इंदौर। नेमी नगर जैन कॉलोनी जैन कॉलोनी के सन्मति समवशरण में आचार्यश्री सुनीलसागर जी की प्रखर प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को अपार ज्ञान की संपदा से संपन्न किया है। नित्य प्रवचन में यही ज्ञान राशि पाकर गुरु भक्त धन्य-धन्य होकर अपने घरों को लौटते हैं। सोमवार को प्रवचन श्रृंखला में आचार्यश्री सुनीलसागर जी ने कहा कि जीवन का सफर कितना छोटा है, इसका एहसास अक्सर इंसान को तब होता है, जब वह अपने आसपास की भागदौड़ से थोड़ा रुककर देखता है। रिश्ते, दौलत, शोहरत और पद जिन्हें पाने के लिए इंसान पूरी जिंदगी संघर्ष करता है, अंततः सब कुछ यहीं छूट जाता है।

आसक्ति ही मनुष्य के दुख का कारण बनती ह

मनुष्य इस संसार में खाली हाथ आता है और खाली हाथ ही चला जाता है, लेकिन जीवनभर माया, मोह और तृष्णा उसे अपनी ओर खींचते रहते हैं। एक इच्छा पूरी होती है तो दूसरी जन्म ले लेती है। इसी निरंतर चाहत में इंसान कई बार अपने भीतर की शांति और वास्तविक उद्देश्य को भूल जाता है। दरअसल, संसार की वस्तुएं प्राप्त करना गलत नहीं, लेकिन उनके प्रति अत्यधिक मोह और आसक्ति ही मनुष्य के दुख का कारण बनती है। जब जीवन का मूल्य केवल धन, प्रतिष्ठा और भौतिक सुखों से तय होने लगे, तब इंसान बाहर से कितना भी समृद्ध क्यों न हो, भीतर से खाली महसूस कर सकता है।

खुद को समझ लिया तो कई सवाल सुलझ जाएंगे

जीवन का वास्तविक प्रश्न यह नहीं कि हमने कितना कमाया या कितना पाया, बल्कि यह है कि हमने स्वयं को कितना समझा और अपने जीवन को कितना सार्थक बनाया। आखिर यह सफर कुछ समय का ही है। एक दिन रिश्ते, दौलत और शोहरत सब यहीं रह जाएंगे। साथ जाएगा तो केवल हमारे कर्म और हमारे भीतर विकसित किए गए भाव। इसलिए शायद जिंदगी का सबसे बड़ा ज्ञान यही है-खुद को समझ लो, क्योंकि जिस दिन इंसान ने खुद को समझ लिया, उस दिन जीवन के कई अनसुलझे सवाल अपने आप समझ आने लगते हैं।