रात्रि में अच्छी नींद आये। इस हेतु सर्वप्रथम तो अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करें। एक समय निश्चित कर लें कि इस दरमियान कुछ भी हो सोने हेतु समय देना है। मनोरंजन और टीवी चैनलों के मायाजाल में नहीं उलझना है। ओटीटी जैसे प्लेटफॉर्म का एक सीमित समय के लिए उपयोग करना है। जिसमें स्वच्छंदता से बहुत कुछ दिखाया जा रहा हो, उसका प्रमाद (Neglect) करना है। रातभर जागकर नहीं देखना है। इन बातों का हम ध्यान रखेंगे तभी हमें नींद अच्छी आएगी, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक है। मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की पुस्तक खोजो मत पाओ व अन्य ग्रंथों के माध्यम से श्रीफल जैन न्यूज का कॉलम Life Management निरंतरता लिए हुए है। पढ़िए इसके 26वें भाग में श्रीफल जैन न्यूज के रिपोर्टर संजय एम तराणेकर की विशेष रिपोर्ट….

नींद न आने पर क्या करें ?

- नीद न आने पर लाईट बंद करके अँधेरे में शान्त भाव से लेटे रहे।

- छाती पर हाथ रखकर सीधे न लेटें।

- बाँयी करवट से ही लेटें और लेटे-लेटे ही अपनी श्वासों पर ध्यान दे।

- मन्दिर की शान्तमूर्ति को अपने ध्यान में लाये और उनके चरणो में अपना सिर रखा है, ऐसा भाव करें।

- फिर भी नींद न आए तो बैठकर शान्त भाव से हृदय कमल पर उस शान्त मूर्ति को बिठावें। थोड़ी देर उसका ध्यान करें।

- ‘ॐ‘ या ‘ॐ‘ हृी णमो अरिहंताणं‘ के अक्षरों का हृदय में ध्यान करें।

- नींद नहीं आने पर चिन्तित न हो बल्कि यह सोचे कि अच्छा हुआ जो नींद नहीं आने पर कम से कम हमें आज मंत्र जाप, आत्मचितन, परमात्मा का ध्यान करने का मौका मिल गया।

- चिन्तन करें कि नीद नहीं आना कोई रोग नहीं है, यह देह और मस्तिष्क को आराम देने की प्रक्रिया है। योगी लोग शान्त भाव से रातभर बैठे रहकर आत्मध्यान करते रहते है।

- नींद न आने पर कोई अच्छी किताब थोड़ी देर पढ़े जिसमें किसी के प्रवचन या चरित्र का वर्णन हो।

- नींद न आने पर टी.वी. कभी न देखें क्योकि उससे बहुत देर के लिए आपकी नींद और चली जाएगी।

- संकल्प लें कि मैं नींद की गोली कभी नहीं खाऊँगा।

- अपनी सोच सकारात्मक बनाये। किसी के बारे में ज्यादा न सोचे।

- किसी की स्मृति से दूर हटने के लिए मेरी भावना, बारह भावना या चालीसा का पाठ करें और लेट जाएँ, नीद तुरन्त आ जायेगी।