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	<title>अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>जैन समाज के बच्चों को साधु-साध्वियों का मिला सान्निध्य : श्रेष्ठ संस्कारों से जुड़ने के लिए बाल पदयात्रा ने रचा इतिहास  </title>
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		<pubDate>Mon, 13 Oct 2025 13:22:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज के बच्चे सुसंस्कारित हों। उन्हें श्रेष्ठ संस्कार मिलें। वे मित व्ययी बनें और अधिकांश समय वे सेवा कार्यों में लगाएं। इस उद्देश्य से रविवार को तिलकनगर स्थिति तिलकेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर से स्कूली बच्चों की पदयात्रा निकाली गई। इंदौर से पढ़िए, यह संकलित और साभार खबर&#8230;. इंदौर। जैन समाज के बच्चे सुसंस्कारित हों। उन्हें [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज के बच्चे सुसंस्कारित हों। उन्हें श्रेष्ठ संस्कार मिलें। वे मित व्ययी बनें और अधिकांश समय वे सेवा कार्यों में लगाएं। इस उद्देश्य से रविवार को तिलकनगर स्थिति तिलकेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर से स्कूली बच्चों की पदयात्रा निकाली गई। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह संकलित और साभार खबर&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन समाज के बच्चे सुसंस्कारित हों। उन्हें श्रेष्ठ संस्कार मिलें। वे मित व्ययी बनें और अधिकांश समय वे सेवा कार्यों में लगाएं। इस उद्देश्य से रविवार को तिलकनगर स्थिति तिलकेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर से स्कूली बच्चों की पदयात्रा निकाली गई। इसमें उनके साथ दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची और अन्य परिजन सजेधजे परिधानों में शामिल हुए। आचार्यश्री नयचंद्रसागर जी महाराज एवं गणिवर्यश्री अजीतचंद्रसागर जी महाराज सहित 20 से अधिक साधु-साध्वियों ने पदयात्रा में शामिल होकर बच्चों का हौसला बढ़ाया। बच्चों ने संतों की निश्राा में श्रेष्ठ संस्कारों से जुड़ने, दीपोत्सव पर्व की खुशियों को अपने आसपास की झुग्गी-बस्तियों और जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने, मोबाइल का कम से कम उपयोग करने और अपनी पॉकेट मनी से मायूस चेहरों की खुशियों लौटाने के संकल्प लिए। आदेश्वर जैन मंदिर में बालिकाओं का दूध-पानी और गुलाब जल के मिश्रण से पाद प्रक्षालन किया गया।</p>
<p><strong>झांकियों ने मन मोह लिया </strong></p>
<p>पदयात्रा तिलकनगर मेनरोड, रविंद्रनगर, पलासिया चौराहा, एमजी रोड, रीगल तिराहा, जिला न्यायालय, राम प्याउ चौराहा, कृष्णपुरा, राजबाड़ा चौक होते हुए पीपली बाजार पहुंची, जहां सभी जैन श्री संघों की ओर से बच्चों और आयोजकों का स्वागत किया गया। पदयात्रा में शामिल बच्चे साफा बांधे, सूट-बूट पहनकर विंटेज कार, बग्घी और खुले वाहनों में सवार थे। यात्रा में मुंबई का बैंड दल और पांच तीर्थ स्थलों की झांकियों ने सभी का मनमोह लिया।</p>
<p><strong>बच्चों ने धर्म स्थलों के दर्शन किए</strong></p>
<p>पदयात्रा मार्ग में बच्चों और पदयात्रियों ने नागेश्वर पार्श्वनाथ, जीरावाला पार्श्वनाथ मंदिर, नाकोड़ा पार्श्वनाथ, अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर तथा पार्श्वनाथ मंदिर के दर्शन किए। यात्रा संयोजक सोनल कोठारी, साधना जैन, विकास जैन, शिल्पा जैन ने यात्रा का मार्गदर्शन किया। सभी समूहों के लिए संघ पति बनाए गए थे। जिन्हें बच्चों का मार्गदर्शन करने का जिम्मा सौंपा गया था। गणिवर्य कीर्ति रत्नसागर जी महाराज ने इस अवसर पर आशीर्वचन देते हुए संबोधित किया। इस अवसर पर समाजसेवी देवेंद्र जवेरी, दिलीप भाई शाह, अक्षय सुराना, दिलीप मंडोवरा, विकास जैन सहित सभी सहयोगियों का भी बहुमान किया गया।</p>
