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	<title>श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन लखनऊ में सम्मानित : उपाध्याय विहसंत सागर जी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ भव्य ज्योतिष सम्मेलन </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:22:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ के महावीर दिगंबर जैन मंदिर, आशियाना में आयोजित तंत्र, मंत्र, यंत्र एवं ज्योतिष सम्मेलन में ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ. हुकुमचंद जैन का सम्मान किया गया। सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा, ज्योतिष और आध्यात्मिक साधना पर मंथन हुआ। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट। मुरैना/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित महावीर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>लखनऊ के महावीर दिगंबर जैन मंदिर, आशियाना में आयोजित तंत्र, मंत्र, यंत्र एवं ज्योतिष सम्मेलन में ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ. हुकुमचंद जैन का सम्मान किया गया। सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा, ज्योतिष और आध्यात्मिक साधना पर मंथन हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/लखनऊ।</strong> उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर, आशियाना में परम पूज्य मेडिटेशन गुरु उपाध्याय 108 श्री विहसंत सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में तंत्र, मंत्र, यंत्र एवं ज्योतिष सम्मेलन भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में देशभर से आए ज्योतिषाचार्यों, वास्तु विशेषज्ञों एवं विद्वानों ने भारतीय ज्योतिष की उपयोगिता, वैज्ञानिक आधार एवं सामाजिक भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।</p>
<p><strong>डॉ. हुकुमचंद जैन का हुआ सम्मान</strong></p>
<p>सम्मेलन के प्रमुख आकर्षण के रूप में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ. हुकुमचंद जैन (ग्वालियर) को जैन मंदिर आशियाना समिति द्वारा तिलक, माल्यार्पण, दुपट्टा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित विद्वानों एवं श्रद्धालुओं ने इसे भारतीय ज्योतिष परंपरा के प्रति समर्पित विद्वानों के योगदान का सम्मान बताया।</p>
<p><strong>भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुआ मंथन</strong></p>
<p>सम्मेलन में तंत्र, मंत्र, यंत्र, ज्योतिष, ध्यान, आध्यात्मिक साधना एवं जीवन प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति की उन प्राचीन परंपराओं पर प्रकाश डाला, जो व्यक्ति के मानसिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं।</p>
<p><strong>उपाध्याय विहसंत सागर जी महाराज का प्रेरक संदेश</strong></p>
<p>उपाध्याय 108 श्री विहसंत सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि आत्मचिंतन, संयम, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक साधना जीवन को सफल एवं संतुलित बनाती है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्योतिष केवल भविष्य जानने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित और उद्देश्यपूर्ण बनाने का मार्गदर्शक भी है।</p>
<p><strong>“ज्योतिष जीवन को दिशा देने वाली टॉर्च है”</strong></p>
<p>अपने संबोधन में डॉ. हुकुमचंद जैन ने कहा कि “ज्योतिष व्यक्ति का भाग्य बदलने का दावा नहीं करता, बल्कि उसे सही दिशा दिखाने का कार्य करता है। जिस प्रकार अंधेरे में टॉर्च सुरक्षित मार्ग दिखाती है, उसी प्रकार ज्योतिष जीवन की संभावित परिस्थितियों का पूर्व संकेत देकर सही निर्णय लेने में सहायता करता है।”</p>
<p><strong>अनेक विद्वानों की रही सहभागिता</strong></p>
<p>सम्मेलन में जैन ज्योतिषाचार्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि जैन गुरुजी (दिल्ली), महामंत्री डॉ. हुकुमचंद जैन (ग्वालियर), राजीव जैन, सुशील जैन, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त युवा विद्वान एवं कवि विकर्ष शास्त्री सहित अनेक विद्वान, समाजसेवी, धर्मप्रेमी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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		<title>इंदौर प्रवेश के साथ मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज को मिली नई गौरवपूर्ण उपलब्धि : मध्यप्रदेश शासन ने दिया राजकीय अतिथि का दर्जा </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:20:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर में मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के मंगल प्रवेश के साथ मध्यप्रदेश शासन ने उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया है। जैन समाज ने इसे संत परंपरा और तप-संयम के सम्मान का ऐतिहासिक निर्णय बताया। पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट। इंदौर।