कुण्डलपुर(मप्र)। परिस्थितियां केवल रंग हैं, जीवन की तस्वीर कैसी बनेगी यह हमारे विवेक, पुरुषार्थ और भावों पर निर्भर है। यह उदगार मुनि श्री समतासागर जी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने जीवन को कला बताते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति इस ब्रह्मांड की एक अनूठी कलाकृति है और इस कलाकृति का कलाकार तथा कर्ता भी स्वयं वही है। परिस्थितियां हमें केवल रंग प्रदान करती हैं, लेकिन उन रंगों से अपने जीवन के कैनवास पर क्या रचना करनी है, यह हमारे हाथ में है। इसलिए परिस्थितियों को दोष देने के बजाय अपनी दृष्टि, विचार, भाव और कर्मों को सुंदर बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
जीवन में आने वाली परिस्थितियों को बदलना हमेशा संभव नहीं
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं क्षेत्रीय प्रचार मंत्री जयकुमार जैन ‘जलज’ ने कहा कि मुनि श्री समतासागर महाराज के इस संदेश में जीवन को परिस्थितियों के अधीन न मानकर स्वयं अपने जीवन का निर्माता बनने की प्रेरणा दी गई है। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली परिस्थितियों को बदलना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन उन परिस्थितियों के बीच अपनी सोच, भावनाओं और कर्मों को किस दिशा में ले जाना है, यह व्यक्ति के हाथ में होता है।
आत्म चिंतन की छैनी से तराशना आवश्यक
जीवन के कैनवास पर अहंकार, आग्रह और अज्ञानता ऐसे पत्थर हैं, जिन्हें साधना और आत्म चिंतन की छैनी से तराशना आवश्यक है। जब अहंकार, आग्रह और अज्ञानता समाप्त होने लगते हैं तो भीतर से शांति, सुख और प्रसन्नता की प्रतिमा स्वयं प्रकट होने लगती है आध्यात्मिक दृष्टि से वही जीवन वास्तविक मास्टरपीस है, जिसमें व्यक्ति अहंकार से शून्य और पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर जीवन जीना सीख जाता है।उन्होंने कहा कि जीवन की पेंटिंग को बिगाड़ने वाले पांच प्रमुख रंग हैं-दूसरों की मंजूरी पर निर्भरता, निराशा एवं तुलना, अतीत के पछतावे और भविष्य की चिंता, प्रमाद तथा दूसरों को दोष देने की मानसिकता।
व्यक्ति को इन रंगों से सावधान रहना चाहिए। दूसरों की राय के आधार पर अपने निर्णय लेना, दूसरों से अपनी तुलना करके निराश होना, ‘मैंने ऐसा क्यों किया’ और ‘मैं ऐसा कब करूंगा’ में उलझे रहना, आलस्य एवं शॉर्टकट की प्रवृत्ति तथा अपनी गलतियों का दोष दूसरों पर डालना जीवन की सुंदर तस्वीर को बदरंग कर देता है। संयम की सुरक्षा लेयर जरूरी। मुनि श्री ने कहा कि जीवन में सुंदर रंगों का प्रयोग करने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा भी जरूरी है। संयम का रंग ऐसी सुरक्षा लेयर है, जो जीवन की पूरी पेंटिंग को सुरक्षित करता है। इसके बिना व्यक्ति कितनी भी सुंदर रचना क्यों न बना ले, वह लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह सकती।
अनेकांतवाद के फर्श पर अहिंसा का कालीन बिछाएं
