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	<title>अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री प्रमाणसागर ससंघ का पिच्छिका परिवर्तन समारोह रविवार को : मुनिश्री ने अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन में सदस्यों को धन की सार्थकता का पाठ पढ़ाया </title>
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		<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 09:23:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन समारोह विद्या प्रमाण गुरुकुलम् में रविवार दोपहर एक बजे से रखा गया है। भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230; भोपाल। आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन समारोह विद्या [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन समारोह विद्या प्रमाण गुरुकुलम् में रविवार दोपहर एक बजे से रखा गया है। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन समारोह विद्या प्रमाण गुरुकुलम् में रविवार दोपहर एक बजे से रखा गया है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि यह चातुर्मास का सबसे अंतिम कार्यक्रम होता है। जिसमें कोई बोली नहीं होती संयमी श्रावकों द्वारा यह उपकरण जीवदया की दृष्टि से मुनिमहाराज के हाथों में दिया जाता है तथा मूनिराज भी अपनी पुरानी पिच्छिका को सुधी श्रावक परिवार को सौंप देते हैं। जिससे उनके घर परिवार में अहिंसा के भाव जीवित रहें। प्रातःकालीन बेला में मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने गुणायतन के अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन में आए हुए सभी सदस्यों को सफलता के साथ-साथ धन की सार्थकता का पाठ भी पढ़ाया। मुनि श्री ने कहा कि श्रद्धा भावना और संस्कार से ही समर्पण का भाव जगता है। देश में विद्यालयों की कमी नहीं, लेकिन जितने भी केंद्र हैं। वहां सिर्फ लर्निंग और अर्निंग की बात सिखाई जाती है। पढ़ो और पैसा जोड़ो लेकिन, गुरुकुलम् में केवल लर्निंग और अर्निंग की नहीं,लिविंग का पाठ पढ़ाने की आवश्यकता है। जिससे उनके अंदर के संस्कार जीवित रहें।</p>
<p><strong>यह मात्र ऊपर का चोला है यथार्थ को पहचानिए</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जीवन तो सभी को मिलता है,लेकिन जीने का तरीका सभी का अलग अलग होता है। जन्म की दृष्टि तो सभी का जीवन समान है लेकिन, अंत की दृष्टि से सभी का जीवन समान नहीं होता। उन्होंने कहा कि भौतिक जीवन के इस नाम और रूप से ऊपर उठकर अपने जीवन को देखिये तथा अपने भीतर की संभावनाओं को खुद टटोलिए। यह जो नाम मिला है वह मात्र व्यवहार चलाने का एक साधन है तथा यह रूप जो सामने दिख रहा है। यह मात्र ऊपर का चोला है यथार्थ को पहचानिए। मैं हूं कौन ? मेरा यह नाम और रूप तो अस्थायी है, लेकिन मेरा जो स्वरूप है वह असीम अनंत, अविनाशी और शाश्वत है। उसके भीतर निहित संभावनाएं छिपी हुई है। जिसे हम नहीं पहचान पाते। हम तो अपनी पूरी ताकत को अपने नाम और रूप में लगा देते हैं।</p>
<p><strong>अपने भीतर की क्षमताओं को पहचानो</strong></p>
<p>एक कथानक में मुनिश्री ने कहा कि भक्त भगवान के पास पहुंचा। मुझे इस धरती का सबसे बड़ा भाग्यवान बना दो। कहानी के भगवान हंसे और कहा कि तेरे अंदर तो भगवान बनने की क्षमता है तू भाग्यवान बनने की बात क्यों कर रहा है? बस तेरे अंदर जो है उसी को पहचान लेगा तो तू भाग्यवान नहीं भगवान बन जाएगा। रहा सवाल भाग्यवान बनने का तो वह तो बहुत प्रबल है तभी तो तुझे अच्छा शरीर, अच्छी बुद्धि , अच्छे संस्कार, अच्छा परिवार, धन संपन्नता, सबकुछ अच्छा ही अच्छा तो मिला है। अपने भीतर की क्षमताओं को पहचान लेगा तो तेरा जीवन भी पामर से परमेश्वर, कंकर से शंकर, नर से नारायण, पतित से पावन हो जाएगा। अपने भीतर की भगवत्ता को पहचानो और अभिव्यक्त करो।</p>
<p><strong>जुड़ो न जोड़ो, जोड़ा तो छोड़ो </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि आज पर्सनालटी डवलपमेंट के लिए तो तरह-तरह के शोज तथा कार्यक्रम किए जाते हैं, लेकिन अपनी आत्मा को संवारने की कोई कोशिश ही नहीं करता? दृष्टि में बदलाव करके अपने आत्मतत्व को पहचानो और अपने मोक्ष मार्ग को पुष्ट करने का एक मात्र लक्ष्य बनाइये। यदि ऐसा दृष्टिकोण बना लोगे तो आपके अंदर के अभिमान, अंदर की आसक्ति के साथ भोगा शक्ति मिटेगी। जिससे परिणाम निर्मल होंगे। जीवन में अभी तक जोड़ा ही जोड़ा है और ऐसे ही एक दिन सब छोड़ देंगे। गुरुदेव ने हायकू के माध्यम से संदेश दिया है कि जुड़ो न जोड़ो, जोड़ा तो छोड़ो जुड़ो तो बेजोड़ जोड़ो जुड़ो आत्मा से, परमात्मा से तथा धर्म से जो तुमने जोड़ा है। अभी तक जो तुमने जोड़ा है, वह सब यही छूट जाना है। अपने भीतर के स्वरूप को पहचानिए और अपने नरभव को सफल बनाइए।</p>