बसर सेठ हुकुमचंद जी एवं लोकमाता देवी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर में मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के मंगल प्रवेश के साथ मध्यप्रदेश शासन ने उन्हें राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया है। जैन समाज ने इसे संत परंपरा और तप-संयम के सम्मान का ऐतिहासिक निर्णय बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राजेश जैन दद्दू की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong>बसर सेठ हुकुमचंद जी एवं लोकमाता देवी अहिल्याबाई की धर्मनगरी इंदौर में निर्यापक तीर्थरक्षक मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के मंगल प्रवेश के साथ एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मध्यप्रदेश शासन ने पूज्य गुरुदेव को राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया है।</p>
<p><strong>शासन ने दिया विशेष सम्मान</strong></p>
<p>मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूज्य मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज को राजकीय अतिथि का दर्जा प्रदान किया गया है। इसे संत परंपरा, तप, त्याग और संयममय जीवन के प्रति शासन की श्रद्धा एवं सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p><strong>संत परंपरा का सम्मान</strong></p>
<p>सकल दिगम्बर जैन समाज धर्म प्रभावना समिति की अध्यक्ष सपना मनीष गोधा ने कहा कि यह सम्मान केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित एवं समाजहित में समर्पित संत जीवन के प्रति सार्वजनिक सम्मान है। यह अभिनंदन संपूर्ण तपस्वी परंपरा का सम्मान है, जिसने सदैव समाज को संस्कार, सदाचार, संयम और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाया है।</p>
<p><strong>चातुर्मास की गरिमा हुई और बढ़ी</strong></p>
<p>धर्म प्रभावना समिति ने कहा कि वर्ष 2026 का पूज्य गुरुदेव का वर्षायोग चातुर्मास तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय, छत्रपति नगर स्थित दलालबाग, इंदौर में आयोजित होना है। ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर राजकीय अतिथि का सम्मान इस चातुर्मास की गरिमा को और अधिक प्रतिष्ठित बनाता है तथा इंदौर के लिए भी गौरव का विषय है।</p>
<p><strong>सरकार के निर्णय का स्वागत</strong></p>
<p>समिति ने मध्यप्रदेश शासन के इस निर्णय पर हर्ष व्यक्त करते हुए साधुवाद ज्ञापित किया। समाजजनों ने इसे केवल पूज्य गुरुदेव का सम्मान नहीं, बल्कि संपूर्ण दिगम्बर जैन संत परंपरा, जैन समाज और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान बताया।</p>
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		<title>अष्टानिका पर्व पर सनावद में नंदीश्वर द्वीप मंडल विधान सम्पन्न : 52 जिनालयों में श्रद्धापूर्वक समर्पित किए गए 52 अर्घ्य </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:18:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सनावद के श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में अष्टानिका पर्व के द्वितीय दिवस नंदीश्वर द्वीप मंडल विधान श्रद्धा, विनय और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने 52 जिनालयों में 52 अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित किया। पढ़िए श्रीफल साथी सन्मति जैन काका की यह रिपोर्ट। सनावद। धर्म नगरी सनावद में अष्टानिका पर्व के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सनावद के श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में अष्टानिका पर्व के द्वितीय दिवस नंदीश्वर द्वीप मंडल विधान श्रद्धा, विनय और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने 52 जिनालयों में 52 अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सन्मति जैन काका की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद</strong>। धर्म नगरी सनावद में अष्टानिका पर्व के द्वितीय दिवस आषाढ़ शुक्ल नवमी के अवसर पर श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में नंदीश्वर द्वीप मंडल विधान भक्ति एवं श्रद्धा के साथ आयोजित किया गया। मंदिर परिसर दिनभर जिनभक्ति, मंत्रोच्चार और धार्मिक वातावरण से गुंजायमान रहा।</p>
