इंदौर। छत्रपतिनगर स्थित दलाल बाग के विद्या सुधा मंडप में इन दिनों आध्यात्मिक विवेचनाओं की अनवरत वृष्टि हो रही है। इसमें जैन श्रावक-श्राविकाएं धर्मानंद से सराबोर हो रहे हैं। मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने मंगलवार की धर्मसभा में श्रावकों को स्व साधना, स्वयं को पहचाने, संसार रूपी जंगल से बाहर निकलने के लिए स्वयं मार्ग बनाने के लिए प्रेरित किया। इस संसार रूपी जंगल को भटकने वाला बताते हुए मुनिश्री ने कहा कि इस संसार में रास्ते नहीं हैं। यह संसार बियावान जंगल है। जहां रास्ते नहीं होते हैं। जंगल में रास्ते नहीं हैं। अक्सर लोग जंगल में भटकाते हैं क्योंकि जंगल में रास्ते नहीं है। रास्ते बताने वाला कोई नहीं है। जंगल में हिंसक जीव रहते हैं। इस संसार की भी यही स्थिति हो गई है।
मृत्यु होने से पहले इस जंगल से निकलना है
जैन मुनि, साधु, गुरु कहते हैं कि अगर इस संसार रूपी जंगल से बाहर निकलना है तो स्वयं पगडंडी बनाओ। जंगल से निकलना है शाम होने के पहले। हिंसक जीव जागृत हो जाते हैं। उनके जागृत होने से पहले हमें इस संसार के बियावान से बाहर निकल जाएं। मृत्यु होने से पहले इस जंगल से निकलना है। मुनिश्री ने कहा कि हम जहां हैं वहां रास्ते नहीं है। जहां रास्ते हैं, वहां हम पहुंच ही नहीं पाए।
मुनिश्री ने विहार का प्रसंग सुनाया
मुनिश्री सुधासागर जी ने वर्ष 1981 का एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि हम गुरुदेव के साथ मुक्तागिरि से आहार करके विहार कर रहे थे। रास्ते में एक मनचले ने रास्ता भटका दिया। अब आहार के बाद विहार हो गया था। चलते-चलते शाम हो गई। कड़ाके की ठंड थी। रात सुनसान स्थान पर निकालनी पड़ी। सुबह उठे तो कहां जाएं। स्वयं को रास्ता पता नहीं। गुरुदेव ने कहा-यही संसार है। रात में कोई सोया नहीं संसार कुंभीपात है। इसमें कुंभ तो है, लेकिन दरवाजे नहीं है। उन्होंने कहा कि अपनी अक्ल से, अपनी बुद्धि से निर्णय करो।
जो शिक्षा दे रहा हूं, उसे अपनाओ
गुरुदेव ने कहा कि सूरज के भरोसे चलो। रास्ते भटकाने की वजह से 20 किमी उल्टी दिशा में चले गए। मुनिश्री ने कहा कि इस संसार में खोटे साथी, खोटे गुरु मिल जाते हैं। जो भटका देते हैं। सही रास्ता बताने वाले कम है। गलत रास्ता बताने वाले अधिक है। गिरे हुए को उठाने वाले कम हैं। इसलिए स्वयं को पगडंडी बनाना होगी। तभी सम्यक दर्शन के मेनरोड पर पहुंचोगे। मोक्ष का हाइवे बाद में आएगा। मुनिश्री सुधासागर जी ने कहा-मैं तुम्हें रोज ही शिक्षा दे रहा हूं। ट्यूशन दे रहा हूं। पढ़ा रहा हूं। इसमें कोई किताब नहीं है। पहला पेपर स्वयं को पढ़ने का है। आपकी बुद्धि कितनी है। वही सही-गलत का फर्क बताएगी। इसके अलावा कोई उपाय नहीं है।
घर-घर कंस, हर घट मथुरा, हर घर रावण
मुनिश्री ने आगे कहा कि इस संसार में कोई करुणा करने वाला नहीं, कोई दया करने वाला नहीं है। गुरु और भगवान पवित्र स्थान पर मिलते हैं। जहां भगवान और गुरु रहते हैं इसलिए उसे मंदिर कहते हैं। इस संसार में संकट छाया हुआ है। युद्ध हो रहा है। हमेशा से हो रहा है। जिसके पास शक्ति है। वह कमजोर को दबा रहा है। बलवान का काम कमजोर को उठाकर गले लगाना है। आज अज्ञानी ज्ञानी की हंसी उड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि इस संसार में असंख्यात तीर्थंकर लाइन में खड़े हैं जन्म लेने के लिए। इस आर्यावत भारत वर्ष में, लेकिन जन्म इसलिए नहीं हो रहा कि यहां का माहौल गंदा हो गया है। आज घर-घर कंस, हर घट मथुरा, हर घर रावण इतने श्याम और इतने राम कहां से लाऊं? उन्होंने कहा कि स्व साधना, स्वाध्याय और स्वानुशासन के माध्यम से ही संसार जंगल से बाहर निकल सकते हैं।
इन्होंने मंगलाचरण, पाद प्रक्षालन और शांतिधारा का लिया लाभ
धर्मसभा से पूर्व जय जिनेंद्र महिला मंडल की महिलाओं ने संगीतमय मंगलाचरण कर भक्ति नृत्य प्रस्तुत कर आराधना की। इस अवसर पर जालंधर से आए श्रावक भूपेंद्र जैन, अक्षय जैन, मीना जैन, सुमित जैन, सत्येंद्र जैन, देवेंद्र जैन आदि ने गुरुदेव का पाद प्रक्षालन किया और सुबह शांतिधारा की।
इस अवसर पर यह रहे मौजूद
कार्यक्रम में आनंद नवीन गोधा, मयंक जैन, राजेश जैन दद्दू, सौरभ बड़जात्या, सोनाली बड़जात्या, हर्ष जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे।







