इंदौर। आज हजारों जैन घरों में एक भी घर ऐसा दिखाई नहीं देता, जहां जैनत्व के सिद्धांतों का पूर्णतः पालन होता हो। सच्चा जैनी वही है जिसका घर ऐसा हो जैसा जिनवाणी में उल्लेख है और घर में रहने वाले लोग भी जैनत्व के संस्कारों से समृद्ध हों, घर में रात्रि भोजन पूर्णतः निषेध हो, जो खुद भी रात्रि भोजन ना करें और मेहमानों को भी नहीं कराए,वहीं सच्चा जैन घर और जैनी है। यह खरी-खरी बातें मंगलवार को सकल दिगंबर जैन धर्म प्रभावना समिति के तत्वावधान एवं विद्या सुधा देशना मंडप में आयोजित धर्मसभा में मुनि पुंगवश्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए कहीं। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि मुनि श्री ने तंज किया कि जैन होकर भी जिस घर के लोग रात्रि भोजन करते हों उस मकान पर निशाचर भवन लिखवा देना चाहिए।
मुनि श्री ने यह भी कहा कि...
व्यक्ति जिन कष्टों, बीमारियों और परेशानी से आज दुखी है ,प्रभु वैसे दुख,बीमारी किसी अन्य जीव को ना हो सुखी रहे सब जीव जगत के प्रतिदिन ऐसी भावना भाए़ तो तुम्हारे दुख भी दूर हो जाएंगे और तुम्हारी विशुद्धि भी बढ़ेगी। व्यक्ति में अगर व्यसन आदि कोई बुरी आदत हो, तो उसे छोड़ दे और जो छोड़ नहीं सकते वह एक नियम ले लें कि बुराई को छुपा कर करूंगा, उजागर नहीं करूंगा ताकि जो बुराई, पाप आदि मेरे अंदर हैं वह अंदर ही रहे ताकि दूसरे व्यक्ति बुराई से, आदत से प्रभावित होकर वह भी वैसा न करने लगे। तुम्हारी पाप प्रवृत्ति हो तो उसको कोरोना मानना ताकि तुम्हारी आदत से दूसरे संक्रमित, प्रभावित न हो। धर्मसभा का संचालन अनुराग जैन ने किया। इस अवसर पर आलोक आकाश कोल, अक्षय कासलीवाल, धर्मेन्द्र सिनकेम, आनंद नवीन गोधा, डॉ जैनेन्द्र जैन, कमल जैन चैलेंजर उपस्थित थे।