<p><strong>पंचामृत अभिषेक से हुआ शुभारंभ</strong></p>
<p>सन्मति जैन काका ने बताया कि प्रातःकाल भगवान का पंचामृत अभिषेक एवं पूजन सम्पन्न हुआ। दोपहर में कुसुम कुमार–हेमंत कुमार सन्मति जैन काका परिवार तथा सुधीर कुमार–प्रशांत कुमार–पुलकित जैन &#8220;चौधरी&#8221; परिवार द्वारा विधान का पुण्यार्जन किया गया।</p>
<p><strong>52 जिनालयों में 52 अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>विधान के दौरान श्रद्धालुओं ने नंदीश्वर द्वीप के 52 जिनालयों की भावना करते हुए 52 अर्घ्य अत्यंत विनय एवं श्रद्धा के साथ समर्पित किए। वातावरण भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से ओत-प्रोत रहा।</p>
<p><strong>नंदीश्वर विधान की महिमा बताई</strong></p>
<p>आर्यिका ज्ञानमती माताजी द्वारा रचित विधान की महिमा का वर्णन करते हुए पंडित रिंकेश जैन एवं प्रशांत चौधरी ने बताया कि नंदीश्वर द्वीप के 52 चैत्यालयों में प्रत्येक में 108 रत्नमय जिनप्रतिमाएं विराजमान हैं। शुद्ध भाव से इस विधान की आराधना करने से आध्यात्मिक उन्नति, शांति एवं समृद्धि की प्राप्ति होती है। जैन मान्यता के अनुसार देवगण भी नंदीश्वर द्वीप में भगवान जिनेन्द्र की पूजा-अर्चना करते हैं।</p>
<p><strong>संगीतमय आरती एवं प्रवचन</strong></p>
<p>सायंकाल श्रीजी की संगीतमय महाआरती, भक्तिमय कार्यक्रम एवं शास्त्र प्रवचन का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भक्ति में लीन होकर धर्म आराधना का लाभ प्राप्त किया।</p>
<p><strong>बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित</strong></p>
<p>कार्यक्रम में डिसेंटबला जैन, बाला पंचोलिया, महिमा जैन, अंजू पाटनी, मंजुला भूच, राजकुमारी बाई जैन, खुशकुंवर बाई जैन, सावित्री जटाले, अंकिता जैन, रूपल चौधरी, प्रतिभा जैन, कुसुम बाई जैन, विनय पंचोलिया, सुदेश जटाले, कमल केके, प्रदीप पंचोलिया, कांतिलाल जैन, अक्षय सराफ, लोकेंद्र जैन, रजत जैन, मुकेश जैन, मौसम जैन, अभिजीत जैन, गौतम जैन, राहुल स्वास्तिक, अरविंद जैन, अशोक पंचोलिया, सुनील मास्टर साहब सहित बहू मंडल एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>आचार्य सौभाग्यसागर एवं आचार्य सुरत्नसागर ससंघ का ट्रांस यमुना कॉलोनी में मंगल प्रवेश : श्रद्धा, जयघोष और धर्मप्रभावना से गूंजा मंदिर परिसर </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:15:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा के ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर पंचायती जैन मंदिर में आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री सुरत्नसागराचार्य जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। पढ़िए श्रीफल साथी राहुल जैन की यह रिपोर्ट। आगरा। गुदड़ी मंसूर खां स्थित जैन मंदिर से बुधवार प्रातः [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगरा के ट्रांस यमुना कॉलोनी स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर पंचायती जैन मंदिर में आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री सुरत्नसागराचार्य जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश श्रद्धा और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी राहुल जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> गुदड़ी मंसूर खां स्थित जैन मंदिर से बुधवार प्रातः 5:00 बजे मंगल विहार आरंभ कर आचार्य श्री 108 सौभाग्यसागर जी महाराज एवं आचार्य श्री 108 सुरत्नसागराचार्य जी महाराज ससंघ (8 पिच्छी) का प्रातः 7:00 बजे श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर पंचायती जैन मंदिर, ट्रांस यमुना कॉलोनी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ।</p>
<p><strong>जयघोष के साथ हुआ भव्य स्वागत</strong></p>
<p>मंदिर परिसर में ढोल-नगाड़ों, जय जिनेंद्र के उद्घोष एवं मंगल जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने दोनों आचार्य भगवंतों का भावपूर्ण स्वागत किया। पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।</p>
<p><strong>मंगल प्रवचन से मिला धर्म संदेश</strong></p>
<p>प्रातः 8:30 बजे आचार्य श्री के मुखारविंद से मंगल प्रवचन हुआ। अपने प्रवचन में उन्होंने श्रद्धालुओं को धर्म, संयम, सदाचार एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उपस्थित समाजजनों ने श्रद्धापूर्वक प्रवचन श्रवण कर धर्मलाभ अर्जित किया।</p>