उन्होंने कहा कि हमारा मन जीवन के घर का एक महत्वपूर्ण कमरा है। यदि इस कमरे को कोई नाम और उद्देश्य नहीं दिया गया तो वह धीरे-धीरे डंपिंग ग्राउंड बन सकता है, जहां जो भी विचार और भाव आते जाएं, हम उन्हें जमा करते जाएं। इसलिए जीवन की दीवार पर संयम का प्राइमर और गुरु आज्ञा के रंग निरंतर लगाते रहना चाहिए। मुनि श्री ने कहा कि सही ज्ञान से उत्पन्न विचारों को संयम का फ्रेम लगाकर जीवन की दीवार पर सजाएं। मन के कमरे में अनुशासन और समता की कुर्सी रखें तथा अनेकांतवाद के फर्श पर अहिंसा का कालीन बिछाएं।
हमारे पूर्वकृत कर्म भी हमारी वर्तमान परिस्थितियों का एक कारण
जब मन इस प्रकार के श्रेष्ठ संस्कारों से सजता है तो व्यक्ति का जीवन स्वयं एक सुंदर और प्रेरणादायी मास्टरपीस बन जाता है। कैरियर को लेकर भ्रमित विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देते हुये मुनि श्री ने कहा कि आज अनेक विद्यार्थी बहुत पढ़ाई और डिग्रियां हासिल करने के बाद भी चौराहे पर खड़े होकर पूछते हैं कि भविष्य में क्या करें। ऐसी स्थिति में सबसे पहले अपनी योग्यता, रुचि और उत्साह का आकलन करना चाहिए। उन्होंने जैन दर्शन के संदर्भ में कहा कि हमारे पूर्वकृत कर्म भी हमारी वर्तमान परिस्थितियों का एक कारण बनते हैं। जो परिस्थितियां सामने आई हैं, उन्हें स्वीकार करके उनसे संघर्ष करने में अपनी सारी ऊर्जा खर्च करने के बजाय अपनी ऊर्जा इस बात में लगानी चाहिए कि इन परिस्थितियों के बीच अपने जीवन की पेंटिंग को किस प्रकार सुंदर बनाया जाए।
पांच नकारात्मक रंगों से बचना जरूरी
मुनि श्री ने विद्यार्थियों से कहा कि अपनी योग्यता को पहचानें, अपनी रुचि के क्षेत्र में उत्साह बनाए रखें और वर्तमान परिस्थितियों को धैर्य एवं साहस के साथ स्वीकार करें परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनमें उपलब्ध अवसरों को पहचानकर आगे बढ़ें। कर्मों के परिणाम के रूप में जो परिस्थिति सामने आई है, उसमें पुरुषार्थ और विवेक से श्रेष्ठ भविष्य का निर्माण किया जा सकता है।प्रमाद के रंग से बचने की शुरुआत करें मुनि श्री ने कहा कि जीवन को सुंदर और सुरक्षित बनाए रखने के लिए पांच नकारात्मक रंगों से बचना जरूरी है, लेकिन इसकी शुरुआत प्रमाद के रंग से की जा सकती है।
परिस्थितियां केवल आपको मिले हुए रंग हैं
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य में आलस्य न करें। समय और आवश्यकता को देखते हुए फुर्ती, विवेक और जागरूकता के साथ अपने कार्य को आगे बढ़ाएं।उन्होंने कहा कि प्रमाद व्यक्ति की क्षमता को भीतर से कमजोर करता है। जो व्यक्ति समय का सदुपयोग करता है, जिम्मेदारियों से नहीं भागता और उचित पुरुषार्थ करता है, वह धीरे-धीरे अपने जीवन की तस्वीर को सुंदर बना लेता है। मुनि श्री ने अंत में कहा कि आप इस ब्रह्मांड की सबसे अनूठी कलाकृति हैं। कलाकार भी आप हैं और कर्ता भी आप ही हैं। परिस्थितियां केवल आपको मिले हुए रंग हैं उनसे क्या बनाना है, यह निर्णय आपका है। इसलिए घर जाते समय यह चिंतन करें कि अपने जीवन की तस्वीर को सुंदर बनाने के लिए मुझे किस रंग से बचना है और किस श्रेष्ठ रंग को अपनाना है।
ंयम की सुरक्षा-परत लगाएं
उन्होंने कहा कि जीवन को जागरूकता, संयम, करुणा, साहस, उत्साह, जिज्ञासा और समता के रंगों से सजाएं। अपने जीवन की रचना को सुंदर बनाएं और उसे सुरक्षित रखने के लिए संयम की सुरक्षा-परत लगाएं।.”यदि जीवन एक कला है तो उसे सुंदरतम रचना बनाना हमारा दायित्व है। यही जीवन को मास्टरपीस बनाने का सार संदेश है।