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		<title>पूजन, अभिषेक के निकला ध्वज जुलूस : शिरपुर अंतरिक्ष पार्श्वनाथ में ध्वजारोहण  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Mar 2023 08:38:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर(राजेश जैन दद्दू)। मंदिर के द्वार खुलने के बाद शिरपुर के अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर में सैकड़ों वर्षों की परंपरानुसार बुधवार सुबह आचार्य श्री विद्यासागर जी के आशीष से शिरपुर में विराजमान निर्यापक श्रमण मुनिश्री योगसागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में ध्वजारोहण हुआ। मंदिर में प्रातः 6.30 बजे से अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम पूजन पश्चात आचार्य [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इंदौर(राजेश जैन दद्दू)।</strong> मंदिर के द्वार खुलने के बाद शिरपुर के अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर में सैकड़ों वर्षों की परंपरानुसार बुधवार सुबह आचार्य श्री विद्यासागर जी के आशीष से शिरपुर में विराजमान निर्यापक श्रमण मुनिश्री योगसागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में ध्वजारोहण हुआ।</p>
<p>मंदिर में प्रातः 6.30 बजे से अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम पूजन पश्चात आचार्य श्री का पूजन हुआ। इसके बाद मुनि संघ के प्रवचन हुए। प्रवचन के बाद निकलंक भवन से मुनि संघ के सानिध्य में ध्वज जुलूस मंदिर तक पहुंचा और ध्वजारोहण हुआ।</p>
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		<title>श्री दिगम्बर जैन अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर : आंदोलन में शामिल होने के लिए सकल दिगम्बर जैन समाज को आह्वान </title>
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		<pubDate>Tue, 14 Mar 2023 07:09:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शिरपुर के अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ताले खोलने के आदेश, उसके बावजूद नहीं सुलझा मामला। श्वेतांबर जैन समाज ने यहां अपने ताले लगा दिए हैं, जिससे दिगंबर समाज में रोष है। इसी को लेकर यहां आंदोलन की शुरुआत की जा रही है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की विशेष रिपोर्ट&#8230; इंदौर। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>शिरपुर के अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे ताले खोलने के आदेश, उसके बावजूद नहीं सुलझा मामला। श्वेतांबर जैन समाज ने यहां अपने ताले लगा दिए हैं, जिससे दिगंबर समाज में रोष है। इसी को लेकर यहां आंदोलन की शुरुआत की जा रही है।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए राजेश जैन दद्दू की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> शिरपुर के भगवान पार्श्वनाथ के मंदिर को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के बीते 22 फरवरी 2023 के अंतरिम आदेश के अनुसार को खोल दिया गया है और श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदाय के लोगों को दर्शन करने का अधिकार दिया गया है। अंतरिम आदेश में इसके लिए कोई समय सीमा नहीं दी गई है लेकिन पूजन अभिषेक के लिए 3-3 घंटे का स्लॉट दिया गया है। बीते 11 मार्च को पुलिस प्रशासन ने श्वेतांबर जैन समाज के प्रतिनिधि को मंदिर की चाबी सौंपी, लेकिन पुलिस ने दिगंबर जैन समाज से कोई अनुमति नहीं ली। श्वेतांबर समाज ने सरकारी ताले हटाकर खुद के ताले लगवा लिए हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश की अवमानना करते हुए लेप के नाम पर 50 से 60 दिनों तक दिगम्बर समाज को मंदिर प्रवेश और दर्शन पूजा के कोर्ट द्वारा प्रदत्त दिगंबर जैन समाज के अधिकारों को श्वेताम्बर समाज द्वारा छीना जा रहा है।</p>
<p><strong>यह भी था निर्णय</strong></p>