<p><strong>आहारचर्या हुई सम्पन्न</strong></p>
<p>मंगल प्रवचन के उपरांत दोनों आचार्य भगवंतों सहित साधु-संघ की आहारचर्या विधिपूर्वक सम्पन्न हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित रहकर गुरु भगवंतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>समाजजनों की रही उल्लेखनीय उपस्थिति</strong></p>
<p>कार्यक्रम में जगदीश प्रसाद जैन, मनोज जैन बाकलीवाल, जितेंद्र जैन, धर्मेंद्र जैन, संदीप जैन, मोहित जैन, विप्लव जैन, वैभव जैन, आशीष जैन, आकाश जैन, संजय जैन, सुमित जैन, राजेश जैन, के.सी. जैन, हिमांशु जैन, संयम जैन, ऋषभ जैन, पूजा जैन, तृप्ति जैन, प्रीति जैन, कंचन जैन, संगीता जैन एवं डिंपल जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>अष्टानिका महापर्व पर नौगामा नगर में नंदीश्वर महामंडल एवं सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ : नौ दिनों तक होंगे भक्ति, आराधना और धार्मिक आयोजन </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:14:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नौगामा नगर के आदिनाथ जैन मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर भव्य एवं संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान तथा सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ हुआ। 21 से 29 जुलाई तक प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन एवं विधान आयोजित किए जाएंगे। पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट। नौगामा नगर। अष्टान्हिका महापर्व के पावन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नौगामा नगर के आदिनाथ जैन मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर भव्य एवं संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान तथा सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ हुआ। 21 से 29 जुलाई तक प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन एवं विधान आयोजित किए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा नगर।</strong> अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर नौगामा नगर स्थित श्री आदिनाथ जैन मंदिर में भव्य एवं संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान तथा श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। यह आयोजन 21 से 29 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन विविध धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न होगा।</p>
<p><strong>अष्टान्हिका महापर्व का आध्यात्मिक महत्व</strong></p>
<p>जैन धर्म में अष्टान्हिका महापर्व को अत्यंत पवित्र एवं आराधनामय पर्व माना जाता है। यह पर्व श्री नंदीश्वर द्वीप स्थित 52 शाश्वत जिनालयों की दिव्य आराधना का स्मरण कराता है। जैन आगमों के अनुसार सौधर्म इन्द्र सहित असंख्य देवगण वहां भगवान जिनेन्द्र की निरंतर पूजा-अर्चना करते हैं। पृथ्वी पर श्री नंदीश्वर महामंडल विधान उसी दिव्य आराधना का भावपूर्ण अनुकरण है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन होंगे धार्मिक अनुष्ठान</strong></p>
<p>आयोजन के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न होगी। इसके पश्चात प्रातः 7:00 बजे से 9:00 बजे तक संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान, 52 जिनालयों के 52 अर्घ्य, जयमाला तथा अन्य धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न कराई जाएंगी। श्रद्धालु प्रतिदिन पूजन एवं अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित करेंगे।</p>
<p><strong>सिद्धचक्र विधान भी जारी</strong></p>
<p>इस अवसर पर श्री 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान भी श्रद्धापूर्वक आयोजित किया जा रहा है। दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने 16 अर्घ्य समर्पित किए। साथ ही सुखोदय तीर्थ नसियाजी में सामूहिक पूजन का आयोजन भी निरंतर चल रहा है।</p>
<p><strong>धर्मप्रभावना का अनुपम अवसर</strong></p>
<p>वीणा दीदी ने कहा कि यह महापर्व श्रद्धालुओं के लिए धर्म, भक्ति, साधना और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ अवसर है। महापर्व के माध्यम से जिनभक्ति, आत्मशुद्धि, सम्यक्त्व एवं मोक्षमार्ग की भावना को सुदृढ़ करने का संदेश दिया जा रहा है।</p>
