अडिन्दा (उदयपुर)। श्री अडिन्दा पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र पर अभिनन्दनीय वर्षा योग के लिए विराजमान गणिनी आर्यिका श्री सुभूषण मति माताजी ने मिथ्यात्व की नींंद में सोए श्रावकों को जगाते हुए कहा कि जिनेन्द्र भक्ति पुण्यशाली ही कर पाते हैं। जैन कुल में जन्म लेना व जिनेन्द्र भक्ति करना पुण्य का फल है। जिस प्रकार बिना पूंजी के व्यापार नहीं हो सकता, उसी प्रकार जन्म - जन्मांतरों के पुण्य बिना जिनेन्द्र भक्ति का भाव नहीं बनता। सातिशय संपन्न क्षेत्र पर आने के लिए और अधिक पुण्य की आवश्यकता होती है। जब भी क्षेत्र पर जाएं तो भगवान पार्श्वनाथ का फोटो फोन के कैमरे में नहीं मन के कैमरे में खींचे ताकि आँख बंद करने पर भ. के दर्शन कैमरे में नहीं, मन के कैमरे में हो जाएं।
जपने से जब नाम तुम्हारा, भूत प्रेत वो करे किनारा
भूत, प्रेत एवं कष्ट बाधाएं तो क्षेत्र पर आकर जिनेन्द्र दर्शन से दूर होती ही हैं, लेकिन मन भी प्रसन्नचित्त होता है। जब भी यहां क्षेत्र पर आएं श्री अडिन्दा पार्श्वनाथाय नमः की पांच माला अवश्य फेरें ताकि क्षेत्र-दर्शन करना सार्थक हो। जन्म जन्मांतर के लोग से मीटाने वाली गुरु मां के संक्षिप्त किंतु सारगर्भित वचनों से कृतार्थ होकर सभी भक्त गुरु मां को वन्दामी वन्दामी वन्दामी करते हुए निज धाम की ओर प्रस्थित हुए । यह जानकारी अंजलि जैन खतौली मुजफ्फरनगर ने दी।







