्यक्ष योगेश जैन मेरठ, महामंत्री भूपेंद्र जैन दिल्ली, अधिवेशन संयोजक निकुंज जैन दिल्ली, आरसी गर्ग आईपीएस बोलखेड़ा, राजकमल सरावगी ग्रीन नगर आदि ने राजस्थान के प्रतिनिधियों के साथ मंच पर सभी का सम्मान किया। आचार्य श्री ने राजस्थान के प्रांतीय अध्यक्ष और उनकी पूरी टीम के कार्याें की सराहना करते हुए बिलाला को पुनः अगले कार्यकाल के लिए प्रांतीय अध्यक्ष घोषित किया। प्रांतीय अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष ने आचार्य श्री को वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>इनको भी मिला सम्मान </strong></p>
<p>द्वितीय पुरस्कार दिल्ली की उत्तम नगर पश्चिमी दिल्ली को तथा तृतीय पुरस्कार शाहदरा जोन शाखा दिल्ली को प्राप्त हुआ। संस्थान के राजस्थान प्रांत के संरक्षक ओमप्रकाश काला मामाजी, ज्ञानचंद जैन बस्सी, राकेश जैन माधोराजपुरा के अलावा कार्यकर्ता निर्मल पाटोदी, देवेंद्र कासलीवाल, सिद्ध सेठी, नरेन जैन, राजेन्द्र ठोलिया, सोभाग अजमेरा, किरण शिखरचंद जैन, पंकज काला, विनीत जैन, महेश काला, प्रमेश जैन सहित राजस्थान की 34 शाखाओं के श्रेष्ठ कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति देकर सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong>आचार्यश्री ने संस्था को दिया आशीर्वाद </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने संस्थान को अपने उद्देश्य के अनुरूप धर्म प्रभावना और जैन समाज हित के कार्य करते रहने के लिए आशीर्वाद दिया। अधिवेशन में युवा व महिला प्रकोष्ठ का भी राष्ट्रीय स्तर पर गठन किया गया। जिसमें राजस्थान के बहुत से प्रतिनिधियों को स्थान मिला है। संचालन मनोज जैन शास्त्री और संजय जैन बडजात्या कामा ने किया।</p>
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		<title>जैन उपासना स्थलों पर कब्जा गंभीर चिंता का विषय: सामूहिक प्रयासों से समस्या का समाधान खोजे जाएं </title>
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		<pubDate>Wed, 18 Jun 2025 08:02:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के उपासना स्थलों पर बलात कब्जे की घटनाओं गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। वास्तव में यह बहुत खेदजनक भी है कि जैन तीर्थ और धर्मस्थलों पर अतिक्रमण किए जा रहे हैं। आचार्यश्री वसुनंदीजी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से संचालित संस्था अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान (पंजीकृत) के राष्ट्रीय महामंत्री इंजीनियर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के उपासना स्थलों पर बलात कब्जे की घटनाओं गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। वास्तव में यह बहुत खेदजनक भी है कि जैन तीर्थ और धर्मस्थलों पर अतिक्रमण किए जा रहे हैं। आचार्यश्री वसुनंदीजी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से संचालित संस्था अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान (पंजीकृत) के राष्ट्रीय महामंत्री इंजीनियर भूपेंद्र जैन ने बताया कि जैन समाज एक शांतप्रिय समाज है। जैन ने इन घटनाओं को चिंतनीय बताया है। <span style="color: #ff0000">नईदिल्ली से पढ़िए, मनोज जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> जैन समाज के उपासना स्थलों पर बलात कब्जे की घटनाओं गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। वास्तव में यह बहुत खेदजनक भी है कि जैन तीर्थ और धर्मस्थलों पर अतिक्रमण किए जा रहे हैं। आचार्यश्री वसुनंदीजी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से संचालित संस्था अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान (पंजीकृत) के राष्ट्रीय महामंत्री इंजीनियर भूपेंद्र जैन ने बताया कि जैन समाज एक शांतप्रिय समाज है। जो अहिंसा परमो धर्मः एवं जियो और जीने दो के सिद्धांत पर अपना व्यवसाय आदि कर जीवनयापन करती है। कुछ समय से देखने में आ रहा है कि इस शांतप्रिय समाज के उपासना स्थलों पर अन्य समाज के आसमाजिक तत्व बलात कब्जा कर माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। जो जैन समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। आज के इस युग में यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है कि कई स्थानों पर अन्य समुदायों के लोग जैन मंदिरों और तीर्थस्थलों पर अवैध कब्जा कर रहे हैं। यह केवल धार्मिक स्थलों पर अतिक्रमण नहीं है, बल्कि यह हमारी आस्था, विरासत और पहचान पर सीधा आघात है। जैन मंदिर केवल पूजा के स्थान नहीं हैं। वे हमारे सांस्कृतिक इतिहास, आध्यात्मिक मूल्यों और अहिंसा व सत्य पर आधारित जीवन शैली के प्रतीक हैं। इन पर किसी भी प्रकार का कब्ज़ा या परिवर्तन हमारी आत्मा को ठेस पहुंचाने जैसा है।</p>