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		<title>सिद्धचक्र विधान में 32 गुणों सहित 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित : विश्व शांति एवं सुख-समृद्धि की मंगलकामना के साथ हुई आराधना </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:11:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुचामन सिटी स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने 32 गुणों एवं 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति, सुख-समृद्धि और अमन-चैन की मंगलकामना की। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट। कुचामन सिटी। श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कुचामन सिटी स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने 32 गुणों एवं 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति, सुख-समृद्धि और अमन-चैन की मंगलकामना की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, डीडवाना रोड, कुचामन सिटी में विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं अमन-चैन की मंगलभावना से आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत बुधवार को प्रातः भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ।</p>
<p><strong>कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य</strong></p>
<p>कलशाभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी भंवरलाल, कमला देवी, जूली, आशीष, जीती एवं यश झाझरी परिवार तथा राजेश, मंजूला, मनोज, ममता, अंकित, नीता एवं रम्यक पांडया परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>अष्टान्हिका पर्व का महत्व</strong></p>
<p>लालचंद पहाड़िया ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व वर्ष में तीन बार—कार्तिक, फाल्गुन एवं आषाढ़ मास में मनाया जाता है। इन पावन अवसरों पर नंदीश्वर द्वीप विधान एवं सिद्धचक्र विधान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर 21 श्रावकों ने भगवान का जलाभिषेक कर पुण्यार्जन अर्जित किया।</p>
<p><strong>32 गुणों एवं 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित</strong></p>
<p>सुरेश पांडया ने बताया कि कलशाभिषेक के पश्चात देव-शास्त्र पूजन, पंचमेरु पूजन, नंदीश्वर द्वीप पूजन एवं मूलनायक भगवान महावीर की पूजा सम्पन्न हुई। इसके बाद आयोजित सिद्धचक्र विधान में श्रद्धालुओं ने 32 गुणों सहित 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति एवं समस्त प्राणियों के कल्याण की मंगलकामना की।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं की रही उत्साहपूर्ण सहभागिता</strong></p>
<p>विधान में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता करते हुए भक्ति एवं श्रद्धा के साथ पूजन-अर्चन किया तथा धर्मलाभ अर्जित किया। पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास और भक्ति का वातावरण बना रहा।</p>
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		<title>अष्टानिका महापर्व पर भेद विज्ञान और सम्यग्दर्शन का संदेश : श्रमणाचार्य विमर्शसागर जी ने बताया आत्मकल्याण का मार्ग </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 16:10:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, देहरा तिजारा में अष्टानिका महापर्व पर श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने भेद विज्ञान, सम्यग्दर्शन और आत्मकल्याण पर आधारित प्रेरणादायी प्रवचन दिए। उन्होंने सिद्धत्व प्राप्ति के लिए मिथ्यादर्शन के त्याग और सम्यग्दर्शन को जीवन का आधार बताया। पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट। देहरा तिजारा। श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, देहरा तिजारा में अष्टानिका महापर्व पर श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने भेद विज्ञान, सम्यग्दर्शन और आत्मकल्याण पर आधारित प्रेरणादायी प्रवचन दिए। उन्होंने सिद्धत्व प्राप्ति के लिए मिथ्यादर्शन के त्याग और सम्यग्दर्शन को जीवन का आधार बताया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी सोनल जैन की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>देहरा तिजारा।</strong> श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, देहरा तिजारा में विराजमान जिनागम पंथ प्रवर्तक संघ शिरोमणी, परम पूज्य भवलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ससंघ ने पावन अष्टानिका महापर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं को आत्मकल्याण, भेद विज्ञान और मोक्षमार्ग का प्रेरणादायी संदेश प्रदान किया।</p>
<p><strong>भेद विज्ञान से सिद्धत्व की प्राप्ति</strong></p>