<p>कोर्ट द्वारा यह भी निर्णय दिया जा चुका है कि अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर में 16 अन्य वेदियां दिगंबर जैनियों की हैं। फिर भी उन वेदियों दर्शन पूजन से रोका जा रहा है, जिनकी पूजा और अभिषेक का पूरा अधिकार दिगंबरों को है।</p>
<p><strong>सौंपा ज्ञापन</strong></p>
<p>बीते 13 मार्च को जैन समाज के प्रतिनिधियों द्वारा शिरपुर पुलिस स्टेशन में ज्ञापन सौंपकर तदुपरांत मंदिर जी का ताला खोलने के लिए धरना आंदोलन किया गया। तदुपरांत एसपी और डीएसपी से मीटिंग करके दिगम्बर जैन समाज का पक्ष रखा गया। पुलिस के कहने पर श्वेतांबर समाज से समन्वय मीटिंग करने का प्रयास किया गया लेकिन श्वेताम्बर समाज ने सहकार्य नहीं किया और मीटिंग के लिए नहीं आए।</p>
<p><strong>आंदोलन की शुरुआत</strong></p>
<p>दिगम्बर समाज का अधिकार सुरक्षित रखने के लिए 14 मार्च सुबह प्रातः 10.00 बजे को दिगम्बर समाज अंतरिक्ष पार्श्वनाथ क्षेत्र पर धरना आंदोलन की शुरुआत कर रहे हैं। हमारे पूर्वजों ने अंतरिक्ष पार्श्वनाथ की इसी प्रकार आन्दोलन करके रक्षा की है। पूर्वजों द्वारा सुरक्षित रखी गई इस विरासत की सुरक्षा के लिए महिलाओं, पुरुषों, युवाओं, लड़कियों और बच्चों सभी को इस आंदोलन में आना होगा। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि हम अपने तीर्थ रक्षा के लिए अपने अधिकार के लिए जैन एकता के साथ आंदोलन को सब की सहभागिता से सफल बनाना है। परम् पूज्य महामहिम संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज जी के आशीर्वाद के साथ ही निर्यापक श्रमण मुनि श्री योगसागरजी महाराज ससंघ शिरपुर की ओर विहार कर रहे हैं एवं उनके दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा। यह आंदोलन ऐलक श्री 105 सिद्धांतसागरजी महाराज के मार्गदर्शन में हो रहा है।</p>
<p><strong>इसके चलते संस्थान पर ताला लगा रहा</strong><br />
शिरपुर जैन में विश्व प्रसिद्ध अंतरिक्ष पार्श्वनाथ मंदिर है। इस मंदिर को लेकर दिगंबर जैन और श्वेतांबर जैन संप्रदायों के बीच विवाद था। नतीजतन, इस मंदिर को 22 अप्रैल, 1981 को बंद कर दिया गया था। भक्तों को एक छोटी सी खिड़की से दर्शन लेने पड़ते थे। अदालती लड़ाई चल रही थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। आखिरकार 22 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के कपाट खोलने और मूर्ति पर रंग लगाने का आदेश दिया।</p>
<p><strong>जानें अंतरिक्ष पार्श्वनाथ के बारे में</strong></p>
<p>यह क्षेत्र शिरपुर में है, मुम्बई-नागपुर रेलमार्ग पर अकोला से 70 कि.मी. दूर है। ग्राम के मध्य में अंतरिक्ष पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र है। यहीं पर राजा ऐल श्रीपाल का कुष्ठ रोग यहां के कुएंके जल में स्नान करने से ठीक हुआ था। इस कुएं में से ही उसने अन्तरिक्ष पार्श्वनाथकी मूर्ति निकाली थी और राजा ने यहीं पर मंदिर का निर्माण कराया था। कहा जाता है कि इस मंदिर के शिखर में ऐसी ईंटों का प्रयोग किया गया था, जो जल में तैरती हैं। यह मंदिर अष्टकोण आकार का है और अत्यन्त कलापूर्ण है। इस पाषाण मंदिर के नीचे ईंटों का चबूतरा बना। ये ईंटें भी आकार में बड़ी और अधिक प्राचीन हैं। लगता है, वर्तमान पाषाण मंदिर के निर्माण के पहले यहां ईंटों का कोई प्राचीन मंदिर था। यह मंदिर गांव के बाहर पश्चिम की ओर वृक्षों की पंक्ति के मध्य खड़ा हुआ है। इस मंदिर में पूर्व, उत्तर और दक्षिण की ओर पत्थर के द्वार बने हुए हैं। द्वार के सिरदल पर पद्मासन दिगम्बर मूर्तियां बनी हुई हैं। इसी प्रकार द्वारों के दोनों ओर खड्गासन दिगम्बर जैन मूर्तियाँ और आम्रपत्रों से वेष्टित कलशों का अंकन बड़ा भव्य प्रतीत होता है। दक्षिण द्वार पर तीर्थंकरों के जीवन से संबंधित अत्यन्त कलापूर्ण चित्रांकन है।</p>
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