<p>अब समय आ गया है कि जैन समाज एकजुट होकर, शांतिपूर्ण और कानूनी तरीकों से अपनी धार्मिक संपत्तियों की रक्षा के लिए कदम उठाना चाहिए। हम सभी का कर्तव्य है कि हम अपनी विरासत की रक्षा करें, आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखें और स्पष्ट रूप से यह संदेश दें कि जैन धर्म की संपत्ति केवल जैन समुदाय की है और रहेगी। हम सभी को एकजुट होकर शासन-प्रशासन द्वारा कब्जा आदि रोकने के लिए प्रयास करने होंगे। एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और अपनी आस्था और पहचान की रक्षा करने के लिए आइए, हम सब साथ आएं।</p>
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		<title>जैन उपनाम को अपनाने का समाज से आग्रह : धर्म जागृति मंच ने की अपील </title>
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		<pubDate>Fri, 06 Jun 2025 16:52:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत सरकार के आंकड़ों में जैन समाज की संख्या काफी कम अंकित है । इसका मूल कारण जैन समाज बंधुओं द्वारा स्वयं के नाम के साथ जैन न लिखते हुए अपने गोत्र आदि लिखना है। अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान की ओर से अपील की गई है। नईदिल्ली से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत सरकार के आंकड़ों में जैन समाज की संख्या काफी कम अंकित है । इसका मूल कारण जैन समाज बंधुओं द्वारा स्वयं के नाम के साथ जैन न लिखते हुए अपने गोत्र आदि लिखना है। अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान की ओर से अपील की गई है। <span style="color: #ff0000">नईदिल्ली से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> भारत सरकार के आंकड़ों में जैन समाज की संख्या काफी कम अंकित है । इसका मूल कारण जैन समाज बंधुओं द्वारा स्वयं के नाम के साथ जैन न लिखते हुए अपने गोत्र आदि लिखना है। दिगंबराचार्य वसुनंदी जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से संचालित संस्था अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान के महामंत्री इंजीनियर भूपेंद्र जैन ने बताया कि सरकार द्वारा की जाने वाली जनगणना में हमारे अधिकांशतः भाई बंधु जैन नहीं लिखाते बल्कि जैन के स्थान पर अपना गोत्र आदि लिखाते हैं। जिससे सरकारी आंकड़ों में जैन बंधुओं की संख्या हकीकत से काफी कम अंकित है। आगामी जनगणना में हम सभी को धर्म और जाति के खाने में जैन अवश्य लिखना होगा।</p>
<p>इंजीनियर भूपेंद्र जैन के मुताबिक बहुतायत संख्या में हमारे भाई बंधु अपने नाम के साथ जैन न लिखते हुए गोत्र आदि लिखते हैं। जो कि किसी भी दृष्टि से उचित नहीं हैं। हम अपने सम्मानित जैन समुदाय के सभी सदस्यों से विनम्रतापूर्वक और गर्व के साथ आग्रह करते हैं कि वे अपने नाम में &#8220;जैन&#8221; उपनाम जोड़ने पर विचार करें। यह केवल एक नाम नहीं, बल्कि हमारी एकता, शक्ति और सांझा विरासत का प्रतीक है।</p>
<p><strong>सशक्तिकरण के लिए एक जुटता दिखानी होगी</strong></p>
<p>आज के विविधतापूर्ण समाज में, जहाँ अन्य समुदाय अपनी सांस्कृतिक पहचान और एकजुटता से सशक्त होते जा रहे हैं। वहीं हम जैन लोग उपजातियों में बंटे होकर सशक्त नहीं हो पा रहे हैं। हमें सशक्तिकरण के लिए एक जुटता दिखानी होगी । &#8220;जैन&#8221; उपनाम को अपनाना हमें एकजुट होकर गर्व के साथ यह दर्शाने का अवसर देता है कि हम उस दर्शन के अनुयायी हैं जो अहिंसा, सत्य और करुणा पर आधारित है। यह हमारी एकता को प्रकट करता है। हमारे पूर्वजों को सम्मान देता है और समाज में हमारी उपस्थिति को और सशक्त बनाता है।</p>
<p><strong>संस्था की ओर से जारी किया पत्र</strong></p>
<p>हम सभी समाज बंधु एकता और पहचान के इस कदम में एकजुटता के साथ आंगे आएँ। &#8220;जैन&#8221; उपनाम को अपनाकर हम न केवल यह बताते हैं कि हम कौन हैं, बल्कि यह भी कि हम किन अमूल्य मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं। धर्म जागृति मंच के राष्ट्रीय महामंत्री इंजीनियर भूपेंद्र जैन ग्रीनपार्क दिल्ली ने संस्था की ओर से जारी पत्र में सभी साधर्मी बंधुओं से अपने नाम और गोत्र के साथ जैन लिखने की अपील की है।</p>
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