<p>अपने मंगल प्रवचन में श्रमणाचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने कहा कि</p>
<p>&#8220;भेद ज्ञान की शक्ति से सहज गुणों से सजना है, सिद्धों की भक्ति गुणवान बनाए रे। जीवन है पानी की बूंद, कब मिट जाए रे, होनी-अनहोनी कब क्या घट जाए रे।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि यदि सिद्ध परमात्मा बनना है तो भेद विज्ञान का आश्रय लेना अनिवार्य है। आत्मा और शरीर का भेद जाने बिना मोक्षमार्ग की यात्रा संभव नहीं है। आज तक जितनी भी आत्माएँ सिद्ध बनी हैं, उन्होंने भेद विज्ञान के माध्यम से ही अपने शुद्ध स्वरूप को प्राप्त किया है।</p>
<p><strong>सम्यग्दर्शन है मोक्षमार्ग का प्रथम द्वार</strong></p>
<p>महाराजश्री ने कहा कि सिद्ध भगवान का संदेश स्पष्ट है कि आत्मकल्याण के लिए सबसे पहले मिथ्यादर्शन का त्याग कर सम्यग्दर्शन को धारण करना आवश्यक है। सम्यग्दर्शन ही मोक्षमार्ग का प्रथम द्वार है और यही आत्मा को शुद्धता एवं सिद्धत्व की ओर अग्रसर करता है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने लिया धर्मलाभ</strong></p>
<p>अष्टानिका महापर्व के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रवचन का लाभ प्राप्त किया। उपस्थित धर्मप्रेमियों ने भक्ति, स्वाध्याय एवं आत्मचिंतन के माध्यम से अपने जीवन को धर्ममय बनाने का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>समाजजन रहे उपस्थित</strong></p>
<p>इस अवसर पर देहरा जैन मंदिर अध्यक्ष मुकेश जैन, महामंत्री नरेंद्र जैन, प्रचार मंत्री उमंग जैन, चातुर्मास अध्यक्ष पटेल जैन, अंशुल जैन, नवीन जैन, संजय जैन, वरुण जैन सहित अनेक धर्मप्रेमी श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सीकर में दूसरी बार होगा आचार्य श्री धर्मसागर जी की जन्मभूमि पर मंगल प्रवेश : आचार्य श्री वर्धमानसागर जी संघ करेगा नगर भ्रमण, श्रावक-श्राविकाओं में उत्साह का माहौल  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 14:58:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली और जन्मभूमि सीकर में इस बार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का दूसरी बार भव्य मंगल प्रवेश होगा। सीकर से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ.राजेश पंचोलिया की खबर सीकर। अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली और जन्मभूमि सीकर में इस बार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का दूसरी बार भव्य मंगल प्रवेश होगा। <span style="color: #ff0000">सीकर से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ.राजेश पंचोलिया की खबर</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सीकर।</strong> अनेक जिनालयों, दीक्षा गुरु आचार्य श्री धर्मसागर जी की समाधि स्थली, अनेक साधुओं की दीक्षा स्थली और जन्मभूमि सीकर में इस बार आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज का दूसरी बार भव्य मंगल प्रवेश होगा। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी से सन 1969 में दीक्षित 57 वर्ष के संयमी जीवन में 37 वर्षों से आचार्य पद पर प्रतिष्ठित 76 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का सीकर में आचार्य बनने के बाद पहली बार भव्य मंगल प्रवेश होगाा। इससे पूर्व वे सन 1986-87 में मुनि अवस्था में सीकर पधारे थे।</p>
<p><strong>आत्मा में विचारों और कार्यों से कर्म का बंध होता है</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने प्रवचन में कहा कि आचार्य श्री धर्मसागर जी कल्पवृक्ष के समान थे। जैसे भोगभूमि में कल्पवृक्ष से मनचाही वस्तु मिल जाती थी, वैसे ही उनसे हमें धर्म और ज्ञान की प्राप्ति हुई। उन्होंने कहा कि आत्मा में विचारों और कार्यों से कर्म का बंध होता है जिससे भावानुसार पुण्य या पाप अर्जित होता है। वर्तमान में 24 तीर्थंकरों ने धर्म का प्रवर्तन किया है।</p>
<p><strong>आचार्य श्री धर्मसागर जी चर्या के प्रति अत्यंत सजग थे</strong></p>
<p>डॉ. राजेश पंचोलिया और विवेक पाटोदी के अनुसार आचार्य श्री ने गुणानुवाद करते हुए बताया कि आचार्य श्री धर्मसागर जी चर्या के प्रति अत्यंत सजग थे। बीमारी और कमजोरी के बावजूद वे प्रतिमाह देवपुरा विहार कर रात्रि विश्राम वहीं करते और अगले दिन आहार लेकर पुनः विहार करते थे। उन्होंने ऐसा तीन माह तक किया। उसी पुण्य के कारण सीकर की पहली धर्मसभा देवपुरा में हुई। वर्ष 1972 में लाडनूं का वर्षायोग पूर्ण कर 1973 का वर्षायोग आचार्य श्री धर्मसागर जी ने सीकर में किया और यहीं से वे महावीर स्वामी महोत्सव के लिए दिल्ली गए थे।</p>