<p><strong>भोपाल में खुलने जा रहे विद्या प्रमाण गुरुकुलम् में दान दिया</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि चातुर्मास का अंतिम कार्यक्रम पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम दोपहर एक बजे से विद्याप्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में आयोजित है। विगत दिनों गुणायतन का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित हुआ। जिसमें न केवल भारत से वल्कि भारत के बाहर विदेशों से जुड़े गुणायतन के कार्यकर्ता उपस्थित हुए तथा उन्होंने दिल खोलकर भोपाल में खुलने जा रहे विद्या प्रमाण गुरुकुलम् में दान दिया तथा एक एक प्रोजेक्ट को अपने हाथों में लिया। इस अधिवेशन में गुणायतन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों के अलावा मध्यभारत क्षेत्र तथा भोपाल गुणायतन से जुड़े सभी सदस्यों ने भाग लिया। विशेषकर शिकागो अमेरिका, दुवई, तथा मुम्बई, दिल्ली, कोलकाता जैसे महानगरों एवं आगरा, जयपुर, इंदौर तथा आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित थे।</p>
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		<title>भोपाल में शिक्षा, समाज और साधना के क्षेत्र में गुणायतन गौरव कार्यक्रम का आगाज : विद्या प्रमाण गुरुकुलम बनेगा देश के जैन बालकों का प्रेरणा केंद्र, 7 से 9 नवंबर तक तीन दिवसीय आयोजन </title>
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		<pubDate>Sun, 02 Nov 2025 14:36:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के सान्निध्य में 7 से 9 नवंबर तक तीन दिवसीय “गुणायतन गौरव कार्यक्रम” आयोजित होगा। विद्यासागर गुरुदेव की प्रेरणा से स्थापित “विद्या प्रमाण गुरुकुलम्” अब जैन बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र बनकर उभर रहा है। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट… भोपाल। संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भोपाल में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के सान्निध्य में 7 से 9 नवंबर तक तीन दिवसीय “गुणायतन गौरव कार्यक्रम” आयोजित होगा। विद्यासागर गुरुदेव की प्रेरणा से स्थापित “विद्या प्रमाण गुरुकुलम्” अब जैन बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र बनकर उभर रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज की प्रेरणा से गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने गत वर्ष इंदौर चातुर्मास में जैन समाज के बालकों और युवाओं के लिए एक आदर्श गुरुकुलम् की स्थापना का संकल्प दिया था। उसी प्रेरणा के परिणामस्वरूप भोपाल के अवधपुरी स्थित श्री विद्यासागर इंस्टीट्यूट में “विद्या प्रमाण गुरुकुलम्” की स्थापना की गई, जहाँ समूचे भारतवर्ष से 180 प्रतिभावान बच्चों का चयन कर उन्हें आवास, शिक्षा और संस्कार की समग्र व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है।</p>
<p>मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने इन बालकों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के उद्देश्य से 2025 का चातुर्मास भी यहीं करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बच्चों में यह भावना जगाई कि वे केवल संस्कारित नहीं बल्कि देश के “आइकॉन” बनें जो समाज और राष्ट्र दोनों का गौरव बढ़ाएँ।</p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 7 नवंबर को गुरुकुलम् के विभिन्न प्रकल्पों का शिलान्यास, 8 नवंबर को गुणायतन का अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन, तथा 9 नवंबर को मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर महाराज ससंघ की उपस्थिति में पिच्छिका परिवर्तन समारोह संपन्न होगा। इस अवसर पर देश-विदेश से गुणायतन परिवार की प्रमुख विभूतियाँ उपस्थित रहेंगी जो ज्ञान और संसाधनों से गुरुकुलम् को समृद्ध करेंगी।</p>
<p>3 नवंबर को चूना भट्टी, भोपाल में मुनि श्री प्रमाणसागर और मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज ससंघ का मंगल मिलन हुआ। इसके अतिरिक्त सोमवार, 4 नवंबर को बाबड़िया कला में साधु वाटिका का शिलान्यास प्रवचन उपरांत किया जाएगा। गुणायतन परिवार ने समस्त जैन समाज से इस स्वर्णिम आयोजन में भाग लेने का आह्वान किया है।</p>
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