<p><strong>प्रातः नींद खुलते ही पंच परमेष्ठी का ध्यान करें और मंदिर में पूजन </strong></p>
<p>मुनि श्री हितेन्द्रसागर जी ने कहा कि जिन दर्शन और भगवान के नाम स्मरण से सुख प्राप्त होता है और कष्ट दूर होते हैं। सभी को प्रातः नींद खुलते ही पंच परमेष्ठी का ध्यान कर मंदिर जाकर दर्शन, अभिषेक और पूजन करना चाहिए। उन्होंने वर्ष 2020 के कोरोना काल का उदाहरण देते हुए बताया कि संघ के साधु-श्रावक-श्राविकाओं ने भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति से 20 दिन में रोगमुक्ति पाई। उस समय सीकर के युवा आशीष जयपुरिया ने बेलगांव जाकर प्राणों की बाजी लगाकर संघ सेवा की जो प्रशंसनीय है।</p>
<p><strong>37 पिच्छी के साथ आचार्यश्री का होगा मंगल प्रवेश और 58वां चातुर्मास</strong></p>
<p>नगर के इतिहास में पहली बार आचार्य श्री का यह मंगल प्रवेश 10 मुनिराज, 20 आर्यिका माताजी, 1 ऐलक, 4 क्षुल्लक और 1 क्षुल्लिका सहित 37 पिच्छी के साथ होगा। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के महेश बाकलीवाल, संतोष विनायगा, अजीत जयपुरिया, अभिनव सेठी और आशीष जयपुरिया के अनुसार संघ दिगंबर जैन चन्द्रप्रभ जिनालय से प्रस्थान कर संघ चैत्यालय, नगर के विभिन्न जिनालयों के दर्शन करता हुआ सिल्वर जुबली रोड, स्टेशन रोड, अहिंसा सर्किल, जाट बाजार, कोतवाली रोड, बावड़ी गेट और बजाज रोड होते हुए पारस भवन दंग की नसिया पहुंचेगा, जहां आचार्य श्री का 58वां चातुर्मास होगा।</p>
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		<title>सात प्रतिमा धारी मंजू दीदी बनी क्षुल्लिका श्री सुदर्शन मति माताजी : दीक्षा के इस भावुक क्षण में भावविभोर हुए उपस्थित दिगंबर जैन श्रावक-श्राविकाएं  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 14:56:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सात प्रतिमा धारी परिवहन नगर निवासी ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी ने आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी महाराज से क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर 105 क्षुल्लिका श्री सुदर्शन मति हुई। बुधवार को प्रातः श्री जी के अभिषेक के बाद पंडाल में दीक्षार्थी मंजू दीदी एवं समाज के चयनित इंद्रों द्वारा श्री महावीर विधान की पूजन भक्ति भावपूर्वक की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सात प्रतिमा धारी परिवहन नगर निवासी ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी ने आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी महाराज से क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर 105 क्षुल्लिका श्री सुदर्शन मति हुई। बुधवार को प्रातः श्री जी के अभिषेक के बाद पंडाल में दीक्षार्थी मंजू दीदी एवं समाज के चयनित इंद्रों द्वारा श्री महावीर विधान की पूजन भक्ति भावपूर्वक की गई। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ.राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर परिवहन नगर</strong>। सात प्रतिमा धारी परिवहन नगर निवासी ब्रह्मचारिणी मंजू दीदी ने आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी महाराज से क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर 105 क्षुल्लिका श्री सुदर्शन मति हुई। बुधवार को प्रातः श्री जी के अभिषेक के बाद पंडाल में दीक्षार्थी मंजू दीदी एवं समाज के चयनित इंद्रों द्वारा श्री महावीर विधान की पूजन भक्ति भावपूर्वक की गई। पूजन के बाद आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी की पूजन हुई। नवनीत जैन, देव चंद जैन ने बताया कि दीक्षा समारोह में सर्वप्रथम श्री जी समक्ष दीप प्रज्वलन नमिश जैन अध्यक्ष पोरवाड़ जैन समाज, जयंत, सुरेश मामोरा, दीक्षार्थी परिवार के शांतिलाल अतिथियों एवं मंदिर पदाधिकारियों ने किया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-109754" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020-1320x990.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/07/IMG-20260722-WA0020.jpg 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>दीक्षा पूर्व सभी से क्षमायाचना की </strong></p>
<p>आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन दीक्षार्थी परिवार के श्री शांतिलाल जैन एवं परिवार ने किया। जिनवाणी जयंत जटाले एवं अन्य ने भेंट की। मंगलाचरण के बाद दीक्षार्थी द्वारा पुनः आचार्य श्री से दीक्षा देने की प्रार्थना कर परिजनों ,समाज के प्रति क्षमा भाव धारण कर सभी से क्षमा याचना की।</p>
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<p><strong>हाथों में अणुव्रत 11 प्रतिमा के संस्कार आरोपित</strong></p>
<p>दीक्षा संस्कार के पूर्व आचार्य श्री ने संघ परिजनों एवं समाज से सहमति चाही। सभी ने हाथ उठाकर अनुमोदना की। सौभाग्यशाली महिलाओं द्वारा चौक पुरन की क्रिया की गई। स्वस्तिक से अभिमंत्रित कपड़े पर दीक्षार्थी को विराजमान कर आचार्य सिद्धांत सागर जी ने दीक्षार्थी के पंचमुष्टि केश लोच कर उनके मस्तक और हाथों में अणुव्रत 11 प्रतिमा के संस्कार आरोपित किया। दीक्षार्थी का नाम क्षुल्लिका श्री सुदर्शन मति किया गया।</p>
<p><strong>समाजजनों ने दीक्षा की अनुमोदना की</strong></p>
<p>नवीन क्षुल्लिका माताजी को पिच्छी, शास्त्र, कमंडल, माला देने का सौभाग्य शांतिलाल जैन दीक्षार्थी परिवार को मिला। कार्यक्रम के बाद इनके द्वारा समाज का वात्सल्य भोज हुआ। इस अवसर पर काफी संख्या में लोगों ने उपस्थित रहकर दीक्षा की अनुमोदना की।</p>
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		<title>गुरु पूर्णिमा पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा : गुरु के प्रति श्रद्धा, ज्ञान और आत्मकल्याण का महापर्व </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Jul 2026 08:53:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा पर 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाई जाएगी। यह पर्व गुरु के प्रति कृतज्ञता, ज्ञान, संस्कार एवं आत्मचिंतन का संदेश देता है। जैन धर्म में भी गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट। मुरैना। इस वर्ष गुरु [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा पर 29 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाई जाएगी। यह पर्व गुरु के प्रति कृतज्ञता, ज्ञान, संस्कार एवं आत्मचिंतन का संदेश देता है। जैन धर्म में भी गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पर्व बुधवार, 29 जुलाई 2026 को श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद हिमांशु जैन ने बताया कि पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई 2026 को सायं 6:18 बजे प्रारंभ होगी तथा 29 जुलाई 2026 को रात्रि 8:05 बजे समाप्त होगी।</p>
<p><strong>गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व</strong></p>
<p>गुरु पूर्णिमा को &#8220;व्यास पूर्णिमा&#8221; भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने वेदों का विभाजन, महाभारत तथा अनेक पुराणों की रचना कर भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। भारतीय संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूजनीय माना गया है।</p>
<p><strong>जैन धर्म में गुरु का सर्वोच्च स्थान</strong></p>
<p>जैन धर्म में आचार्य, उपाध्याय एवं साधु-साध्वी भगवान महावीर द्वारा बताए गए मोक्षमार्ग के पथप्रदर्शक माने जाते हैं। गुरु पूर्णिमा पर श्रद्धालु गुरु वंदना, प्रवचन श्रवण, स्वाध्याय, सामायिक, प्रतिक्रमण, धर्म ध्यान तथा संयम और सेवा का संकल्प लेकर अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करते हैं।</p>
<p><strong>गुरु पूर्णिमा कैसे मनाएं</strong></p>
<p>प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। गुरु अथवा गुरु के चित्र का पूजन करें, नवकार मंत्र या गुरु मंत्र का जाप करें, गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान, सेवा और गुरु दक्षिणा अर्पित करें। साथ ही धर्मग्रंथों का अध्ययन एवं सात्विक जीवन का पालन करें।</p>
<p><strong>इस दिन क्या करें और क्या नहीं</strong></p>
<p>गुरु, माता-पिता एवं शिक्षकों का सम्मान करें। गरीबों को अन्न, वस्त्र एवं फल का दान दें, वृक्षारोपण, गौसेवा, जप, तप एवं ध्यान करें। वहीं क्रोध, झूठ, निंदा, नशा, तामसिक भोजन और किसी के अपमान से बचें।</p>
<p><strong>गुरु का संदेश</strong></p>
<p>डॉ. हुकुमचंद हिमांशु जैन ने कहा कि गुरु केवल शिक्षा देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले प्रकाश स्तंभ हैं। गुरु ही सत्य, धर्म, संयम, विवेक और आत्मकल्याण का मार्ग दिखाते हैं। गुरु के प्रति श्रद्धा ही ज्ञान प्राप्ति का प्रथम सोपान है।</p>
<p>«&#8221;गुरु बिना ज्ञान नहीं, ज्ञान बिना विवेक नहीं और विवेक बिना जीवन का कल्याण नहीं।&#8221;»</p>
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